मुजफ्फरपुर शेल्टर होम के गुनाहों से नितीश पर लगा दाग धुलना मुश्किल

मुजफ्फरपुर शेल्टर होम के गुनाहों से नितीश पर लगा दाग धुलना मुश्किल

नुमाइंदा खुसूसी
पटना! खुद को ‘सुशासन बाबू’ कहलाने वाले नितीश कुमार की सरकार में मुजफ्फरपुर के शेल्टर होम में रहने वाली लड़कियां के साथ जो गुनाह हुए हैं उन गुनाहों मे नितीश कुमार के पूरे सियासी कैरियर पर जो बदनुमा दाग (कलंक) लगा है उसे धुल पाना नितीश के लिए मुश्किल ही नहीं नामुमकिन होगा। इस घिनौने वाक्ए पर पटना से दिल्ली पूरे बिहार की सडकों से पार्लियामेट और सुप्रीम कोर्ट तक जो जबरदस्त हंगामा हुआ है उसने नितीश कुमार और उनकी सरकार को पूरी तरह से हिला दिया। दो अगस्त को लेफ्ट पार्टियों ने इस मसले पर बिहार बंद का नारा देकर पूरे बिहार में हंगामा मचाया तो नितीश कुमार की जनता दल यूनाइटेड और बीजेपी के अलावा बाकी सभी सियासी पार्टियां बिहार बंद में शामिल हुई। कई जगहों पर मजाहिरीन (प्रदर्शनकारियों) और पुलिस मे झडपे भी हुई सभी पार्टियों का कहना था कि जबसे नितीश की सरकार बिहार मे बनी है तबसे वह खुद ही होम मिनिस्टर हैं इसलिए उन्हें इस्तीफा देना चाहिए। कई अखबारों और टीवी चैनलों ने अय्याशी का शिकार हुई लड़कियों की तस्वीरे शाया कर दी और इंटरव्यू दिखा दिए तो सुप्रीम कोर्ट ने उसपर सख्त एतराज करते हुए कहा कि इस तरह की सहाफत किसी भी कीमत पर मंजूर नहीं की जा सकती। सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार और मीडिया दोनो को सख्त फटकार लगाई और कहा कि आइंदा ऐसा नहीं होना चाहिए। चारों तरफ मच रहे हंगामे से परेशान नितीश कुमार ने आखिर अपने समाजी बहबूद (समाज कल्याण) वजीर को हटाने का एलान कर दिया।
मुजफ्फरपुर के शेल्टर होम में रहने वाली 44 में से 42 लडकियों के रेप के मामले से निपटने में नितीश कुमार लगे ही थे कि आरा से नितीश सरकार को शर्मसार करने वाली एक और खबर आ गई। कुछ मकामी अखबारात टीवी चैनलों और सोशल मीडिया पर खबर आ गई कि आरा मे रिमाण्ड होम में बंद लडकों के साथ बडे पैमाने पर गैर फितरी तौर पर बदफेली (आप्रकृतिक यौनाचार) की गई और एतराज करने पर उन्हें बुरी तरह से मारा पीटा गया। इस रिमाड होम में भोजपुर जिला समेत इर्द-गिर्द के तीन जिलों के बच्चों को रखा जाता है। मकामी टीवी चैनलों पर दिखाई जाने वाली खबरों और सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो मे कई लडकों ने अपने जिस्म में आए जख्मों को भी दिखाया है। मुजफ्फरपुर के शेल्टर होम की तरह आरा के रिमाड होम में हुए शर्मनाक वाक्ए पर भी सरकारी अफसरान ने पर्दा डालने की पूरी कोशिश की आरा के पुलिस कप्तान अवकाश कुमार ने खबर लिखे जाने तक सिर्फ इतना कहा था कि उन्हें आरा के रिमाड होम में बंद एक नाबालिग बच्चे के साथ मारपीट किए जाने की इत्तेला मिली है। उन्होने कहा कि एक अफसर को जांच करने के लिए आरा के रिमाड होम भेजा गया है खबर लिखे जाने तक जांच करने गए अफसर की रिपोर्ट नहीं आई थी। जिला इंतजामिया (जिला प्रशासन) ने मुजफ्फरपुर के शेल्टर होम की तरह आरा के रिमाड होम मे भी मीडिया नुमाइंदों के जाने पर रोक लगा रखी थी।
मुजफ्फरपुर शेल्टर होम को एक एनजीओ के जरिए चलाने वाले फर्जी सहाफी ब्रजेश ठाकुर की सरकार में पहुच किस हद तक है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ब्रजेश ठाकुर के जरिए चलाए जाने वाले ख्वातीन के एक और शेल्टर होम (स्वाधार गृह) की तहकीकात नौ जून को की गई थी वहां रहने वाली सोलह ख्वातीन जांच के वक्त गायब थीं जिनका खबर लिखे जाने तक कोई पता नहीं चला था लेकिन जिला इंतजामियास और जांच अफसरान ने पहली अगस्त तक यह बात छुपा रखी थी नितीश कुमार पर ब्रजेश ठाकुर का ऐसा जादू चलता रहा कि चारों तरफ से हंगामों के बावजूद नितीश कुमार मुजफ्फरपुर शेल्टर होम के वाक्ए की तहकीकात सीबीआई से कराने के लिए किसी तरह तैयार नहीं हुए। जब पानी सर से ऊपर हो गया तो मजबूरन उन्हे मामला सीबीआई को सौपना पड़ा। 28 जुलाई को सीबीआई टीम जांच करने के लिए मुजफ्फरपुर पहुच गई।
इतना ही नहीं मामला पूरी तरह अवाम में आने से पहले इस शेल्टर होम के खिलाफ जिस जिस ने आवाज उठाई उसी के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई की शेल्टर होम का मामला भी मीडिया में छाया हुआ था 31 मई को पुलिस ने उसके खिलाफ पहली रिपोर्ट दर्ज की उस दिन भी ब्रजेश ठाकुर की एनजीओ को सरकार ने एक नया प्रोजेक्ट सौप दिया। जिस शेल्टर होम की लडकियों को अय्याशी का शिकार बनाया गया उसे चलाने के लिए सालाना एक करोड़ की ग्राट नितीश सरकार देती रही है।
नितीश कुमार जो नरेन्द्र मोदी की तरह बात-बात पर मीडिया के सामने आ जाते हैं मुजफ्फरपुर शेल्टर होम में हुए गुनाहों पर खामोश ही रहे। ब्रजेश ठाकुर के हर पार्टी के सियासी लीडरान से गहरे ताल्लुकात बताए जाते हैं। सोशल मीडिया मे लालू यादव और नितीश कुमार दोनों के साथ उसकी तस्वीरे वायरल हो रही है। लेकिन नितीश कुमार के साथ उसकी नजदीकियां कुछ ज्यादा ही रही है। वह ‘सेवा संकल्प एवं विकास समिति’ नाम का एनजीओ चलाता है। लडकियों का शेल्टर होम इसी एनजीओ के तहत चलता है। जैसे जैसे इस शेल्टर होम का मामला तूल पकडता जा रहा है बिहार के सियासतदानों और अफसरान की सासें भी थमती जा रही है। क्योंकि खबरें है कि ब्रजेश कुमार ठाकुर बडी तादाद में सियासतदानों और अफसरान को उनकी हवस मिटाने के लिए शेल्टर होम की मासूम बच्चियों को भेजने का काम कई सालों से कर रहा था। जो बच्चियां उसकी हिदायत और हुक्म न मानने की हिम्मत दिखाती थीं उनको बुरी तरह से मारा पीटा जाता था। उनके जिस्म के नाजुक हिस्सो पर चोट की जाती थी उन्हें भूका रखा जाता था और उन्हें नशा पिलाकर बेसुध कर दिया जाता था। खबर लिखे जाने तक ब्रजेश ठाकुर और उसके साथ रिपोर्ट में नामजद ग्यारह मुल्जिमान को गिरफ्तार किया जा चुका था लेकिन बिहार से दिल्ली तक इस मामले पर हंगामा जारी था।