अकबर की लिंचिंग में वसुंधरा पुलिस भी शामिल

अकबर की लिंचिंग में वसुंधरा पुलिस भी शामिल

“सुप्रीम कोर्ट के सख्त आर्डर के तीन दिन बाद ही राजस्थान के अलवर में गाय के नाम पर दहशतगर्दी करने वालों और रामगढ थाने की पुलिस ने अकबर को पीट-पीट कर मार डाला।”

नुमाइंदा खुसूसी
अलवर (राजस्थान)! मुसलमानों की लिंचिंग के खिलाफ चीफ जस्टिस की सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने सख्त आर्डर तीसरी बार दिया। पार्लियामेंट में हंगामा हुआ तो होम मिनिस्टर राजनाथ सिंह ने सारी जिम्मेदारी रियासती सरकारों पर डाल दी साथ ही यह भी कह दिया कि लिंचिंग की सबसे संगीन वारदातें तो 1984 में हुई थीं। वह इंदिरा गांधी के कत्ल के बाद सिखों के खिलाफ बडे़ पैमाने पर हुई हिंसा का हवाला दे रहे थे। गाय के नाम पर सड़कों पर दहशतगर्दी मचाने वाले आरएसएस के गुण्डों को राजनाथ सिंह के बयान से नया हौसला मिला उन्होने एक बार फिर समझ लिया कि सिखों के साथ हिंसा हुई थी इसलिए अब उन्हें मुसलमानों को मारने का लाइसेंस मिल गया है। लोक सभा का एजलास तकरीबन ग्यारह बजे रात में खत्म हुआ उसके सवा घंटे बाद ही अलवर जिले के रामगढ थाना हलके में हरियाणा के दो दूध व्यापारियों अकबर उर्फ रकबर और असलम को भगवा दहशतगर्दों ने पकड़ लिया क्योकि यह दोनां एक-एक गाय खरीद कर ले जा रहे थे। दहशतगर्दों की तादाद सात थी उन्हीं में से एक नवल किशोर शर्मा ने ही पुलिस को इसकी इत्तेला भी दी। इन दहशतगर्दों ने दोनों को वहशी दरिंदों की तरह पीटना शुरू कर दिया। असलम छूट गया तो जान बचाकर भाग खड़ा हुआ लेकिन 28 साल का अकबर इतना खुशकिस्मत नहीं था कि भाग पाता इसलिए मारा गया। उसके सात छोटे-छोटे बच्चे हैं।
सुप्रीम कोर्ट की इससे बड़ी तौहीन नहीं हो सकती क्योंकि अकबर की लिंचिंग में रामगढ थाने की पुलिस के शामिल होने के सबूत मिल रहे हैं। मालूम हुआ है कि गाय के नाम पर दहशतगर्दी करने वालों की पिटाई से अकबर को जितनी चोटें आई थीं उससे ज्यादा जख्म उसे थाने में पुलिस ने दिए। पुलिस वाले अकबर को जीप में डालकर नवल किशोर शर्मा के घर भी ले गए वहां भी उसे मारा-पीटा गया। विश्व हिन्दू परिषद के गौरक्षक नवल किशोर शर्मा की चाची माया देवी ने बताया कि पुलिस जीप में जो आदमी पड़ा था पुलिस वाले उसे भद्दी-भद्दी गालियां देते हुए लातों से उसे मार रहे थे। मैं जीप के पास गई तो मुझ से कहा तुम यहां से जाओ। अस्पताल पहुचने से पहले ही रास्ते में उसकी मौत हो गई।
नवल किशोर की इत्तेला पर पुलिस रात बारह बजकर चालीस मिनट पर अकबर को उठा कर थाने ले आई थी लेकिन चन्द कदम के फासले पर कायम कम्युनिटी हेल्थ सेंटर पर उसे तीन बजे सुबह मुर्दा हालत में पहुचाया गया। मुजरिम जेहन पुलिस की बेहिसी का आलम यह है कि मौके पर धर्मेन्द्र यादव और सरदार परमजीत सिंह दो गायों को पकडे़ खड़े मिले थे। कुछ पुलिस वाले थाने में अकबर की पिटाई में जुट गए तो कुछ अकबर से पहले दोनों गायों को गौशाला पहुचाने में मसरूफ हो गए थे। पुलिस ने धर्मेन्द्र यादव, परमजीत सिंह और नवल किशोर शर्मा को अगली सुबह गिरफ्तार कर लिया था। वसुंधरा राजे सरकार के लिए यह इंतहाई शर्मनाक बात है कि उनकी पार्टी के मेम्बर असम्बली ज्ञान देव आहूजा बाकायदा गौरक्षकों के नाम पर दहशतगर्दों का गरोह चलाते है और फख्रिया इसका एलान भी करते रहते हैं। अकबर की लिंचिंग में भी ज्ञानदेव आहूजा का हाथ बताया जाता है। उनका एक वीडियो वायरल हुआ है वही उनके खिलाफ पुख्ता सबूत है।
तकरीबन एक साल पहले अलवर में ही हरियाणा के पहलू खान को भी इसी तरह पीट-पीट कर मार डाला गया था। मरने से पहले पहलू खान ने मारने वालां के नाम भी बताए थे। उनमें से सभी मुल्जिमान को गिरफ्तार नहीं किया गया। जो गिरफ्तार हुए बाद में सरकार ने उन्हें अदालत से छुड़वा दिया। अगर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई हो जाती तो शायद गौगुण्डों और भगवा दहशतगर्दों की अकबर को मारने की हिम्मत न पड़ती।
राजस्थान के अलवर में मुबैयना (कथित) गोरक्षकों के हाथों अकबर उर्फ रकबर कत्ल के मामले में वसुंधरा राजे की पुलिस पर सवाल खड़े होने लगे हैं। गायों की स्मगलिंग के इल्जाम में गौभक्तों की शक्ल में दहशतगर्दों ने रकबर खान नाम के एक शख्स को पीट-पीटकर मार डाला था। इस पूरे मामले पर पुलिस की टाइमिंग पर सवाल उठ रहे हैं। पुलिस अगर वक्त पर रकबर को अस्पताल ले जाती तो उसकी जान बच सकती थी। पुलिस की बेहिसी का आलम यह है कि वह अकबर से बरामद गायों को पहले अस्पताल ले गए। दरअसल रकबर का इलाज करने वाले डाक्टरों और पुलिस को वाक्ए की जानकारी देने वाले के बयान से तो ऐसा ही लग रहा है। पुलिस को रकबर पर हमले की जानकारी 12 बजकर 40 मिनट पर मिली थी, लेकिन पुलिस उसको इलाज के लिए 3 बजे अस्पताल लेकर पहुंचती है। ऐसे में सवाल उठता है कि 2 से 2.30 घंटे तक रकबर कहां था।
पुलिस के मुताबिक 12.40 पर इत्तेला मिलते ही वह मौके पर पहुंच गई थी। पुलिस को इत्तेला देने और पुलिस के साथ गाड़ी में जाने वाले नवलकिशोर शर्मा ने कहा रात को एक बजे पुलिस जख्मी को रामगढ़ थाने में लेकर पहुंची। लेकिन रकबर का इलाज करने वाले डाक्टरों का कहना है पुलिस उसे सुबह 3 बजे अस्पताल लेकर आई थी। ऐसे में पुलिस पर सवाल उठ रहा है कि दो घंटे अकबर कहां था।
रकबर खान की मौत थाने में पुलिस की पिटाई से भी होने के इल्जाम पर अलवर के एसपी राजेंद्र सिंह ने बयान दिया है। उन्होंने कहा कि मामले की जांच की जा रही है, अगर पुलिस वाले कुसूरवार निकले तो उनको सजा दी जाएगी।
पुलिस को सबसे पहले वाक्ए की इत्तेला देने वाले नवलकिशोर शर्मा ने बताया कि पुलिस ने जख्मी रकबर के इलाज में न सिर्फ ढाई से तीन घंटे की ताखीर की बल्कि उसे रामगढ़ थाने ले जाकर उससे मारपीट भी की गई। वहीं उसकी मौत हुई। गौरतलब है कि खुद पुलिस ने एफआईआर में शर्मा को वाक्ए की सबसे पहले इत्तेला देने वाला और मौके पर साथ ले जाने वाला बताया है। शर्मा के इस सनसनीखेज खुलासे से पूरे मामले में नया मोड़ आ गया है। गाय के नाम पर सड़कों पर दहशतगर्दी कराने वाले बीजेपी के मेम्बर असम्बली ज्ञानदेव आहूजा ने भी कहा है कि उनके गौरक्षकों ने गाय ले जाने की इत्तेला थाने को दी थी। पुलिस ने शिकायत करने वालों को खुश करने के लिए अकबर को पीटा जिससे उसकी मौत हो गई।
नवल किशोर शर्मा ने बताया कि जब रात को जख्मी रकबर को थाने पर लेकर आए थे तब उनको संगीन चोटें नहीं थी और अगर चोटें थी तो पुलिस ने अस्पताल में भर्ती क्यों नहीं करवाया। पुलिस रकबर को 3 बजे अस्पताल लेकर गई, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। नवलकिशोर शर्मा ने बताया कि पुलिस को उन्होंने करीब 12.40 बजे इत्तेला दे दी थी। इसके करीब दस मिनट बाद ही वह खुद पुलिस थाने पहुंचे। जहां से पुलिस टीम उसे सरकारी गाड़ी में साथ लेकर जाए वारदात पर पहुंची। यहां रकबर कीचड़ में सना पड़ा था। उसे कोई ऐसी संगीन चोट नहीं थी जिससे उसकी मौत हो जाती। इसलिए पुलिस मौके से उठाकर उसे सीधे रामगढ़ पुलिस थाने ले गई। यहां कीचड़ में सने रकबर को नहलाया गया और उसके कपड़े गीले हो जाने की वजह से पुलिस ने ललावंडीके रहने वाले धर्मेंद्र यादव को भेजकर कपड़े मंगाए। वह कपड़े उसे पहनाए गए। इस दौरान थाने में उसके साथ मारपीट की गई। इसी मारपीट से रकबर की मौत हुई।
नवलकिशोर शर्मा का कहना है कि करीब दो से ढाई घंटे पुलिस ने रकबर को थाने में रखा। उसकी मौत पुलिस कस्टडी में मारपीट से हुई है। जराए का कहना है कि हमले की जगह पर रकबर की हालत मरने जैसी नहीं थी। ऐसा होता तो पुलिस उसे लेकर सीधे अस्पताल जाती या तो उसकी हालत ठीक थी या पुलिस ने इलाज में देरी की। दोनों में कोई एक ही वजह हो सकती है।
पुलिस की टाइमिंग पर सवाल
मशहूर समाजी खिदमतगार असद हयात के मुताबिक नवलकिशोर शर्मा के दावे के अलावा वाक्ए की टाइमलाइन भी पुलिस को कठघरे में खड़ा कर रही है। दरअसल पुलिस ने एएसआई मोहन सिंह के हवाले से दर्ज एफआईआर में खुद कहा कि उसे रात करीब 12.40 बजे इत्तेला मिली। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि पुलिस एक बजे भी जख्मी अकबर को लेकर चली तो महज 4 किलोमीटर दूर अस्पताल पहुंचने में 3 घंटे कैसे लग गए। अस्पताल में रकबर का इलाज करने वाले डाक्टर के मुताबिक पुलिस उसे सुबह करीब 3 बजे अस्पताल लेकर पहुंची। यानी इलाज में करीब तीन घंटे की देरी हुई। रामगढ़ के कम्युनिटी हेल्थ सेंटर के डाक्टर हसन अली ने कहा कि पुलिस 3 बजे नामालूम शख्स को लेकर आई थी जो मुर्दा हालत मे था। उन्होंने कहा अगर यह वाक्या एक बजे पेश आया था तो 3 बजे तक यह जख्मी शख्स कहां था। अगर वक्त पर अस्पताल में भर्ती कराया जाता तो शायद उसे बचाया जा सकता था।
इस केस की एफआईआर असिस्टेट सब-इंस्पेक्टर मोहन सिंह ने दर्ज कराई है। रिपोर्ट के मुताबिक रात 12.41 पर टेलीफोन के जरिए नवल किशोर शर्मा से इत्तेला मिली कि जंगल में कुछ लोग पैदल पैदल गायों को लेकर जा रहे हैं। जब इस इत्तेला पर पुलिस जाने लगी तो नवल किशोर थाने के बाहर ही मिल गए तो उसे पुलिस जीप में बिठा कर मौके पर पहुंची। टार्च की रोशनी में जख्मी आदमी पर पानी डाल कर पूछा तो उसने अपना नाम अकबर बताया और कहा कि मैं व मेरा साथी असलम 2 गाय लेकर आ रहे थे तो कुछ लोग हम को मारने पीटने लगे और असलम जान बचा कर भाग गया।
रिपोर्ट में लिखे इस बयान से साफ है कि असलम इस वाक्ए का अकेला चश्मदीद गवाह है और दूसरा गवाह खुद मोहन सिंह एएसआई और उनके साथ गयी पुलिस टुकड़ी है। रिपोर्ट में साफ लिखा है कि 2 गायों को पकड़े धर्मेंद्र यादव और सरदार परमजीत सिंह मिले, बाकी हमलावर भाग गए।
दूसरी तरफ बीजेपी मेम्बर असम्बली ज्ञानदेव आहूजा का वीडियो वायरल हुआ है जिसमें वह साफ कह रहे हैं कि उन्होंने अपने वर्कर्स को हिदायत दे रखी है कि वह ऐसे लोगों की जो गाय की स्मगलिंग करते हैं उनकी पिटाई करें और पुलिस को सौंप दें।
अभी सुप्रीम कोर्ट का ताजा फैसला आया ही था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लिंचिंग बर्दाशत नही होगी यह एक संगीन जुर्म है। इस फैसले के बावजूद जिस तरह से मारपीट की हिमायत करने का बयान आया है वह शर्मनाक जुर्म की एक्स्ट्रा जुडिशल कुबूलनामा है यानी इन्होंने अदालत के बाहर अवामी तौर पर अपना बयान देकर जुर्म में अपनी साजिशन शमिलयत (लिप्तता) को कुबूल कर लिया है इसलिये उनके खिलाफ आईपीसी की दफा 120 बी और दफा 302 के तहत मुकदमा बनता है।
लिंचिंग का शिकार हुए अकबर के साथी असलम का कहना है कि वह पांच हमलावरों नवल किशोर शर्मा, विजय, सुरेश, परमजीत और धर्मेद्र यादव को पहचानता है दीगर दो भाग गए। असलम का यह भी कहना है कि जिन लोगो ने मारा पीटा वह कह रहे थे कि ज्ञानदेव आहूजा हमारे साथ है इसलिए हम को किसी का खौफ नही, इन दोनों को आग लगा दो।
इन हालात में पुलिस को मेम्बर असम्बली के खिलाफ मुजरिमाना साजिश रचने का केस सेक्शन 120 बी के तहत बनाना चाहिये और गिरफ्तार करना चाहिए।
यह मेम्बर असम्बली आहूजा की गौ रक्षा के नाम पर रची गई मुजरिमाना साजिश है जिस को सियासी फायदे के लिए वह अपने वर्कर्स के जरिए करा रहे हैं। इसलिए पुलिस को उनके खिलाफ जुर्म का नोटिस लेना चाहिए। इनका मकसद साफ है कि पुलिस को हवाले करने से पहले इतना मारो कि पुलिस कस्टडी में मर जाए।
इस सिलसिले मे वायरल वीडियो की सीडी अलवर जिले के सीनियर पुलिस अफसरान को अपने खत के साथ भेज रहा हूँ कि इस को तहकीकात मे शामिल किया जाए। आहूजा के खिलाफ भी जांच हो।
सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि जांच मे लापरवाई करने वाले पुलिस वाले भी नपेंगे। उनके खिलाफ भी कार्रवाई होगी। क्रिमिनल प्रोसीजर कोड सीआरपीसी की दफा 2 एच मे जांच करने वाले की जिम्मेदारी है कि वह हर उस पहलू पर जांच करे जो उस की जानकारी में लाया जाए ।
सुप्रीम कोर्ट का आर्डर है कि 6 महीने के अंदर फास्ट ट्रैक कोर्ट ट्रायल पूरा करें और हर जिले में खुसूसी अदालत बनाई जाए और तीस दिनों के अंदर सरकार मरने वाले के वारिसैन को माली इमदाद फराहम करे।
अखिलेश यादवः- राजस्थान के अलवर जिले मे एकबार फिर हुई माब लिंचिंग की हरकत पर समाजवादी पार्टी के सदर अखिलेश यादव ने अपना सख्त रद्देअमल जाहिर किया है। माब लिंचिंग के वाक्ए पर अखिलेश यादव ने बीजेपी पर हमला बोला है। याद रहे कि अलवर जिले के रामगढ़ गांव में अलावड़ा ललावंडी रोड पर गांव के गौभक्त गुण्डों ने गाय ले जा रहे दो मुस्लिम नौजवानों को पकड़ लिया था। गाय को ले जाते देख गांववालों ने उसे गाय का स्मगलर बता कर पीटना शुरू कर दिया था। लोगों से बुरी तरह पिटने के बाद एक अकबर की मौत हो गई थी। वाक्ए की जानकारी मिलने के बाद रामगढ़ थाना पुलिस ने मौके पर पहुंचकर नौजवान को भीड़ से बचाने की कोशिश की थी। लेकिन इलाज के दौरान नौजवान ने दम तोड़ दिया था। इसके बाद उसकी लाश को रामगढ़ अस्पताल की मोर्चरी में रखा गया। इससे पहले मरकजी वजीर जयंत सिन्हा ने झारखण्ड माब लिंचिंग मे सजा पाये मुजरिमों की इज्जत अफजाई की थी।
अखिलेश यादव ने ट्वीट करके बीजेपी के सभी दावों को खोखला बताया है। उन्होंने ट्वीट में लिखा है कि ‘भीड़तंत्र’ फिर से अलवर में अकबर को कत्ल कर गया। बरसरे एक्तेदार (सत्ताधारी) एक बार फिर ‘मुजरिमों’ं के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेंगे जैसे खोखले दावे करके फिर से उन हिंसक लोगों को इनाम देंगें और गले में माला डालकर उनकी इज्जतअफजाई करेंगे और ऐसी घिनौनी हरकतों पर खामोश रहने वालों की खामोशी और भी गहरी हो जाएगी। इंतेहाई काबिले मजम्मत!’
शशि थरूर और असदउद्दीन ओवैसीः- अपने तल्ख और सख्त बयानात के लिए मशहूर कांग्रेस के लोक सभा मेम्बर शशि थरूर ने बयान देते हुए कहा कि भारत में कई जगहों पर ‘मुस्लिमों के मुकाबले में गाय’ ज्यादा महफूज है, उनके इस बयान से बीजेपी और फिरकापरस्त ताकतें नया तनाजा खड़ा कर सकती है ेलेकिन थरूर कहते हैं कि उन्हें इसकी फिक्र नहीं है। उनके ‘हिन्दू पाकिस्तान’ के बयान के बाद भी बीजेपी हंगामा मचा चुकी है। उस वक्त भी शशि थरूर ने कहा था कि वह अपने बयान पर कायम हैं और रहेगें। इससे पहले लोक सभा मेम्बर असादुद्दीन ओवैसी ने ट्वीट कर बीजेपी पर हमला बोला था कि संविधान के हिसाब से देश में गाय तो जी रही है लेकिन मुस्लिम को जीने का हक नहीं मिल पा रहा है।
थरूर ने ट्विटर में लिखा, ‘‘बीजेपी के वजीरों का फिरकावाराना हिंसा में कमी के बारे में दावा हकायक (तथ्यों) पर खरा क्यों नहीं उतरता। ऐसा महसूस होता है कि कई जगहों पर मुस्लिम के मुकाबले में गाय ज्यादा महफूज है।“ उन्होंने एक पोर्टल पर छपे अपने बयान का लिंक भी दिया है।
जिसमें ‘गाय-मुस्लिम’ जैसा तब्सिरा था। उनका बयान कि गाय स्मगल करने के शक में राजस्थान के अलवर जिले में एक भीड़ ने 28 साल के अकबर खान को पीट-पीटकर कत्ल कर दिया। इससे चन्द दिन पहले ही मोदी के वजीर ने लिंचिंग के मुजरिमों की इज्जतअफजाई की थी। कुछ दिनों पहले शशि थरूर ने बीजेपी पर हमला बोलते हुए कहा था कि अगर भारतीय जनता पार्टी 2019 के लोकसभा चुनाव में जीतती है तो इससे देश ‘हिंदू पाकिस्तान’ बन जाएगा। तिरुअंनंतपुरम में एक प्रोग्राम को खिताब करते हुए शशि थरूर ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी अगर जीतती है,तो वह नया संविधान लिखेगी। जिससे यह देश पाकिस्तान बनने की राह पर चल पडेगा जहां अकलियतों के हुकूक का कोई एहतराम नहीं किया जाता है। उन्होने कहा था कि आइंदा लोक सभा चुनाव में बीजेपी की जीत से जम्हूरी इकदार (लोकतान्त्रिक मूल्य) खतरे में पड़ जाएंगी। थरूर के इस बयान पर बीजेपी ने सख्त एतराज किया था।