बैंक को चूना लगाकर भागा एक और गुजराती

बैंक को चूना लगाकर भागा एक और गुजराती

नीरव मोदी और मेहुल चौकसी की तरह सदेसरा भाई भी मुल्क से फरार

नुमाइंदा मरकज

मुंबई! नीरव मोदी और ‘मेहुल भाई’ की तरह मोदी सरकार के करीबी बताए जाने वाले गुजरात के सदेसरा भाई (नितिन और चेतन सदेसरा) बैंकों का साढे पांच हजार करोड़ से ज्यादा रूपया हज्म करके मुल्क से फरार हो गए और बकौल राहुल गांधी के ‘चौकीदार’ सोता रहा या फिर भगोड़ों से मिल गया। नितिन जयंतीलाल संदेसरा और उनके भाई चेतन संदेसरा के खिलाफ इंफोर्समेंट डायरेक्ट्रेट मनी लाडिं्रग एक्ट के तहत चार्जशीट दाखिल करेगा। गुजराती होने की वजह से संदेसरा भाइयों पर नरेन्द्र मोदी सरकार की मेहरबानियां किस कदर थी। इसका अंदाजा इसी से लगता है कि पिछले साल 27 अक्टूबर को बड़ौदा की फार्मास्यिटिकल कम्पनी स्टर्लिंग बायोटेक के मालिक नितिन जयंतीलाल संदेसरा, उनके भाई चेतन जयंतीलाल सदेसरा, चेतन की बीवी दीप्ति संदेसरा, राजभूषण, ओम प्रकाश दीक्षित और विलास जोशी के खिलाफ मनी लाडिंरग एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया था। उसके दो दिन बाद सीबीआई ने संदेसरा भाइयों के खिलाफ 5700 करोड़ रूपए के बैंक लोन फ्राड और करप्शन मामले में केस दर्ज किया था मगर तकरीबन एक साल का अर्सा गुजर जाने के बाद भी उनके खिलाफ ईडी के जरिए चार्जशीट नहीं दाखिल की गई हालांकि सीबीआई ने उनके खिलाफ चार्जशीट तो दायर कर दी थी मगर उन्हें पकड़ने की कोशिश नहीं की गई जबकि संदेसरा भाइयों पर 2004 से 2012 के बीच मुख्तलिफ बैंकों से कर्ज लेने के इल्जाम हैं मगर 2014 में सरकार बनाने के बावजूद नरेन्द्र ने किसी भी बेईमान गुजराती बिजनेसमैन के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होने दी। अब जब वह भाग गया तो सब शोर मचा रहे हैं।

जो लोग चाय, जिलेटिन फार्मा और कच्चे तेल का व्यापार करते हों और जिनकी आमदनी करोड़ों में हो, वडोदरा में जिनका 60 हजार स्क्वायर फीट का बंगला हो, जिसका इंटीरियर बालीवुड की सिलेब्रिटी इंटीरियर डिजाइनर सुजैन खान और गौरी खान ने तैयार किया हो, उनकी शान ओ शौकत का अंदाजा लगाना ज्यादा मुश्किल नहीं है। ऐसी राजसी जिंदगी जीने वाले संदेसरा भाइयों की तलाश में सीबीआई और ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) दोनों है। फिलहाल यह दोनों भाई भारत से बाहर हैं क्योंकि इन लोगों के राजसी ठाटबाट बैंको के पैसों पर थे जिसे लेकर वह फरार हो चुके हैं।

59 साल के नितिन संदेसरा असल में वडोदरा के रहने वाले हैं लेकिन पले-बढ़े मुंबई में हैं। नितिन चार्टड अकाउंटेड हैं। उनके भाई चेतन संदेसरा उनसे दो साल छोटे हैं। ऊटी में टी-गार्डन खरीदकर स्टर्लिंग टी की शुरुआत करने वाले इन दोनों भाइयों ने उन तिजारतों को चुना जिनका मुस्तकबिल उन्हें बेहतर नजर आ रहा था और इसके जरिए उन्होंने अपने लिए सालाना कई करोड़ डालर की सालाना आमदनी वाले तिजारती ग्रुप को कायम किया। एक वक्त था जब दवाओं और दीगर तरह के जिलेटिन से जुड़े प्रोडक्ट के मामले में स्टर्लिन ग्रुप का देश में 60 फीसद और दुनिया में 6 फीसद हिस्सा हुआ करता था। किसी भी मशीन के हिस्से में हाथ से चलने वाले हत्थे (लेथ) की जगह जब सीएनसी मशीन का इस्तेमाल होने लगा तो इन भाइयों ने मशीन टूल के प्रोडक्शन में हाथ आजमाया। भारत में कच्चे तेल के प्रोडक्शन और बिक्री के लिए दिग्गज सरकारी और प्राइवेट कंपनियां थी तब स्टर्लिंग ने नाइजीरिया में तेल के कुएं हासिल किए। वहां प्रोडक्शन शुरू करने वाली यह पहली कंपनी बनी जिसने वापस भारत को तेल बेचना शुरू किया। 1985 से 2017 तक उन्होने कामयाब तिजारत की थी। गुजराती होने की वजह से उन्हें बीजेपी और नरेन्द्र मोदी की हमेशा हिमायत हासिल रही, यूपीए सरकार के जमाने में बैंकों से संदेसरा भाइयों ने लोन लिया और उसे दूसरे कारोबार में लगा दिया साथ ही बैंकों को कर्ज वापस भी नहीं किया और फरार हो गए। बैंकों को 5700 करोड़ का चूना लगा कर संदेसरा भाई फरार हो गए। नितिन संदेसरा ने अपनी पूरी जिंदगी तिजारत में लगा दी और शादी तक नहीं की नितिन तिजारत की बेहतरीन समझ रखते थे इसीलिए नितिन किसी भी नए शोबे में इनवेस्ट करने से पहले उसकी अच्छी तरह परख कर लेते हैं ताकि स्टर्लिंग ग्रुप को कोई नुकसान ना हो। बैंकों से लोन लेने के लिए प्रपोजल बनाने में भी नितिन माहिर रहे हैं।

वडोदरा के कई लोगों का मानना है कि नितिन की सूझबूझ और इवेंट मैनेजमेंट के हुनर की वजह से वडोदरा में होने वाले नवरात्रि महोत्सव का डंका देश-विदेश में बजता है। नितिन संदेसरा और उनके ग्रुप ने बडी सतह पर गरबा करा कर साबित किया कि नवरात्रि को एक बहुत बड़े मार्केटिंग इवेंट के तौर पर भी पेश किया जा सकता है। हालांकि कुछ साल बाद स्टर्लिंग ग्रुप इस प्रोग्राम से अलग हो गया। जब हर्षद मेहता केस सामने आया तब नितिन शेयर बाजार के बड़े खिलाड़ी हुआ करते थे। नितिन के छोटे भाई चेतन  की शोहरत उनकी पेज-थ्री पार्टियों की वजह से है। वह छोटी-छोटी वजहों से पार्टी देने और उनमें खुद हाजिर रहने के लिए जाने जाते हैं। उनमें लोगों के साथ ताल्लुकात बनाने और मुस्तकबिल में इन ताल्लुकात का इस्तेमाल कर अपने कारोबार को आगे बढ़ाने का हुनर था। ऐसा कहा जाता है कि दूसरी कंपनियों के मुकाबले संदेसरा भाइयों की कंपनी को नाइजीरिया में दाखिला दिलाने और कच्चे तेल का प्रोडक्शन करने के लिए सरकारी मंजूरी हासिल करने के पीछे चेतन का ही दिमाग था।

चेतन की बीवी दीप्ति के रिश्ते देश विदेश की मशहूर डिजाइनर, महंगे सामान बनाने वाले डीलर और बालीवुड सलेब्रिटीज के साथ बताए जाते हैं। दीप्ति के सलेब्रिटी कनेक्शन, चेतन की लाइजनिंग और नितिन का दिमाग ही स्टर्लिंग कंपनी की मजबूती की वजह माने जाते हैं।

सीबीआई की चार्जशीट के मुताबिक संदेसरा ग्रुप के सालाना बिक्री के आंकड़े उनकी कंपनी के हिसाब में दिखाई गई प्रापर्टी और कारोबार में तौसीअ से मेल नहीं खाते। यह सबकुछ महज कागजों पर ही है। जो प्लांट 45 करोड़ का खरीदा गया है वह 450 करोड़ का दिखाया गया है और इस दिखाई गई ऊंची कीमत पर लोन लिया गया है। इसके अलावा बिक्री के आंकड़े भी झूठे हैं, झूठे बिल और हवाला के जरिए कंपनी की बिक्री ज्यादा दिखाई गई है। ऊंची खरीद और लगातार बिक्री दिखाकर कंपनी ने बैंकों से लोन लिया। लोन देने वाले बैंकों के अफसरान को रिश्वत देने के इल्जाम भी हैं। बैंक लोन के पैसे को हवाला और शेल कंपनियों के जरिए विदेशों में भेजने का संदेसरा भाइयों पर इल्जाम है।

सीबीआई का दावा है कि कंपनी के शेयर लिस्टेड थे। लेकिन पब्लिक के नाम पर दिखाए गए शेयर हकीकत में उन शेल कंपनियों (वह कंपनियां जो अक्सर कागज पर ही चलती हैं) के पास थे जिनके मालिक मुबैयना तौर पर उनके घरवाले थे। शुरुआती जांच के बाद सीबीआई ने इल्जाम लगाया था कि संदेसरा परिवार ने शेयर की कीमतों को कम और ज्यादा कर करोड़ों रुपये कमाए। अभी तक हुई जांच से वैसे तो बहुत ज्यादा बातें सामने नहीं आ पाई हैं क्योंकि अहम मुल्जिमीन की गिरफ्तारी नहीं हुई है। लेकिन कहा जा रहा है कि नितिन और चेतन दोनों भाई नाइजीरिया में हैं।