योगी को अखिलेश का मुंह तोड़ जवाब

योगी को अखिलेश का मुंह तोड़ जवाब

शबीहुल हसन नकवी
लखनऊ! वजीर-ए-आला आदित्यनाथ के साबिक वजीर-ए-आला अखिलेश यादव पर एक बयान ने एक नया सियासी तूफान खड़ा कर दिया है। वजीर-ए-आला ने निषाद, कश्यप और बिंद समाज के एक जलसे में अखिलेश यादव पर सख्त बयान देते हुए कहा कि वह तो आज के औरंगजेब हो गए हैं। उन्होने मोस्ट बैकवर्ड कहे जाने वाले इन तबकों के लोगों से कहा कि जो शख्स अपने वालिद और चचा (मुलायम व शिवपाल यादव) का न हुआ वह आपका क्या होगा। उन्होने अखिलेश यादव पर इल्जाम लगाया कि अपनी सरकार के दौरान उन्होने कश्यप, बिंद और निषाद समाज के खिलाफ साजिश रच कर अपने ही लोगों से एक मुकदमा अदालत में कायम करा दिया था ताकि इस समाज को शेड्यूल्ड कास्ट की तरह रिजर्वेशन न मिलने पाए।
भारतीय जनता पार्टी मुसलसल दावा करती रहती है कि वह जात-पात और मजहब की सियासत नहीं करती, अगर यह दावा महज झूट नहीं है तो वजीर-ए-आला आदित्यनाथ उन तबको की मीटिंग करके क्या साबित करना चाहते थे। अगर यह मीटिंग जात-पात की सियासत का हिस्सा नहीं थी तो और क्या था। अखिलेश यादव पर वजीर-ए-आला आदित्यनाथ ने जो कमेण्ट किया वह उनकी आदत का हिस्सा ही था। मुल्क के सबसे बड़े प्रदेश की बागडोर संभाले उन्हें तकरीबन डेढ साल हो रहा है लेकिन अवामी जलसा हो या असम्बली का एजलास वह अक्सर ऐसी जुबान (भाषा) बोल देते हैं जिससे लगता है कि अभी तक वह वजीर-ए-आला के ओहदे में खुद को फिट नहीं कर पाए हैं और उसी तरह की बयानबाजी करने में उन्हें मजा आता है जैसी बयानबाजी वह हिन्दू महासभा और हिन्दू युवा वाहिनी के लीडर की हैसियत से करते रहते थे। पब्लिक मीटिगों में तो बीजेपी के लोग अक्सर छोटी बात करते रहते हैं लेकिन आदित्यनाथ शायद उत्तर प्रदेश में बीजेपी के पहले चीफ मिनिस्टर हैं जो धमकी देने वाली बाते करने के साथ-साथ अपने मुखालिफीन के लिए ‘सांप का बच्चा सपोला ही होगा’ जैसी सतह से गिरी हुई बात करने में कोई झिझक महसूस नहीं करते हैं।
अखिलेश यादव ने भी आदित्यनाथ के औरंगजेब वाले बयान का मुंह तोड़ जवाब दिया इतना जरूर है कि उन्होने सख्त जवाब भी तहजीब के दायरे में ही रहकर दिया। अखिलेश यादव ने कहा कि प्रदेश का वजीर-ए-आला पूरे अवाम का गार्जियन और वालिद के बराबर के दर्जे का होता है। इसलिए मौजूदा चीफ मिनिस्टर (आदित्यनाथ) को उन्नाव के उस कमजोर बाप को भी अपने बेटे जैसा मानना चाहिए था जिसकी बेटी को बीजेपी मेम्बर असम्बली के जरिए रेप किया गया। अपनी बेटी की इज्जत के लिए उस बाप ने आवाज उठाई तो उसे उनकी पार्टी के लोगों ने पीट-पीट कर मार डाला इन्हें उस बेटी को भी अपनी बेटी जैसी तस्लीम करना चाहिए था। जिसको सिर्फ स्याह झण्डा दिखाने पर जेल की काल कोठरी में डलवा दिया था। अखिलेश यादव ने प्रदेश मे फैल चुके जंगल राज पर भी योगी को घेरते हुए कहा कि प्रदेश में जरायम का सैलाब सा आ चुका है। पुलिस का इकबाल खत्म हो चुका है। इस जंगल राज की अस्ल वजह यह है कि मौजूदा सरकार ने उनकी सरकार में शुरू किए गए डायल-100 और वीमेन पावर लाइन को ही कमजोर कर दिया। उन्होने कहा कि जब से प्रदेश में बीजेपी सरकार आई है लिंचिंग, लूट, रेप और कत्ल जैसे संगीन जरायम का सैलाब सा आ गया है। उन्होने कहा कि रेप के वाक्यात की वजह से विदेशों तक में प्रदेश की बदनामी हो रही है।
याद रहे कि वजीर-ए-आला योगी आदित्यनाथ ने सात सितम्बर को समाजवादी पार्टी के सदर अखिलेश यादव पर बेहद ही सख्त हमलावर रूख अपनाते हुए न सिर्फ उनको मौकापरस्त करार दिया बल्कि उनका मवाजना (तुलना) मुगल बादशाह औरंगजेब से करके सियासी गलियारों में एक तरह से नया हंगामा खड़ा कर दिया था। इससे पहले अखिलेश यादव ने अपने एक बयान में कहा था कि 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के चीफ मिनिस्टर की कुर्सी पर नहीं रहेंगे।
सात सितम्बर को बैकवर्ड ‘मोर्चा सम्मेलन’ को खिताब करते हुये योगी ने कहा, ‘जो अपने बाप-चाचा का नहीं हुआ, वह आपको अपने साथ जोडने की बात करता है। उन्होंने औरंगजेब की मिसाल देते हुए कहा कि इतिहास दोहराया जा रहा है। औरंगजेब ने सत्ता की खातिर अपने वालिद को भी जेल की सलाखों के पीछे डाल दिया था, इसलिए आज भी मुस्लिम तबके के लोग अपने बेटे का नाम औरंगजेब नहीं रखते।
इतना ही नही वजीर-ए-आला ने कहा कि कश्यप और निषाद समाज को पहले गुड खांडसारी के लाइसेंस के लिए मुसीबत उठानी पड़ती थी। समाज की दिक्कत को देखते हुए उनकी सरकार ने गुड और खांडसारी का लाइसेंस बगैर किसी फीस के जारी करने का बंदोबस्त किया है। साथ ही नाव डूबने और सांप काटने से मौत होने पर चार लाख रुपये मुआवजे का एलान भी कर दिया। उन्होंने निषाद समाज से वादा किया कि मरकज और प्रदेश सरकार निषाद समाज के मसायल का हल निकालने को तरजीह (प्राथमिकता) देगी। साथ ही यह भी कहा कि जिस समाज के पुरखां ने भगवान राम की नैया पार लगाई हो उस समाज को धर्म की तशरीह (परिभाषा) बताने की जरूरत नहीं है। देश व धर्म की हिफाजत के लिए निषाद समाज ने तआवुन (योगदान) दिया है।
यहां यह जिक्र भी जरूरी है कि आदित्यनाथ की लोक सभा सीट गोरखपुर में निषाद, कश्यप और बिंद समाज की आबादी बहुत ज्यादा है। उन्हीं की नाराजगी की वजह से गोरखपुर सीट भी योगी समाजवादी पार्टी के हाथों हार चुके हैं।