झारखण्ड की बीजेपी सरकार गायों की जान बचाने में नाकाम

झारखण्ड की बीजेपी सरकार गायों की जान बचाने में नाकाम

नुमाइंदा खुसूसी

देवघर! भारतीय जनता पार्टी की सरकारों वाले प्रदेशों में गायों की हिफाजत के बहाने गौगुण्डे मवेशियों का कारोबार करने वाले मुस्लिम कारोबारियों को अपनी नफरत का निशाना बनाते रहे हैं। लेकिन खुद बीजेपी सरकारों वाली रियासतों में गायों की देखरेख का आलम यह है। गौशालाओं के नाम पर पैसा डकार लिया जाता है और वहां उनकी देखरेख का कोई बंदोबस्त नहीं होता, जिसका नतीजा यह है कि बड़ी तादाद में गौशाला में गायों की मौत हो जाती है। उसी तरह जैसे राजस्थान में हिंगोनिया गौशाला में सैकड़ों गायों की मौत हो चुकी थी। गौशालाओं में गायों की बदहाली का यह आलम तब है जब झारखण्ड सरकार ने ‘झारखण्ड गौसेवा कमीशन’ बनाया और प्रदेश के उससे रजिस्टर्ड गौशालाओं को लाखों रूपए की ग्राण्ट देती है। पिछले दिनों वैद्यनाथ धाम गौशाला मे सौ के करीब गायों की मौत बदइंतजामी की वजह से हो गई। यह हाल तब है जब झारखण्ड में मवेशी परवरी (पशुपालन) के वजीर रणधीर कुमार सिंह देवघर इलाके के ही हैं। 400 गायो की सलाहियत (क्षमता) वाली गौशाला में 900 गायों को ठूंस दिया गया।

देवघर की वैद्यनाथ धाम गौशाला में 100 के करीब हुई गायों की मौत की वजह डाक्टरों ने उन्हें सही गिजा न मिलना बताई है। बडी तादाद में गायें बीमार भी हैं। रांची से देवघर पहुची वेटनरी डाक्टरों की टीम इनके इलाज में लगी है। मगर गायों के लिए मुनासिब गिजा और दवा दोनों की कमी है। गौशाला मैनेजमेट ने इस बारे में एडमिनिस्ट्रेटिव अफसरान को खत भी लिखा है। यह भी पता चला है कि गोरक्षकों के भेष में गौगुण्डे जो मुस्लिम मवेशी ताजिरों से गाय छीनते हैं उनमें से कुछ को वह पुलिस को दे देते हैं जो उन्हें इन गौशालाओं को सौंप देती है। लाखों रूपयों की सरकारी मदद मिलने के बावजूद गायों की सही तरीके से देखभाल न करना बीजेपी का गायों के लिए असल प्यार को जाहिर करता है।

श्रीवैद्यनाथ गौशाला के सेक्रेटरी रमेश बाजला का कहना है कि हमारे यहां 400 गायों को रखने की सलाहियत (क्षमता) है जबकि 500 गायें यहां पहले ही से थीं। इसके बावजूद पुलिस ने पिछले  तीन महीने के दौरान एनीमल क्रूएलटी एक्ट (पशु क्रूरता अधिनियम) के तहत जब्त 400 और गायों को गौशाला को सौंप दिया। वह कहते हैं कि इन्हें कंटेनर में बोरे की तरह ठूंस कर लाया गया था। इन्हें उतारने में ही कुछ गायों की मौत हो गई। जबकि कुछ गायें मरी हुई हालत में ही लाई गई थी। कई गायें बीमार और जख्मी थीं। भूक-प्यास से कई गायों की हालत खराब थी। वह मरने के करीब थी। इस वजह से पिछले एक महीने में 80 से ज्यादा गायों की मौत हो गई। इसलिए हमने गौशाला के सदर और देवघर के एसडीओ को खत लिखकर मदद की गुहार लगाई हैं। देवघर के एसडीओ रामनिवास यादव ने इस मामले पर कहा कि गौशाला समिति को लम्बे वक्त से कोई फण्ड नहीं मिला है इस वजह से 40 एकड़ में फैली गौशाला में नए शेड की तामीर नहीं हो पाई है। साथ ही रकम के फुकदान (अभाव) में चारे की खरीद भी नहीं हो सकी है। ऊपर से पुलिस की पकड़ी गायें भी गौशाला में भेज दी गई। गोड्डा से पुलिस की लाई हुई पांच गायें उतारते वक्त ही मर गई और बीस बीमार हालत में पहुची थी। इनका इलाज शुरू हुआ लेकिन पैसे की कमी में गौशाला समिति के लोग मुनासिब इलाज नहीं करा सके। इस वजह से कुछ गायों की मौत हो गई।

झारखण्ड के जराअत और मवेशी परवरी के वजीर रणधीर कुमार सिंह देवघर जिले की ही असम्बली में नुमाइदगी करते हैं। इसके बावजूद गौशाला मैनेजमेट के दावे के बावजूद ग्राण्ट की रकम नहीं मिली। इतनी बडी तादाद में गायों की मौत के बारे में जब वजीर का रद्देअमल जानने की कोशिश की गई तो  उन्होने कुछ भी बोलने से इंकार कर दिया। उन्होने कहा कि चूंकि वैद्यनाथ गौशाला प्राइवेट है इसलिए उनका इस मसले पर बोलना मुनासिब नहीं। झारखण्ड के वजीर-ए-आला रघुवर दास सरकार ने गायों की हिफाजत के मद्देनजर 2016 में झारखण्ड गौसेवा आयोग बनाया था इसके जरिए सरकार सूबे भर की रजिस्टर्ड गौशालाओं को लाखों ग्राण्ट देती है। देवघर की श्रीवैद्यनाथ गौशाला भी इससे रजिस्टर्ड है और इसे सरकारी ग्राण्ट भी मिलती रही है। गौशाला के सेक्रेटरी का कहना है कि  पिछले दो साल से ग्राण्ट मिलने में दिक्कत होने लगी है। जबकि इसी दौरान वजीर-ए-आला रघुवर दास ने कई बार गायों की हिफाजत करने का अवामी तौर पर अज्म किया है। एक अखबार को दिए इंटरव्यू में वजीर-ए-आला रघुवर दास ने कहा था कि ‘जो लोग भारत को अपना देश मानते हैं उन्हें गाय को मां के तौर पर मानना चाहिए। आप किसी भी मजहब-जात के हों लेकिन हमें गायों की हिफाजत करनी चाहिए। हमारी सरकार गायों की हिफाजत के लिए मुमकिन कदम उठा रही है।’

श्रीवैद्यनाथ गौशाला के सेक्रेटरी रमेश बाजला कहते हैं कि गायों को सरकार नहीं बचा पा रही है। झारखण्ड में अगर गाये बच रही हैं तो उसकी वजह गौशालाएं हैं। इसके बावजूद सरकार अपनी गलती हमारे सर मढने में लगी है। जबकि हम लोग बाजार से उधार लेकर गौमाता की सेवा कर रहे हैं। वह आगे कहते हैं कि सरकार के डाक्टर हमें दवाइयां लिखकर दे देते हैं लेकिन वह अस्पतालों में दस्तयाब नहीं हैं। हमें बाजार से दवा खरीदना पड़ती है। आप समझ सकते हैं कि प्रदेश में गायों की मौत का असली जिम्मेदार कौन है।

देवघर वाके गौशाला मे गायों के इलाज में लगे डाक्टर पंकज कुमार ने बताया कि गायों की मौत की वजह तेज धूप, भूक-प्यास और मुनासिब और जरूरी चारे का नहीं मिलना है। कडी धूप में बगैर शेड के रखी गई गायें तेजी से बीमार पड रही हैं और उनकी मौत हो जा रही है। लेकिन प्रदेश सरकार को यह सब नजर नहीं आ रहा है। इसके वजीर रजिस्टर्ड गौशाला को प्राइवेट बताकर अपना दामन बचा रहे हैं।