केरल सैलाब पर भी घिनौनी सियासत

केरल सैलाब पर भी घिनौनी सियासत

सौ सालों में सबसे भयानक सैलाब ने केरल में मचा दी ऐसी तबाही कि उबरने में सालों लगेंगे

“सौ सालों में केरल में आई सबसे बड़ी तबाही से निपटने के लिए मोदी सरकार छः सौ करोड़ रूपए से ज्यादा की माली मदद देने को तैयार नहीं है। यूनाइटेड अरब अमीरात ने 700 करोड़ और कतर ने 500 करोड़ की मदद की पेशकश की तो भारत सरकार यह नहीं तय कर सकी कि यह रकम ली जाए कि नहीं। केरल के एक डाक्टर शमशेर और उनकी बीवी डाक्टर शबीना ने पचास करोड़ देने का एलान किया।”

“आरएसएस और उससे जुडे़ कई लोगों ने केरल की तबाही में भी खेली घिनौनी सियासत। पार्टी मीडिया सेल के सुरेश कोचाट्टिल ने लोगों से अपील की कि चीफ मिनिस्टर फण्ड के बजाए आरएसएस के सेवा भारती के अकाउण्ट में मदद का पैसा भेजें। चीफ मिनिस्टर फण्ड में भेजा गया पैसा मुसलमानों की मदद में लग जाएगा। यह ठीक नहीं है।”

“फौज और एनडीआरएफ के जवानों ने जान की परवा किए बगैर लोगों को बचाकर साबित कर दिया कि सिर्फ सरहद ही नहीं किसी भी कुदरती आफत आने के वक्त वह ही सही मायनों में देश के काम आते हैं। कोचीन के मछुआरों ने लोगों को बचाने के एवज में सरकार से मिली रकम लेने से इंकार करते हुए कहा कि इंसानियत का काम करने की कोई मजदूरी या कीमत नहीं होती।”

हिसाम सिद्दीकी
नई दिल्ली! गुजिश्ता सौ सालों में केरल में सबसे भयानक सैलाब आया, लाखों लोग बेघर होकर रिलीफ कैम्पों में पहुंच गए, लाखों मवेशी मर गए पूरा मुल्क ही नहीं दुनिया भर में रहने वाले हिन्दुस्तानियों ने केरल की मदद में हाथ बढा दिए। देश के फौजी जवानों ने दिन रात काम करके एक बार फिर साबित कर दिया कि वह अपनी जान पर खेल कर मुल्क और मुल्क के लोगों पर पड़ने वाली किसी भी परेशानी से लोगों को बचाने में अपना सबकुछ कुर्बान कर सकते हैं। खबर लिखे जाने तक सैलाब का पानी शहरों, गांवों और दीगर आबादियों से तेजी के साथ उतरने लगा था लेकिन पानी उतरने के साथ ही केरल के अवाम और सरकार दोनां इस खौफ में मुब्तला दिख रहे थे कि अब पानी उतरने के बाद वबाई अमराज (महामारी) का खतरनाक हमला होगा। उससे कैसे निपटा जाए। इस भयानक आफत के दौरान भी फिरकापरस्त ताकतें खुसूसन आरएसएस और बीजेपी से मुताल्लिक तंजीमें और अफराद अपनी घिनौनी और शर्मनाक हरकतों में मुलव्विस दिखे। सबसे पहले तो वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी ने ही केरल के साथ उस वक्त भोण्डा मजाक किया जब सैलाब से मुतास्सिरा इलाकों का हवाई मुआइना करने के बाद उन्होंने इतनी संगीन सूरतेहाल से निपटने के लिए केरल सरकार को सिर्फ पांच सौ करोड़ की मरकजी माली इमदाद देने का एलान किया। उनसे पहले होम मिनिस्टर राजनाथ सिंह ने भी केरल का हवाई दौरा करने के बाद सौ करोड़ रूपए की मरकजी इमदाद का एलान किया था। केरल में हुए पच्चीस से तीस हजार करोड़ के नुक्सान की भरपाई के लिए मोदी सरकार ने सिर्फ छः सौ करोड़ की मदद देना ही मुनासिब समझा। मोदी के दौरे के बाद बीजेपी और आरएसएस से जुडे़ लोगों ने जिस बेशर्मी का मजाहिरा किया उससे पूरे मुल्क का सर शर्म से झुक गया। आरएसएस के थिंक टैंक कहे जाने वाले चार्टर्ड आकउण्टेट एस गुरू मूर्ति ने अट्ठारह अगस्त को कह दिया कि सुप्रीम कोर्ट ने सबरी माला मंदिर में ख्वातीन के दाखिले का आर्डर कर दिया था इसलिए भगवान अय्यपन की नाराजगी की वजह से केरल पर यह आफत सैलाब की शक्ल में आई है। आरएसएस के मकामी लोगों ने प्रोपगण्डा शुरू कर दिया कि केरल में गाय का गोश्त खाया जाता है इसलिए भगवान ने नाराज होकर चार करोड़ आबादी में से तीन करोड़ को सैलाब में डुबो दिया। खुद को बीजेपी मीडिया और आईटी सेल का ओहदेदार बताने वाले सुरेश कोचाट्टिल ने ट्वीट करके लोगों से अपील की कि वह केरल की मदद में जो भी पैसा या सामान दे रहे हैं वह चीफ मिनिस्टर फण्ड में भेजने के बजाए आरएसएस की तंजीम ‘सेवा भारती’ को भेजें। इस बेशर्म शख्स ने अपनी अपील में कहा कि अगर चीफ मिनिस्टर फण्ड में पैसा गया तो उसका ज्यादा बड़ा हिस्सा मुसलमानों के पास चला जाएगा। ओमान के लूलू सेण्टर में मुसलमानों के पैसों पर पलने वाले एक राहुल चेक पलामट्टू नाम के सांप ने तो बेशर्मी की तमाम हदें तोड़ दी। उसने सोशल मीडिया पर पोस्ट डाल दी कि क्या राहत इमदादी सामान के कण्डोम भी भेज दूं। यूनाइटेड अरब अमीरात की जानिब से सात सौ (700) करोड़ की मदद देने का एलान किया गया तो सरकारी बाबू से रिटायर होकर मोदी सरकार में वजीर बनने वाले अल्फान्ज ने कह दिया कि हमारी सरकार इस पर गौर करेगी कि विदेशी मदद लेनी भी चाहिए या नही। दुबई में रहकर केरल के यूसुफ अली ने चौदह करोड़ पचास लाख (14.50 करोड़) रूपए की माली इमदाद दी और कहा कि यूनाइटेड अरब अमीरात में रह कर केरल के जो लोग तिजारत करते है या सनअतकार (उद्योगपति) हैं उनकी एक कमेटी बनाकर वह और भी ज्यादा बड़ी रकम इकट्ठा करने की कोशिश में लगे हुए हैं। दुबई के अमीर शेख मोहम्मद ने कहा कि उनकी सरकार डेढ हजार करोड़ तक की मदद करेगी। ओमान सरकार ने भी मोदी सरकार के बराबर ही पांच सौ करोड़ की मदद की पेशकश की। तेलंगाना सरकार ने पच्चीस करोड़ देने का एलान किया।
सैलाब जैसी कुदरती आफत के वक्त भी वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी ने केरल के साथ जो रवैया अख्तियार किया उसपर उंगलियां उठनी लाजमी है। केरल की चार करोड़ में से तीन करोड़ से ज्यादा आबादी इस सैलाब का शिकार हुई है मोदी की मरकजी सरकार ने सिर्फ छः सौ करोड़ की मदद दी मतलब यह कि सैलाब का शिकार हुए एक शख्स को एक सौ साठ से एक सौ सत्तर रूपए। इतने में तो तीन दिनों के खाने का भी इंतजाम नहीं हो सकता है। स्वदेशी के नाम पर पूरे देश को दोनों हाथों से लूटने वाले योग व्यापारी रामदेव ने अपनी पतंजलि इण्डस्ट्री की जानिब से सिर्फ दो करोड़ देने का एलान किया। फिल्म अदाकार शाहरूख खान ने पांच करोड़ इक्कीस लाख दिए मुंबई फिल्म इण्डस्ट्री से अक्षय कुमार समेत बड़ी तादाद में अदाकारों और अदाकाराओं ने भी खुले दिल और खुले हाथों से केरल की मदद करने का काम किया। हैदराबाद से लोक सभा मेम्बर असदउद्दीन ओवैसी ने दस लाख रूपए का चेक चीफ मिनिस्टर फण्ड में दिया और दस लाख की ही दवाएं भी भेजीं। मोदी की करीबी कम्पनी पे-टीएम ने तो सिर्फ दस हजार का ही चेक दिया।
एस गुरूमूर्ति को चन्द दिन पहले ही नरेन्द्र मोदी ने रिजर्व बैंक आफ इंडिया के बोर्ड में शामिल किया है, आरएसएस में वह बहुत काबिल समझे जाते हैं। अट्ठारह अगस्त को उन्होने ट्वीट किया कि सुप्रीम कोर्ट के जज को इस बात पर भी गौर करना चाहिए कि उन्होने गुजिश्ता दिनों भगवान अय्यपन के खिलाफ जो फैसला दिया उसका सबरीमाला में आई सैलाब की तबाही से क्या कोई ताल्लुक है? याद रहे कि सुप्रीम कोर्ट ने सबरी माला मंदिर में औरतों के दाखिले पर लगी पाबंदी हटाने का फैसला दिया था। गुरूमूर्ति के इस ट्वीट को केरल की बीजेपी और आरएसएस ने हाथों हाथ लिया साथ ही यह प्रोपगण्डा भी शुरू कर दिया कि केरल में गाय का गोश्त खाया जाता है इसलिए भगवान ने गुस्से में केरल को सैलाब से तबाह कर दिया। इन बदअक्ल के अंधों से कौन पूछे कि अगर गाय का गोश्त खाने की सजा भगवान देता तो गोवा और बंगाल को तो वह समन्दर में ही डुबो देता क्योंकि इन दोनों प्रदेशों में सबसे ज्यादा गाय का गोश्त खाया जाता है।
इन फिरकापरस्तों के गिरने का आलम यह है कि पहले तो इन लोगों ने सालों पहले 2012 की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल करके झूटे दावे किए कि आरएसएस वायलेंटियर्स दिन-रात मेहनत करके सैलाब से मुतास्सिरा लोगों की मदद कर रहे हैं। बीजेपी मीडिया और आईटी सेल के लिए काम करने वाले सुरेश कोचट्टिल ने ट्वीट करके केरल को मदद करने वालों से कहा कि वह लोग मदद में दी जाने वाली रकम चीफ मिनिस्टर रिलीफ फण्ड में भेजने के बजाए आरएसएस की सेवा भारती के खाते में भेजें क्योंकि चीफ मिनिस्टर्स फण्ड में भेजी गई रकम मुसलमानों को मिल जाएगी। सुरेश मलियाली हैं वह केरल का रहने वाला है अब वह दिल्ली और सिंगापुर में रहता है। उसकी इस हरकत पर मलियाली अखबारात और मकामी टीवी चैनलों ने उसके इस बयान के लिए उसकी जम कर मजम्मत की। सुरेश जैसा ही केरल का रहने वाला एक और घटिया शख्स राहुल चेरू पलायट्टू ओमान में रहकर लू लू सेण्टर में कैशियर का काम करता था। उसने केरल में सैलाब का शिकार लोगों का मजाक उड़ाते हुए बाकायदा सोशल मीडिया पर एक पोस्ट वायरल करके पूछा कि क्या रिलीफ के सामान के साथ कण्डोम भी भेज दूं। उसके इस पोस्ट के सामने आते ही उसे नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया। नौकरी गई तो वह बुजदिल रोने लगा और बोला कि उसने तो शराब के नशे में यह पोस्ट डाल दी थी अब वह अपनी गलती के लिए माफी मांगता है।
आरएसएस ने केरल में जान पर खेलकर लोगों को बचाने में लगे फौजी जवानों को भी बदनाम करने की कोशिश का नतीजा यह कि आर्मी को एक बयान जारी करना पड़ा कि वह लोग अपना काम कर रहे हैं उन्हें किसी किस्म की कोई दिक्कत नहीं है। हर बार की तरह केरल में भी हिन्दुस्तानी फौज ने साबित किया कि वह सिर्फ सरहद पर रहकर ही मुल्क की हिफाजत नहीं करती, मुल्क के अंदर आने वाली किसी भी कुदरती आफत के दौरान लोगों की हिफाजत करने में अपनी जान की बाजी लगा देती है। लोगों की मदद करने में उसके सामने कभी हिन्दू-मुस्लिम जैसा सवाल नहीं रहता है। उसके सामने सिर्फ मुल्क और मुल्क के लोग होते हैं। फौजियों के अलावा कोचीन की मछुआरा बिरादरी ने भी जान पर खेलकर लोगों की मदद की और सैलाब में फंसे लोगों को निकाला। इनमें तकरीबन सभी मुसलमान हैं। इनकी मेहनत और काम से खुश होकर केरल हुकूमत ने सभी को तीन-तीन हजार रूपए देने का एलान किया तो इन लोगों ने यह पैसा लेने से मना कर दिया। मोहम्मद सिद्दीक, फैसल और समीर वगैरह ने कहा कि उन्होने जो कुछ किया वह अल्लाह का बताया रास्ता है। उन्होने इंसानियत की खिदमत की है। इस खिदमत के लिए तीन हजार तीन लाख हो या तीन करोड़ उन्हें पैसे नहीं चाहिए। हां अगर सरकार चाहे तो उनकी कश्तियों का जो नुक्सान हुआ है उसकी मरम्मत करा दे। खुदाई खिदमतगार तंजीम के आल इंडिया सदर इनाम उल हक और केरल प्रदेश के सदर जयेश कुमार अपनी टीम लेकर दिन-रात लोगों की मदद में लगे रहे और कभी भी यह नहीं चाहा कि उनको अखबारों में पब्लिसिटी मिले। फौज के सिपाहियों ने तो इस हद तक काम किया है कि जवानों ने उल्टे लेटकर अपनी पीठ का जीना बना दिया जिनपर चढकर लोग सैलाब से निकले। उन जवानों की तारीफ करने के बजाए आरएसएस ने यह प्रोपगण्डा कर दिया कि केरल की सीपीएम सरकार की मर्जी के खिलाफ मोदी ने अपनी फौज को भेजा मतलब यह कि आरएसएस की नजर में देश की फौज मोदी की जागीर है।
केरल ने इससे पहले इतनी बड़ी तबाही पिछले सौ साल में नहीं देखी थी खबर लिखे जाने तक मरने वालों की तादाद सरकारी तौर पर तकरीबन चार सौ थी लेकिन इस बात का अंदेशा जाहिर किया जा रहा था कि पूरी तरह पानी उतरने के बाद जब राहत और इमदादी टीमें एक-एक गांव पहुचेगी तो शायद मरने वालों की तादाद 500 से ज्यादा हो जाएगी। डेढ हजार से ज्यादा जवान फौज और एनडीआरएफ टीम के काम में लगे थे। सबसे ज्यादा नुक्सान एरूनाकुलम और कोचीन इलाके में बताया गया जहां सवा लाख से ज्यादा लोग सैलाब का शिकार हुए खबर लिखे जाने तक सैलाब में फंसे पांच लाख से ज्यादा लोगों को निकाला जा चुका था। यह सब अलग-अलग जगहों में बने रिलीफ कैम्पों में रखे गए। केरल सरकार के मुताबिक तकरीबन 95 हजार किलोमीटर सड़कें टूट गई जिनकी मरम्मत पर भारी खर्च आएगा। इसलिए सरकार ने मरकज की मोदी सरकार से दो हजार छः सौ (2600) करोड़ की माली इमदाद मांगी लेकिन नरेन्द्र मोदी छः सौ करोड़ से ज्यादा देने को तैयार नहीं हैं।
यूनाइटेड अरब अमीरात ने 700 करोड़ की मदद फौरन देने की पेशकश की और एलान किया कि मदद की यह रकम 1500 करोड़ तक जा सकती है। इसी तरह कतर के हुक्मरां अल तमीमी ने भी 500 करोड़ की मदद का एलान किया। दोनों का कहना था कि उन दोनों के मुल्कों की तामीर (निर्माण) करने में केरल के लोगों का शुरू से ही काबिले जिक्र तआवुन (उल्लेखनीय योगदान) रहा है। अब अगर केरल पर मुसीबत आई है तो हमारी भी अखलाकी (नैतिक) जिम्मेदारी है कि हम आगे बढकर उनकी मदद करें। खबर लिखे जाने तक मोदी सरकार यह नहीं तय कर पाई थी कि कतर और यूनाइटेड अरब अमीरात की मदद ली जानी चाहिए कि नहीं। मोदी के वजीर कन्नाथनम जोसेफ अल्फांस ने इस मदद को भी हिन्दू-मुस्लिम में तकसीम करके देखा और कहा कि उनकी सकार इस बात पर गौर करेगी कि इन मुल्कों की इमदाद ली भी जानी चाहिए कि नहीं। मतलब यह कि खुद मोदी हुकूमत मदद नहीं करेगी और अगर कोई दूसरा मुल्क मदद करे तो उसमें अडंगे डालेगी। वजह सिर्फ इतनी है कि केरल के लोग बीजेपी को वोट नहीं देते, इसलिए बीजेपी आज तक वहां से लोक सभा की एक सीट भी नहीं जीत पाई है।