नितीश को ठुकरा कर तेजस्वी के साथ हुए हार्दिक पटेल

नितीश को ठुकरा कर तेजस्वी के साथ हुए हार्दिक पटेल

नुमाइंदा खुसूसी

पटना! पटेल (कुर्मी) बिरादरी से ताल्लुक होने की वजह से गुजरात के मशहूर पाटीदार लीडर हार्दिक पटेल ने 2016 में पटना आकर न सिर्फ चीफ मिनिस्टर नितीश कुमार की जमकर तारीफ की थी बल्कि उनके साथ मिलकर कुर्मियों के हक की लडाई लडने का एलान किया था। उन्हीं हार्दिक पटेल ने तीस जून को दुबारा पटना पहुच कर आरजेडी लीडर लालू यादव के बेटे तेजस्वी यादव के साथ मिलकर कुर्मी , कुशवाहा, धानुक, यादव और मुसलमानों के हक की लडाई लडने का एलान किया। साथ ही यह भी कह दिया कि नितीश कुमार जैसों से अब वह कोई राब्ता नहीं रखना चाहते क्योकि नितीश कुमार ने बिहार के मुसलमानों यादवों कुर्मियों और तमाम सेक्युलर जेहन बिरादरियों के साथ न सिर्फ धोकेबाजी की है बल्कि उनकी पीठ में छुरा भांक कर सेक्युलरिज्म और जम्हूरियत दोनों की तौहीन की है। वह एक बार फिर फिरकापरस्तों की गोद में जाकर बैठ गए।

तेजस्वी यादव से मुलाकात के बाद हार्दिक पटेल ने पटना के एस के मेमोरियल हाल में बैकवर्ड तबके के लोगों के हक में बुलाए गए ‘पटेल जागरूकता सम्मेलन’ को खिताब किया और कहा कि पटेल का मतलब सिर्फ कुर्मी से नहीं हैं पटेलों में कुर्मी, कुशवाहा और धानुक भी शामिल है। समाजी रस्मों रिवाज और रहन-सहन के एतबार से यह सब एक जैसे हैं इसीलिए अब मैं कहता हूं कि मेरा पूरा नाम ‘कुर्मी, कुशवाहा, धानुक हार्दिक पटेल’ है। उन्होने कहा कि अगर यह तीनों तबके यादवों और मुसलमानों के साथ मिलकर अपने हक में सोचें और अपने मफाद में सियासी फैसले ले तो न सिर्फ इनके अपने हालात बेहतर हो जाएगें हमारे तमाम मसायल हल हो जाएगे और देश की सूरत ही बदल जाएगी।

इस मौके पर हार्दिक पटेल ने कहा कि बिहार की तरह गुजरात मे भी पटेल बिरादरी भी बटी हुई थी लेकिन हमने वहां दुनिया को अपनी ताकत दिखाई है मैं यह कहना चाहता हू कि आज अगर हम सब मुत्तहिद (संगठित) हो जाएं तो हमसे मुकाबला करने की बात तो दूर कोई हमसे नजर मिलाने की भी हिम्मत नहीं कर सकेगा। उन्होने कहा कि बिहार में कुर्मी, कुशवाहा और धानुक मिलकर आबादी में बारह फीसद होते है। यह बहुत बडी ताकत है हम सब मुत्तहिद हो गए तो हम ही हुकूमत करेगे वर्ना दूसरे हम पर हुकूमत करते रहेगे। उन्होने कहा कि 1994 मे नितीश कुमार ने शहर के गांधी मैदान में एक बडी ‘कुर्मी चेतना रैली’ की थी उसी के बाद वह कुर्मियों के वाहिद (एकमात्र) लीडर बन गए उनके अलावा दूसरे भी कई लीडर पैदा हो गए खूब तरक्की भी कर ली लेकिन पटेल बिरादरी वही रह गई जहां वह थी।