अकबर की लिंचिंग-पुलिस हिरासत में मौत

अकबर की लिंचिंग-पुलिस हिरासत में मौत

 

बैकफुट पर राजस्थान सरकार, आरएसएस लीडर इन्द्रेश कुमार का बेतुका बयान

”गाय का गोश्त खाते हैं मोदी के वजीर किरन रिजिजू। गाय का गोश्त बिकवा रही है मनोहर पर्रिकर की गोवा सरकार, गाय खाता है पूरा नार्थ-ईस्ट बंगाल और केरल, गाय के नाम पर मुसलमानों की लिंचिंग होती है यूपी, हरियाणा, राजस्थान, झारखण्ड, एमपी और गुजरात में। इन्द्रेश कह रहे हैं कि लोग बीफ यानी गाय का गोश्त खाना छोड़ दें तो लिंचिंग खुद ब खुद बंद हो जाएगी।“

हिसाम सिद्दीकी
जयपुर! अलवर जिले में गुजिश्ता दिनों हरियाणा के दूध कारोबारी अकबर उर्फ रकबर खां को गाय समगलर करार देकर पीट-पीट कर मार डालने के मामले में राजस्थान की वसुंधरा सरकार और उनकी भारतीय जनता पार्टी पूरी तरह बैकफुट पर आ गई। तमाम अपोजीशन पार्टियों के पार्लियामेंट में हंगामे और सुप्रीम कोर्ट का सर पर लटकता कानून का चाबुक नजर आया तो बसुंधरा सरकार ने फौरन तस्लीम कर लिया कि अकबर खां की लिंचिंग ‘कस्टोडियल कत्ल’ है। इसलिए इसकी जुडीशियल जांच एक एडीशनल जुडीशियल मजिस्ट्रेट के जरिए कराने का आर्डर दे दिया गया है। मजिस्ट्रेट ने तहकीकात भी शुरू कर दी है। इससे पहले बीजेपी सरकारों की मिली भगत से लिंचिंग की जितनी भी वारदातें हुई उन सबमें पुलिस का डायरेक्ट या इनडायरेक्ट रोल रहा है। लेकिन बीजेपी सरकारों ने हर वारदात पर पर्दा डालने और मुल्जिमान को बचाने का ही काम किया है। वजह यह है कि लिंचिंग करने वाले आरएसएस, बीजेपी और विश्व हिन्दू परिषद व बजरंग दल के तैनात किए हुए ‘गौरक्षक’ हैं। गौरक्षकों के नाम पर इन तमाम दहशतगर्दों को बाकायदा शिनाख्ती कार्ड भी दिए गए है। शिनाख्ती कार्ड देखकर पुलिस भी उन्हीं के साथ हो जाया करती है। इन दहशतगर्दों को आरएसएस की जानिब से बाकायदा मेहनताने की शक्ल में मोटी-मोटी तंख्वाहें मिलती है, मोटरसाइकिलें और असलहे भी दिए गए हैं।
अकबर खान के मामले में राजस्थान में वसुंधरा सरकार फौरन ही बैकफुट पर इसलिए आ गई कि लिंचिंग में शामिल विश्व हिन्दू परिषद के दहशतगर्द नवल किशोर शर्मा ने ही पूरी साजिश का भाण्डा यह बता कर फोड़ दिया कि उसने अकबर की पिटाई की इत्तेला रामगढ पुलिस को रात में एक बजकर चालीस मिनट पर दे दी थी। दस मिनट में पुलिस मौके पर पहुच गई और उसे उठा कर थाने ले गई। दूसरी तरफ थाने से महज पांच-छः किलोमीटर के फासले पर कम्युनिटी हेल्थ सेटर के डाक्टर ने बताया कि पुलिस अकबर उर्फ रकबर को चार बजे सुबह लेकर आई थी। सुप्रीम कोर्ट की सख्ती की वजह से इस मामले में पहले के मामलात की तरह मीडिया ने भी दहशतगर्द गौरक्षकों का साथ नहीं दिया। तीन दिनों तक अकबर की लिंचिंग का मामला खबरों में छाया रहा। अकबर के साथ असलम भी थे। वह किसी तरह जान बचाकर भाग खडे़ हुए थे। उन्होने पुलिस को जो तहरीरी बयान दिया उसमें कहा है कि हमला करने वाले छः-सात लोग थे जो आपस में बात करते हुए कह रहे थे कि मारो और जला दो, एमएलए ज्ञानदेव आहूजा हमारे साथ हैं। वह हमें बचा लेंगे। किसी बडे़ गुण्डे बल्कि डाकुओं जैसे दिखने वाले ज्ञानदेव आहूजा भी फौरन मीडिया के सामने आए पहली बार वह डरे सहमे दिख रहे थे। अकबर की मौत पुलिस की पिटाई से हुई सबसे पहले उन्होने ही यह बात कही थी।
राजस्थान सरकार के इकबाल-ए-जुर्म के बावजूद आरएसएस के लोग चारों तरफ से गाय के नाम पर लिंचिंग को सही ठहराने में ही लगे रहे। आरएसएस के सीनियर ओहदेदार इन्द्रेश कुमार ने एक नया और अजीब व गरीब शोशा छोड़ दिया। शातिर जेहन इन्द्रेश ने कहा कि अगर लोग बीफ यानी गाय का गोश्त खाना छोड़ दें तो लिंचिंग के वाक्यात भी बंद हो जाएंगे। यही तो आरएसएस की हठधर्मी है। गाय का गोश्त खाते हैं गोवा के लोग बंगाल, केरल और तमिलनाडु के लोग। गाय का गोश्त खाते हैं मोदी के चहीते वजीर किरन रिजिजू, गाय खाई जाती है पूरे नार्थ-ईस्टर्न प्रदेशों में और गाय के नाम पर मुसलमानों की लिंचिंग होती है झारखण्ड, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, मध्य प्रदेश और गुजरात में फिर गाय का गोश्त खाने वालां और लिंचिंग में क्या ताल्लुक है?
अकबर की लिंचिंग पर राहुल गांधी ने ट्वीट कर दिया तो नरेन्द्र मोदी के वजीर पियूष गोयल और ड्रामा क्वीन स्मृति ईरानी भड़क गईं। स्मृति ईरानी और पियूष गोयल में इतनी इंसानियत और शर्म नहीं है कि वह इस तरह मारे गए अकबर के बच्चों और बीवी के लिए अफसोस में दो लफ्ज कहते। उत्तर प्रदेश के चीफ मिनिस्टर आदित्यनाथ योगी ने कहा कि अगर इंसान की जान अहम है तो गाय भी अपनी जगह अहमियत रखती है। उन्होने कहा कि अलवर की वारदात को कांग्रेस पार्टी जरूरत से ज्यादा तूल दे रही है। किसी भी इंसान को इस तरह पीट-पीट कर मार डालने के मामले के खिलाफ आवाज उठाना उस हरकत को तूल देना कैसे हो सकता है? आदित्यनाथ को तो खैर कहना भी यही चाहिए क्योंकि उनके अपने प्रदेश में चन्द दिन कब्ल ही हापुड़ में कासिम को इसी तरह गाय के नाम पर आरएसएस के दहशतगर्दों ने पीट-पीट कर मार डाला था। उसके साथी साठ साल के समीउद्दीन को मार-मार कर अधमरा कर दिया था उस मामले में आदित्यनाथ पुलिस भी मारने वालों के साथ शामिल दिखी थी फिर इसी बेईमान पुलिस ने रिपोर्ट में लिख दिया कि दो मोटर सायकिलों के टकरा जाने की वजह से झगड़ा हुआ था उसी में कासिम की मौत हो गई।
अलवर में मारे गए अकबर की पोस्ट मार्टम रिपोर्ट में कहा गया है कि उसके जिस्म में तेरह संगीन चोटें थीं हाथ-पैर भी तोड़ दिए गए थे। अकबर की एक पसली टूट कर फेफड़े में धंस गई थी जिससे खून निकला और फेफड़ों ने काम करना बंद कर दिया। उसके एक फेफड़े में तकरीबन सात सौ मिलीलीटर खून भी जमा पाया गया। यह मामला इतना तूल पकड़ गया कि राजस्थान के होम मिनिस्टर गुलाब चन्द कटारिया को कई सीनियर पुलिस अफसरान के साथ मौके पर जाना पड़ा। कटारिया और वसुंधरा को मालूम हो चुका था कि इस वारदात के बाद राजस्थान सरकार के खिलाफ तौहीन-ए-अदालत की पटीशन सुप्रीम कोर्ट में पहुच चुकी है जिसे सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के लिए मंजूर भी कर ली है। इस लिए सुप्रीम कोर्ट के खौफ से कटारिया ने फौरन एलान कर दिया कि मामला पुलिस हिरासत में मौत का है। इतना हंगामा होने के बावजूद वजीर-ए-आला वसुंधरा राजे के मुंह से एक लफ्ज भी नहीं निकला।
याद रहे कि सत्रह जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने एक साल के अंदर तीसरी बार लिंचिंग की हरकतों पर सख्ती के साथ तमाम रियासतों को हिदायत दी थी कि इस किस्म के वाक्यात रोके जाएं अगर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती न होती तो राजस्थान के होम मिनिस्टर पहलू खान की लिंचिंग की तरह अकबर को पीट-पीट कर मारने वालों को बचाने का पूरा बंदोबस्त पुलिस रिपोर्ट में जरूर करा देते। पहलू खान ने मरते वक्त अपने बयान मे जिन दहशतगर्दों को नामजद किया था कटारिया ने उन सभी को कानून के हाथों से बचवा दिया और उल्टे पहलू खान के बेटों पर गौकुशी के कानून के तहत मुकदमा दर्ज करा दिया था। वह लोग अदालत के चक्कर लगाने पर मजबूर हैं।