दहशतगर्द ही निकले गौरक्षक

दहशतगर्द ही निकले गौरक्षक

‘महाराष्ट्र सनातन संस्था’ और हिन्दुत्ववादी गोडसे की औलादों के घरों से बमों और असलहों का जखीरा बरामद

“मालेगांव बम धमाकों में प्रज्ञा सिंह ठाकुर, कर्नल श्रीकांत पुरोहित कई दहशतगर्दों की गिरफ्तारी के बाद उन्हें ‘भगवा दहशतगर्द’ कहा गया था तो आरएसएस और बीजेपी ने कांग्रेस सरकार पर हिन्दुओं को बदनाम करने का इल्जाम जड़ दिया था। अब तो महाराष्ट्र से दिल्ली तक बीजेपी की सरकारें हैं। हिन्दू गौवंश समिति के नाम पर दहशतगर्दी करने वाले वैभव राउत गरोह का पर्दाफाश हुआ है। यह गरोह सनातन संस्था और विश्व हिन्दू परिषद के नजदीकी है इन्हें क्या नाम दिया जाएगा ‘राष्ट्रभक्त’, ‘गौरक्षक’ या ‘दहशतगर्द’?”

“आरएसएस और विश्व हिन्दू परिषद के नजदीकी हिन्दू गौवंश रक्षा समिति के दहशतगर्दों के ठिकानों पर महाराष्ट्र सरकार ने मजबूरी में छापा मरवाया। इस गरोह के पास बमों और खतरनाक असलहों का जखीरा होने का पता कर्नाटक एटीएस ने गौरी लंकेश के कत्ल की तहकीकात के दौरान लगाया था। उन्हीं की इत्तेला पर महाराष्ट्र सरकार को अपनी एटीएस को छापा मारने की इजाजत देनी पड़ी। वर्ना इस गरोह की हरकतों की महाराष्ट्र पुलिस को मालूमात पहले से ही थी।”

“महाराष्ट्र ही नहीं गौरक्षा के बहाने पूरे उत्तर भारत में दहशतगर्दी करने वालों को विश्व हिन्दू परिषद से पैसे मिलने की खबरें आम हैं। इन्हें बाकायदा शिनाख्ती कार्ड तक जारी किए गए है। वैभव के साथ पकड़े गए सतारा के सुधानवा गोधालेकर और शरद कसालकर का ताल्लुक सभाजी भिंडे की तंजीम से है। सभाजी भिंडे के खिलाफ दलितां ने दो रिपोर्टे दर्ज करा रखी हैं। इसके बावजूद भिंडे के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। क्योंकि उसकी पहुच वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी तक है।”
हिसाम सिद्दीकी
मुंबई! महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई के नजदीक पालघर जिले के लाला सोभारा में हिन्दू गोवंश रक्षा समिति के नाम पर दहशतगर्दी करने वाले गरोह के सरगना वैभव राउत के घर पर पुलिस और महाराष्ट्र एण्टी टेररिस्ट स्क्वायड (एटीएस) ने छापा मारा तो एटीएस टीम की आखें हैरत से इस लिए खुली रह गई कि वैभव राउत के घर में बमों, बम बनाने का सामान और धमाकाखेज अशिया (विस्फोटक पदार्थ) का जखीरा मौजूद मिला। यह दहशतगर्द गायों के तहफ्फुज (सुरक्षा) की आड़ में काफी दिनों से दहशतगर्दी कर रहे थे। पहले मरहले में चालीस साल के वैभव राउत के अलावा उसके दो खतरनाक साथियों उन्तीस साल के सुधनवा गोंधालेकर और पच्चीस साल के शरद कसालकर को गिरफ्तार करके पूछगछ हुई तो उनकी निशानदेही पर दो ठिकानों से दर्जनों पिस्तौल, मैगजीन कुछ आधे बने पिस्तौल दीगर असलहे बरामद हुए। एक पुलिस अफसर ने कहा 1992 मार्च में सीरियल बम धमाकों के बाद मुंबई से बरामद रायफलों के जखीरे के बाद रियासत में यह सबसे बड़ी बरामदगी है। खबर है कि गौरी लंकेश के कत्ल की तहकीकात करने वाली कर्नाटक एटीएस टीम को वैभव और उसके साथियों के पास असलहा और बमों के बडे़ जखीरे की खबर मिली थी। उसी टीम ने महाराष्ट्र एटीएस को न सिर्फ इसकी इत्तेला दी बल्कि कर्नाटक एटीएस की एक टीम उनके ठिकानों की चौबीस घंटे निगरानी में लग गई। महाराष्ट्र एटीएस ने वजीर-ए-आला देवेन्द्र फण्डनवीस को इस की खबर दी तो मुंबई से दिल्ली तक बैठे बीजेपी के बड़े लीडरान के हाथ-पांव फूलने लगे वैभव और उसके गरोह के ठिकानों पर छापेमारी के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा था। अगर छापा न पड़ता तो कर्नाटक एटीएस खुद ही मकामी पुलिस के साथ मिलकर छापेमारी करती उस सूरत में महाराष्ट्र सरकार की बदनामी होती, मजबूरन छापे मारने पडे़। याद रहे कि मालेगांव बम धमाकों में कर्नल श्रीकांत पुरोहित, आरएसएस लीडर प्रज्ञा सिंह ठाकुर और उसके गरोह की गिरफ्तारी के बाद भगवा दहशतगर्दी का पर्दाफाश हुआ था। बीजेपी और आरएसएस इसके लिए कांग्रेस लीडरान को कोसने का काम कर रहे हैं कि दिग्विजय सिंह, सुशील कुमार शिंदे और पी चिदम्बरम ने भगवा दहशतगर्दी का नाम क्यों दिया। अब महाराष्ट्र से दिल्ली तक बीजेपी सरकार है उन्हीं के दौर में इस दहशतगर्दी का पर्दाफाश हुआ है अब इन्हें राष्ट्रभक्त कहा जाएगा गौरक्षक कहा जाएगा या दहशतगर्द?
सनातन संस्था दहशतगर्दों का गरोह है जो कभी गौरक्षा तो कभी हिन्दुत्व की हिफाजत के नाम पर दहशतगर्दी में मुलव्विस रहती है। सनातन संस्था और आरएसएस में ठीक वही रिश्ता है जो पचास की दहाई में नाथूराम गोडसे की हिन्दू महासभा और आरएसएस के दरम्यान था। गोडसे ने गांधी को कत्ल कर दिया था तो गोडसे की औलादों के जरिए बनाई गई सनातन संस्था का नाम गौरी लंकेश, नरेन्द्र दाभोलकर, गोविन्द पंसारे और एम एम कुलकर्णी के कत्ल में आ रहा है। इन चारों कत्ल वाक्यात में सनातन संस्था के कुछ लोग गिरफ्तार भी हुए हैं।
वैभव राउत के साथ गिरफ्तार किए गए सतारा के सुधनवा गोधालेकर और शरद कसालवर का ताल्लुक सभाजी भिंडे की तंजीम ‘शिवप्रतिष्ठान हिन्दुस्तान’ से भी बताया गया है। सभाजी भिंडे मुल्क के वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी के नजदीकी बताए जाते हैं। मोदी उन्हें देश का महान सपूत और देवतानुमा इंसान तक करार दे चुके हैं। पिछली यकुम जनवरी को भीमा कोरेगांव मेंं दलितों के सालाना जलसे के दौरान पुणे और दीगर मकामात पर दलित मुखालिफ हिंसा के जो वाक्यात हुए थे उनके पीछे भिंडे का ही हाथ बताया गया था। दलितों ने पुणे समेत दो मकामात पर भिंडे और उनकी तंजीम के खिलाफ पुलिस में इस इल्जाम के साथ रिपोर्ट लिखवाई थी कि भिंडे ने पुणे से भीमा कोरेगांव तक सवर्णों को भड़का कर दलितों के जुलूस पर हमले कराए। वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी तक भिंडे की पहुच होने की वजह से आज तक महाराष्ट्र पुलिस ने भिंडे और उनकी तंजीम (संगठन) के दूसरे लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। उल्टे इस मामले की तहकीकात के दौरान पुणे, मुंबई, दिल्ली और हैदराबाद से एक एडवोकेट समेत कई दलित दानिशवरों को गिरफ्तार कर लिया गया। सुधनवा गोधालेकर और शरद कसालकर के चेहरों पर पड़ा नकाब हटने और उनकी गिरफ्तारी के बावजूद भिंडे के खिलाफ किसी भी कार्रवाई का इमकान नहीं है।
महाराष्ट्र में हिन्दू गौवंश रक्षा समिति के नाम पर दहशतगर्दी करने वाले गरोह का विश्व हिन्दू परिषद और आरएसएस का गहरा ताल्लुक बताया गया है। पूरे मुल्क खुसूसन उत्तर भारत के प्रदेशों में विश्व हिन्दू परिषद ने गाय की हिफाजत के नाम पर अलग-अलग तंजीमें (संगठन) बना रखी हैं। इन गरोहों में शामिल दहशतगर्दों को बाकायदा शिनाख्ती कार्ड दिए गए हैं। हर महीने इन्हें तंख्वाह और जेब खर्च के नाम पर मोटी-मोटी रकमें दी जाती हैं। हर गरोह को नई-नई मोटर साइकिलें खरीदवाई गईं हैं। अब अगर विश्व हिन्दू परिषद या हरियाणा की मनोहर लाल खट्टर, राजस्थान की वसुंधरा राजे और मध्य प्रदेश की शिवराज सरकारें यह सफाई दें कि गाय के नाम पर सड़कों पर दहशतगर्दी, हिंसा और लिंचिंग करने वालों से उनका कोई ताल्लुक नहीं है तो यह गलत और सद फीसद झूट ही होगा। महाराष्ट्र की देवेन्द्र फण्डनवीस सरकार तो वैभव गरोह के पकड़े जाने की वजह से पूरी तरह बैकफुट पर चली गई है। वैभव के ठिकानों पर छापेमारी के बाद आरएसएस और विश्व हिन्दू परिषद की जानिब से नाराजगी जाहिर की गई इसी लिए चीफ मिनिस्टर देवेन्द्र फण्डनवीस को कहना पड़ा कि काफी सोच समझ और संजीदगी से गौर करने के बाद ही इस गरोह के ठिकानों पर छापेमारी की कार्रवाई करनी पड़ी। वह शायद अपने आरएसएस कुन्बे को समझाने की कोशिश कर रहे थे कि अब इन दहशतगर्दों के खिलाफ कार्रवाई कराने के अलावा दूसरा कोई रास्ता ही नहीं बचा था।
वैभव राउत और उसके दो साथियों की गिरफ्तारी के दौरान ही वैभव के दो मंजिला आलीशान बंगले से बाइस क्रूड बम, कई जिलेटिन शीट्स, छः वोल्ट की एक बैट्री, बम में इस्तेमाल होने वाले खास किस्म के तार ग्लू और ट्राजिस्टर के साथ एक डायरी बरामद हुई है। जिसमें बम बनाने का फार्मूला भी दर्ज है। एटीएस के मुताबिक जो क्रूड बम बरामद हुए हैं वह इस्तेमाल करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं जो काफी मुहलिक (घातक) किस्म के हैं। कुछ आधे बने बमों के अलावा धमाकाखेज अशिया (विस्फोटक पदार्थ) भी बरामद हुआ है। इन तीनों ने पूछगछ के दौरान असलहों के दूसरे जखीरों के ठिकाने भी बताए उनके बताए हुए ठिकानों पर एटीएस नें बारह अगस्त को छापा मारा तो वैभव के घर से ही दस पिस्तौल उनकी मैगजीन, बडी तादाद में कारतूस कई अधबने पिस्तौल और पुर्जे भी मिले। वैभव ने बताया कि पिस्तौल और कारतूस उसे उत्तर प्रदेश से उसके साथियों ने दिलाए है। उत्तर प्रदेश के किस गरोह से उसे यह असलहा मिला उसने एटीएस को इसकी तफसील भी बताई। लेकिन पुलिस ने उसका नाम मीडिया को नहीं बताया। इसीलिए उस गरोह का ताल्लुक बरसरे एक्तेदार (सत्ताधारी) पार्टी के कुछ अहम लोगों से है।