जेटली की मदद से भागा माल्या?

जेटली की मदद से भागा माल्या?

बैंकों को लूट कर मुल्क से भागने वालों की बीजेपी और सरकार में बैठे अहम लोगों की पूरी मदद

” राहुल गांधी का साफ इल्जाम है कि विजय माल्या को भगाने के मामले में फाइनेंस मिनिस्टर अरूण जेटली झूट बोल रहे हैं। उन्हें बताना चाहिए कि माल्या को भागने में उन्होने खुद अपनी तरफ से अपनी मर्जी से ही मदद की या ऐसा करने के लिए वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी ने उन्हें फोन करके कहा था। पीएल पुनिया कहते हैं कि जेटली और माल्या पहले तो खड़े होकर बात करते रहे फिर बैठ कर दोनो ने तकरीबन बीस मिनट तक बातें की।”

“अरूण जेटली ने बड़ी चालाकी के साथ अल्फाज मुंतखब करके सफाई देते हुए कहा कि कई बार कोशिशों के बावजूद उन्होने विजय माल्या को कभी अपने घर या दफ्तर में मुलाकात का वक्त नहीं दिया। यह तो सवाल ही नहीं है जब आपने सेण्ट्रल हाल में उनसे बीस मिनट से ज्यादा देर तक बात कर ली तो फिर दफ्तर या घर में मुलाकात का वक्त न देकर कौन सा तीर मारा था।”

“बीजेपी की जानिब से संबित पात्रा ने प्रेस कांफ्रेंस करके सफाई दी उनकी बौखलाहट जाहिर कर रही थी कि वह जेटली का बचाव नहीं कर पा रहे है। क्योंकि इस मामले में दाल में काला नहीं पूरी दाल ही काली हो चुकी है। पात्रा सुब्रामण्यम स्वामी के बारह जून के ट्वीट पर एक लफ्ज नहीं बोल पाए जिसमें स्वामी ने लिखा था कि भागने से पहले माल्या एक ताकतवर शख्स से मिला था जो शख्स लुकआउट नोटिस में तब्दीली कर सकता था।”
हिसाम सिद्दीकी
नई दिल्ली! बैंकों से हजारों करोड़ रूपए लेकर विजय माल्या और नीरव मोदी व उसका मामूं मेहुल चोकसी छुप कर नहीं भागे वह डंके की चोट पर मुल्क के कानून और पूरे सिस्टम को धता बताकर भागे हैं क्योंकि नीरव मोदी और चोकसी को मुल्क के वजीर-ए-आजम तो विजय माल्या की मुल्क के फाइनेंस मिनिस्टर अरूण जेटली के साथ मुबय्यना (कथित) मिलीभगत थी। माल्या ने मुल्क से भागने के दो साल से ज्यादा वक्त गुजारने के बाद लंदन में वेस्ट मिनिस्टर्स अदालत के बाहर मीडिया नुमाइंदों को यह बता कर पूरे मुल्क ही नहीं दुनिया को हैरत में डाल दिया कि हिन्दुस्तान छोड़ने से पहले उसने फाइनेंस मिनिस्टर अरूण जेटली से मुलाकात की थी। उसने यह तो नहीं बताया कि अरूण जेटली से उसकी क्या-क्या बातें हुई थी। लेकिन इतना तो साफ कर ही दिया कि इस मामले में जेटली ने अभी तक मुल्क को पूरी हकीकत नहीं बताई। उन्होने अब तक अपनी मुलाकात को पोशीदा रखने का जुर्म भी किया। अब इस मामले से बचने के लिए वह कभी यह कहते हैं कि माल्या तो उन्हें पार्लियामेट हाउस के कोरिडोर में मिला था, कभी कहते हैं कि मेम्बर पार्लियामेंट होने का उसने गलत फायदा उठाया था तो कभी कहते हैं कि वह तो मोबाइल की बैट्री चार्ज करने के लिए पतली पिन वाले चार्जर के लिए उसके पास आया था। मतलब यह कि अरूण जेटली गरीबां की मदद के लिए मुल्क की तरक्की के लिए अपनी फाइनेंस मिनिस्ट्री को भले चार्ज न कर पाए मेम्बरान पार्लियामेट को मोबाइल फोन चार्ज करने की सहूलत अपने दफ्तर में जरूर देते रहे हैं। विजय माल्या के इस नए खुलासे के बाद से मुल्क की सियासत में एक नया बवाल खड़ा हो गया है। कांग्रेस सदर राहुल गांधी ने मतालबा किया है कि मोदी को इस मामले में फौरन ही किसी आजाद और ताकतवर एजेंसी से गहराई के साथ जांच करानी चाहिए और जांच पूरी होने तक अरूण जेटली को फाइनेंस मिनिस्ट्री के काम से अलग रखना चाहिए। अपने-अपने लोगों और अपनी पार्टी पर लगने वाले दीगर तमाम इल्जामात की तरह इस मामले पर भी नरेन्द्र मोदी ने खबर लिखे जाने तक खामोशी अख्तियार कर रखी थी। विजय माल्या बारह सितम्बर को वेस्ट मिनिस्टर्स अदालत में हाजिर होने आया था, जहां उसपर यह मुकदमा चल रहा है कि उसे वापस हिन्दुस्तान भेजा जाए या नहीं? अदालत से बाहर निकल कर उसने इतना बड़ा धमाका कर दिया। उससे दो दिन पहले ही मेहुल चोकसी ने भी बाकायदा एक वीडियो जारी करके बारह हजार करोड़ के बैंक घोटाले की सारी जिम्मेदारी बैंकों और इनफोर्समेंट डायरेक्ट्रेट पर ही डाल दी। चोकसी वह है जिसे नरेन्द्र मोदी मेहुल भाई कह कर मुखातिब करते थे वह मोदी की अहम मीटिगों में सनअतकारों के साथ मौजूद रहता था।
विजय माल्या के लंदन से आए बयान के अगले ही दिन तेरह सितम्बर को राहुल गांधी खुद मीडिया से रूबरू हुए उनके साथ पार्टी के राज्य सभा मेम्बर पीएल पुनिया भी मौजूद थे। राहुल ने कहा अरूण जेटली झूट बोल रहे हैं कि विजय माल्या ने सेण्ट्रल हाल में उनसे मिलने की कोशिश की थी लेकिन हमने माल्या को दो टूक कह दिया था कि अपने मामले में बैंकों से ही बात करें यह कहते हुए मैं आगे बढ गया था। पीएल पुनिया का कहना है कि उन्होने खुद दोनों को बैठ कर बाते करते हुए देखा था। दोनों के दरम्यान तकरीबन बीस मिनट तक बातचीत हुई। पुनिया ने कहा कि अगर उनकी बात का यकीन न हो तो पार्लियामेंट की सीसीटीवी फुटेज देखी जाए। मेरी बात गलत हुई तो मैं सियासत छोड़ दूंगा और अगर जेटली गलत हों तो उन्हें सियासत छोड़ देनी चाहिए। राहुल गांधी ने अरूण जेटली से यह भी सवाल किया कि अरूण जेटली ने अपनी तरफ से ही माल्या को भागने में मदद की या उन्हें नरेन्द्र मोदी की जानिब से फोन आया था। उन्होने कहा कि माल्या ने अरूण जेटली को बताया था कि वह लंदन जा रहा है। उसके खिलाफ रेड कार्नर नोटिस जारी था आखिर रेड कार्नर नोटिस को हल्का (डायलूट) करके दूसरा नोटिस मुल्क के इमिग्रेशन को किसने दिया जिसकी मदद से माल्या को भागने में मदद मिली। राहुल ने कहा कि उसके खिलाफ जिस किस्म का मामला था वह किसी ‘बडे़’ की मदद के बगैर भाग ही नहीं सकता था। उन्होने कहा कि अरूण जेटली वैसे तो बहुत बडे़ ब्लाग लिखा करते हैं लेकिन इस मामले पर दो-चार अल्फाज के अलावा कुछ भी नहीं बोल पा रहे हैं। वह बताए कि उनपर खामोश रहने के लिए किस का दबाव है?
भारतीय जनता पार्टी ने अरूण जेटली को बचाने मे जिस किस्म की अनाप-शनाप बाते कहीं और बौखलाहट मे प्रेस कांफ्रेंस करके पार्टी तर्जुमान संबित पात्रा ने बेसिर-पैर की बातें कीं उन्हें सुनकर जाहिर होता है कि इस मामले में अरूण जेटली ही नहीं पूरी बीजेपी बैकफुट पर है। संबित ने अस्ल सवालात का जवाब देने के बजाए यह कहना शुरू कर दिया कि किंगफिशर एयरलाइन्स तो नेहरू गांधी परिवार की ही थी। अपने इस भोडे इल्जाम में उन्होने कहा कि सोनिया गांधी राहुल गांधी समेत उनके कुन्बे के लोग जब भी कभी किंगफिशर एयरलाइन्स में सफर करते थे कोई मजीद पैसे लिए बगैर उन लोगों की सीटें अपग्रेड करके उन्हें फर्स्ट और एक्जीक्यूटिव क्लास में बिठाया जाता था। संबित के पास चूंकि कहने को कुछ नहीं है इसलिए इस किस्म की लफ्फाजी करने लगे। उन्होने यह भी कह दिया कि राहुल गांधी के लंदन दौरे के बाद ही विजय माल्या ने यह बयान क्यों दिया। संबित के पास इस सवाल का कोई जवाब नहीं था कि खुद उन्ही की पार्टी के बड़बोले राज्य सभा मेम्बर सुब्रामण्यम स्वामी ने भी गुजिश्ता बारह जून को ट्वीट करके कहा था कि माल्या देश नहीं छोड़ सकता था क्योंकि उसके खिलाफ लुक आउट नोटिस था। लंदन जाने से पहले वह दिल्ली आया, दिल्ली में एक बहुत ही असरदार शख्स से मिला जो शख्स उसके खिलाफ जारी लुक आउट नोटिस को तब्दील करा सकता था। ऐसा ही हुआ लुक आउट नोटिस तब्दील किया गया और उसका फायदा उठा कर विजय माल्या देश की आखों में धूल झोंक कर फरार हो गया। आखिर वह कौन शख्स था जिसने लुकआउट नोटिस को तब्दील करके विजय माल्या को एयरपोर्ट पर गिरफ्तार होने से बचाया।
अरूण जेटली ने इस सिलसिले में जो सफाई दी वह भी काफी टेक्नीकल है। उन्होने जोर देेेकर कहा कि विजय माल्या की कोशिशों के बावजूद उन्होने कभी उसे ‘अपने दफ्तर या घर पर मुलाकात का वक्त नहीं दिया। मैं सेण्ट्रल हाल से अपने आफिस की जानिब जा रहा था उस वक्त माल्या भागते हुए उनके पास आए कहने लगे कि वह कर्जों को सेटल करना चाहते हैं मैंने उनसे चलते-चलते कह दिया कि वह अपने बैंकों से बात करें। हमने उन्हें बात करने का भी मौका नहीं दिया। हालांकि उन्होने राज्य सभा मेम्बर होने का पूरा फायदा उठाने की कोशिश की।’ दूसरी तरफ उनकी मुलाकात के चश्मदीद रहे पीएल पुनिया ने कहा है कि पहले इन दोनों नेएक तरफ खडे़ होकर काफी देर तक बातें की फिर दोनों बेंच पर बैठ गए और तकरीबन बीस मिनट तक बातें करते रहे। जेटली ने बड़ी चालाकी के साथ यह तो कह दिया कि उन्होने माल्या को अपने घर या दफ्तर मे मिलने का वक्त नहीं दिया यह नहीं कहा कि सेण्ट्रल हाल में मुलाकात कर ली थी।