झूट क्यों बोलते हैं नरेन्द्र मोदी

झूट क्यों बोलते हैं नरेन्द्र मोदी

 

नुमाइंदा मरकज

भोपाल! वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी ज्यादा पढे-लिखे नहीं हैं इसलिए वह लाइल्मी (अज्ञानता ) का शिकार हैं या उन्हें झूट बोलने की आदत पड़ चुकी है। चार सालां मे पूरा मुल्क यह बात समझ नहीं सका है कि आखिर मोदी झूट पर झूट क्यों बोलते जाते हैं। सिक्किम में मुल्क के हवाई अड्डों के सिलसिले में वह बडा झूट बोल आए। मुल्क भर में सोशल मीडिया के जरिए उसपर बहस चल ही रही थी कि भोपाल में उन्होने फिर एक बार झूट बोलकर पूरे मुल्क को हैरत में डाल दिया।

गांधी जयंती और स्वच्छता अभियान के मिलेजुले सरकारी जलसे को खिताब करते हुए गुजिश्ता दिनों भोपाल में मोदी ने कहा कि 1984 में हमारी पार्टी सिर्फ दो लोक सभा सीटें जीत सकी थी इसके बावजूद हमने एलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) पर इल्जाम लगाकर अपनी शिकस्त को छुपाने का काम नहीं किया। मुट्ठी बंद करके दोनां अगूठों से अपनी तरफ इशारा करते हुए उन्होने कहा हम अवाम के बीच गए। अवाम ने हम पर भरोसा किया तो आज हम पूरी अक्सरियत के साथ सत्ता में हैं।

मोदी का यह झूट फौरन पकड़ गया लोगों ने पूछा कि देश में 1984 में ईवीएम से तो एलक्शन होता ही नहीं था फिर मोदी की पार्टी शिकायत क्या करती। 2004 में बीजेपी हारी तब ईवीएम का इस्तेमाल होने लगा था तो बीजेपी के सबसे सीनियर लीडर और मोदी के वालिद जैसे (पिता तुल्य) लाल कृष्ण आडवानी ने अपनी पार्टी के हार के लिए ईवीएम को ही जिम्मेदार ठहराया था। इतना ही नहीं उन्ही की पार्टी के सुब्रामण्यम स्वामी ने तो ईवीएम के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में मुकदमा तक दायर कर दिया था तो पार्टी के लीडर  जी बी एल नरसिम्हा ने ईवीएम के खिलाफ एक किताब ही लिख डाली थी। मोदी की नजर में अगर यह ईवीएम की शिकायते नहीं हैं तो क्या हैं?