इंसानों की कत्लगाह बना यूपी

इंसानों की कत्लगाह बना यूपी

अलीगढ फर्जी इनकाउण्टर

“सत्रह साल के नौशाद और बाइस साल के मुस्तकीम को सोलह सितम्बर को अलीगढ पुलिस घर से उठाती है बुरी तरह पीट कर एक कमरे में रखती है। अट्ठारह सितम्बर को सीनियर पुलिस कप्तान दोनांं पर 25-25 हजार के इनाम का एलान करते हैं। बीस को मीडिया को बुलाकर दोनों को बेरहमी से कत्ल कर दिया जाता है। दोनों के खिलाफ कोई मुकदमा नहीं।”

 

“अलीगढ पुलिस ने दो मुस्लिम नौजवानों को कत्ल करके रोज एक नई कहानी गढी हर कहानी झूटी साबित हुई। आखिर में कह दिया कि इनकाउण्टर के ठीक पहले भी दोनों ने एक बाइक छीनी थी चार दिनों से दोनों पुलिस के कब्जे में थे तो बाइक कैसे छीन ली और अगर छीनी तो किस से और अब बाइक कहां है? दोनों मुसलमान थे इसलिए कोई सुनवाई भी नहीं।”

 

“इनकाउण्टर के बहाने बेगुनाहों को कत्ल करने वाली पुलिस ने फर्जी इनकाउण्टर पर सवाल उठाने वाले साबिक मेम्बर असम्बली जमीर उल्लाह खान को सीआरपीसी की दफा 160 का नोटिस जारी करके तो साबिक लोक सभा मेम्बर चौधरी विजेन्द्र सिंह को भी धमकाया। दोनां मकतूलों की वालिदा जिन लोगों के साथ दिल्ली में मीडिया से अपनी बात कहने गई उन दस लोगों के खिलाफ दोनों को अगवा (अपहरण) करने का मुकदमा तक लिख दिया। यह बौखलाहट क्यों?”

 

नुमाइंदा खुसूसी

अलीगढ! उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ पुलिस ने अलीगढ के भैंसपाड़ा से दो मुस्लिम नौजवानों को उठा कर दिन दहाडे़ कत्ल कर दिया और आदत के मुताबिक ‘कोल्ड ब्लडेड’ इस मामले को खतरनाक क्रिमिनल्स को इनकाउण्टर में मारे जाने की कहानी भी गढ दी। चूंकि पुलिस इस मामले मे पूरी तरह फंसती नजर आ रही है इसलिए बीस सितम्बर से अब तक रोजाना एक नई कहानी गढ कर पेश करती आ रही है। चूंकि मारे जाने वाले दोनों नौजवान नौशाद और मुस्तकीम मुसलमान थे, इसलिए आदित्यनाथ सरकार भी कुछ सुनने के लिए तैयार नहीं है। मीडिया ने भी इन मुसलमानों को कत्ल किए जाने के वाक्ए को कोई अहमियत नहीं दी। हालांकि देश भर के मीडिया ने लखनऊ में पुलिस के हाथों कत्ल किए गए विवेक तिवारी के मामले में आसमान सर पर उठा लिया तकरीबन सभी चैनलों ने चार-पांच दिनों तक चार-चा र घंटे के प्रोग्राम विवेक तिवारी के मर्डर पर किए और आदित्यनाथ को मजबूर कर दिया कि उन्हें कत्ल किए गए विवेक के घर वालांं को चालीस लाख का मुआवजा उनकी बीवी को सरकारी नौकरी, रहने के लिए एक मकान और दोनां बच्चियों की तालीम की जिम्मेदारी लेनी पड़ी। अलीगढ में दो गरीब मुसलमानों को पकड़ कर पुलिस ने कत्ल कर दिया तो किसी पर कोई फर्क नहीं पड़ा।

नौशाद और मुस्तकीम को पुलिस ने सोलह सितम्बर को जब उनके घर से उठाया तो वह दोनां खाना खा रहे थे। दोनां रिश्ते में साले बहनोई थे और कपडे़ की एक दुकान पर कढाई का काम करते थे। दोनों को उठाने के साथ-साथ पुलिस उनके आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर कार्ड समेत तमाम ऐसे रिकार्ड भी उठा ले गई जिनसे उनकी उम्र का पता चल सके। उनकी वालिदा और घरवालों के मुताबिक इस वक्त मुस्तकीम की उम्र बाइस साल और नौशाद सत्रह साल का था। उम्र से मुताल्लिक तमाम दस्तावेजात गायब करने के बाद अब पुलिस कह रही है कि पोस्ट मार्टम से पता चला कि उनकी उम्र तीस साल थी।

दोनों को पुलिस ने सोलह सितम्बर को घर से उठाया रास्ते में ही बुरी तरह पीटना शुरू कर दिया। उन्हें एक कमरे में बंद करके रखा गया तीसरे दिन अट्ठारह सितम्बर को अलीगढ के पुलिस कप्तान ने उनपर पच्चीस-पच्चीस हजार के इनाम का एलान करते हुए कहा कि दोनां बहुत ही खतरनाक किस्म के क्रिमिनल्स हैं। इसके तीसरे दिन बीस सितम्बर को हरदुआ गंज पुलिस ने गोली मार कर इनकाउण्टर बता दिया। इस मुबय्यना (कथित) इनकाउण्टर को दिखाने के लिए पुलिस ने मीडिया नुमाइंदों को भी बुला रखा था।

मुस्तकीम की वालिदा रफीकन और नौशाद की वालिदा शाहीन ने दिल्ली जाकर मीडिया को अपने बेटों को इस तरह कत्ल किए जाने की तफसील बताई लेकिन मीडिया और सरकार किसी ने कोई तवज्जो नहीं दी दोनों ख्वातीन ने अपने-अपने बेटों को कत्ल किए जाने की तफसील उनतीस सितम्बर को रोते हुए पूरे मुल्क के सामने बयान की थी। दोनों ने वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी से इस मामले में दखल देने की अपील की थी लेकिन उनकी अपील किसी ने नहीं सुनी।

अलीगढ पुलिस ने पहले तो कहा कि यह दोनों इंतेहाई खतरनाक किस्म के क्रिमिनल्स थे इन दोनां ने रूपसिंह नाम के एक साधू को कत्ल किया था। साधू रूप सिंह के भाई गिरिराज सिंह ने पुलिस की कहानी को झूट का पुलिंदा करार देते हुए कह दिया कि रूप सिंह के कत्ल से इन दोनो का कुछ लेना-देना नहीं है। पुलिस झूट बोल रही है। बाद में पुलिस ने अपने गुनाह पर पर्दा डालने के लिए एक नई कहानी गढ दी कि नौशाद और मुस्तकीम सजायाफ्ता मुजरिम थे। गाजियाबाद की जिला अदालत ने उन्हें 2007 में दस-दस साल की सजा भी दी थी दोनों सजा काट कर जेल से निकले थे। यह कहानी भी झूटी निकली। बेलगाम योगी पुलिस ने इस फर्जी इनकाउण्टर पर सवाल उठाने वाले समाजवादी पार्टी के साबिक मेम्बर असम्बली जमीर उल्लाह खान को भी तलब करके उन्हें धमकी दे दी कि उन्हें पुलिस के खिलाफ अफवाह फैलाने के इल्जाम में जेल भेजा जा सकता है। कांग्रेस के साबिक मेम्बर लोक सभा चौधरी विजेन्द्र सिंह को भी इसी किस्म की धमकी पुलिस ने दी। जमीर उल्लाह खान को सीआरपीसी की दफा एक सौ साठ (160) का नोटिस तक जारी कर दिया गया यह दीगर बात है कि जमीर उल्लाह खान और चौधरी विजेन्द्र सिंह दोनों ने ही पुलिस के सामने घुटने नहीं टेके।

किसी को भी इनकाउण्टर के बहाने कत्ल करने की छूट पुलिस को वजीर-ए-आला आदित्यनाथ ने प्रदेश की सत्ता संभालते ही दे दी थी। चीफ मिनिस्टर की पुश्तपनाही हासिल होने से उत्तर प्रदेश की पुलिस पूरी तरह बेलगाम हो गई। अलीगढ पुलिस तो इतनी बेलगाम हो गई कि मुस्तकीम की वालिदा रफीकन और नौशाद की वालिदा शाहीन जिन लोगोे के साथ मीडिया से बात करने दिल्ली गईं थी उन सबके खिलाफ पुलिस ने रफीकन और शाहीन को अगवा करने का मुकदमा बजरंग दल के गुण्डों की शिकायत पर दर्ज कर दिया। इस मामले में जवाहर लाल युनिवर्सिटी के तालिब इल्म लीडर उमर खालिद अलीगढ युनिवर्सिटी के साबिक सदर मशकूर उस्मानी और फैजुल हसन समेत दस लोगों को नामजद कर दिया। इस मामले में भी पुलिस को मुंह की खानी पड़ी।

अलीगढ पुलिस ने बेशर्मी और झूट की तमाम हदें पार करते हुए एक नया शोशा छोड़ते हुए आखिर में कह दिया कि पुलिस रिकार्ड के मुताबिक मारे गए नौशाद और मुस्तकीम सजायाफ्ता मुजरिम थे 11 साल पहले इन दोनों  को गाजियाबाद जिला अदालत ने दस-दस साल की सजा सुनाई थी जिसमें से सात साल की सजा यह दोनो डासना जेल में काट चुके थे।

पुलिस की एफआईआर के मुताबिक 2007 में इन दोनों ने कुछ लोगों को यरगमाल (बंधक) बनाकर लूट की वारदात को अंजाम दिया था। लूट के दौरान एक शख्स को इन्होंने गोली भी मारी थी। अलीगढ़ में मुठभेड़ से एक महीने पहले इन पर दो साधुओं समेत छः लोगों को कत्ल करने का इल्जाम भी पुलिस ने लगाया था। अलीगढ़ पुलिस ने झूट बोला कि इनकाउण्टर से कुछ ही घंटे पहले दोनों ने एक बाइक भी लूटी थी। सवाल यह है कि जब दोनां 16 सितम्बर से ही  पुलिस के कब्जे में थे तो बाइक कैसे लूट ली और अगर लूटी तो वह बाइक कहां है। कत्ल किए गए नौशाद की वालिदा ने कहा कि पुलिस सरासर झूठ बोल रही है। पुलिस गढ़मुक्तेश्वर, हापुड़ में जिस वक्त का वाक्या बता रही है उस वक्त मेरे बेटे नौशाद की उम्र सिर्फ 6 साल थी। कत्ल के वक्त नौशाद सत्रह साल का था। ऐसे में छः साल का लड़का कैसे तमंचा चलाकर राह चलते हुए लोगों को लूट सकता है। मुस्तकीम की मां शबाना अलीगढ़ पुलिस पर इल्जाम लगाती है  कि 2007 के जिस वाक्ए से पुलिस मेरे 22 साल के बेटे मुस्तकीम को जोड़ रही है उस वक्त मुस्तकीम की उम्र महज ग्यारह साल थी। पुलिस यह भी कह रही है कि हमारे बेटे डासना जेल में 7-7 साल की सजा भी काट चुके हैं तो पुलिस यह बताए कि ग्यारह और छः साल के नाबालिग बच्चे  जुवेनाइल सेटर (बाल सुधार गृह) की जगह डासना जेल में कैसे सजा काट आए।

शाहीन और शबाना का यह भी इल्जाम है कि पुलिस दोनों को कत्ल करने से पहले हमारे घर से आधार कार्ड,  वोटर कार्ड और बैंक की पासबुक तक उठा लाई है। हमारे घर में किसी भी तरह का कोई कागज नहीं छोड़ा है। इन इल्जामात के सिलसिले में अतरौली हलके के सर्किल अफसर (सीओ) प्रशांत सिंह का कहना है ‘हमारी जांच में सामने आया है कि यह लोग पुराने और सजायाफ्ता मुजरिम हैं। इनकी पुरानी क्राइम हिस्ट्री और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक इस वकतं इनकी उम्र करीब 30 साल के आसपास है।’

रिहाई मंच के अवधेश यादव के साथ मंच और अलीगढ युनिवर्सिटी यूनियन के ओहदेदारों और नफरत के खिलाफ मुहिम छेड़ने वालों ने अलीगढ के गांव मुबय्यना (कथित) इनकाउण्टर की जगह और थाने का दौरा करने के बाद पुलिस के झूट की धज्जियां उड़ा दी। इन लोगों ने उस साधू रूप सिंह के भाई और घरवालों से भी मुलाकात की जिस साधू को कत्ल करने में पुलिस ने नौशाद और मुस्तकीम के शामिल होने का झूट बोला है। सत्ताइस सितम्बर को इन लोगों ने  पुलिस के हाथों कत्ल किए गए मुस्तकीम और नौशाद के घर वालों से मुलाकात की। इस वफ्द (प्रतिनिधिमंडल) ने सफेदापुर में कत्ल किए गए साधू और इस मामले में गिरफ्तार किये गए डाक्टर यासीन और इरफान के घरवालों से भी मुलाकात की। मंच ने कहा कि साधू रूप सिंह के भाई गिरिराज सिंह ने न सिर्फ कत्ल पर सवाल उठाए बल्कि उनके भाई के कत्ल के नाम पर किए गए फर्जी इनकाउण्टर पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि पुलिस कत्ल का जो वक्त बता रही है उस वक्त उनके बड़े भाई बाबा जी से मिलकर आये थे। वहीं इनकाउण्टर में मारने के पुलिसिया दावे पर उन्होंने कहा कि आज तक पुलिस ने साधू के मोबाइल और बैग की बरामदगी नहीं की है। वह लोग क्यों मारेंगे वह बेगुनाह हैं। उन्होंने कहा कि गांव के लोगों की मिलीभगत के बगैर यह वाक्या नहीं हो सकता। वह बताते हैं कि इसके पहले भी कई बार मंदिर में चोरी हो चुकी है। एक बार 35 हजार रुपए खाना बनाने के बर्तन, एक बार 60 हजार रुपए, मंदिर का एम्प्लीफायर और इस बार 90 हजार रुपए चोरी हुए। सुबह जब बड़े भाई दूध लेकर पहुंचे तो देखा कि बाबा का कत्ल हो गया था। हालत को देखते हुए उन्हें लगता है कि चोर मंदिर में घुसे और बाबा जाग गए। पहचान लिए जाने के डर से चोरों ने उनका कत्ल कर दिया और ट्यूबल पर पहुंचे होंगे। उसी दौरान जंगली सुअर को भगाने के लिए दवा डालने गए शौहर बीवी की टार्च की रौशनी उन पर पड़ गई। इस बार भी उन्होंने पहचान लिए जाने के खौफ से उन दोनों को भी कत्ल कर दिया होगा। इससे लगता है कि वह कातिल गांव के ही रहे होंगे। जब वह मामले को लेकर पुलिस के पास गए तो पुलिस ने उन्हें एक वीडियो दिखाया जिसमें एक शख्स कह रहा है कि उसने बाबा को मारा और आखिरी गाड़ी पकड़कर चला गया। आखिरी गाड़ी 8 बजे की है। यह कैसे मुमकिन हो सकता है जब कि मेरे बड़े भाई 8 बजे बाबा से मिलकर आए थे।

वफ्द ने अतरौली के नई बस्ती भैंसपाड़ा में मुस्तकीम और नौशाद के घरवालों से मुलाकात की। मुस्तकीम की माँ शबाना ने बताया कि उनके बच्चे बेगुनाह थे। 16 सितंबर को ही पुलिस उन्हें उठाकर ले गई थी। पुलिस जब मारते-पीटते ले जा रही थी तो दोनों कह रहे थे कि हमारा क्या गुनाह है। मुस्तकीम ने भागने की कोशिश की तो उसे और बेरहमी से पुलिस वालों ने पीटा। उस रात और उसके बाद 18 सितम्बर को पुलिस आई और उनके फरार होने की बात कही। इस पर उन्होंने कहा कि जब पुलिस उसे ले गई थी तो वह फरार कैसे हो गए। मुस्तकीम के भाई सलमान को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया है। उन्होंने बताया कि उसी दिन से उनके शौरह इरफान का भी कोई अता-पता नहीं है। नौशाद की माँ शाहीन ने बताया कि बच्चों को मारने के बाद पुलिस वाले उनके साथ रफीकन और शबाना को थाने ले गए थे। बड़े अफसरों की मौजूदगी में उनसे सादे और लिखे कागजों पर अंगूठा लगवाया और देर रात छोड़ दिया गया। उनके बच्चे और बहू घर में अकेले थे और पुलिस वहां कमरे तक में घुसी हुई थी। किसी को आने-जाने नहीं दिया जा रहा था। घर पर सिर्फ ख्वातीन और बच्चों के होने के बावजूद खातून पुलिस नहीं थी। 24 घंटे मर्द पुलिसवाले उनके घर पर मौजूद रहते हैं। उन्होंने बार-बार इस बात को कहा कि उन्हें पुलिस पूछगछ के नाम पर लगातार परेशान कर रही है और उन्हें घर के बाहर नहीं जाने दिया जा रहा है। पुलिस लगातार खौफ का माहौल बनाए हुए हैं। पहले से ही गरीबी की मार झेल रहे परिवार पर पुलिसिया दहशत का साया है। उन्हें भूके पेट रहना पड़ रहा है। उनके छोटे-छोटे बच्चे हैं और मुस्तकीम की मां, दादी और मुस्तकीम की बीवी हैं। उन्हें अंदेशा है कि जिस तरह से जेहनी तौर से माजूर नफीस को पुलिस ने हिरासत में रखा है कहीं नौशाद के वालिद इरफान को भी पुलिस हिरासत में न रखा गया हो। ऐसे में उनका परिवार मोहल्ले वालों की मदद के ही सहारे है। कत्ल किए जाने वालों के घरवालों ने इस मामले में इंसाफ की गुहार लगाई है और गैरजानिबदाराना जांच का मतालबा किया है।

वफ्द ने डाक्टर यासीन और इरफान के परिवार से भी मुलाकात की। डाक्टर यासीन और इरफान को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया है। डाक्टर यासीन के परिवार में उनकी बीवी हिना नाज की तबीयत बहुत खराब है वहीं इरफान की बीवी का भी बुरा हाल है।

इस वफ्द में रिहाई मंच के अवधेश यादव, रविश आलम, शाहरुख अहमद,  एएमयू तलबा लीडर इमरान खान, अहमद मुस्तफा, आमिर, सोहेल मसर्रत, शरजील उस्मानी, अयान रंगरेज, राजा, आरिश अराफात और मोहम्मद नासिफ, राजीव यादव वगैरह शामिल थे।