नजीब का पता लगाने में सीबीआई भी नाकाम

नजीब का पता लगाने में सीबीआई भी नाकाम

मरियम सिद्दीकी
नई दिल्ली! जवाहरलाल नेहरू युनिवर्सिटी (जेएनयू) से लापता हुए तालिब इल्म नजीब अहमद के मामले में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करने से मुताल्लिक सीबीआई के बयान की नजीब की मां फातिमा नफीस ने मुखालिफत की है। दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान फातिमा ने इल्जाम लगाया कि सीबीआई ने न तो पूरी कोशिश की और न ही सही तरीके से मामले की जांच की। हाई कोर्ट ने दोनों फरीकैन को सुनने के बाद मामले में अपना फैसला महफूज कर लिया।
अजीब बात है कि दिल्ली पुलिस अपने दफ्तर में बैठ कर ही यह पता लगा लेती है कि कश्मीर से कन्याकुमारी तक और गुवाहाटी से महाराष्ट्र तक किस शहर और किस कमरे में बैठ कर कुछ मुस्लिम नौजवान देश के खिलाफ क्या-क्या साजिशें कर रहे हैं लेकिन वही पुलिस और सीबीआई दोनों मिल कर यह पता नहीं लगा पाई कि जेएनयू से गायब किए गए नजीब अहमद को जमीन निगल गई या आसमान। नजीब की वालिदा ने शायद ठीक ही कहा है नजीब को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के गुण्डों ने कत्ल करके उसकी लाश गायब कर दी है और मोदी सरकार में पुलिस या सीबीआई किसी की भी इतनी हिम्मत नहीं है कि वह नजीब के कातिलों पर हाथ डाल सके। यह शायद पहला ऐसा मामला है जिसमें जांच करने वाली एजेसी ने मुल्जिमान को हिरासत में लेकर पूछगछ तक नहीं की। वजह यह है कि एजेसी को पूरी साजिश अच्छी तरह मालूम है।
फातिमा ने नजीब अहमद की तलाश की मांग को लेकर हाई कोर्ट में अपील दायर की थी। उन्होंने इल्जाम लगाया कि जब मामला अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के गुण्डों से जुड़ा हो तो सीबीआई से गैरजानिबदार जांच की उम्मीद नहीं की जा सकती। यह सियासी मामला है और शक था कि मोदी की मरकजी सरकार मुल्जिमान को बचाने का काम करेगी, जोकि सही साबित हुआ। उन्होने इल्जाम लगाया कि सीबीआइ ने सरकारी दबाव के सामने घुटने टेक दिए और सही तरीके से जांच नहीं की। सवाल किया कि आखिर सीबीआई ने मुल्जिमान को हिरासत में लेकर जांच क्यों नहीं की।
सीबीआई की तरफ से वकील निखिल गोयल ने कहा कि जांच पूरी कर ली गई है और जांच एजेंसी क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करना चाहती है। हम निचली अदालत के बजाय सुप्रीम कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करना चाहते हैं। कोर्ट अपील को डिस्पोज करेगी। इसके बाद वह क्लोजर रिपोर्ट मजिस्ट्रेट के सामने पेश करेंगे जहां फातिमा बीबी एक अपील फिर दाखिल कर सकती हैं।
नजीब की मां के वकील कोलिन गोंसाल्वे ने दलील दी कि सीबीआइ ने किसी भी मुल्जिम को हिरासत में लेकर पूछगछ नहीं की। इस पर सीबीआई के वकील ने कहा कि यह जांच एजेंसी का फैसला है कि वह किसी शख्स को गिरफ्तार करे या न करे। यह अंदाजा ही लगाया जा सकता है कि मामला हाईप्रोफाइल है। यह अगवा या कत्ल का केस है। जांच एजेंसी ने मामले में चश्मदीद व वार्डन का बयान भी इंटरिम रिपोर्ट में दिया है।
नजीब की वालिदा ने मामले की आजादाना जांच के लिए स्पेशल इंवेस्टीगेशन टीम (एसआइटी) बनाने का मतालबा किया। इस पर बेंच ने उनके वकील से पूछा कि आप तहरीर देकर बताएं कि दीगर मामलात में अदालत के जरिए बनाई गई ऐसी कमेटी का कानूनी स्टेटस क्या है। हम ऐसे ही एसआइटी बनाने का आर्डर नहीं देंगे।
जेएनयू के एमएससी बायोटेक्नोलाजी के तालिब इल्म नजीब अहमद का 14 अक्टूबर 2016 को माही मांडवी हास्टल में कुछ दूसरे तलबा के साथ झगड़ा हुआ था और 15 अक्टूबर से नजीब लापता है। जांच में कुछ सामने नहीं आने पर नजीब की मां हाई कोर्ट पहुंची थीं। कोर्ट के आर्डर पर 600 पुलिस वालों की टीम ने जेएनयू कैम्पस के हास्टल से लेकर जंगल इलाके तक में तलाशी ली थी। छः महीने तक नजीब का कोई सुराग न मिलने पर उनके घर वालों की मांग पर अदालत ने 16 मई 2017 को जांच सीबीआइ को सौंप दी थी।