अजीम क्रिकेटर थे अजीत वाडेकर

अजीम क्रिकेटर थे अजीत वाडेकर

 

मो. सैफुल इस्लाम

इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज में भारत को पहली जीत दिलाने वाले साबिक क्रिकेट कप्तान अजीत वाडेकर का लंबी बीमारी के बाद मुंबई में पिछले दिनों इंतकाल हो गया। वह 77 साल के थे। उनके परिवार में बीवी रेखा के अलावा दो बेटे और एक बेटी है। वाडेकर ने साउथ मुंबई के जसलोक अस्पताल में आखिरी सांस ली। वजीर-ए-आजम नरेंद्र मोदी ने वाडेकर को अजीम बल्लेबाज, शानदार कप्तान और बाअसर क्रिकेट एडमिनिस्ट्रेटर बताते हुए उनके इंतकाल पर अफसोस जताया है। नरेन्द्र मोदी ने ट्वीट करके कहा, ‘अजित वाडेकर को भारतीय क्रिकेट में उनके तआवुन के लिए याद किया जाएगा। अजीम बल्लेबाज और शानदार कप्तान जिन्होंने हमारी टीम को क्रिकेट के इतिहास की कुछ सबसे यादगार जीत दिलाई। उनके जाने का दुख है। वाडेकर की गिनती भारत के कामयाब कप्तानों में होती है। वह बाएं हाथ के बल्लेबाज व बेहतरीन फील्डर थे। हिन्दुस्तानी टीम के कोच का ओहदा भी उन्होंने संभाला।

अजीत वाडेकर का जन्म 1 अप्रैल 1941 को बंबई (अब मुंबई) में हुआ। वह बाएं हाथ के जारेह बल्लेबाज होने के अलावा बेहतरीन फील्डर भी थे।  वाडेकर का इंटरनेशनल कैरियर आठ साल का रहा। वह भारतीय क्रिकेट टीम के वाहिद ऐसे कप्तान थे, जिन्होंने लगातार तीन सीरीज में टीम को जीत दिलाई, इनमें इंग्लैंड और वेस्टइंडीज की धरती पर भारत की जीत शामिल है। अजीत लक्ष्मण वाडेकर ने  37 टेस्ट मैच खेलकर 31.07 की औसत से 2113 रन बनाए। अपनी वाहिद सेंचुरी उन्होंने 1967-68 में न्यूजीलैंड के खिलाफ (143 रन) लगाई थी। वाडेकर अपने टेस्ट कैरियर के दौरान चार बार 90 या ज्यादा रन बनाकर आउट हुए। अजीत भारतीय वनडे क्रिकेट टीम के पहले कप्तान थे। हालांकि उनका वनडे इंटरनेशनल कैरियर सिर्फ दो मैच का ही रहा। दो वनडे मैचों में उन्होंने 36.50 के औसत से 73 रन बनाए जिसमें 67 रन का सबसे बड़ा स्कोर शामिल है। वाडेकर 1990 की दहाई में मोहम्मद अजहरुद्दीन की कप्तानी के दौरान भारतीय टीम के मैनेजर कम कोच भी रहे। अजहर और वाडेकर की जुगलबंदी में भारत ने टेस्ट क्रिकेट में कई शानदार जीत हासिल कीं। अनिल कुंबले, वेंकटपति राजू और राजेश चौहान की स्पिन तिकड़ी ने इस दौर में अपनी फिरकी से भारत के लिए शानदार मुजाहिरा किया। वाडेकर बाद में सलेक्शन कमेटी के चेयरमैन भी रहे। भले ही टेस्ट क्रिकेट में वाडेकर का कैरियर और बल्लेबाजी औसत बहुत असरदार नहीं रहा लेकिन घरेलू क्रिकेट में उन्होंने अपनी बल्लेबाजी से मुंबई को कई जीत दिलाईं। उन्होंने 1966-67 के रणजी ट्राफी मैच में 323 का बेस्ट स्कोर मैसूर के खिलाफ बनाया था। उन्होंने 237 मैचों में 47. 03 के औसत से 15 हजार 380 रन बनाए, जिसमें 36 सेंचुरी और 84 हाफ सेंचुरियां शामिल रही। वाडेकर ने कुल 18 दलीप ट्राफी मैच खेले जिनमें छह में वह वेस्ट जोन के कप्तान रहे। उन्होंने छह बार बम्बई टीम की कप्तानी भी की। वाडेकर ने इंग्लैंड के 1967 के दौरे पर काउंटी मैचों में 835 रन बनाए। वाडेकर की गिनती उनके दौर के बेहतरीन फील्डरों में की जाती थी। स्लिप में तो वह बेजोड़ थे।  उनके रिफ्लेक्सेस बेहद तेज थे और भारतीय स्पिनरों की गेंदबाजी पर उन्होंने कई बेहतरीन कैच लपके। 37 टेस्ट में 46 कैच उनके नाम पर दर्ज हैं।  फर्स्ट क्लास क्रिकेट में उन्होंने 271 कैच लिए। अजीम ओपनर सुनील गावस्कर ने अजीत वाडेकर की कप्तानी में अपने इंटरनेशनल कैरियर का आगाज किया। उनकी कप्तानी में भारतीय टीम ने साल 1970-71 में वेस्टइंडीज के खिलाफ उसके ही मैदान पर टेस्ट सीरीज जीतने का कारनामा किया। वाडेकर भारत के ऐसे पहले कप्तान रहे जिनकी कप्तानी में भारतीय टीम ने इंग्लैंड को उसके ही मैदान में टेस्ट सीरीज हराने का करिश्मा किया। वेस्टइंडीज और इंग्लैंड को उसके मैदान पर हराने के बाद उनकी कप्तानी में भारत ने अपने मैदान पर इंग्लैंड को 2-1 से हराकर सीरीज जीत की हैट्रिक पूरी की थी।

फोटो अजीत वाडेकर