क्रिमिनल्स और नक्सलियों को असलहे कारतूस बेच रही नितीश पुलिस?

क्रिमिनल्स और नक्सलियों को असलहे कारतूस बेच रही नितीश पुलिस?

पुलिस असलहा खाने से गायब हो गए हजारों कारतूस, कहां गए वजह नहीं बताई जा रही है, शराब की तरह कारतूस तो नहीं खा गए चूहे, सोशल मीडिया पर उड़ रहा मजाक

नुमाइंदा खुसूसी

पटना! समस्तीपुर, सीवान और पटना पुलिस लाइन समेत कई जिलों के असलहाखानों (शस्त्रागारों) से हजारों कारतूस और कई असलहों के गायब होने की बात पिछले दिनों सामने आई है। जांच में पता चला है कि कारतूसों और असलहों के गायब होने का सिलसिला 1999से चल रहा था। 19 साल से कारतूसों के गायब होने की बात सामने आने के बावजूद सिर्फ 4000 से ज्यादा कारतूस गायब होने की बात कही जा रही है। इस मामले में एक मेजर समेत दो रिटायर्ड सूबेदारो को नामजद किया गया है। मगर यह कारतूस और असलहे कहां गए और अब तक इस का पता क्यों नहीं चला इस बारे में कोई पुलिस अफसर बोलने के लिए तैयार नहीं है। सोशल मीडिया पर पुलिस का मजाक उड़ाते हुए कहा जा रहा है कि जब पुलिस मालखाने में रखी सैकडो लीटर शराब चूहे पी सकते हैं तो हजारों कारतूस भी खा सकते हैं। जबकि बड़ी तादाद में लोगों को शक है कि असलहाखाना से कारतूसों और असलहों को चुरा कर पुलिस वाले उन्हें क्रिमिनल्स और नक्सलियों को बेच देते हैं।

कारतूसों और असलहों के गायब होने का सिलसिला पिछले 19 साल से चल रहा था इस बीच किसी ने असलहों और कारतूसों की गिनती नहीं कराई इसी से शक होता है कि उसके तार नीचे से ऊपर तक के पुलिस अफसरों से जुड़े हैं। यह बात सब जानते हैं कि पुलिस वालों को गिन कर कारतूस दिए जाते हैं और उनका पूरा हिसाब रखा जाता है। ऐसे में कारतूसों का गायब हो जाना और किसी को उसका पता न लगना शक पैदा करता है। पुलिस अफसर चूंकि कुछ साफ बात नहीं कर रहे हैं और सिर्फ जांच कराई जा रही है। इस वजह से बिहार के आम लोगों का कहना है कि नितीश कुमार की नाक के नीचे कारतूसों के गायब होने का खेल चल रहा था और उन्हें कुछ मालूम नहीं हो सका तो इससे लगता है कि पुलिस पर उनका कोई कंट्रोल नहीं है। यही वजह है कि बिहार के लोग न सिर्फ सोशल मीडिया पर पुलिस का मजाक उड़ा रहे हैं बल्कि इल्जाम भी लगा रहे हैं कि पुलिस वालां ने असलहे और कारतूस चुरा कर बेच दिए हैं और चोरी का यह सिलसिला 1999 से जारी था। ऐसे में यह कहना कि 4000 या उससे कुछ ज्यादा कारतूस ही गायब हैं मुल्जिम पुलिस वालों को बचाने या उनका जुर्म हल्का करने की कोशिश है। जब कोई हिसाब ही नहीं है तो फिर यह कैसे कहा जा सकता है कि कितने कारतूस और कितने असलहे गायब हैं। यह सिर्फ एक समस्तीपुर का मामला नहीं है सीवान पुलिस लाइन से भी कारतूस व असलहे गायब हो चुके हैं और पटना पुलिस लाइन से भी। यह मामला सामने आने के बाद बिहार के हर जिले की पुलिस लाइन और असलहाखाने में रखे कारतूसों और असलहों का वेरीफिकेशन (सत्यापन) कराकर उसकी तफसील अवाम के सामने पेश की जाए वर्ना अवाम तो यही समझेगे कि पुलिस वाले असलहे और कारतूस चुरा कर क्रिमिनल्स और नक्सलियों को बेच रहे हैं?

बिहार में शराब पीने के बाद अब पुलिस के हथियार व कारतूस भी चूहे खाने लगे हैं। सूबे के समस्तीपुर जिले के पुलिस असलहाखाने (शस्त्रागार) से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है, जहां चार हजार से ज्यादा गोली के गायब होने का मामला सामने आया है। इस बात का खुलासा तब हुआ जब वेरीफिकेशन के लिए असलहाखाने में आर्म्स-कारतूस की गिनती चल रही थी। इसके पहले सीवान जिले के पुलिस लाइन से भी भारी तादाद में हथियार व कारतूस गायब हो चुके हैं। हासिल हुई जानकारी के मुताबिक समस्तीपुर पुलिस लाइन के असलहाखाने और इससे मुताल्लिक कागजात की जांच में वहां से चार हजार कारतूस गायब होने का मामला उजागर हुआ। जांच के बाद इस बाबत मुफस्सिल थाना में एफआइआर दर्ज की गई है। इसमें 1999 से चल रही इस बेजाब्तगी (अनियमितता) का पर्दाफाश करते हुए मेजर, दो रिटायर्ड सूबेदार समेत 12 लोगों को नामजद किया गया है। बताया जाता है कि मौजूदा पुलिस कप्तान ने अपने तआवुन (योगदान) के कुछ दिनों बाद ही पुलिस लाइन में अपने जायजे के दौरान इस बेजाब्तगी (अनियमितता) को पकड़ा था। इसकी जांच के लिए उन्होंने दलसिंह राय डीएसपी की कयादत में एक कमेटी बनाई थी। जांच कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद  आइजी कुंदन ने फिर मामले की जांच की। तब जाकर पहली जुलाई को एफआइआर दर्ज करने का आर्डर दिया गया। पुलिस कप्तान ने मामले की जांच के लिए जो कमेटी बनाई, उसने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि कारतूस गायब होने का यह खेल 1999 से ही जारी था। यह 2000, 2001, 2004, 2013 और 2016 तक बेरोकटोक चलता रहा। इन बरसों में अभी तक चार हजार कारतूस का पता नहीं चल पाया। इस बाबत आम लोगों ने सोशल मीडिया पर तंज कसा है कि शराबबंदी के दौर में जब पुलिस मालखाने में रखी शराब चूहे पी सकते हैं तो भला कारतूस क्यों नहीं खा सकते। हालांकि, एसपी दीपक रंजन जांच के बाद कार्रवाई की यकीन दहानी कराई हैं।

दरभंगा हलके के आईजी ने समस्तीपुर पहुंच कर पुलिस कप्तान और पुलिस अफसरान के साथ एक मीटिंग भी की। वहीं, गायब गोली के मामले को लेकर पुलिस का कोई भी अफसर कुछ भी बोलने से बचते नजर आया। इससे पहले, सीवान पुलिस लाइन में भी 1 राइफल के साथ 28 गोलियां, दो पिस्टल के साथ 57 गोलियां गायब पाई गई हैं। इस बार पटना पुलिस लाइन के असलहाखाने से कई हथियार गायब होने की खबर आ रही है। न तो हथियारों का हिसाब मिल रहा है और न ही पुलिस के आला अफसरान इस मामले में कुछ कहने को तैयार हैं।

जराए के मुताबिक पटना पुलिस लाइन वाके असलहाखाने से 7 बोल्ट एक्शन राइफल गायब हैं। असलहाखाने की जांच में इन हथियारों का रिकार्ड नहीं मिल पा रहा है। बोल्ट एक्शन राइफल के अलावा कई रिवाल्वर पिस्टल भी गायब हैं। हालांकि अभी कितने हथियार गायब हैं, इसकी गिनती पूरी नहीं हो सकी है। कुछ दिनों में इसकी पूरी तादाद का पता चल पाएगा। काबिले जिक्र है कि डीजीपी के एस द्विवेदी ने जिला पुलिस के सभी असलहाखाने को जांच करने के हुक्म दिये थे। इसके बाद जिला पुलिस के हथियारों और गोलियों की जांच शुरू की गई थी। हालांकि पुलिस लाइन के असलहाखाने की जांच अभी आखिरी मरहले में है और अभी ही काफी हथियारों के गायब होने की इत्तेला आ रही है। मामले को लेकर पुलिस मोहकमे में हड़कंप मची हुई है।यहा बता दें कि पिछले साल पटना के एसएसपी मनु महाराज ने पटना नगर निगम चुनाव से पहले थानेदारों की मीटिंग बुलाई थी। इसी दौरान मनु महाराज ने थानेदारों से पूछा था कि शराबबंदी लागू होने के बाद जितनी भी शराब जब्त हुई है और जिसे थाने के मालखाने में रखा गया, उसमें कमी क्यों आ रही है? इस सवाल के बाद थानेदारों ने जो कहा वह वाकई चौंकाने वाला था।

थानेदारों ने कहा था करोडों की शराब मालखाने से इसलिए गायब हो गई है क्योंकि उस शराब को चूहों ने पी लिया। ऐसे में सोशल मीडिया पर लोग तंज कर रहे है कि जब चूहे शराब पी सकते है तो कारतूस क्यों नहीं खा सकते हैं। लेकिन इतना मजाक उड़ने के बाद भी पुलिस अफसरान बता नहीं पा रहे है कि असलहे और कारतूस कहां चले गए? क्या इन्हें बेच दिया गया है इस सवाल पर सभी पुलिस अफसरान और मुलाजिम खामोशी अख्तियार कर लेते हैं।