रायटर के सहाफियों को सजा जुटां से भी जालिम बन गई सूकी

रायटर के सहाफियों को सजा जुटां से भी जालिम बन गई सूकी

यंगून! लम्बी मुद्दत तक जेल में रहने का रिकार्ड कायम करने वाली आंग सान सूकी के म्यांमार (बर्मा) में अब इंसानी हुकूक (मानवाधिकारों) की खिलाफवर्जियों और म्यांमार पुलिस व फौज के जरिए किए जा रहे मजालिम के खिलाफ आवाज उठाने वाले किसी भी शख्स को न सिर्फ पकड़ कर जेलों में ठूंसा जा रहा है बल्कि हिरासत में उन्हें तरह-तरह की जिस्मानी और जेहनी अजीयतें (शारीरिक व मांसिक यातनाएं) देने का काम किया जा रहा है। सरकार के जुल्म का ताजा शिकार हुए हैं दुनिया की सबसे बड़ी खबर रसां एजेसी ‘रायटर’ के दो नुमाइदे क्थाव सोई ओ और वालोन। इन दोनों सहाफियों का गुनाह यह है कि इन्होने म्यांमार पुलिस और फौज के जरिए रोहिग्या मुसलमानों पर ढाए जा रहे मजालिम और उनके लिए खुसूसी तौर से बनाए गए अजीयतखानों (यातना केन्द्रो) में रोहिग्या मुसलमानों के साथ हो रही खौफनाक गैर इंसानी हरकतों की रिपोर्ट लिख दी थी। म्यांमार के अजीयत खानों में कैद रोहिंग्या मुसलमानों के हाथ ऊपर लगे लोहे के मजबूत पाइपों से बांध कर उन्हें पूरी तरह बरहना (नंगा) किया जाता है। उनके नंगे जिस्मों पर कोड़ों और चाकुओं से मार कर व काट कर खाल उधेड़ी जाती है फिर जख्मों पर पेट्रोल स्प्रे करके आग लगाई जाती है। यह तो एक सजा है ऐसी ही कई सजाएं उन्हें दी जाती हैं।
‘रायटर’ के लिए काम करने वाले दोनों सहाफी 28 साल के क्याव सोईयो और 32 साल के वालोन म्यांमार के ही शहरी हैं। वह मुसलमान नहीं हैं इन दोनों को पिछले साल बारह दिसम्बर को गिरफ्तार किया गया था तभी से इन पर नार्दर्न डिस्ट्रिक्ट जज की अदालत में आफीशियल सीक्रेट एक्ट के जुर्म में मुकदमा चल रहा था। तीन सितम्बर को इन दोनों को सात साल की सजा सुनाई गई। सजा सुनकर क्याव सोईओ की आंखों में आंसू आ गए फिर भी उन्होने कहा कि सरकार उन्हे जेल में डाल सकती है लेकिन दुनिया और म्यांमार के लोगों की आंखें और कान बंद नहीं कर सकती। वालोन ने कहा कि जेल उनके हौसले नही तोड़ सकती वह वापस आएगें और इंसानियत के लिए लडेगे। सोईओ के छोटे छोटे बच्चे हैं गिरफ्तारी के वक्त लोन की बीवी हामिला (गर्भवती) थी उनकी एक महीने की बेटी है।
यूनाइटेड नेशन्स, अमरीका, ब्रिटेन और फ्रांस समेत योरपियन यूनियन में शामिल तमाम मुल्कों ने दोनों सहाफियों को सजा दिए जाने की सख्त मजम्मत करते हुए म्यांमार सरकार से उन दोनों को फौरन रिहा करने के लिए कहा है। यूनाइटेड नेशन्स के इंसानी हुकूक के हाई कमिशनर माइकल ब्रेसलेट ने इन दोनों को सजा दिए जाने पर सख्त एतराज करते हुए कहा है कि इंसाफ के साथ न सिर्फ भद्दा मजाक किया गया है बल्कि इंसाफ की धज्जियां उड़ाई गई हैं। इस फैसले के जरिए म्यांमार के तमाम सहाफियो का मैसेज दिया गया है कि वह या तो सरकार के इशारे पर नाचने का काम करें या जेल जाने के लिए तैयार रहें। सजा सुनाए जाने के बाद दोनों को इंतेहाई खतरनाक मुजरिमों की तरह हथकड़ियों मे जकड़ कर ले जाया गया।
‘रायटर’ के दो सहाफियों वालोन और क्याव सोईओ को सात साल की सजा होने पर दुनिया भर में सबसे ज्यादा निशाने पर म्यांमार की हुकमरां आंग सान सू की हैं क्योकि एक जमाने में उन्हें इंसानी हुकूक के खिलाफ अलम बगावत उठाने वाली एक मजबूत आवाज के तौर पर दुनिया देखती थी। जुंटा हुकूमत मे तमामतर पाबंदियों के बावजूद आंग सान सूकी के साथ होने वाले मजालिम की खबरें दुनिया तक पहुचाने में ऐसे ही सहाफी थे जैसे कि मौजूदा हुकूमत की रोहिंग्या मुसलमानों पर ढाए जा रहे मजालिम को रायटर के सहाफी वालोन और क्याव सोईओ अपने पेशेवराना फरायज को अंजाम देते हुए म्यांमार हुकूमत की जानिबदारना कार्रवाइयों से दुनिया को बाखबर और रूशनास कराने का काम अपने को तमाम खतरों में डाल कर पूरी ईमानदारी से कर रहे थे। आंग सान सूकी म्यांमार हुकूमत वा लोन और क्याव सोईओ की रिपोर्टिग से हद दर्जा परेशान थी। उस वक्त से तो म्यांमार हुकूमत अपने को दबाव में महसूस करने लगी थी जब रायटर के सहाफियों ने रोहिंग्या मुसलमानों पर ढाए जाने वाले मजालिम की सुबूतों और गवाहियो पर मबनी वाक्यात की रिपोर्टिग करके कभी राइटर एक्टिविस्ट रहीं आंग सान सूकी के घिनौने चेहरे से पर्दा उठा दिया था।
उसी के बाद सरकार ने वालोन और क्याव सोईओ को फंसाने की साजिश रचने का काम शुरू कर दिया। गुजिश्ता बरस 12 दिसम्बर को जब म्यांमार पुलिस और फौज ने आफिशियल सीक्रेट एक्ट की खिलाफवर्जी के लिए यनगून के एक रेस्तरां से गिरफ्तार किया तो उनके पास हुकूमत के कुछ खुफिया दस्तावेज बरामद दिखाए गए। जबकि असलियत यह थी कि सरकारी कारिंदो ने दोनों सहाफियो को पकड़ने के लिए जो जाल बिछाया था वह उसमें फंस गए क्योकि जिन दस्तावेज की बरामदगी का उनपर इल्जाम लगा वह दस्तावेज चंद लम्हे पहलें ही उनके हाथ आए थे और खुफिया एजेंसियों ने उन्हें धर दबोचा था। गिरफ्तारी के बाद इन दोनो सहाफियो की समझ में आ गया कि अस्ल मामला क्या है। 12 दिसम्बर 2017 से तीन सितम्बर 2018 तक तकरीबन नौ महीने जेल में रखने के बाद डिस्ट्रिक्ट जज ने उन्हें सात साल की कैद की सजा सुना दी। उनपर यह इल्जाम है कि वह आफिशियली सीक्रेट एक्ट की दफा 3 आईसी की खिलाफवर्जी के मुरतकिब पाए गए। डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के फैसले के खिलाफ पहले रीजनल कोर्ट में फिर सुप्रीम कोर्ट मे अपील की जा सकती है।
वाजेह हो कि म्यांमार हुकूमत रोहिंग्या मुसलमानों को ‘स्टेटलेस’ शहरी करार दे चुकी है और उनपर इंसानियतसोज मजालिम का सिलसिला बरसों बरस से जारी है। म्यांमार हुकूमत की ज्यादतियों और जुल्म व जब्र की कार्रवाइयों से तंग आकर सात लाख से ज्यादा रोहिंग्या मुसलमान न सिर्फ बांग्लादेश में पनाह लिए हुए हैं। रोहिंग्या मुसलमानों ने दुनिया के दूसरे मुमालिक में भी पनाह ले रखी है। आलमी बिरादरी कभी-कभी इन जब्र व इस्तेब्दाद के शिकार लोगों के तयीं जबानी हमदर्दी का तो इजहार करती है मगर म्यांमार हुकूमत पर जिस तरह का दबाव बनाया जाना चाहिए अभी तक कुछ नहीं हुआ है। दुनिया की बेहिसी का फायदा उठाकर म्यांमार सरकार अपनी जाबिराना कार्रवाइयों को वुसअत देती जा रही है। इसी का नतीजा है रायटर के दो म्यांमारी सहाफियो को सात साल की सजा। लेकिन इस मामले ने अब तूल पकड़ लिया है और दुनिया भर की हुकूक तंजीमों के अलावा हुकूमतों ने भी सजा के खिलाफ शदीद रद्देअमल का इजहार किया है।
खबर रसां एजेसी ‘रायटर’ के एडीटर इन चीफ जे एडलर ने सजा का फैसला आने के बाद कहा ‘म्यांमार के लिए आज का दिन इंतेहाई अफसोसनाक दिन है वालोन और क्याव सोईओ और प्रेस हर जगह है। उन्होने कहा कि वालोन और क्याव सोईओ के साथ नाइंसाफी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और हम उन्हें राहत दिलाने के लिए आलमी फोरम पर अपनी बात को रखेगे।
सहाफियों की सजा पर पूरी दुनिया के राइटर एक्टिविस्टों समेत हुकूमतों के जो रद्देअमल आ रहे हैं वह तीन साल पहले म्यांमार की हुक्मरां बनी आंग सान सू की बची खुची साख को मिट्टी में मिलाने वाले हैं। अमरीका के डिप्लोमेट बिल रिचर्डसन जो अभी तक आंग सान सूकी के मोतमिद रहे कहा कि सूकी पूरी तरह बदल चुकी हैं क्योंकि जब उन्होने सहाफियों की तकलीफ और मुसीबतों को उनसे जिक्र किया तो उन्होने बड़ी हिकारत से उनकी बात को नजरअंदाज कर दिया। एक वक्त था जब सूकी आजाद प्रेस की वकालत करती थी और फारेन मीडिया की डार्लिग हुआ करती थीं और मीडिया उनमें नेल्सन मंडेला, दलाई लामा और मार्टिन लूथर की शबीह देखता था। प्रेस की आवाज दबा कर उन्होने अपनी इमेज को तबाह कर दिया है। प्रेस की आजादी को उनकी हुकूमत के दौरान कितनी बुरी तरह से कुचला गया है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 2017 में बीस सहाफियों पर मुकदमे चलाए गए।