सात महीने से एनएसए में फंसे लोगों के कुन्बे हो गए तबाह- रिहाई मंच

सात महीने से एनएसए में फंसे लोगों के कुन्बे हो गए तबाह- रिहाई मंच

नानपारा से लेकर सरायमीर और सहारनपुर तक एनएसए का बेजा सियासी इस्तेमाल

शादाब हुसैन

बहराइच! समाजी तंजीम रिहाई मंच के एक वफ्द ने डीएम और एसपी से मुलाकात की। सात महीने से जेल में बंद और एनएसए में पाबंद नानपारा के पांच लोगों की रिहाई के लिए अपील की। इस मौके पर इस वफ्द ने एक मेमोरन्डम भी दिया। इसके बाद सहाफी सलीम सिददीकी की रिहाईश पर प्रेस कांफ्रेन्स करते हुए कहा कि योगी सरकार मुस्लिमों-दलितों के खिलाफ सियासी बदले के तहत नानपारा से लेकर सरायमीर और सहारनपुर तक नेशनल सिक्योरिटी एक्ट के तहत कार्रवाई कर रही है।
इस मौके पर वफ्द ने बताया कि डीएम माला श्रीवास्तव से मुलाकात में कहा गया कि एनएसए में बन्द किए गए लोग माली एतबार से बहुत कमजोर हैं, इनसे कौमी सलामती को कोई खतरा नहीं है। इस पर डीएम व एसपी ने यकीन दिलाया कि जांच के बाद जरूर इन्साफ दिलाया जायेगा। मालूम हो कि मुन्ना, नूर हसन, असलम, मकसूद रजा, मोहम्मद अरशद जेल मे सात महीने से बन्द हैं।
इस वफ्द में रिहाई मंच के सदर एडवोकेट मुहम्मद शुऐब, साबिक आईजी एसआर दारापुरी, सहाफी सलीम सिद्दीकी, सृजनयोगी आदियोग, अलीगढ़ मुस्लिम युनिवर्सिटी के तलबा यूनियन के साबिक सदर फैजुल हसन, अब्दुल हन्नान, आईएम इस्लाम, सैय्यद शफात अली, नजमुल हसन, शम्सुल हसन, सईद अहमद, वीरेन्द्र गुप्ता, नागेन्द्र यादव, राजीव यादव व मुतास्सिरा कुन्बे के लोग भी शामिल थे। मुलाकात में एनएसए में बन्द मुन्ना की बीवी मुनीरन और उनके बड़े भाई मदारु, नूर हसन की बीवी अकीला बानो, असलम की बीवी शन्नो और मकसूद की बीवी सलीकुन निसां, अरशद के वालिद मोहम्मद शाहिद भी शामिल थे।
मालूम हो कि दो दिसम्बर 2017 को थाना नानपारा, बहराइच के गुरघुट्टा में पेश आए वाक्ए पर जमुना प्रसाद ने 35 नामजद और नामालूम लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाया था। बाद में पांच को एनएसए (रासुका) के तहत पाबन्द कर दिया गया। इस वाक्ये की पड़ताल में यह पाया गया कि गुरघुट्टा गांव में बारावफात के जुलूस के रास्ते को लेकर तनाजा हुआ और दोनों तबके के लोग आमने-सामने आ गए।
इस टकराव के पीछे प्रधानी का चुनाव और जमीनी झगड़ा भी वजह बना। मिली जानकारी व दस्तावेजों के मुताबिक नूर हसन वल्द बब्बन को 19 फरवरी 2018, असलम वल्द मुनव्वर को 22 फरवरी 2018, मकूसद रजा वल्द खलील बेग को 29 जनवरी 2018, मुन्ना और मोहम्मद अरशद को भी एनएसए के तहत पाबन्द किया गया। इसको छः महीने के लिए बढ़ा दिया गया।
इस वफ्द ने जोर देकर कहा कि इस वाक्ये मे जिन लोगों पर एनएसए के तहत कार्रवाई की गई है उनसे कौमी सलामती के लिए कहीं से कोई खतरा नहीं है, बल्कि तकरीबन सात महीने से उनके जेल में रहने से उनकी फैमली के सामने जरुर खतरा खड़ा हो गया है। मसलन एनएसए में बन्द नूर हसन की बीवी अकीला बानो अपने छोटे-छोटे बच्चों के साथ इंदिरा आवास स्कीम के तहत मिले जिस मकान में रहती हैं उसमें दरवाजा तक नहीं लग सका है। इसी तरह असलम की बीवी शन्नो हों या मकसूद की बीवी सलीकुन निसां, उनकी माली हालत इतनी खराब है कि अपने शौहर से जेल में मिलने के लिए जाने का किराया भी नहीं जुटा पातीं। ऐसे में वह कानूनी लड़ाई लड़ें कि अपने छोटे-छोटे बच्चों के पेट भरने की लड़ाई। कमोबेश इस पूरे इलाके में तकरीबन सभी की यही हालत है, चाहे वह हिंदू हो या मुसलमान। सबके सब मेहनत मजदूरी करके अपनी जिंदगी गुजार रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ इस इलाके में शरारती और फिरकापरस्त ताकतें सरगर्म हैं और वह लगातार छेड़छाड़ कर जिले का माहौल बिगाड़ने मे लगी हैं। चूंकि प्रदेश मे बीजेपी की हुकूमत है इसलिए उन्हे नजरअन्दाज किया जा रहा है। पिछले दिनो इसी इलाके की ईदगाह के मैदान मे नजिस जानवर(सुअर) बांधकर मजहबी जज्बात भड़काने की कोशिश की गई थी। लेकिन जिला इन्तेजामिया की सख्ती व इलाकाई लोगों की सूझबूझ से मामला ठंडा हो गया।