हिन्दुस्तान और वजीर-ए-आजम का मजाक उड़वा रहे हैं मोदी

हिन्दुस्तान और वजीर-ए-आजम का मजाक उड़वा रहे हैं मोदी

नुमाइंदा खुसूसी

मगहर(संतकबीरनगर)! वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी ने मगहर में संत कबीर दास को बाबा गोरखनाथ और गुरू नानक देव को हमअस्र बता दिया और यह भी कहा कि यह तीनों संत और महापुरूष मगहर में बैठ कर ‘आध्यात्मिक चर्चा’ किया करते थे। दुनिया के सबसे बडे़ जम्हूरी मुल्क का वजीर-ए-आजम अवामी जलसे में ऐसी बातें करे जिनका तारीखी हकायक से दूर-दूर का वास्ता न हो तो उसे तारीख के इल्म से नाबलद ही कहा जाएगा। वजीर-ए-आजम एक बार नहीं कई बार ऐसी बातें कर चुके हैं जिनकी तारीख में कोई सनद नहीं मिलती तो क्या यह समझा जाए कि वह निरे जाहिल हैं या फिर जानबूझ कर ऐसे शोशे छोड़ते हैं या फिर उनके मातहत अफसर जिनके जिम्मे उनकी तकारीर तैयार करने का काम है उन्हें तारीख की एबीसी भी नहीं मालूम तभी तो उनसे बार-बार गलतियां सर जद हो रही हैं। ऐसी बातें करने के पीछे वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी का चाहे जो भी मंशा हो मगर इसकी वजह से वजीर-ए-आजम के ओहदे और मुल्क की साख को बराबर धक्का पहुंच रहा है। वह एक बार तक्षशिला को बिहार में बता चुके हैं जो कि पंजाब में था और अब वह पाकिस्तान में है उन्होने कोनार्क के सूर्य मंदिर को दो हजार साल पुराना बता दिया था जबकि वह महज सात सौ बरस पहले तामीर हुआ था। अभी मई में वजीर-ए-आजम ने कांग्रेस को कठघरे में  खड़ा करने के लिए यह इल्जाम लगाया था कि कोई कांग्रेसी भगत सिंह से मिलने जेल नहीं गया था, यह भी कोरा झूट साबित हुआ। मोदी भक्त उनकी लफ्फाजी से चाहे जितना खुश हों लेकिन उनकी इस तरह की बातों से दुनिया में हिन्दु़स्तान और वजीर-ए-आजम के ओहदे का मजाक बनवाने के मुरतकिब हो रहे हैं।

वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी ने मगहर में संत कबीर दास की 620वीं सालगिरह पर खिराजे अकीदत पेश करने के बहाने समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी को जो कहना था वह कहा ही कांग्रेस को खास तौर पर निशाने पर रखा और आदत के मुताबिक अपनी गढी हुई तारीख को अवाम के सामने बयान करने से बाज नहीं आए। उन्होने संत कबीर दास, बाबू गोरखनाथ और गुरू नानक को न सिर्फ हमअस्र (समकालीन) बता दिया बल्कि यहां तक कह गए कि इन तीनों अजीम हस्तियों ने मगहर में एक साथ बैठकर ‘अध्यात्मिक’ चर्चा भी की थी। नरेन्द्र मोदी की जबान से अदा हुए इन जुमलों को सुनकर लोगों के होश इसलिए उड़ गए क्योंकि यह हस्तियां बरसों के फर्क से नहीं सदियों के फर्क से दुनिया में आईं। बाबा गोरखनाथ ग्यारहवीं सदी में पैदा हुए। कबीर का जन्म 1398 में हुआ था जबकि गुरूनानक 1479 में पैदा हुए थे। मोदी की तकरीर की एक खास बात और रही कि अभी तक जब भी संतों का जिक्र होता है सूफियों की तालीमात को लाजमी तौरपर याद किया जाता है मगर मोदी ने अपनी तकरीर में एक भी सूफी का जिक्र नहीं किया शायद इसलिए कि इनका ताल्लुक इस्लाम से था और वह मुसलमान थे लेकिन मुसलमानों को इस तरह से याद किया कि मुस्लिम बहनें आज तमाम धमकियो की परवा किए बगैर तीन तलाक को खत्म करने की मांग कर रही हैं।

सबसे अहम बात यह है कि प्रिंट मीडिया जो उनकी तकरीरों को बड़ी तफसील से छापता है उसकी रिपोर्टिग में इसका कहीं भी जिक्र नहीं है कि वजीर-ए-आजम ने अपनी तकरीर के दौरान संत कबीर दास, बाबा गोरखनाथ और गुरू नानक को हमअस्र बताया था। यह बीजेपी का मीडिया मेनेजमेट था या शायद नरेन्द्र मोदी की गलती की इस्लाह करते हुए अखबारात ने तारीखी हकायक से छेड़छाड़ करने वाली उनकी बातों को खारिज करना ही बेहतर समझा। ऐसा नही है कि नरेन्द्र मोदी से ऐसी गलती पहली बार सरजद हुई है इससे पहले उन्होने पटना की एक रैली में 2013 में पाटलीपुत्र, नालंदा और अशोक के साथ तक्षशिला को बिहार की ताकत बता दिया था जबकि तक्षशिला पंजाब में था जो कि अब पाकिस्तान में है। इसी तरह एक तकरीर में कोनार्क के सूर्यमंदिर को दोहजार साल पुराना बता दिया था जबकि यह मशहूर मंदिर महज सात सौ साल पुराना है। इसी तरह मोदी ने मई 2018 में एक मौके पर कांग्रेस पर यह इल्जाम लगाया था कि शहीद भगत सिंह जेल में थे तो उनसे कोई कांग्रेसी लीडर मिलने नहीं गया था मगर जब यह सच्चाई सामने आई कि कौन-कौन लीडर उनसे जेल में मिलने गए थे तो संघ, बीजेपी और तमाम मोदी भक्तों की जबानों पर ताले पड़ गए थे।

मगहर पहुच कर नरेन्द्र मोदी ने संत कबीर दास की मजार पर चादर चढाई और गुलहाए अकीदत पेश किया और बाद में एक अवामी जलसे को खिताब किया तो यह जलसा संत कबीर के यौमे पैदाइश पर होने वाले जलसे के बजाए जल्द ही इंतखाबी जलसे में तब्दील हो गया। उन्होने कहा कुछ सियासी पार्टियां ‘महापुरूषों’ के नाम पर खुद गरजी की सियासत कर रही हैं। उन्होने कहा कि कबीर ने सारी जिंदगी उसूलों पर ध्यान दिया कभी किसी चीज की लालच नहीं की लेकिन गरीबांं को झूटा दिलासा देने वाले और समाजवाद और बहुजनसमाज की बात करने वालां का एक्तेदार के तयीं आज हम बखूबी देख रहे हैं। एक्तेदार का लालच ऐसा है कि इमरजेसी लगाने वाले और उसकी मुखालिफत करने वाले कांधे से कांधा मिलाकर कुर्सी झटकने की फिराक में घूम रहे हैं। वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी ने कहा कि वक्त के लम्बे अर्से में संत कबीर के बाद रैदास आए सैकड़ों बरस बाद महात्मा फुले आए, महात्मा गांधी आए बाबा साहेब अम्बेडकर आए। समाज में फैले अदम मसावात को दूर करने के लिए सभी ने अपने-अपने तरीके से रास्ता दिखाया। बाबा साहेब ने हमें एक आईन दिया, एक शहरी के तौर पर सभी को बराबरी का हक दिया। बदकिस्मती से आज इन्हीं ‘महापुरूषों’ के नाम पर खुद गरजी और मौकापरस्ती की सियासत कुछ पार्टियां कर रही हैं और समाज को तोड़ने की कोशिशों में मसरूफ हैं। कुछ पार्टियों को समाज में अम्न व तरक्की नहीं हैजान और बदअम्नी चाहिए क्योंकि उनको लगता है कि जितनी बेइत्मीनानी और बदअम्नी का माहौल बनाएंगे उतना ही उनको सियासी फायदा होगा। लेकिन सच्चाई यह है कि ऐसे लोग जमीन से कट चुके हैं। उन्हें अंदाजा नहीं कि संत कबीर, महात्मा गांधी और बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर को मानने वाले हमारे मुल्क का अस्ल मिजाज क्या है। कबीर कहते थे कि अपने अंदर झांको सच मिलेगा लेकिन उन्होने कबीर को कभी संजदगी से पढा ही नहीं। इन पार्टियों और उनके लीडरों का ध्यान अवाम और समाज की तरक्की पर नहीं बल्कि अपने आलीशान बंगले पर लगा हुआ है। मोदी ने इस अवामी जलसे को पूरी तरह से इंतखाबी जलसे में तब्दील करते हुए कहा कि मुझे याद है जब गरीब और मिडिल क्लास को घर देने के लिए प्रधान मंत्री आवास योजना शुरू हुई तो पहले वाली सरकार (समाजवादी सरकार) का रवैया क्या था। हमने खत लिखे, कई बार फोन पर बात की…लेकिन वह ऐसी सरकार थी जिसको अपने बंगले की फिक्र में दिलचस्पी थी। अब उत्तर प्रदेश में बीजेपी की सरकार के आने के बाद गरीबों के लिए रिकार्ड तादाद में मकानों की तामीर करवाई जा रही है। उन्होने यह भी कहा कि ऐसी पार्टियों को अपने मफाद की फिक्र है। गरीब, महरूम, दबे कुचले तबके, दलितों और पिछड़ों को धोका देकर अपने लिए करोड़ों रूपए के बंगले बनाने वाले… भाइयों और रिश्तेदारों को करोड़ों अरबों की इमलाक का मालिक बना दिया। ऐेसे लोगों से मुल्क और सूबे के लोगों को होशियार रहने की जरूरत है।

वजीर-ए-आजम की इन बातों पर चुटकी लेते हुए एक सीनियर लीडर ने कहा कि वजीर-ए-आजम ने मगहर में समजावादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के हवाले से जो-जो बातें कही हैं दरअस्ल वह बातें खुद नरेन्द्र मोदी और उनकी बीजेपी पर फिट बैठती हैं क्योंकि उन्होने और उनकी पार्टी ने अवाम से जो-जो वादे किए थे उनका चार साल में क्या हश्र हुआ है यह किसी से छुपा नहीं है। दरअस्ल मोदी और बीजेपी ने अवाम को ठगने के लिए कोई काम नहीं किया है। अब लोग उनकी सलाहियत जान चुके हैं इसलिए बीजेपी और उसके लीडरान अपोजीशन पार्टियों पर बेबुनियाद और बेहूदा इल्जाम लगा रहे हैं।

मुल्क की दूसरी बड़ी अक्सरियत मुसलमानों का तीन तलाक के हवाले से जिक्र करते हुए नरेन्द्र मोदी ने कहा कि आपने तीन तलाक पर इन लोगों का रवैया देखा है। मुल्क भर में मुस्लिम बहनें आज तमाम धमकियां के बावजूद तीन तलाक हटाने की मांग कर रही हैं। लेकिन एक्तेदार के लिए वोट बैंक का खेल खेलने वाले तीन तलाक बिल के पास होने में रोड़े अटका रहे हैं। यह लोग अपने मफाद में समाज को हमेशा कमजोर रखना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि आज कई खानदान खुद को अवाम का निजात दिलाने वाला मानकर कबीर की बातों को पूरे तौर से खारिज करने में लगे हैं। कबीर मेहनत कश थे और मेहनत की अहमियत को समझते थे लेकिन आजादी के इतने सालों तक हमारे पालीसीसाजों ने कबीर के इस फलसफे को नहीं समझा। गरीबी हटाने के नाम पर वह गरीबों की वोट बैंक की सियासत पर मुंहसिर रहे। गुजिश्ता चार बरसों में हमने इन पालीसियों को बदलने की पूरी कोशिश की है।