राफेल सौदाः घपले में घपला

राफेल सौदाः घपले में घपला

मोहम्मद मशहूद
नई दिल्ली! कांग्रेस सदर राहुल गांधी के ‘मिस्टर 56’ वाले ट्वीट से तिलमिलाए वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी का वह चेहरा सामने आ गया जिसको वह यह कहकर छुपाते रहे थे कि उन्हें पता है कि गुरबत क्या होती है और उनकी जिंदगी गरीबों, नादारों और दबेकुचलों की फलाह व बहबूद और भलाई के लिए वक्फ है। लखनऊ के एक प्रोग्राम में अपने चेहरे से नकाब हटाते हुए साफ कह दिया कि हम उनमें से नहीं है कि सनअतकारों के साथ न खडे़ हों। कई लोग सनअतकारों के साथ खड़े होने में डरते हैं। सनअतकारों को चोर-लुटेरा कहना या उनकी तौहीन करना पूरी तरह से गलत है। अगर इरादे नेक हों तो किसी के साथ खडे़ होने से कोई दाग नहीं लगता। इसी बहाने उन्होने अपने को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के बराबर खड़ा होने की कोशिश करते हुए कहा कि महात्मा गांधी को बिड़ला के घर जाकर रहने में कोई हिचक नहीं हुई क्योंकि उनकी नियत साफ थी। मगर मोदी ने राहुल गांधी के ट्वीट का कोई जवाब नहीं दिया जिसमें उनपर संगीन इल्जाम लगाए गए थे।
राफेल लड़ाकू जहाज खरीद मामले में जिस तरह से नए-नए इंकशाफ हो रहे हैं और कांग्रेस जिस तरह से अपने इल्जामात पर कायम है इसीलिए बीजेपी, उसके लीडरान खुसूसन मरकजी डिफेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण और मरकजी वजीर रविशंकर प्रसाद सारे मामले को दूसरी सिम्त मोड़ने की कोशिश करते हुए इसकी संगीनी हो हल्का करने में लगे हुए हैं लेकिन उनकी कमजोर दलीलें मोदी सरकार के लिए परेशानी का बाइस ही बनते जा रहे हैं और अब तो यह खतरा भी जाहिर किया जा रहा है कि राफेल सौदा बीजेपी के लिए बोफोर्स जैसा न साबित हो।
तहरीक अदम एतमाद के दौरान बहस में हिस्सा लेते हुए कांग्रेस सदर राहुल गांधी ने राफेल डील से मुताल्लिक मोदी और उनकी सरकार पर जो इल्जामात लगाए गए थे वह न सिर्फ इस पर कायम हैं बल्कि ट्वीट के जरिए बेहद संगीन इल्जामात लगाने का सिलसिला जारी रखे हुए हैं तो दूसरी तरफ साबिक मरकजी डिफेंस मिनिस्टर ए के अंटोनी ने प्रेस से मुखातिब होते हुए राफेल सौदे की जो तफसीलात बताईं और कहा कि आईन के तहत सरकार पार्लियामेट को किसी भी सौदे की कीमत बताने की पाबंद है। पार्लियामेट में कीमतों के उजागर करने के बाद सीएजी और पब्लिक अकाउट्स कमेटी इसकी पडताल करते हैं। ए के अंटोनी की राफेल सौदे से मुताल्लिक वजाहत के बाद मोदी सरकार इस मामले में फंसती दिखाई देने लगी है।
वाजेह हो कि मोदी सरकार राफेल लड़ाकू जहाजों की कीमतें बताने से मुआहिदे की शर्तों का हवाला देते हुए मना कर रही है। लोक सभा में जब राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर राफेल लड़ाकू जहाजों की कीमत का सवाल उठाया था तो डिफेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण ने पार्लियामेट में कहा था कि राहुल गांधी एवान को गुमराह कर रहे हैं इसके लिए वह उनके खिलाफ ‘प्रीवीलेज मोशन’ लाएंगीं। बीजेपी की तरफ से राहुल गांधी के खिलाफ ‘प्रीवीलेज मोशन’ आ भी गया जिसे मेम्बर पार्लियामेंट निशीकांत दुबे, अनुराग ठाकुर, दुष्यंत सिंह और प्रहलाद जोशी ने नोटिस दिया है। प्रीवीलेज मोशन पर जवाबी हमला करते हुए कांग्रेस की जानिब से दस मेम्बरान पार्लियामेट ने वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी और डिफेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण के खिलाफ नोटिस दिए हैं। यह भी याद रहे कि जो राफेल हवाई जहाज यूपीए 526 करोड़ में खरीद रही थी वही लड़ाकू तैय्यारे मोदी सरकार ने फी लड़ाकू तैय्यारा 1670 करोड़ में खरीदे हैं।
राफेल लड़ाकू तैय्यारा डील में हुई इसी बेजाब्तगी को उजागर करते हुए कांग्रेस सदर राहुल गांधी ने ट्वीट किया तो मोदी और उनकी चमचों ने औल फौल बकना शुरू कर दिया। राहुल गांधी ने वजीर-ए-आजम की तरफ इशारा करते हुए पहले ट्वीट कर कहा डियर ट्रोलर्स, मैं अपने पहले ट्वीट के लिए माजरतख्वाह हूं जिसमें मैंने कहा था कि मिस्टर 56 इंच के दोस्त के ज्वाइंट वेंचर को चार अरब डालर का आफसेट ठेका मिला है। उन्होने कहा कि मैं सोलह अरब डालर के राफेल ‘लाइफ साइकिल’ कांट्रेक्ट को जोड़ना भूल गया कुल बीस अरब डालर(एक लाख तीस हजार करोड़ रूपए) का फायदा पहुचाया गया है। राहुल गांधी ने इससे पहले 22 जुलाई को खबर के हवाले से ट्वीट किया था कि मिस्टर 56 (मोदी) को जो पसंद आता है उसे सूट पहने होना चाहिए, 45 हजार करोड़ रूपए के कर्ज में डूबा होना चाहिए और उसने अपनी जिंदगी में कभी तैय्यारा न बनाया हो। उन्होने कहा था कि अगर आप इन शरायत को पूरा करते हैं तो आपको चार अरब डालर के कांट्रेक्ट का ईनाम मिलेगा। राहुल गांधी के ट्वीट पर चर्चा चल ही रहा था कि कांग्रेस के मीडिया मोहकमे के चीफ रणदीप सिंह सुरजेवाला ने सहाफियों से बात करते हुए डिफेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण पर इल्जाम लगाया कि वह मुल्क से झूट बोल रही हैं। उन्होने मरकजी सरकार और रिलायंस कम्पनी के कुछ दस्तावेज पेश करते हुए कहा कि राफेल सौदे की आए दिन खुलती परतें वजीर-ए-आजम और डिफेंस मिनिस्टर के जरिए बोले गए झूट को उजागर कर रही है। कल्चर आफ क्रोनी कैपिटलिज्म एनडीए सरकार का डीएनए बन गया है। इस सौदे से सरकारी खजाने को नुक्सान पहुचाए जाने की बू आती है। सुरजेवाला ने यह भी दावा किया कि फ्रांस के साथ 36 राफैल लड़ाकू तैय्यारों की खरीद का समझौता होने के बाद इस सौदे से जुडा ठेका सरकारी कम्पनी हिन्दुस्तान एरोनाटिक्स लिमिटेड से लेकर रिलायंस ग्रुप डिफेंस कम्पनी को दे दिया गया जबकि यह कम्पनी समझौते से महज 12 दिन पहले रजिस्टर्ड हुई थी और इसके पास हवाई जहाज बनाने का कोई तजुर्बा नहीं है।
राफेल सौदे के बारे में कांग्रेस सदर राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर यह भी इल्जाम लगाया है कि उसने रिलायंस कम्पनी को 36 राफेल लड़ाकू तैय्यारों के रख-रखाव का जो ठेका एक लाख करोड़ रूपए का दिया है उसे मुल्क के टैक्स देने वालों को रिलायंस को अगले पचास साल तक अदा करना पडे़गा। उन्होने कहा कि क्या डिफेंस मिनिस्टर हस्बे मामूल प्रेस कांफ्रेंस करके इसकी तरदीद करेगीं। मगर सच्चाई रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर के प्रेजेटेशन के एक दस्तावेज को ट्वीट के साथ टैग करते हुए कहा प्रेजेटेशन में डिसाल्ट रिलायंस एयरोस्पेस लिमिटेड (डीआरएएल) का जिक्र है जो फ्रांस की डिसाल्ट एवीएशन और अनिल अंबानी के रिलायंस ग्रुप की ज्वाइंट वेंचर कम्पनी है। इसने डिसाल्ट एवीएशन से तीस हजार करोड़ का आफ सेट ठेका हासिल किया और फिर लाइफ साइकिल के लिए एक लाख करोड़ का ठेका भी उसे मिल गया।
तहरीक अदम एतमाद के दौरान डिफेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण ने राफेल के साथ 2008 में यूपीए के साथ हुए मुआहिदे का जिक्र करते हुए कहा था कि सौदे के तमाम उमूर को राज में रखा जाएगा इसकी तरदीद के लिए साबिक डिफेंस मिनिस्टर ए के अंटोनी सामने आए। पार्लियामेट में राफेल पर लोक सभा में वजीर-ए-आजम और डिफेंस मिनिस्टर के जवाब को खारिज करते हुए एक प्रेस कांफ्रेंस में अंटोनी ने कहा कि निर्मला सीतारमण ने 2008 के जिस खुफिया समझौते का हवाला दिया है उसमें कोई हकीकत नहीं है क्योकि समझौते में कीमत उजागर नहीं करने जैसी बात नहीं है। इतना ही नहीं 2008 में डील पर दस्तखत नहीं हुए थे और छः कम्पनियों के साथ राफेल भी एक दावेदार था। राफेल खुले टेडर के बाद दिसम्बर 2012 में चुना गया तब कीमत पर बातचीत हुई और 126 हवाई जहाजों को खरीदा जाना तय हुआ। अंटोनी ने कहा कि फ्रांस ही नहीं रूस और अमरीका के साथ भी राजदारी के समझौते उस वक्त हुए। लेकिन डिफेंस मिनिस्टर के नाते उन्होने 2008 के बाद एडमिरल गौरशकोफ सोखोई जेट, कावेरी इंजिन, मेराज हवाई जहाजों के अपग्रेडेशन की कीमतें पार्लियामेट में बताई। फ्रांस के आईनी जाब्तों में कीमतों को उजागर करना वहां लाजमी है। इसी तरह हमारे आईन मे भी सरकार पार्लियामेट को कीमत बताने की पाबंद है। पार्लियामेट में कीमतों के उजागर होने के बाद ही कम्ट्रोलर आडीटर जनरल (सीएजी) और पब्लिक अकाउट्स कमेटी (पीएसी) इसकी पड़ताल करते हैं। अंटोनी ने कहा कि सरकार जितना इसे छुपाने की कोशिश कर रही है शक व शुब्हात उतने ही गहरे होते जा रहे हैं। आफ सेट ठेका एक निजी कम्पनी को राहुल गांधी के इल्जाम को दोहराते हुए उन्होने कहा कि यूपीए सरकार ने तकनीकी ट्रांसफर करने को यकीनी बनाया था जिसे नई डील में हटा दिया गया। इस हिसाब से राफेल की कीमत यूपीए के दौर से भी कम होना चाहिए। प्रेस कांफ्रेस में ए के अंटोनी के साथ आनन्द शर्मा भी थे उन्होने कहा मोदी सरकार ने इन्ही राफेल लड़ाकू तैय्यारों को जिसे यूपीए सरकार ने 526 करोड में खरीदने का मुआहिदा किया था 1670 करोड़ रूपए तैय्यारा खरीदने का समझौता किया। इतना ही नहीं वजीर-ए-आजम मोदी ने पुराना सौदा मंसूख करने के लिए सीसीएस से पेशगी इजाजत भी नहीं ली और ज्यादा कीमत चुकाने के सवालों की आखिर पार्लियामेट में तस्दीक या तरदीद क्यों नहीं की आनन्द शर्मा जो राहुल गांधी और फ्रांस के सदर मैक्रों की मुलाकात के वक्त मौजूद थे कहा फ्रांस ने राफेल बातचीत से मुताल्लिक तरदीद नहीं की है। इस तरह राफेल सौदे में तो घपला हुआ ही है। आफ सेट ठेके में भी घपला किया गया है।