फ्रांस ने खिताब तो क्रोएशिया ने दिल जीता

फ्रांस ने खिताब तो क्रोएशिया ने दिल जीता

फ्रांस दूसरी बार बना वर्ल्ड चैम्पियन

मो. सैफुल इस्लाम
रूस में हुए फुटबाल वर्ल्डकप की शुरूआत पिछले वर्ल्डकप की चैम्पियन जर्मनी की शिकस्त के साथ हुई। उसके बाद स्पेन, पुर्तगाल और अर्जेंटीना जैसी मजबूत टीमें बाहर होती गई। दूसरी तरफ कई छोटी टीमें अच्छा खेल दिखा रही थीं। जिसका नतीजा यह हुआ कि फ्रांस से क्रोएशिया जैसे छोटे मुल्क ने फाइनल खेला मगर फ्रांस के सामने उनकी तरकीबें काम नहीं आईं और वह फाइनल हार गई। इगलिंश टीम ने भी अच्छा खेल दिखाया मगर वह क्रोएशिया जैसे छोटे मुल्क से सेमीफाइनल हार गई बाद में वह बेल्जियम से हार कर चौथे नम्बर पर आई। इधर फ्रांस ने बेल्जियम को हराकर फाइनल में कदम रखा था। चालीस लाख की आबादी वाला छोटा मुल्क क्रोएशिया फाइनल भले हार गया मगर उसने दिल जीत लिया। क्रोएशिया के खिलाडी़ ल्यूका मोदरिच को गोल्डन बाल तो इंग्लैण्ड के खिलाड़ी हैरीकेन को टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा गोल मारने की वजह से गोल्डन बूट का अवार्ड मिला। फ्रांस के कोच डिटिएर डेशचैंप दुनिया के ऐसे तीसरे कोच बन गए जिन्होंने बतौर कप्तान और कोच अपनी टीम को वर्ल्ड चैम्पियन बनवाया है।
डिफेंस को रौंद कर बेहतरीन हमलावर खेल का मुजाहिरा करते हुए फ्रांस ने क्रोएशिया के ख्वाब को चकनाचूर करते हुए उसे 4-2 से हराकर दूसरी बार वर्ल्ड चैंपियन बनने का फख्र हासिल कर लिया। फ्रांस को शुरुआत में ही क्रोएशिया के खुदकुश (आत्मघाती) गोल से बढ़त मिली थी, जिसे क्रोएशिया ने कुछ ही देर बाद 28वें मिनट में 1-1 से बराबर कर दिया। लेकिन इस बराबरी के 10 मिनट बाद ही मिली पेनाल्टी किक को गोल में बदल ग्रीजमैन ने फ्रांस को फिर से 2-1 से आगे कर दिया। फ्रांस के लिए तीसरा गोल दूसरे हाफ में पोग्बा, तो चौथा गोल के मबापी ने किया। वहीं क्रोएशिया के लिए दूसरा गोल एम मैंजुकिच ने किया। वर्ल्ड कप खिताब जीतने पर जहां फ्रांस को 38 मिलियन डालर (करीब 260 करोड़), तो क्रोएशिया को 28 मिलियन डालर (करीब 191 करोड़ रुपये) बतौर इनामी रकम मिले। एंटोनी ग्रीजमैन को मैन आफ द मैच चुना गया।
दूसरे हाफ में दोनों ही टीमों ने शुरुआत से हमलावर रुख अख्तियार कर लिया। दूसरे हाफ के दूसरे ही मिनट में क्रोएशियाई खिलाड़ी फ्रांस की डी में पहुंच गए। इस दौरान रेबिक ने बायीं छोर से एक अच्छा मूव बनाया, लेकिन फ्रांसिसी कप्तान और गोलची लोरिस ने क्रोएशिया की इस कोशिश को बेकार कर दिया। 2-1 की बढ़त पर सवार फ्रांस के खिलाड़ियों की बाडी लैग्वेज देखने लायक थी। रफ्तार और जोश पूरी तरह शबाब पर। खेल के 59वें मिनट में दाएं छोर से रास्ता बनाते हुए और क्रोएशिया के डिफेंस में पहुचने का काम किया फ्रांस के स्टार एमबापी ने गेंद को पोग्बा की तरफ भेजा। क्रोएशियाई डिफेंडर विडा ने इसमें रूकावट पहुंचाई, लेकिन गेंद उनसे टकराकर फिर से पोग्बा के पास पहुंचा, जिन्होंने इसे अपनी बायीं किक से गोल में तब्दील कर स्कोर 3-1 कर दिया। फ्रांसिसी हामी शायकीन सातवें आसमान पर थे, तो क्रोएशियाई पूरी तरह पस्त, लेकिन यही काफी नहीं था। फ्रांसीसी टीम का जोश आसमान पर था। तीसरे गोल के छः मिनट बाद ही एमबापी ने क्रोएशिया को एक और सदमा देते हुए फ्रांस की बढ़त 4-1 कर दी।
एमबापी क्रोएशियाई गोल से करीब पच्चीस मीटर दूर से ही गेंद को छीनकर आगे बढ़े। क्रोएशियाई डिफेंस पूरी तरह बिखर चुका था। एमबापी को विडा रोकने में नाकाम रहे और एमबापी फ्रांसीसी सुबासिक को चीरते हुए गोलची को गच्चा देते हुए गोल करने में कामयाब रहे। स्क्रिप्ट करीब-करीब तय हो चुकी थी। हालांकि चार मिनट बाद ही फ्रांसीसी कप्तान और गोलची की बेवकूफी का फायदा उठाते हुए क्रोएशिया गोल करने और स्कोर को 4-2 पर लाने में जरूर कामयाब रहा। लेकिन फर्क इतना ज्यादा हो चुका था कि यहां से वर्ल्ड चैम्यिन कौन होगा, यह साफ हो गया। इसके बाद बचे वक्त में कोई भी टीम एक-दूसरे पर गोल दागने में नाकाम रही फ्रांस ने 4-2 के स्कोर के साथ साल 1998 के बाद दूसरी बार वर्ल्ड चैम्पियन बनने का फख्र हासिल कर लिया। फ्रांस की महारत और हमला पहली बार वर्ल्ड कप का फाइनल खेल रही क्रोएशिया पर भारी पड़ा। पूरे टूर्नामेंट में हार न मानने वाले क्रोएशियाई खिलाड़ी सबसे बड़े मौके के दबाव के आगे टूट गए और फ्रांस ने साल 1998 के बाद फिर से वर्ल्ड कप का खिताब अपनी झोली में डाल लिया।
फ्रांस ने इससे पहले 1998 में फीफा वर्ल्ड कप जीता था। तब उसके कप्तान डिडियर डेसचैम्प्स थे जो अब टीम के कोच हैं। इस तरह से डेसचैम्प्स खिलाड़ी और कोच के तौर पर वर्ल्ड कप जीतने वाले तीसरे शख्स बन गये हैं। उनसे पहले ब्राजील के मारियो जगालो और जर्मनी फ्रैंक बेकनबऊर ने यह कामयाबी हासिल की थी। क्रोएशिया पहली बार फाइनल में पहुंचा था। उसने अपनी तरफ से हर मुमकिन कोशिश की और अपनी महारत और समझदारी से नाजरीन का दिल भी जीता।
लेकिन आखिर में जालटको डालिच की टीम को रनर अप बनकर ही सब्र करना पड़ा। इसमें कोई शक नहीं कि क्रोएशिया ने बेहतर फुटबाल खेली लेकिन फ्रांस ज्यादा असरदार और होशियारी भरा खेल दिखाया, यही उसकी असली ताकत है जिसके दम पर वह 20 साल बाद फिर चैम्पियन बनने में कामयाब रहा। दोनों टीमें 4-2-3-1 के कम्बीनेशन के साथ मैदान पर उतरी। क्रोएशिया ने इंग्लैंड की खिलाफ जीत दर्ज करने वाली शुरुआती टीम में बदलाव नहीं किया तो फ्रांसीसी कोच डेसचैम्प्स ने अपनी डिफेंस लाइन को मजबूत करने पर ध्यान दिया।
क्रोएशिया ने अच्छी शुरुआत की और पहले हाफ में न सिर्फ गेंद पर ज्यादा कब्जा जमाये रखा बल्कि इस बीच हमलावर हिकमते अमली भी अपनाये रखी। उसने नाजरीन में जोश भरा जबकि फ्रांस ने अपने खेल से मायूस किया। यह अलग बात है कि किस्मत फ्रांस के साथ थी और वह बगैर किसी खास कोशिश के दो गोल करने में कामयाब रहा। फ्रांस के पास पहला मौका 18वें मिनट में मिला और वह इसी पर बढ़त बनाने में कामयाब रहा। फ्रांस को दायीं तरफ बाक्स के करीब फ्री किक मिली। ग्रीजमैन का क्रास शाट गोलकीपर डेनियल सुबासिच की तरफ बढ़ रहा था लेकिन तभी मैंडजुकिच ने उस पर हेडर लगा दिया और गेंद गोल में चली गयी। इस तरह से मैंडजुकिच वर्ल्ड कप फाइनल में खुदकुश गोल करने वाले पहले खिलाड़ी बन गये। यह इस वर्ल्ड कप का रिकार्ड 12वां खुदकुश गोल है। पेरिसिच ने हालांकि जल्द ही बराबरी का गोल करके क्रोएशियाई मद्दाहों और मैंडजुकिच में जोश भरा। पेरिसिच का यह गोल काबिले दीद था जिसने लुजनिकी स्टेडियम में बैठे नाजरीन को रोमांचित करने में कसर नहीं छोड़ी। क्रोएशिया को फ्री किक मिली और फ्रांस इसके खतरे को नहीं टाल पाया। मैंडजुकिच और डोमागोज विडा की कोशिश से गेंद विंगर पेरिसिच को मिली। उन्होंने थोड़ा वक्त लिया और फिर बायें पांव से शाट जमाकर गेंद को गोल के हवाले कर दिया। फ्रांसीसी गोलकीपर ह्यूगो लोरिस के पास इसका कोई जवाब नहीं था। लेकिन इसके फौरन बाद पेरिसिच की गलती से फ्रांस को पेनाल्टी मिल गयी। बाक्स के अंदर गेंद पेरिसिच के हाथ से लग गयी। रेफरी ने वीएआर की मदद ली और फ्रांस को पेनाल्टी दे दी। तजुर्बेकार ग्रीजमैन ने उस पर गोल करने में कोई गलती नहीं की। 1974 के बाद वर्ल्ड कप में पहला मौका है जबकि फाइनल में हाफटाइम से पहले तीन गोल हुए। क्रोएशिया ने इस तादाद को बढ़ाने के लिये लगातार अच्छी कोशिश की लेकिन फ्रांस ने अपनी ताकत गोल बचाने पर लगा दी। इस बीच पोग्बा ने देजान लोवरान को गोल करने से रोका। क्रोएशिया ने दूसरे हाफ में भी हमले की हिकमते अमली अपनायी और फ्रांस को दबाव में रखा।
खेल के 48वें मिनट में लुका मोड्रिच ने एंटे रेबिच का गेंद थमायी जिन्होंने गोल पर अच्छा शाट जमाया लेकिन लोरिस ने बड़ी खूबसूरती से उसे बचा दिया। लेकिन गोल करना अहम होता है और इसमें फ्रांस ने फिर से बाजी मारी। इसके छः मिनट बाद एमबापे ने स्कोर 4-1 कर दिया। उन्होंने बायें छोर से लुकास हर्नाडेज से मिली गेंद पर कंट्रोल बनाया और फिर 25 गज की दूरी से शाट जमाकर गोल दाग दिया जिसका विडा और सुबासिच के पास कोई जवाब नहीं था। एमबापे ने 19 साल 207 दिन की उम्र में गोल दागा और वह वर्ल्ड कप फाइनल में गोल करने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ी बन गये। पेले ने 1958 में 17 साल की उम्र में गोल दागा था। क्रोएशिया लेकिन हार मानने वाला नहीं था।
तीन गोल से पिछडने के बावजूद उसका जज्बा देखने लायक था लेकिन उसने दूसरा गोल फ्रांसीसी गोलकीपर लोरिस की गलती से किया। उन्होंने तब गेंद को ड्रिबल किया जबकि मैंडजुकिच पास में थे। क्रोएशियाई फारवर्ड ने उनसे गेंद छीनकर आसानी से उसे गोल में डाल दिया। इसके बाद भी क्रोएशिया ने हार नहीं मानी। उसने कुछ अच्छी कोश्शि की लेकिन उसके शाट बाहर चले गये। इस बीच इंजुरी टाइम में पोग्बा को अपना दूसरा गोल करने का मौका मिला लेकिन वह चूक गये। रेफरी की आखिरी सीटी बजते ही फ्रांस जश्न में डूब गया।
फोटो फ्रांस जीत का