पूरे मुल्क में बीजेपी युवा मोर्चा की दहशतगर्दी

पूरे मुल्क में बीजेपी युवा मोर्चा की दहशतगर्दी

शबीहुल हसन नकवी
नई दिल्ली! 17 जुलाई का दिन देश के लिए इंतेहाई शर्मनाक दिन था। उस दिन 24 घंटे के अंदर बीजेपी के नाम पर गुण्डई करने वालों के हाथों चार शर्मनाक वारदातें पेश आई। झारखण्ड के पाकुड़ में बीजेपी युवा मोर्चा के गुण्डों ने ‘जयश्रीराम’ के नारे लगाते हुए मशहूर सोशल वर्कर स्वामी अग्निवेश को सड़क पर पीट-पीट कर कत्ल करने की कोशिश की इसी दिन तिरूअनन्तपुरम में बीजेपी युवा मोर्चा के लोगों ने ही लोक सभा मेम्बर और साबिक मरकजी वजीर शशि थरूर के दफ्तर पर हमला करके तोड़-फोड़ की और वहां मौजूद लोगों के साथ हाथा-पाई की। इससे पहले बीजेपी के ही गुण्डों ने ही बंगाल के मिदनापुर में नरेन्द्र मोदी की रैली के वक्त पुलिस पर हमला किया। खड़गपुर में बीजेपी के लोगों ने दस बेगुनाहों पर हमला करके उन्हें शदीद तौर पर जख्मी कर दिया। आखिर में 17 जुलाई की शाम को बीजेपी के एक गुलाम टीवी चैनल ने अपने स्टूडियो में शराई अदालत पर बहस कराने के दौरान इंतेहाई काबिले एतराज सवालात उछाले और चैनल के अपने पाले हुए एक मुबय्यना (कथित) मौलाना एजाज अरशद कासमी के जरिए सुप्रीम कोर्ट की वकील फराह फैज पर हमला कराकर एक शर्मनाक और नई नजीर पेश कर दी।
स्वामी अग्निवेश पर बीजेपी युवा मोर्चा के लोगों ने उस वक्त हमला किया जब वह पाकुड़ से 25 किलोमीटर दूर लिट्टीपाड़ा मे पहड़िया आदिवासियों को यह बताने जा रहे थे कि उनके हुकूक (अधिकार) क्या हैं और उन्हें किस तरह पामाल किया जा रहा है। जैसे ही स्वामी अग्निवेश होटल से निकले बीजेपी युवा मोर्चा और एबीवीपी के वर्कर्स के भेष में खड़े गुण्डे उनपर टूट पडे़। स्वामी अग्निवेश का कहना था कि उनपर पत्थरों से भी हमला करने की कोशिश की गई मगर वह किसी तरह बच गए। इस पूरे वाक्ए के पीछे कौन है और अग्निवेश पर मंसूबा बनाकर हमला किया गया इसको पता इसी से चलता है कि पाकुड़ के पुलिस कप्तान शैलेन्द्र प्रसाद बर्नवाल कहते हैं कि उन्हें और पुलिस को स्वामी अग्निवेश के प्रोग्राम की कोई इत्तेला नहीं थी। स्वामी अग्निवेश ने पुलिस कप्तान के बयान को गलत बताया है।
स्वामी अग्निवेश को पीटने वाले बीजेपी युवा मोर्चा का इल्जाम है कि हिन्दू मजहब के खिलाफ और बीफ खाने को गलत न बताने की वजह से लोगों में उनके लिए नाराजगी है। हमलावरों ने इल्जाम लगाया कि अग्निवेश ईसाई मिशनरी और पाकिस्तान के इशारों पर काम कर रहे हैं। वह ईसाई मिशनरी के कहने पर आदिवासियों को भड़काने आए थे। इस हमले के पीछे बीजेपी की आला कयादत का हाथ था इसका भी इजहार झारखण्ड सरकार के वजीर सी पी सिंह के बयान से हो गया जिन्होने कहा कि अग्निवेश स्वामी नहीं फ्राड है उन्होने पब्लिसिटी के लिए खुद ही अपने पर हमला कराया है। स्वामी अग्निवेश ने अगर खुद पर हमला कराया है तो वीडियो में हमलावरों के चेहरे साफ नजर आ रहे हैं उन्हें पहचान कर उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है। झारखण्ड के वजीर-ए-आला रघुवर दास ने पूरे मामले की जांच कराने का एलान (ड्रामा) किया है।
स्वामी अग्निवेश की पिटाई कोई पहला मामला नहीं है जो भी बीजेपी या नरेन्द्र मोदी के खिलाफ अपने ख्यालात का इजहार करता है उसे अक्सर इस किस्म की गुण्डागर्दी झेलना पड़ती है। कांग्रेस के सीनियर लीडर शशि थरूर ने कोई गलत बात नहीं कही थी। इसके बावजूद केरल के तिरूअनन्तपुरम में उनके घर और दफ्तर पर बीजेपी वर्कर्स ने हमला कर दिया। शशि थरूर को पाकिस्तान भेजने जैसे नारे लिखे और दफ्तर मे लगी नेम प्लेट पर कालिख (स्याही) पोत दी। इतना सब होने के बाद बीजेपी के वजीर अनन्त कुमार कहते हैं कि शशि थरूर के दफ्तर पर जो भी हुआ उसके लिए बीजेपी वर्कर्स नहीं वहां की सरकार जिम्मेदार है। सरकार बीजेपी की गुण्डागर्दी रोक नहीं सकी इसके लिए तो उसे जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। मगर दफ्तर पर तोड-फोड़ करने नारे लिखने और स्याही पोतने वाले कौन थे इस बारे में अनन्त कुमार कुछ नहीं कहते हैं।
बीजेपी की खुशामद में लगे कुछ मोलवी नुमा मुसलमान भी जलील होने के बावजूद चापलूसी से बाज नहीं आ रहे हैं। पिछले दिनों आरएसएस के टीवी चैनल सुदर्शन पर बहस के दौरान एक मोलवी का लाइव टेलीकास्ट के दौरान लात मार कर भगाया गया। उसके बाद बीजेपी के ही एक गुलाम टीवी चैनल पर बहस के दौरान खुद को मौलाना कहने वाला मुफ्ती एजाज अरशद कासमी बीजेपी की खुशामद में इस कदर पागल हो गया कि बहस के दौरान शरीफ फराह फैज नाम की खातून पर थप्पड़ों की बरसात कर दी। फराह फैज तीन तलाक की मुखालिफत करने वाली निदा खान की हिमायत कर रही थीं। फराह फैज को थप्पड़ मारने वाले मौलाना मुफ्ती अरशद कासमी को गिरफ्तार कर लिया गया है। उसने अपनी हरकत के लिए माफी तो नहीं मांगी अलबत्ता शर्मिदगी का इजहार जरूर किया है। सुदर्शन हो या कोई और मोदी का गुलाम चैनल यह लोग मुसलमानों की तौहीन करने के लिए ऐसे मोलवियों को बुलाकर बहस कराते रहते हैं।
स्वामी अग्निवेश की पिटाई के मामले की जांच के आर्डर भले ही झारखण्ड सरकार ने दे दी हो अग्निवेश को पीटने के इल्जाम में बारह लोगों को गिरफ्तार भी कर लिया गया हो मगर मुल्जिमों को सजा मिलना मुश्किल है। जब झारखण्ड सरकार में शामिल वजीर इस तरह अग्निवेश को भीड़ के जरिए पीटे जाने को उन्हीं का फैलाया ड्रामा बताए। अग्निवेश को फ्राड स्वामी और गैर मुल्की एजेण्ट बताए, ऐसे में उन्हें पीटने वालों के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई होगी इसमें शक है। शशि थरूर ने अपने दफ्तर पर हमला होने के बाद सवाल किया है कि क्या हिन्दुत्व का तालिबानीकरण हो रहा है। शशि थरूर ने कहा कि यह लोग मुझसे पाकिस्तान जाने के लिए कह रहे हैं। वह कहते हैं कि इन लोगों को यह हक किसने दिया कि वह बताए कि मैं उनके जैसा हिन्दू नहीं हूं इसलिए भारत में नहीं रह सकता। सबसे हैरत की बात यह है कि शशि थरूर से स्वामी अग्निवेश की पिटाई तक किसी भी मामले में वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी ने जुबान खोलना मुनासिब नहीं समझा।