राहुल के मुकाबले लफ्फाजी और झूठ

राहुल के मुकाबले लफ्फाजी और झूठ

नो कांफीडेंस मोशन पर बहस के जवाब में पार्लियामेंट में मोदी और वजीरों का ड्रामा

“देश में दहशतगर्द भेजने वाले पाकिस्तान को सबक सिखाने, डालर की कीमत चालीस रूपए तक लाने, पेट्रोल-डीजल और दीगर जरूरी अशिया (वस्तुओं) की कीमतें कम करने, हर साल दो करोड़ नौजवानों को रोजगार देने, काला धन देश में वापस लाने जैसे बड़े मसलों पर पहली तहरीक अदम एतमाद (अविश्वास प्रस्ताव) के दौरान उठे एक भी सवाल का जवाब मोदी नहीं दे पाए।”
“हम सियासी मुखालिफ हैं, हमारे नजरियात (विचारधारा) में भी टकराव है आप लोग हमसे नफरत करते हैं लेकिन हम आपसे नफरत नहीं करते बल्कि प्यार करते हैं, हम कांग्रेस हैं। कांग्रेस में नफरत के बजाए प्यार करना सिखाया जाता है। यह कहकर मुल्क को एक अच्छा पैगाम देने की कोशिश करते हुए राहुल गांधी जाकर मोदी से गले मिले बाद में मोदी ने बहुत ही भद्दे तरीके से इसका मजाक उड़ाया।”
“गाय और बच्चा चोरी के नाम पर मुल्क मे हो रही मुसलमानों, दलितों और कमजोर तबके के लोगों की लिंचिंग के सवाल पर होम मिनिस्टर राजनाथ सिंह ने इंतहाई गैर जिम्मेदाराना जवाब देते हुए कहा कि लिंचिंग के सबसे ज्यादा वाक्यात तो 1984 में हुए थे। राफेल सौदे में हुई बेईमानी के सवाल पर डिफेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण ने बड़ी चालाकी के साथ पार्लियामेट और देश को गुमराह किया।”
हिसाम सिद्दीकी
नई दिल्ली! गुजिश्ता दिनों लोक सभा में कांग्रेस और तेलगू देसम के जरिए पेश तहरीक अदम एतमाद (अविश्वास प्रस्ताव) पर हुई बहस के जवाब में वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी और उनके जितने भी वजीरों ने अपनी बात कही तकरीबन सभी ने लोक सभा को भी पब्लिक मीटिंग की तरह इस्तेमाल करते हुए लफ्फाजी और जुमलेबाजी तो की लेकिन किसी भी सवाल का कोई ठोस जवाब नहीं दिया। मोदी से जितने सीधे सवाल किए गए उनके जवाब में मोदी ने गोल-मोल बात करते हुए कह दिया कि हमने चार साल में मुल्क के लिए जो काम किए, उसपर हम अडे़ और यहां लोक सभा में खड़े हैं। पार्लियामेंट में वजीर-ए-आजम की सतह से आए इस तरह के जवाब की मिसाल मुल्क की 70 साल की पार्लियामेंट्री तारीख (इतिहास) में नहीं मिलती। वजीर-ए-आजम के बाद सबसे अहम होम मिनिस्टर होते हैं, तो मुल्क में हो रही लिंचिंग के सवाल पर राजनाथ सिंह ने यह कह दिया कि लिंचिंग के वाक्यात तो 1984 में सबसे ज्यादा हुए थे। दूसरा और तकरीबन सबसे ज्यादा अहम सवाल राफेल डील के कमीशन खाने का था, डिफेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण ने उसपर भी एवान (सदन) को गुमराह करते हुए वह कागज दिखा दिया जिसपर फ्रांस और हिन्दुस्तान के दरम्यान यह समझौता हुआ था कि जहाजों की टेक्नालोजी वगैरह का राज किसी को नहीं बताया जाएगा लेकिन निर्मला सीतारमण ने कह दिया कि कीमतें न बताने का भी समझौता हुआ था। बाद में कांग्रेस ने उनके खिलाफ पार्लियामेट की तौहीन का नोटिस दे दिया। तमाम अपोजीशन लीडरान ने सरकार से बेरोजगारी, महंगाई, मेडिकल के नाकिस बंदोबस्त, डालर के मुकाबले गिरती रूपए की कीमत, पाकिस्तान से आने वाली दहशतगर्दी, आंध्र प्रदेश और बिहार जैसे पिछड़े प्रदेशों के लिए स्पेशल पैकेज के वादे, मुल्क में फैले नफरत के माहौल और गाय व बच्चा चोरी के बहाने इंसानों की लिंचिंग जैसे सवाल किए गए थे जिसका मोदी और उनकी सरकार ने कोई ठोस जवाब नहीं दिया। सरकार से तीखे सवाल करने के बाद राहुल गांधी मोदी के पास जाकर उनसे गले मिले और मुल्क को यह पैगाम देने की कोशिश की कि हम सियासी मुखालिफ हैं दुश्मन नहीं, उनकी इस कार्रवाई का जिस तरह मजाक नरेन्द्र मोदी ने उड़ाया वह किसी भी कीमत पर वजीर-ए-आजम के ओहदे के शायाने शान नहीं था।
राहुल गांधी ने राफेल सौदे में बड़े पैमाने पर कमीशन खाए जाने समेत कई तल्ख सवाल मोदी से पूछे, उन्होने यहां तक कह दिया कि ‘मैं राफेल सौदे में गड़बडी़ की बात कर रहा हूं तो मोदी साहब मेरी आंख में आंख नहीं डाल पा रहे हैं। इधर-उधर देख रहे हैं।’ अपनी बात के आखिर में उन्होने यह भी कह दिया कि आप हमसे चाहे कितनी नफरत करें लेकिन हम आपसे नफरत नहीं करने वाले, क्योंकि हम कांग्रेस हैं और कांग्रेस में नफरत के लिए कोई जगह नहीं है। अपनी बात पूरी करने के बाद राहुल गांधी मोदी के पास पहुच गए कहा उठिए गले मिलना है। मोदी कुछ समझ पाते उससे पहले ही राहुल ने झुक कर उन्हें गले लगाया, जब वह वापस जाने लगे तो मोदी ने उन्हें फिर बुलाया, हाथ पकड़ कर हंसते हुए कुछ कहा और दूसरा हाथ उनकी पीठ पर रखकर खुद भी गले मिले। इसके बावजूद मोदी जब बोलने खड़े हुए तो बोले कि अभी हार-जीत का फैसला भी नहीं हुआ था लेकिन वह (राहुल) वजीर-ए-आजम की कुर्सी के लिए इतने उतावले हो गए कि आकर मुझे कुर्सी से उठाने लगे, मैं उनके उठाने से नहीं उठने वाला क्योंकि यहां पर मुझे देश की 130 करोड़ जनता ने बिठाया है। बात यहीं खत्म हो जानी चाहिए थी लेकिन मोदी ने बड़प्पन का सबूत नहीं दिया। अगले ही दिन से वह जितनी पब्लिक मीटिगों में गए हर जगह राहुल का मजाक उड़ाते हुए कहा कि वजीर-ए-आजम की कुर्सी पर कब्जा करने के लिए वह (राहुल) मेरे गले पड़ गए, बड़ी मुश्किल से मैने उनसे खुद को बचाया।
तवक्को (अपेक्षा) के ऐन मुताबिक नरेन्द्र मोदी पार्लियामेंट में इसी तरह की बातें करके असल सवालात से खुद को बचा ले गए। उनके पास इन सवालात का कोई जवाब भी नहीं था कि दो करोड़ नौजवानों को हर साल नौकरी देने का उनका जो वादा था उसका क्या हुआ? पहले तो उन्होने कहा था कि नौजवान अगर पकौडे़ भी बनाकर बेच लेगे तो दिन भर में दो-तीन सौ रूपए कमा लेंगे, अब उन्होने एक नया शोशा छोड़ते हुए कहा नौजवानों को रोजगार मिल रहा है हर साल लाखों वकील तालीम पूरी करके निकल रहे हैं और हर वकील से कम से कम तीन नौजवानों को रोजगार मिल रहा है। उन्होने ऐसे और भी कई पेशे गिनवाए वह यह कहना चाह रहे थे कि 70 सालों से न तो कोई वकील पैदा हो रहे थे न इंजीनियर न चार्टर्ड अकाउटेट यह सब तो उनकी सरकार आने के बाद पैदा होने शुरू हुए हैं। यह वही मोदी हैं जो 2014 में एलक्शन के दौरान पब्लिक मीटिगांं में मदारियों की तरह हाथ फेंक-फेंक कर सवाल करते रहते थे कि नौजवानों को उनकी तालीम के मुताबिक अच्छे से अच्छा रोजगार मिलना चाहिए कि नहीं। अब वह आईआईटी, आईआईएम दीगर इंजीनियरिंग कालेजों और मैनेजमेंट की पढाई पूरी करने वालों से कह रहे हैं कि पकौड़ा बेंचे। अब उन्हें यह होश नहीं है कि नौजवानों को उनकी तालीम के मुताबिक नौकरी मिलनी चाहिए।
वजीर-ए-आजम बनने से पहले मोदी ने देश से वादा किया था कि मुल्क में दहशतगर्द भेजने वाले पाकिस्तान को सबक सिखाएंगे। अगर देश का एक सिपाही मरेगा तो वह दस मार कर लाएगें। अदम एतमाद की तहरीक (अविश्वास प्रस्ताव) पर बोलते हुए अपोजीशन के तकरीबन सभी मेम्बरान ने सवाल उठाए कि कश्मीर में हमारे जवान और शहरी रोज मारे जा रहे हैं अपने वादे के मुताबिक सरकार क्या कर रही है। नरेन्द्र मोदी उनके होम मिनिस्टर राजनाथ सिंह और उनकी डिफेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण इस सवाल को पी गए किसी ने इस सवाल का जवाब नहीं दिया। मेम्बरान ने पूछा कि आपने तो चीन की आंख में आंख डाल कर बात करने का वादा किया था अब आप उनके बुलाए बगैर बार-बार चीन क्यों जा रहे हैं। कई मेम्बरान ने इल्जाम लगाया कि डोकलाम में चीन की जानिब से रोज घुसपैठ होती है उसे रोकने के बजाए मोदी कभी चीन के सदर जी शिन पिंग को गुजरात बुलाकर झूला झुलाते हैं कभी उनके पास दौडे़ चले जाते हैं देश की मईशत (अर्थव्यवस्था) पर पूरी तरह चीन का कब्जा करा दिया गया है। इंतेहा यह कि सरदार पटेल का मुजस्सिमा (मूर्ति) तक चीन से बनवाई जा रही है। ऐसे सवालात को मोदी व उनकी सरकार ने बिल्कुल अनसुना कर दिया। इस तरह तहरीक अदम एतमाद (अविश्वास प्रस्ताव) में उठाए गए सवालात के जवाब में वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी और उनकी सरकार ने लोक सभा में सिर्फ झूट और लफ्फाजी करने का काम किया है।