किसानों पर पड़ी मोदी की मार

किसानों पर पड़ी मोदी की मार

स्वामी नाथन कमेटी की सिफारिश मानने का मोदी का दावा झूटा निकला

हिसाम सिद्दीकी

नई दिल्ली! वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी ने गुजिश्ता दिनों स्वामी नाथन कमेटी की सिफारिशात के मुताबिक काश्तकारों को उनकी लगात के मुकाबले उपज की डेढ गुना कीमत देने का जो ढिढोरा पीटा था वह झूटा साबित हुआ नतीजा यह कि काश्तकारों ने दिल्ली कूच किया तो उनपर लाठियां बरसाई गईं। अपने एक दर्जन से ज्यादा मतालबात मनवाने की गरज से किसान यूनियन ने 23 सितम्बर को हरिद्वार से दिल्ली के किसान घाट तक मार्च निकाला टै्रक्टरों, ट्रालियों और दूसरी गाड़ियों पर सवार हजारों काश्तकारों का हुजूम दो अक्टूबर को जैसे ही  दिल्ली बार्डर पर पहुचा उन्हें गाजीपुर में ही रोक दिया गया। काश्तकारों ने आगे जाने की जिद की तो उन पर लाठियां बरसी, आंसू गैस के गोले छोडे़ और पानी की बौछार छोड़ी गई। काश्तकारों को खौफ जदा करने के लिए हवाई फायरिंग भी हुई। काश्तकारों का कहना था कि वह चौधरी चरण सिंह की समाधि किसान घाट पर जाकर अपना मार्च खत्म करेगे। सरकार ने यह कहकर रोका कि अगर कोई अनहोनी हुई तो उसका जिम्मेदार कौन होगा। जबकि काश्तकारों का कहना था कि वह 23 सितम्बर को हरिद्वार से चले थे। दस दिनों के मार्च में उनके किसी साथी ने रास्ते में किसी की साइकिल तक नहीं रोकी तो किसान घाट तक जाने में हिंसा का खतरा कैसे हो गया।

तेइस सितम्बर को काश्तकारों का जुलूस हरिद्वार से चला लेकिन मोदी और उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के कानों पर जूं तक नहीं रेगी सरकार चाहती तो गाजियाबाद, मेरठ या उससे पहले कहीं भी काश्तकारों के साथ बातचीत की जा सकती थी लेकिन नहीं की गई। दो अक्टूबर को महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के दिन काश्तकारों को पहले पीटा गया फिर वजीर-ए-आजम दफतर के कुछ अफसरान और राजनाथ सिंह ने अलग-अलग बातचीत की कई दौर की बातचीत इसलिए नाकाम रही कि मोदी सरकार स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिश मानने के लिए तैयार नहीं हुई बाकी मतालबात माने जाने पर काश्तकार मुतमइन नहीं थे। यह मोदी सरकार है जिसके वजीर अपनी वजारत के कामों के अलावा बाकी सब काम करते हैं इसीलिए काश्तकारों के साथ बातचीत में वजीर जराअत (कृषि मंत्रि) राधे मोहन सिंह एक बार भी शामिल नहीं हुए।

हरिद्वार से चली भारतीय किसान यूनियन की किसान क्रांति यात्रा को दो अक्टूबर को ‘किसान घाट’ पहुचना था लेकिन मोदी सरकार ने उन्हें दिल्ली में दाखिले की इजाजत नहीं दी दिल्ली यूपी बार्डर पर ही आगे जाने से रोक दिया उसकी वजह यह थी कि मोदी ने पिछले दिनों किसानों की आमदनी दो गुना करने का जो एलान किया था भारतीय किसान यूनियन की मांगे सारे दावों की पोल पट्टी खोल रही थी। बीकेयू की पन्द्रह नुकाती मांगे अपने आप ही चीख कर कह रही थीं कि मौजूदा मोदी सरकार किसानों के साथ सिर्फ छलावा कर रही है। अगर ऐसा न होता तो किसानों की मांगों में यह शामिल नहीं होता कि स्वामी नाथन कमेटी की रिपोर्ट शामिल की जाए। यह भी शामिल न होता कि पीएम फसल बीमा योजना में बदलाव किया जाए। पन्द्रह नुकाती मांग में 60 साल की उम्र के बाद किसानों को पेंशन मिले। गन्ना की कीमतों की जल्द अदाएगी का मतालबा। किसानों का कर्ज माफ किया जाए। एक मांग यह भी शामिल थी गन्ना की कीमतों में अदाएगी में ताखीर पर ब्याज दिया जाए। किसान क्रेडिट कार्ड पर बगैर सूद कर्ज। सभी फसलों की पूरी तरह खरीद की मांग। सभी फसलों को पूरी तरह से खरीदा जाए। सिंचाई के लिए मुफ्त बिजली मिले। इनमें एक मांग यह भी थी कि आवारा जानवरों से फसलों को बचाया जाए। दस साल पुराने टै्रक्टरों के इस्तेमाल पर लगी रोक को हटाया जाना और ईंधन के दामों में कमी करने समेत दीगर मुतालबात शामिल थे। अगरचे सरकार की तरफ से दावा किया गया कि कुछ मांगे मान ली गई हैं और बाकी पर गौर व खौज चल रहा है। जबकि उसी वक्त बीकेयू के सदर नरेश टिकैत ने कहा कि हम सरकार की यकीनदहानी से मुतमइन नहीं है। उन्होने कहा कि हम इस पर बातचीत करेगे फिर आगे कोई रूख का फैसला करेंगे।

किसान लीडर नरेश टिकैत ने तीन अक्टूबर को सुबह तडके अपना मार्च वापस लेने का एलान कर दिया। यह तब मुमकिन हुआ जब दो अक्टूबर की रात में किसानों को दिल्ली में दाखिला मिला और ‘किसान क्रांति यात्रा’ किसान घाट पहुच कर खत्म हो गई। इससे पहले दो अक्टूबर को करीब ग्यारह बजे जब किसानों के दिल्ली में दाखिल होने की इजाजत नहीं दी गई और बैरीकेटिंग लगा दी गई तो किसान मुश्तइल हो गए किसानों ने बैरीकेटिंग को हटा कर आगे बढने की कोशिश की तो पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए आंसू गैस के गोले दागे, पानी की बौछार की और जमकर किसानो ंपर लाठियां भांजी रबर की गोलियां चलाईं और हवाई फायरिंग करके भीड़ को मुंतशिर करने की कोशिश की इसमें 100 से ज्यादा किसान जख्मी हो गए जबकि दिल्ली पुलिस के एक एसीपी समेत सात पुलिस वाले भी जख्मी हुए। किसानों पर पुलिस के जरिए लाठियां भांजने पर अपोजीशन पार्टियों की तरफ से तो सख्त मजम्मत की गई एनडीए में शामिल जनता दल (यू) के लीडर के सी त्यागी ने कहा कि पुरअम्न और हथियारों के बगैर मुजाहिरा कर रहे किसानों के साथ बरबरियत की गई हम इसकी सख्त मजम्मत करते हैं।

अपोजीशन पार्टियों ने राजधानी दिल्ली की तरफ मार्च कर रहे हजारों किसानों के खिलाफ मोदी सरकार पर 2 अक्टूबर को अहिंसा के पुजारी महात्मा गांधी  के जन्म दिन पर पुलिस  पर बरबरियत आमेज कार्रवाई का इल्जाम लगाया और कांग्रेस ने तंज किया कि ‘‘दिल्ली सल्तनत का बादशाह सत्ता के नशे में है।’’ अपोजीशन ने मरकजी सरकार पर ‘किसान मुखालिफ’ होने का इल्जाम लगाते हुए मांग की कि किसानों को पुरअम्न तौर पर अपनी शिकायतों को रखने के लिए दिल्ली में दाखिले की इजाजत नहीं दी गई।

किसानों पर लाठीचार्ज : मोदी सरकार पर अपोजीशन के 15 बड़े हमले

गाजियाबाद में दिल्ली-यूपी सरहद और दीगर जगहों पर किसानों को रोका गया। पुलिस ने किसानों को रोकने के लिये पानी की बौछार और आंसू गैस के गोले दागे और लाठी चार्ज किया गया। जरई कर्ज माफी और ईंधन के दामों में कटौती जैसी मुख्तलिफ मांगों को लेकर भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) की तरफ से मुजाहिरे का नारा दिया गया था।  अफसरान ने कहा कि ट्रैक्टर-ट्रालियों पर सवार किसानों ने पुलिस के बैरीकेड तोड़ दिये और दिल्ली पुलिस के जरिए लगाए गए बैरीकेड की तरफ बढ़ने लगे। उनका कहना है कि भीड़ को तितर-बितर करने के लिये आंसू गैस के गोले भी दागे गए। किसानों के तयीं मोदी सरकार के सख्त रूख अख्तियार करने और उन्हें पुलिस से पिटवाने पर अपना रद्देअमल जाहिर करते हुए कांग्रेस सदर राहुल गांधी ने बीजेपी पर  बैनुलअकवामी अदम तशद्दुद के दिन दिल्ली सरहद पर किसानों की ‘‘जालिमाना पिटाई’’ का इल्जाम लगाया। राहुल ने सवाल किया कि वह कौमी राजधानी में अपनी शिकायत का जिक्र भी नहीं कर सकते? उन्होंने हिंदी में ट्वीट किया, ‘‘आलमी यौमे अदम तशद्दुद (अहिंसा दिवस) पर बीजेपी का दो साला गांधी जयंती तकरीब पुरअम्न तौर पर दिल्ली आ रहे किसानों की पिटाई से शुरू हुआ। अब किसान देश की राजधानी आकर अपना दर्द भी नहीं सुना सकते!’’

पुलिस कार्रवाई की मजम्मत करते हुए कांग्रेस तर्जुमान रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि मरकज अगर कुछ सनअतकारों के भारी भरकम कर्ज माफ कर सकता है तो वह किसानों का कर्ज क्यों नहीं माफ कर सकता। वजीर-ए-आजम नरेंद्र मोदी की तनकीद करते हुए उन्होंने इल्जाम लगाया, ‘‘गुरूर उनके सिर चढ़कर बोल रहा है।’’ कांग्रेस लीडर ने इल्जाम लगाया, ‘‘मांग सुने जाने के बजाए किसानों के साथ बरबरियत हो रही है उन्हें पीटा गया। दिल्ली सल्तनत का बादशाह सत्ता के नशे में चूर है।’’ किसानों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई की तनकीद करते हुए माक्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) के जनरल सेक्रेटरी सीताराम येचुरी ने कहा, ‘‘हम किसानों पर हुई कार्रवाई और ज्यादतियों की सख्त अल्फाज में मजम्मत करते हैं। यह एक बार फिर मोदी सरकार के किसान मुखालिफ रवैये को जाहिर करता है।’’ उन्होने कहा कि बोहरान से जूझ रहे किसानों को राहत देने के बजाए उन्हें कर्ज के बोझ और खुदकुशी की तरफ धकेला जा रहा है। हमने यौमे आजादी के बाद से आजतक ऐसा नहीं देखा। समाजवादी पार्टी के सदर अखिलेश यादव ने मुजाहिरा कर रहे किसानों को अपनी हिमायत देते हुए इल्जाम लगाया कि ईंधन के बढ़े दामों और जीएसटी और नोटबंदी जैसे फैसलों की वजह से किसान बिरादरी बुरी तरह मुतास्सिर हुई है। अखिलेश ने कहा कि ‘‘किसान अपनी मुख्तलिफ मांगों की हिमायत में सड़कों पर हैं। अगर हम देखें तो पिछले चार सालों में करीब 50 हजार किसानों ने खुदकुशी की है। इनमें ज्यादातर उत्तर प्रदेश समेत दीगर बीजेपी के एक्तेदार वाले प्रदेशों के किसान शामिल हैं।“

कम्युनिस्ट पार्टी आफ इंडिया  ने भी मुजाहिरा कर रहे किसानों पर पुलिस कार्रवाई की मजम्मत की। बाएं बाजू की अखिल भारतीय किसान सभा ने भी किसानों के खिलाफ पुलिस की ‘‘बरबरियत’’ की तंकीद की और इस मुद्दे पर सरकार को कठघरे में खड़ा किया। दिल्ली के वजीर-ए-आला अरविंद केजरीवाल ने कहा कि किसानों के एहतेजाजी मार्च को कौमी राजधानी में दाखिले से रोकना ‘‘गलत’’ है।  केजरीवाल ने कहा, दिल्ली सबकी है। उन्हें दिल्ली में आने देना चाहिए। हम उनकी मांगों की हिमायत करते हैं।’’ राष्ट्रीय जनता दल के लीडर तेजस्वी यादव ने कहा कि स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट की अनदेखी कर मोदी सरकार ने किसानों की पीठ में छूरा घोंपा है। उन्होने कहा कि आरजेडी किसानों की मांगों की पूरी तरह से हिमायत करती है। चायवाले सरमायादार की सरकार की जानिब से अन्नदाताओं को रोका जा रहा है। उन्होने कहा कि ठगों और लुटेरों को मुल्क का लाखों करोड़ लुटवा कर बाइज्जत मुल्क के बाहर भेजा जा रहा है। किसानों के साथ ऐसा सुलूक बर्दाश्त न होगा।  तेजस्वी ने ट्वीट कर कहा, ‘‘मोदी जी, माना किसान सरमायादारों की तरह आपकी जेबें नहीं भर सकते लेकिन कम से कम उनके सिर पर डंडे तो मत मरवाइए। अगर आपने गरीबी देखी होती तो किसानों पर इतने जुल्म नहीं करते।’’

सरकार किसानों के मसायल दूर करने के मामले में कितनी संजीदा है कि दस दिन से किसान सड़कों पर थे मगर न मोदी और न योगी ने किसानों का दर्द जानने की कोई पहल नहीं की जब किसान दिल्ली में दाखिल होने को थे तो वजीर दाखिला राजनाथ सिंह, जराअत के मिनिस्टर आफ स्टेट गजेन्द्र सिंह शेखावत और पीएमओ के कुछ अफसरान ने सरगर्मी दिखाई चूंकि सरकार की नियत साफ नहीं थी इसलिए किसानों को मायूस लौटना पड़ा। मगर मोदी सरकार का यह रवैया किसानों का गुस्सा बढाने की वजह बन सकता है। अब यही देखने वाली बात होगी कि किसान अपना गुस्सा सड़कों पर निकाल कर उतारेंगे या फिर बैलेट से बदला लेंगे।