गंगा में गंदगी के बहाने बेरोजगार बनाने की मुहिम

गंगा में गंदगी के बहाने बेरोजगार बनाने की मुहिम

जेबा खान

लखनऊ! ‘मां गंगा ने मुझे बुलाया है’ 2014 में बनारस से लोक सभा एलक्शन लड़ने आए नरेन्द्र मोदी ने यह बात बड़े ड्रामाई अंदाज में कही थी और वादा किया था कि वह गंगा को पूरी तरह साफ  कराएंगे। वह एलक्शन जीत गए, सरकार बनी तो किसी जमाने में फायर ब्राण्ड कही जाने वाली बड़बोली उमा भारती के गंगा की सफाई का वजीर बना दिया। उमा भारती ने एलान किया कि अगर 2018 तक वह गंगा को पूरी तरह  साफ न करा पाई तो गंगा में ही कूद जाऊंगी यानि गंगा में कूद कर खुदकुशी कर लेगी। 2018 आधा गुजर चुका है गंगा की सफाई के नाम पर तकरीबन पांच हजार करोड़ रूपए खाए जा चुके हैं। लेकिन गंगा एक इंच भी साफ नहीं हुई। नरेन्द्र मोदी उन बेटों में शामिल हो गए जो अपनी बीमार मां को लाचार ओर बेसहारा छोड़कर भाग जाते हैं। जब से मोदी सरकार बनी गंगा की सफाई के नाम पर सैकड़ों मीटिंगें हो गई, मीटिंगों में फाइव स्टार होटलो के नाश्ते खाने-पीने  और दिल्ली के बाहर से बुलाए जाने वाले अफसरान के टीए बिलों की शक्ल में पचास करोड़ से ज्यादा उड़ा दिए गए लेकिन गंगा पचास मीटर भी साफ नहीं हो पाई।

अब गंगा की सफाई के बहाने सरकार ने सेंट्रल पल्यूशन कंट्रोल बोर्ड को जो रिपोर्ट भेजी उसके जरिए फर्रूखाबाद जिले के साधवाड़ा इलाके में तकरीबन 150 साल से साड़ियों और कपड़ों की छपाई करने वाले 90 से ज्यादा छोटे कारखानों को बंद करने का नोटिस दे दिया है। इन कारखानों में काम करने वालों की तादाद एक लाख से ज्यादा बताई गई है। इस तरह नरेन्द्र मोदी सरकार ने दो करोड़ बेरोजगार नौजवानों को हर साल रोजगार देने के बजाए घरेलू छोटी सनअतों के एक लाख गरीब मजदूरों की रोजी छीनने का बंदोबस्त कर दिया। इन कारखानों में काम करने वाले गरीब मजदूरों का कहना है कि नरेन्द्र मोदी ने गंगा के साथ धोकेबाजी करके अच्छा नहीं किया, उल्टे हम लाखों गरीबों की रोजी-रोटी छीनने का जो काम कर रहे हैं उन्हें हमारी बददुआआेंं और गंगा मइया का श्राप जरूर लगेगा।

दरअस्ल फर्रूखाबाद के साधवाड़ा इलाके में साध समाज के लोग छपाई का काम करते है। सूती साडी, रजाई का पल्ला, एक्सपोर्ट का कपड़ा शाल की छपाई का काम होता है। सरकार का कहना है कि इन कारखानों से निकलने वाला कैमिकल सीधा गंगा में गिरता है मगर उसे प्यूरीफाइड करने के लिए कारखाना मालिकान ने कोई प्लाण्ट नहीं लगाया है। इसीलिए पल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने कहा कि जिन कारखाना मालिकान ने प्यूरीफाइड करने का प्लाण्ट नहीं लगाया उन्हें बंद करने का नोटिस जारी किया गया है। खबर लिखे जाने तक अभी कारखाने बंद नहीं हुए हैं लेकिन इन कारखानों पर बंदी का खतरा मडरा रहा है और लाखों लोगों को बेरोजगार होने का खतरा बढ गया है।

देश भर में गंगा सफाई मुहिम को लेकर सभी प्रदेशों में एक मुहिम चलाई जा रही है। मरकजी सरकार ने उन छपाई सनअतों को बंद कराने के आर्डर दिए हैं जिन कारखानों में सेट्रल व पल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के जरिए जारी एहकाम पर अमल नहीं किया था। उन 90 कारखानों को बंद करने के नोटिस पिछले हफ्ते जारी कर दिए गए हैं। अगर यह कारखाने बंद हो गए तो तकरीबन एक लाख लोग बेरोजगार हो जाएंगे क्योंकि इन परिवारों का खर्च इन्हीं कारखानों में काम करने से चल रहा है।

145 साल पहले सधवाड़ा के साध समाज के लोगों ने कपड़ा छपाई का काम शुरू किया था। उस वक्त जैतपुर, अहमदाबाद में बनने वाली सूती साडी फर्रूखाबाद में छपती थी। मुसलसल यह काम चल रहा है। अमृतसर से रजाई के पल्ले की छपाई शुरू हुई। मौजूदा वक्त में एक्सपोर्ट का कपड़ा शाल वगैरह की छपाई हो रही है। जिन 90 कारखानों को बंद करने के नोटिस दिए गए हैं उनमें ज्यादातर छोटे कारखानें हैं। उन कारखानों के मालिकान ने मुखालिफत करना शुरू कर दिया है। उन्होने मांग की है कि जिस जगह से गंगा में नाला गिर रहा है वहां पर एसटीपी प्लांट लगाया जाए। उसके लिए उन्होने आला अफसरान को खत के जरिए वाकिफ भी कराया है।

अगर छपाई के कारखाने बंद हो गए तो साधवाड़ा की जो रौनक है वह खत्म हो जाएगी। इन कारखानों से छपाई, धुलाई करने वाले ढोने वाले, शाल में गांठ लगाने वाले सभी के परिवार जुडे हुए हैं। सबसे बडी बात यह कि इस जिले से पहले ही सैकड़ों कारखाना मालिक तर्के सकूनत (पलायन) कर चुके हैं। जिनकी वजह से बेरोजगारी फैल चुकी थी। अगर यह भी बंद हो गए तो क्या होगा। क्योंकि घरों में शाल में गांठ लगाने वाली ख्वातीन भी एक महीने में पांच हजार रूपए की आमदनी करती हैं। शहर के मोहल्ला सधवाला में सैकड़ों छपाई कारखानें चल रहे हैं। इन कारखानों से निकलने वाला कैमिकल वाला पानी नाले के जरिए सीधा गंगा मे गिर रहा है। उसी कडी में पल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने इनको बंद करने का नोटिस दिया था। लेकिन किसी भी कारखाना मालिक ने कारखाने से निकलने वाले पानी को प्यूरीफाइड (दूषित रहित) करने के लिए प्लांट नहीं लगाया था। उसके बाद कई बार जांच भी की गई लेकिन किसी भी कारखाने में प्लांट नहीं लगा पाया गया। इसलिए इनको बंद करने का फैसला लिया गया। खबर लिखे जाने तक कारखाने तो बंद नहीं हुए थे मगर उनके बंद होने का खतरा मडरा रहा है। लोग कह रहे हैं कि रोजगार देने के बजाए रोजगार छीन रही है मोदी सरकार।