मोदी सरकार को दबाव ने दिखाया रंग मायावती ने तोड़ा गठबंधन

मोदी सरकार को दबाव ने दिखाया रंग मायावती ने तोड़ा गठबंधन

राहुल और सोनिया गांधी को नाराज भी नहीं करना चाहती बीएसपी सुप्रीमो

“खबर आई कि इफोर्समेट डायरेक्ट्रेट (ईडी) ने चार घंटों तक मायावती के भाई आनन्द कुमार से पूछगछ की अभी खबरों की तस्दीक या तरदीद भी नहीं हुई थी कि मायावती ने एलान कर दिया कि कांग्रेस के साथ वह कोई गठबंधन नहीं करेगीं। यह महज इत्तेफाक ही नही है कि उनके एलान के साथ ही रविशंकर प्रसाद ने उनसे हमदर्दी जाहिर करते हुए कहा कि गठबंधन बनाना कांग्रेस के डीएनए में नहीं है।”

“मायावती ने कहा कि सोनिया गांधी और राहुल गांधी तो नेक लोग है। हमसे उन्हें हमदर्दी भी है लेकिन बीजेपी के एजेण्ट दिग्विजय सिंह ने समझौता नहीं होने दिया। उन्होने यह भी कहा कि कांग्र्रेस एक मगरूर (घमण्डी) पार्टी है। अब उनसे कौन पूछे कि अगर सोनिया और राहुल नेक दिल लीडर हैं तो कांग्रेस मगरूर कैसे?”

“राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ में कांग्रेस से गठबंधन न करके मायावती बीजेपी को फायदा नहीं पहुचा सकती क्योंकि इन तीनों ही प्रदेशों में सियासी एतबार से मायावती इतनी मजबूत नहीं है कि वह किसी को फायदा या नुक्सान पहुचा सके। उनका रवैया यही रहा तो तीन प्रदेश असम्बलियों के बाद अगले लोक सभा एलक्शन में भी उन्हें नुक्सान उठाना पड़ सकता है।”

 

हिसाम सिद्दीकी

लखनऊ! कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और मायावती की बीएसपी मिलकर लोक सभा एलक्शन लडे़ तो नरेन्द्र मोदी की बीजेपी के लिए उत्तर प्रदेश की दस सीटें जीतना भी मुश्किल हो जाता। बीजेपी का यही हश्र मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ में भी होता इस खतरे को दूर करने के लिए नरेन्द्र मोदी सरकार खुसूसन उनकी बीजेपी के सदर अमित शाह ने इनकम टैक्स और इनफोर्सेमेट डायरेक्ट्रेट (ईडी) की तलवार ऐसे भांजी कि पहले ही वार में मायावती ढेर हो गईं। तीन अक्टूबर को उन्होने एलान कर दिया कि इस साल के आखिर में होने वाले मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ असम्बली के इंतखाबात में वह कांग्रेस से कोई समझौता नहीं करेगी और उनकी पार्टी तीनों प्रदेशों में अकेले एलक्शन लडे़गी। गठबंधन न करने की जो वजह मायावती ने बताई उसपर कोई यकीन करने को तैयार नहीं है। उन्होने कहा कि कांग्रेस सदर राहुल गांधी और साबिक सदर सोनिया गांधी तो गठबंधन करना चाहती थी वह दोनों बहुत अच्छे और समझदार लीडर हैं। वह दिल से हमारे साथ गठबंधन करना चाहते हैं लेकिन मध्य प्रदेश के साबिक वजीर-ए-आला दिग्विजय सिंह बीजेपी से मिले हुए हैं उन्होने साजिश करके गठबंधन नहीं होने दिया। मायावती का बयान आने के साथ-साथ मोदी के वजीर कानून रविशंकर प्रसाद का भी बयान आ गया। उन्होने मायावती की तारीफ करते हुए कहा कि कांग्रेस के डीएनए में गठबंधन है ही नहीं। इसीलिए कांग्रेस जिसके साथ गठबंधन करती है उसे पहले परेशान करती है फिर धोका देती है। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ और राजस्थान में मायावती की पार्टी का न कोई खास असर है न ही वहां उनकी सरकारे बनने वाली है। उन्होने जो दाव चला है वह अगले साल होने वाले लोक सभा एलक्शन के लिए ही है। मायावती के एलान से पहले यह खबर आ चुकी थी कि इफोर्समेट डायरेक्ट्रेट (ईडी) ने उनके भाई आनन्द कुमार से चार दिनों तक सख्ती से पूछगछ की है। कुछ सियासतदानों का कहना है कि मायावती का जितना कद है उससे दस गुना ज्यादा तक वह बदउवानियां (भ्रष्टाचार) में डूबी हुई हैं। इसलिए फिलहाल वह बीजेपी के खिलाफ जाने की हिम्मत कर ही नहीं सकती।

खबर है कि मोदी सरकार ने पैसों से मुताल्लिक इनकमटैक्स और ईडी समेत जितनी भी एजेसियां हो सकती हैं उन सबको मायावती के खिलाफ लगा रखा है। तकरीबन 18 हजार करोड़ का घपला तो उन लोगों के बनाए हुए पार्क, मूर्तियों और हाथी लगवाने के काम में ही बता दिया है। इस वजह से मायावती काफी दबाव में है। मध्य प्रदेश राजस्थान और छत्तीसगढ के एलक्शन के बाद ही लोक सभा एलक्शन में गठबंधन पर आखिरी बात होनी है बहाना कोई भी हो बजाहिर आसार तो यही है कि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस बीएसपी और समाजवादी पार्टी के गठबंधन की बात तो दूर बीजेपी शायद मायावती और अखिलेश यादव का ही गठबंधन नहीं होने देगी।

छत्तीसगढ में तो मायावती ने कांग्रेस के साथ गठबंधन को आखिरी शक्ल अगस्त में ही दे दी थी। उस वक्त तक ईडी ने आनन्द कुमार से पूछगछ नहीं की थी जैसे-जैसे ईडी और इनकमटैक्स की सरगर्मियां बढी कांग्रेस से मायावती के फासले में भी इजाफा होने लगा फिर मायावती ने सितम्बर के आखिर तक कांग्रेस को बगैर बताए अजित जोगी की रीजनल पार्टी के साथ समझौता कर लिया। मध्य प्रदेश और राजस्थान में उनकी कांग्रेस के साथ बातचीत चल ही रही थी कि तीन अक्टूबर को उन्होने एलान कर दिया कि मध्य प्रदेश और राजस्थान में भी उनकी पार्टी कांग्रेस से समझौता नहीं करेगी बल्कि कुछ मकामी पार्टियों के साथ मिलकर एलक्शन लडे़गी। मायावती का यह फैसला बीजेपी मुखालिफ ताकतों को झटका देने वाला है। यह दीगर बात है कि उनके इस फैसले से राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ तीनों ही रियासतों में कांग्र्रेस पर कोई खास फर्क नहीं पड़ने वाला।

मायावती की यह बात भी किसी के गले नहीं उतरने वाली कि सोनिया गांधी और राहुल गांधी तो उनकी पार्टी के साथ समझौता करना चाहते थे लेकिन दिग्विजय सिंह ने नहीं होने दिया। सभी जानते हैं कि दिग्विजय सिंह ऐसा कोई काम नहीं करते हैं जो पार्टी के लिए नुक्सानदेह साबित हो और अगर वह करना भी चाहे तो मध्य प्रदेश के बारे में कांग्रेस के लिए फैसला करने वाले वह अकेले लीडर नहीं हैं मायावती बहाने बनाने पर आई तो यह तक कह दिया कि कांग्रेेस बहुत मगरूर (घमण्डी) पार्टी है गठबंधन साथियों को अहमियत नहीं देती। दूसरी तरफ वह यह भी कह रही हैं कि सोनिया गांधी और राहुल गांधी बहुत अच्छे और नेक दिल लीडर हैं। सवाल यह है कि अगर कांग्रेस मगरूर पार्टी है तो सोनिया गांधी और राहुल गांधी नेक दिल कैसे हो गए। बोलने पर आई तो उन्होने दिग्विजय सिंह को बीजेपी का एजेण्ट तक बता दिया और अभी से यह तक पेशीनगोई कर दी कि इस बार लोक सभा एलक्शन में कांग्रेस मुसलमान उम्मीदवारों की तादाद बहुत कम करने वाली है लेकिन बीएसपी ऐसा नहीं करेगी।