राहुल समझे शराफत का दौर खत्म

राहुल समझे शराफत का दौर खत्म

“राहुल गांधी को अगले वजीर-ए-आजम की हैसियत से प्रोजेक्ट करने का कांग्रेस वर्किग कमेटी का फैसला, एचडी देवगौड़ा ने कहा, ‘राहुल को लीडर मानने में उन्हें कोई एतराज नहीं।”
हिसाम सिद्दीकी
नई दिल्ली! राहुल गांधी की सदारत में हुई आल इंडिया कांग्रेस की पहली वर्किंग कमेटी मीटिंग में राहुल गांधी ने अपनी पार्टी के लीडरान से एक बार फिर सख्ती से कहा कि उनकी मुखालिफ बीजेपी और वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी समेत बीजेपी लीडरान उन (राहुल) पर और कांग्रेस पर चाहे कितने ही जाती और सियासी हमले करते रहें कांग्रेस का कोई लीडर मोदी और बीजेपी के दूसरे लोगों पर जाती हमले नहीं करेगे और उनपर तब्सिरा (टिप्पणी) करते वक्त सतही व गैर मुनासिब अल्फाज का इस्तेमाल भी नहीं करेगें। राहुल गांधी शायद यह नहीं समझ पा रहे हैं कि मोदी के वजीर-ए-आजम बनने के बाद से मुल्क की सियासत में शराफत का दौर तकरीबन खत्म हो गया है। मोदी तो वजीर-ए-आजम हैं, अमित शाह बीजेपी के सदर हैं उनकी बातें तो दूर अब तो बीजेपी के तर्जुमान (प्रवक्ता) संबित पात्रा और जीएल नरसिम्हा जैसे छुटभय्ये भी नेहरू से सोनिया गांधी तक तमाम कांग्रेस लीडरान को गालियां बकने में भी शर्म महसूस नहीं करते। संबित पात्रा जो नेहरू के चपरासी बनने की हैसियत में भी नहीं हैं वह भी टेलीविजन पर होने वाली बहसों में कई बार यह कहते सुने जाते हैं कि देश आज भी ”जवाहर लाल नेहरू के ‘पापों’“ को भुगत रहा है। चूंकि खुद वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी कभी भी कांग्रेस लीडरान का नाम इज्जत व एहतराम (सम्मान) से नहीं लेते। राहुल गांधी और सोनिया गांधी के लिए अक्सर वह ‘मां-बेटे’ का लफ्ज इस्तेमाल करते हैं। देश भर में कहते फिरते हैं कि ‘मां-बेटे’ जमानत पर हैं। याद रहे कि मोदी के ही नजदीकी सुब्राहमण्यम स्वामी ने नेशनल हेराल्ड के एसोसिएटेड जर्नल्स को नई कम्पनी में तब्दील किए जाने के खिलाफ एक फर्जी मुकदमा कायम कर रखा है। जिसमें मुल्क की अदलिया के सिस्टम के मुताबिक राहुल गांधी और सोनिया गांधी को जमानत करवाना पडी़। उन लोगों ने कोई चोरी या डकैती नहीं की है इसके बावजूद मोदी उन्हें मुजरिम करार देते फिर रहे हैं।
22 जुलाई को हुई कांग्रेस वर्किंग कमेटी की मीटिंग में पार्टी ने यह भी फैसला किया कि पार्टी 2019 के लोक सभा एलक्शन में राहुल गांधी को ही अगले वजीर-ए-आजम की हैसियत से पेश करेगी। इसके लिए पार्टी को नई बुलंदियो ंतक पहुचाने वाली राहुल गांधी की वालिदा सोनिया गांधी ने पार्टी लीडरान को हिदायत दी कि वह अपनी तमाम दोस्त पार्टियों से बेहतर ताल्लुकात पैदा करें और सबको साथ लेकर चलने का काम करें। कांग्रेस वर्किंग कमेटी के इस फैसले के अगले ही दिन पार्टी के इस फैसले को उस वक्त बड़ी तकवियत हासिल हो गई जब मुल्क के साबिक वजीर-ए-आजम और जनता दल सेक्युलर के सदर एच डी देवगौड़ा ने एलान कर दिया कि राहुल गांधी को अगले वजीर-ए-आजम की हैसियत से तसलीम करने में उन्हें और उनकी पार्टी को कोई गुरेज या परेशानी नहीं है। अब बीजेपी और मोदी व अमित शाह के खेमों के लोगों ने यह अफवाहें फैलानी शुरू कर दी है कि अगला वजीर-ए-आजम बनने के लिए ममता बनर्जी, मायावती और अखिलेश यादव भी तैयार हैं। यह लोग राहुल गांधी को वजीर-ए-आजम तस्लीम नहीं करेगे। हालांकि खुद ममता बनर्जी, मायावती और अखिलेश यादव ने इस सिलसिले में कुछ भी नहीं कहा है। लेकिन बीजेपी का प्रोपगण्डा जोरों पर है।
वर्किंग कमेटी की मीटिंग में राहुल गांधी ने जोर देकर कहा कि हमारे मुखालिफीन कुछ भी कहते रहें, लेकिन हमें कांग्रेस के नजरियात (विचारधारा) तरक्की के रास्ते पर गामजन भारत और पुरअम्न समाज का अज्म (संकल्प) आम लोगों तक पहुचाना है। पार्टी की नई और पुरानी दोनों पार्टियों को मिलकर पार्टी को मजबूत बनाने के काम में जुटना है। हम सबको मिलकर नफरत, बेहिसी (संवेदनहीनता) और हिंसा की सियासत को खत्म करना होगा। अगर देश में नफरत की सियासत जारी रही तो देश का तहफ्फुज (सुरक्षा) भी खतरे में पड़ सकता है। हमें हर हाल में अपने देश को हर तरह से महफूज रखना है। रवादारी (सहिष्णुता) का रास्ता पकड़ कर मजबूती से चलना है।
कांग्रेस पार्टी ने यह भी तय किया कि जिन प्रदेशों में कांग्रेस मजबूत है उनमें कांग्रेस अपनी ताकत पर एलक्शन लड़ेगी और जिन प्रदेशों में पार्टी कमजोर है उनमें इलाकाई पार्टियों के साथ मिलकर लोक सभा एलक्शन लड़ा जाएगा। साबिक मरकजी वजीर पी चिदम्बरम ने 2019 के लोक सभा एलक्शन की हिकमते अमली (रणनीति) का खाका पेश करते हुए कहा कि अभी भी कम से कम एक दर्जन रियासतों में कांग्रेस की ताकत में कोई कमी नहीं आई है। अगर कांग्रेस पूरी ताकत से मिलकर एलक्शन लडे़ तो उन रियासतों में डेढ सौ सीटें जीती जा सकती हैं। बाकी दूसरे प्रदेशों में हम दोस्त और हमख्याल पार्टियों के साथ मिलकर इतनी ही सीटें आसानी से जीत सकते हैं। इस तरह 300 सीटें जीत कर बीजेपी को आसानी से सत्ता से बाहर किया जा सकता है।