सवर्णों के भारत बंद से घबराई बीजेपी

सवर्णों के भारत बंद से घबराई बीजेपी

नुमाइंदा खुसूसी
नई दिल्ली! मरकज की मोदी सरकार के जरिए एससी-एसटी एक्ट में तरमीम (संशोधन) कर उसे उसकी असल शक्ल में बहाल करने की मुखालिफत में सवर्ण तबके की तंजीमों ने 6 सितंबर को भारत बंद किया है। मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, महाराष्ट्र समेत कई प्रदेशों में बंद को लेकर मुजाहिरीन सड़क पर उतरे। देश के कई इलाकों से सवर्ण तंजीमों के भारत बंद के मद्देनजर एहतियातन कदम उठाए गए। मध्य प्रदेश के ग्वालियर में जहां स्कूलों-कालेजों को बंद रखे गए। वहीं मध्य प्रदेश के 10 जिलों में एहतियात के तौर पर दफा 144 लगा दी गई थी। दफा 144 भारत बंद के अगले दिन यानी 7 सितंबर तक लगी रही। इसके अलावा, मध्य प्रदेश में कई जगहों पर पेट्रोल पंप को भी बंद रखने का फैसला किया गया था। गौरतलब है कि पिछली बार 2 अप्रैल को भारत बंद एससी/एसटी एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ दलित तंजीमों ने बुलाया था तब सबसे ज्यादा हिंसा मध्य प्रदेश के ग्वालियर और चंबल में हुई थी। इस वजह से इस बार मध्य प्रदेश इंतजामिया भारत बंद को देखते हुए पूरी तरह अलर्ट थी। हालांकि, दलितों के बंद के खिलाफ उस वक्त भी कुछ दिन बाद ही सवर्णों ने बंद की अपील की थी। सवर्णो के बंद का सबसे ज्यादा असर मध्य प्रदेश और बिहार में नजर आया। बिहार में तो मधेपुरा से लोक सभा मेम्बर और जनअधिकार पार्टी के मुखिया पप्पू यादव पर बंद के दौरान गुण्डों ने हमला करके मारा-पीटा जबकि पप्पू यादव को वाई कटेगरी की सिक्योरिटी मिली हुई है। पिटाई की बात पप्पू यादव ने रोते-रोते बताई। सवर्णों के इस बंद ने बीजेपी लीडरों के माथे पर पसीना ला दिया।
सवर्णो के जरिए किए गए बंद के दौरान मध्य प्रदेश मंडियों और बाजारों में आधे दिन तक कारोबार ठप रहा। इससे करोड़ों रुपये के कारोबार पर असर पड़ा। अहिल्या चैम्बर्स आफ कामर्स एन्ड इंडस्ट्रीज के चेयरमैन रमेश खंडेलवाल ने बताया कि एक्ट के खिलाफ आधे दिन तक मकामी मंडियां और बाजार बंद रखने की अपील को करीब 110 कारोबारी तंजीमों ने अपनी हिमायत दी थी। यही नहीं भोपाल में वजीर-ए-आला शिवराज सिंह चौहान के बेटे कार्तिकेय चौहान ने अपनी दुकान बंद करके बंद की हिमायत की। इस बंद में सवर्ण समाज, करणी सेना, स्पाक्स, सवर्ण व दीगर सवर्ण तंजीमों ने हिस्सा लिया था।
बिहार के गया, पटना, भोजपुर, दरभंगा समेत मुख्तलिफ इलाकों में सवर्ण सड़क पर उतरे और एक्ट के खिलाफ नारेबाजी की। पुलिस के मुताबिक प्रदेश के मुख्तलिफ हिस्सों में एक रोजा ‘भारत बंद’ के दौरान मुजाहिरीन सुबह से ही सड़कों पर उतर गए और सड़क जाम कर दिया। सड़कों पर मुजाहिरीन ने टायर जलाए और मरकजी सरकार के खिलाफ जमकर नारे लगाए गए।
सवर्ण सेना के लोग दरभंगा, आरा और राजेंद्र नगर टर्मिनल पर रेल टै्रक रोका जिससे ट्रेनों के आवागमन मे ंकुछ वक्त तक रूकावट रही। पटना के मोकामा में भी बंद हामियों के जरिए बेगूसराय में सवर्णों ने जिले के कई सड़कों को भी जाम कर दिया। यह लोग सरकार मुखालिफ नारेबाजी कर रहे थे। वैशाली के लालगंज में नालंदा, भोजपुर, गया, सारण जिले में भी बंद हामी सडक पर उतरे और सडको पर जाम कर मुजाहिरा किया। बिहार में मधेपुरा के लोक सभा मेम्बर पप्पू यादव की सवर्ण गुण्डों ने पिटाई कर दी।
उत्तर प्रदेश के सिर्फ पूर्वाचल में भारत बंद का असर देखने को मिला। मध्य प्रदेश में बंद का सबसे ज्यादा असर देखने को मिला। स्कूल कालेज और पेट्रोल पंप समेत कई इदारे बंद कर दिए गए थे। शहडोल मे पुलिस ने मुजाहिरीन पर लाठी चार्ज किया। जबकि रीवां से बीजेपी के मेम्बर असम्बली रह चुके लक्ष्मण तिवारी ने एससी/एसटी एक्ट में हुए तरमीम के खिलाफ बीजेपी से इस्तीफा देने का एलान कर दिया टीकमगढ से बीजेपी युवा मोर्चा के चार ओहदेदारान ने अपने ओहदे से इस्तीफा दे दिया। उज्जैन मे करणी सेना ने बीजेपी एमपी चितांमणि मालवीय का पुतला जलाया। पुलिस ने एक्ट की मुखालिफत करने पर बीजेपी मेम्बर असम्बली नरेन्द्र कुशवाहा के बेटे पुष्पेप्द्र कुशवाहा समेत एक दर्जन लोगों को गिरफ्तार कर लिया। खुद वजीर-ए-आला शिवराज सिहं चौहान के बेटे कार्तिकेय ने अपनी फलावर शाप बंद करके बंद की हिमायत का एलान किया। स्पाक्स तंजीम के वर्कर काली शर्ट पहन कर निकले जबकि करणी सेना ने ब्राहमण समाज के साथ मिलकर शिवराज चौहान सरकार का चूडियां दी।
मध्य प्रदेश के ग्वालियर में भारत बंद को देखते हुए स्कूल-कालेजों को बंद रखने का फैसला लिया गया था। मध्य प्रदेश के पुलिस आईजी (इंटेलीजेंस) मकरंद देउस्कर ने बताया, ‘भारत बंद के मद्देनजर प्रदेश के सभी 51 जिलों के पुलिस कप्तानों को मुस्तैद रहने की हिदायत दी गई थी शिवपुरी कलेक्टर शिल्पा गुप्ता, भिंड कलेक्टर आशीष कुमार गुप्ता और मुरैना कलेक्टर भरत यादव ने बताया, ‘दफा 144 के तहत लोगों के जानमाल की हिफाजत व अम्न बनाए रखने के लिए सात सितम्बर तक इसे लागू किया गया था। पिछले काफी दिनों से इस कानून के खिलाफ मध्यप्रदेश के कई मकामात पर मुखालिफत व मुजाहिरे चल रहे हैं। वजीर-ए-आला शिवराज सिंह चौहान समेत कई लीडरान व वजीरों को काले झंडे भी दिखाये गए।
एससी/एसटी तरमीम बिल 2018 के जरिए असल कानून में दफा 18ए जोड़ी जाएगी। इसके जरिए पुराने कानून को बहाल कर दिया जाएगा। इस तरीके से सुप्रीम कोर्ट के जरिए किए गए जाब्ते रद्द हो जाएंगें। मामले में केस दर्ज होते ही गिरफ्तारी का जाब्ता है। इसके अलावा मुल्जिम को पेशगी जमानत भी नहीं मिल सकेगी। मुल्जिम को हाईकोर्ट से ही जमानत मिल सकेगी। मामले में जांच इंस्पेक्टर रैंक के पुलिस अफसर करेंगे। जात बताने वाले लफ्जों के इस्तेमाल से मुताल्लिक शिकायत पर फौरन मामला दर्ज होगा। एससी/एसटी मामलों की सुनवाई सिर्फ स्पेशल कोर्ट में होगी। सरकारी मुलाजिम के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दायर करने से पहले जांच एजेंसी को अथारिटी से इजाजत नहीं लेनी होगी।
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने एससी/एसटी एक्ट में बदलाव करते हुए कहा था कि मामलों में फौरन गिरफ्तारी नहीं की जाएगी। कोर्ट ने कहा था कि शिकायत मिलने पर फौरन मुकदमा भी दर्ज नहीं किया जाएगा। अदालत ने कहा था कि शिकायत मिलने के बाद डीएसपी सतह के पुलिस अफसर के जरिए शुरुआती जांच की जाएगी और जांच किसी भी सूरत में 7 दिन से ज्यादा वक्त तक नहीं होगी। डीएसपी शुरुआती जांच कर नतीजा निकालेंगे कि शिकायत के मुताबिक क्या कोई मामला बनता है या फिर किसी तरीके से झूठे इल्जाम लगाकर फंसाया जा रहा है? सुप्रीम कोर्ट ने इस एक्ट के बड़े पैमाने पर गलत इस्तेमाल की बात को मानते हुए कहा था कि इस मामले में सरकारी मुलाजिम पेशगी जमानत के लिए दरख्वास्त दे सकते हैं। मगर मोदी सरकार ने तरमीमी बिल लाकर सुप्रीम कोर्ट के जाब्तों को रद्द कर दिया। इसी बिल के खिलाफ सवर्णो ने भारत बंद किया था।
एससी/एसटी के लोगों पर होने वाले मजालिम और उनके साथ होनेवाले भेदभाव को रोकने के मकसद से एससी/एसटी मजालिम रोकथाम एक्ट 1989 बनाया गया था। जम्मू कश्मीर को छोड़कर पूरे देश में इस एक्ट को लागू किया गया। इसके तहत इन लोगों को समाज में बराबरी का दर्जा दिलाने के लिए कई जाब्ते किए गए और इनकी मदद के लिए हर मुमकिन कोशिश की गई। बीजेपी सवर्णो की नाराजगी को दूर करने की कोशिशों में जुट गई है। बीजेपी सदर अमित शाह ने सीनियर वजीरों और पार्टी लीडरान के साथ एससी/एसटी एक्ट में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलटने के बाद बने हालात पर तफसील से चर्चा की है। पार्टी आफिशियल तौर से इस हस्सास मुद्दे पर तब्सिरा करने को तैयार नहीं है, लेकिन पार्टी लीडर इस मुद्दे को तूल देने के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार बता रहे हैं। बताया जा रहा है कि दिल्ली में होने वाली बीजेपी की नेशनल एक्जीक्यूटिव की मीटिंग में इस मुद्दे पर चर्चा हो सकती है।