लिंचिंग के पीछे मोदी हुकूमत!

लिंचिंग के पीछे मोदी हुकूमत!

मुल्क भर की सड़कों पर हिंसा फैलाने वाले आरएसएस और विश्व हिन्दू परिषद के गुण्डों से खुली हमदर्दी

”मोदी के वजीर जयंत सिन्हा अलीम उद्दीन को पीट-पीट कर मार डालने वालों की जमानत होने पर उनका खैरमकदम करने जाते हैं सभी मुजरिमों को हार पहनाते हैं। दूसरे वजीर गिरिराज सिंह दगा भड़काने में मुलव्विस बजरंग दल लीडर जितेन्द्र प्रसाद उर्फ जीतू से मिलने नवादा जेल जाते हैं फिर उसके घर जाकर आंसू बहाते है। पूरे मुल्क में दोनों की मजम्मत होती है लेकिन नरेन्द्र मोदी खामोश रहते हैं इस खामोशी का पैगाम क्या है?“

”मुसलमानों की लिंचिंग की जितनी भी शर्मनाक वारदातें हुई हैं उनमें मुलव्विस मुल्जिमान का ताल्लुक आरएसएस, बीजेपी, विश्व हिन्दू परिषद और बजरंग दल जैसी तंजीमों (संगठनों) से निकला है। बीजेपी सरकारों के सरकारी वकील इन मुल्जिमान की मदद करते दिखते हैं। ऐसी सूरत में इंसाफ हो पाना कैसे मुमकिन है?“

”जयंत सिन्हा के वालिद यशंवत सिन्हा ने उन्हें नालायक बेटा बताते हुए कहा है कि वह अगला एलक्शन हार जाएगे इसके बावजूद जयंत सिन्हा कहते हैं किगैर जिम्मेदार लोग ही उनके खिलाफ बोल रहे हैं। हावर्ड युनिवर्सिटी से पढे जयंत सिन्हा जमानत पर छूटे कातिलों को मुकदमे से बरी तस्लीम कर रहे हैं और बड़ी बेशर्मी से दावा कर रहे हैं किवह तो जूडीशियरी की इज्जत अफजाई कर रहे हैं।“
हिसाम सिद्दीकी
नई दिल्ली! मुल्क भर में खुसूसन झारखण्ड, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, मध्य प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, त्रिपुरा और असम जैसे बीजेपी सरकारों वाले प्रदेशों में कभी गाय के नाम पर तो कभी बच्चा चोरी के नाम पर हो रही मुसलमानों और गरीब व कमजोर तबकों के बेगुनाहों की लिंचिंग के पीछे मोदी हुकूमत का हाथ है। यह इल्जाम गुजिश्ता दिनों पेश आए कई वाक्यात के बाद सच दिखने लगे हैं। मोदी वजारत में शामिल जयंत सिंहा झारखण्ड में गाय के गोश्त के बहाने गुजिश्ता साल 29 जून को भरे बाजार में अलीमउद्दीन अंसारी को पीट-पीटकर मार डालने वाले ग्यारह दहशतगर्दों को जेल के बाहर हार-फूल पहनाने पहुच गए जब हाई कोर्ट से जमानत मिलने के बाद वह जेल से बाहर निकले थे। मोदी के एक और गिरिराज सिंह नवादा से दंगा भड़काने वाले बजरंग दल लीडर जितेन्द्र प्रसाद उर्फ जीतू से मिलने नवादा जेल पहुच गए। गिरिराज सिंह जीतू के घर भी गए और मीडिया के सामने रोते हुए बोले कि वह मजबूर है वर्ना जीतू जेल में न होते। इन दोनों वजीरों की पूरे मुल्क ने मजम्मत (निंदा) की, जयंत सिंहा के वालिद साबिक मरकजी वजीर यशवंत सिन्हा ने उन्हें नालायक बेटा तक करार दे दिया, लेकिन वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी ने खामोश रहकर अपने दोनां वजीरों की हरकतों को जायज ठहरा दिया। खुद वजीर-ए-आजम मोदी ने राजस्थान और हरियाणा में हुए लिंचिंग के कई वाक्यात पर कहा था कि गाय के नाम पर किसी इंसान की जान लेने की इजाजत किसी को नहीं दी जा सकती। उन्होने तमाम रियासती सरकारों को हिदायत दी थी कि वह लिंचिंग के खिलाफ सख्त कार्रवाई करें। छः सितम्बर 2017 को फिर तीन जुलाई 2018 को दस महीनों में दो बार लिंचिंग के वाक्यात पर सख्त नाराजगी जाहिर करते हुए तमाम रियासती सरकारों को हिदायत दी कि वह इन वारदात को सख्ती के साथ रोकने का काम करे। छः सितम्बर 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने रियासती सरकारों को हिदायत दी थी कि वह जिलों में डिप्टी एसपी सतह के अफसर को नोडल अफसर बना कर लिंचिंग की वारदातों पर न सिर्फ नजर रखें बल्कि उन्हें रोके। किसी भी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट और वजीर-ए-आजम मोदी की हिदायतों पर अमल नहीं किया लिंचिंग के वाक्यात पेश आते रहे और यह दोनों खामोश तमाशाई बन कर देखते रहे। मोदी ने एक बार भी अपने बनाए हुए चीफ मिनिस्टर्स से कुछ नहीं कहा।
वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी और सुप्रीम कोर्ट की सख्त हिदायत के बाद भी उत्तर प्रदेश से महाराष्ट्र, त्रिपुरा और असम तक न सिर्फ लिंचिंग के वाक्यात जारी हैं बल्कि उत्तर प्रदेश के पिलखुवा में अटठारह जून को कासिम को पीट-पीट कर मार डालने और समीउद्दीन को संगीन तौर पर जख्मी करने वाले गुण्डों की हिफाजत करते हुए उत्तर प्रदेश पुलिस दिखाई पड़ी। इस शर्मनाक वारदात का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो प्रदेश के पुलिस चीफ को माफी मांगनी पड़ी। सरकार ने इस शर्मनाक वारदात में शामिल दारोगा अश्विन कुमार, कांस्टेबिल अशोक कुमार और कन्हैया लाल को लाइन हाजिर करके अपनी जिम्मेदारी पूरी कर ली उन्हें मुअत्तल तक नहीं किया गया।
लिंचिंग की घिनौनी हरकतों में अक्सर ऐसे ही गुण्डों को मुलव्विस पाया गया है जिनका ताल्लुक बीजेपी, आरएसएस, विश्व हिन्दू परिषद और बजरंग दल से निकलता है। इन सभी को मोदी की मरकजी और प्रदेशों की बीजेपी सरकारों की पुश्तपनाही हासिल है। इसके एक नहीं दर्जनों सबूत सामने हैं। जयंत सिन्हा और गिरिराज सिंह ने जो शर्मनाक हरकतें की हैं वह तो सामने हैं ही इससे पहले राजस्थान के होम मिनिस्टर गुलाबचंद कटारिया ने पहलू खान समेत पांच-छः मुसलमानों को पीट-पीट कर मार डालने वाले गुण्डों को खुल कर बचाते नजर आए थे। उन्होनें तकरीबन सभी को बचा भी लिया और मोदी खामोश रहे। इससे पहले अखलाक की लिंचिंग में शामिल एक गुण्डे की जेल में मौत हो गई थी तो तिरंगे में उसकी लाश लपेट कर रखी गई थी। मोदी के वजीर महेश शर्मा ने बिसाहड़ा गांव जाकर तिरंगे में लिपटी मुल्जिम की लाश को सलामी तक दी थी। एक मुसलमान को मार कर जलाने वाले शम्भू लाल रैगर जेल गया तो उसकी मदद की अपील बजरंग दल ने की उसकी बीवी के बैंक खाते में एक हफ्ते में ही आनलाइन चंदे की शक्ल में तकरीबन दस लाख रूपए इकट्ठा हो गए। मोदी और वसुंधरा सरकारें खामोश रहीं। उसकी पेशी के दिन गुण्डों ने अदालत की छत पर चढकर तिरंगा हटा कर भगवा फहराया कोई कार्रवाई नहीं हुई। इंतेहा ते तब हो गई जब राम नवमी के जुलूस में कातिल रैगर की झांकी शामिल करके उसे भगवान राम के बराबर खड़ा करके राम की तौहीन का पाप किया गया। कठुआ में मासूम बच्ची को रेप करके कत्ल करने की शर्मनाक हरकत में भी मंदिर को नापाक किया गया तो मुल्जिमान को बचाने के लिए उस वक्त के बीजेपी के दो वजीरों लाल सिंह और चन्द्र प्रकाश गंगा हिन्दू एकता दल बनवा कर पुलिस को अदालत जाने से रोकने के आंदोलन में शामिल हो गए। सरकार जाने के बाद उन्हीं लाल सिंह ने मीडिया को धमकाते हुए हद में रहने के लिए कह दिया। ऐसे पचासों और वाक्यात हैं लेकिन तमाम मामलात में शामिल अपनी पार्टी के गुण्डों के खिलाफ वजीर-ए-आजम मोदी न कुछ बोले और न कोई कार्रवाई कराई। उनके इस रवैय्ये का क्या मतलब है? पूरा देश जानता है कि आज की बीजेपी में मोदी की मर्जी के बगैर पत्ता भी नहीं हिल सकता। कांग्रेस तर्जुमान प्रियंका चतुर्वेदी की दस साल की बेटी तक को रेप करने की धमकी देने वाला गिरीश माहेश्वरी पांच जुलाई को अहमदाबाद के करीब बावला में गिरफ्तार हुआ तो उसने भी खुद को बीजेपी और बजरंग दल का सरगर्म वर्कर बताया।
कांग्रेस के सीनियर लीडर प्रमोद तिवारी ने जयंत सिन्हा और गिरिराज सिंह को बर्खास्त करने का मतालबा किया तो प्रमोद तिवारी पर ही हमले शुरू हो गए। जयंत सिन्हा के वालिद यशवंत सिन्हा ने कहा कि जयंत सिन्हा उनका नालायक बेटा साबित हुआ है। उसने जिस तरह कातिलों की हर-फूल पहनाकर उनकी हौसलाअफजाई की है उससे हालात और भी ज्यादा खराब होगे और वह अगला एलक्शन भी जीत नहीं पाएगा। जयंत सिन्हा यही कहते रहे कि फास्ट टै्रक कोर्ट ने अलीम उद्दीन अंसारी को पीट-पीटकर मार डालने वाले जिन ग्यारह लोगों को उम्र कैद की सजा सुनाई थी रांची हाई कोर्ट ने उनकी सजा पर स्टे देकर उन्हें जमानत दे दी तभी वह उनसे मिलने गए थे। उनका ताल्लुक बीजेपी से है वह हमारे वर्कर हें जयंत सिन्हा हावर्ड युनिवर्सिटी से तालीम हासिल करके आए हैं फिर भी यह नहीं समझते कि सजा पर स्टे हुआ है मुल्जिमान बरी नहीं हुए हैं।
‘‘व्हाट्सऐप और सोशल मीडिया पर आती यह तस्वीर देखकर दिल को बहुत तकलीफ होती है। सरे आम मुल्जिमान को फूलों की माला पहनाकर बहुत ही गंदा संदेश दिया जा रहा है, बताया जा रहा है कि देखो – हम मारेंगे, हम काटेंगे भी और फिर हम बाद में मारने वाले का फूलों से इस्तकबाल भी करेंगे। जिसका घर उजड़ गया, उसका कोई ख्याल नहीं है लेकिन जिन गुण्डों ने घर उजाड़ा है, उसका दिल से खैरमकदम करेंगे, सरेआम, बीच सड़क, बीच राह पर।“
यह अल्फाज शमा परवीन के हैं जिनके वालिद अलीमुद्दीन अंसारी को गुजिश्ता साल 29 जून को भीड़ ने भरे बाजार सड़क पर पीट-पीटकर मार डाला था। इस मामले के लिए बनाई गई फास्ट ट्रैक कोर्ट ने 11 मुल्जिमान को मुजरिम मानकर उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई थी जिनमें एक बीजेपी लीडर नित्यानंद महतो भी शामिल है। जब यह मामला रांची हाईकोर्ट पहुंचा तो हाईकोर्ट ने इन लोगों की सजा पर स्टे लगाकर उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया।
याद रहे कि छः जुलाई को जब यह लोग जेल से छूटे तो मरकजी वजीर जयंत सिन्हा ने हार पहनाकर उनका खैरमकदम किया। उनकी यह तस्वीरें इंटरनेट पर शेयर की जा रही हैं।
अलीमुद्दीन अंसारी की मौत के मामले में शुरुआती पुलिस जांच के मुताबिक, गौ रक्षकों के नाम पर गुण्डों के एक गरोह ने उनका 15 किलोमीटर तक पीछा करने के बाद बाजाटांड़ इलाके में भीड़ देखकर गाय का गोश्त ढोए जाने का शोर मचाया था। इसके बाद भीड़ में शामिल लोगों ने सरेआम पीट-पीटकर उन्हें बुरी तरह जख्मी कर दिया। लोगों ने उनकी गाड़ी भी फूंक दी थी। बाद में अस्पताल ले जाते वक्त अलीमुद्दीन की मौत हो गई।
मरकजी वजीर जयंत सिन्हा के साथ मुल्जिमान की माला पहने तस्वीरें देखकर मजरूह (आहत) होतीं अलीमुद्दीन की बड़ी बेटी शमा परवीन कहती हैं, ‘‘मोदी सरकार हमें क्या पैगाम देना चाहती है। मैं कहूंगी कि जो लोग भी यह तस्वीरें देख रहे हैं वह समझें कि क्या पैगाम देने की कोशिश की जा रही है। बड़ी तकलीफ हो रही है टीवी चैनलों पर यह तस्वीरें देखकर जिसमें एक शख्स जिसने किसी के कपड़ों को खून से रंग दिया, उसे लाल फूलों का हार पहनाया जा रहा है।“ शमा परवीन कहती हैं, ‘‘वह मरकजी वजीर हैं, ताकतवर हैं लेकिन आम आदमी जब किसी को इतनी ताकत देता है तो उसे उसकी हैसियत भी बता सकता है। अलीमुद्दीन अंसारी के बेटे शहजाद और उनकी बीवी मरियम खातून इस मामले में सुप्रीम कोर्ट तक जाने की बात करते हैं। मरियम खातून कहती हैं, ‘‘हमें अभी भी कानून पर पूरा भरोसा है। हम यह चाहते हैं कि जो कुसूरवार है, उन्हें सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए लेकिन बेकुसूरों को सजा नहीं मिलनी चाहिए।“
हजारीबाग से लोक सभा मेम्बर और मोदी के वजीर जयंत सिन्हा ने भारतीय जनता पार्टी के उन लीडरों का खैरमकदम किया जिन्हें कोर्ट ने अलीमुद्दीन की मौत के मामले में मुजरिम करार दिया था। सोशल मीडिया पर लोगों ने सवाल उठाया कि जिनपर कानून की हिफाजत की जिम्मेदारी है वह उन लोगों की इज्जत अफजाई कैसे कर सकते हैं जो मुजरिम हैं।
जयंत सिन्हा ने फास्ट ट्रैक कोर्ट के फैसले पर बात करते हुए कहा, ‘‘मैंने बार-बार फास्ट-ट्रैक कोर्ट के जरिए हर मुल्जिम को उम्र कैद की सजा दिए जाने पर अपना एतराज जताया है। मैं खुश हूं कि हाई कोर्ट इस मामले को अपीलीय अदालत की तरह फास्ट ट्रैक कोर्ट के फैसले की कानूनी पोजीशन की जांच करेगा। मुझे हमारी अदलिया (न्याय व्यवस्था) पर पूरा भरोसा है। मेरे काम के बारे में गैर-जिम्मेदाराना बयान दिए जा रहे हैं जबकि मैं कानूनी कार्रवाई की इज्जत कर रहा हूं। जो लोग बेगुनाह हैं वह छूट जाएंगे और मुजरिमों को मुनासिब सजा मिलेगी।“ इस तरह जयंत सिन्हा ने अपने वालिद यशवंत सिन्हा को भी गैर जिम्मेदार करार दे दिया।
झारखंड मुक्ति मोर्चा के लीडर हेमंत सोरेन ने ट्वीट करके कहा है कि ‘‘क्या भेदभाव पैदा करना और मुल्जिमान की हिमायत करना बीजेपी के लिए तरक्की का माडल है।“ इस पूरे मामले में जयंत सिन्हा के वालिद यशवंत सिन्हा ने ट्वीट किया है कि ‘‘पहले मैं एक लायक बेटे का नालायक बाप था, लेकिन अब रोल तब्दील हो गए हैं। मैं अपने बेटे की हरकतों की हिमायत नहीं करता। अब वह एक लायक बाप का नालायक बेटा बन गया है।“ पिछले साल 29 जून को रामगढ़ में गोश्त कारोबारी अलीमुद्दीन को पीट-पीटकर कत्ल कर दिया गया था। वह अपनी मारुती वैन से गोश्त लेकर जा रहे थे तो उसे गाय का गोश्त बताकर उन्हें पीटा गया जिससे उनकी मौत हो गई।
इस मामले में रामगढ़ की फास्ट टै्रक कोर्ट में ग्यारह लोगों के खिलाफ कत्ल का इल्जाम साबित हुआ था जिनमें से तीन लोगों के खिलाफ कत्ल की साजिश रचने का भी इल्जाम साबित हुआ था। जिन मुल्जिमान पर इल्जाम साबित हुआ था उनमें बीजेपी लीडर नित्यानंद महतो भी शामिल है। फास्ट्र ट्रैक कोर्ट ने जब इन ग्यारह लोगों को उम्र-कैद की सजा सुनाई तो बीजेपी लीडरान ने सीबीआई से इस मामले की जांच कराए जाने की मांग उठाई। जयंत सिन्हा ने भी पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग की थी।
मुजरिमों ने रांची हाईकोर्ट में अपील की जिसकी सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने सजा पर फिलहाल रोक लगा दी है और मुजरिमीन को जमानत पर रिहा किया है।