इस लव जेहाद पर खामोश क्यों फिरकापरस्त

इस लव जेहाद पर खामोश क्यों फिरकापरस्त

अखिला से हादिया बनने वाली लड़की की शादी लव जेहाद तो अखिलेश और तबस्सुम की शादी क्या?

शबीहुल हसन नकवी

प्रतापगढ! इस्लाम मजहब में दिलचस्पी होने के बाद उसका मुताला (अध्ययन) और समझने के बाद उसे अपना कर अखिला से हादिया बनने वाली लड़की ने जब शफीन जहां नाम के शख्स से शादी की तो फिरकापरस्त ताकतों ने आसमान सर पर उठा लिया और नेशनल इनवेस्टीगेशन एजेंसी को उसकी तहकीकात सौंप दी थी। जबकि शादी करने से खासा पहले आखिला इस्लाम मजहब कुबूल करके हादिया बन चुकी थी। लेकिन पिछले दिनों प्रतापगढ जिले के काशीपुर डुबकी गांव में जानवरों को चराने वाले अखिलेश और तबस्सुम नाम की लडकी के बीच इश्क का मामला सामने आया। दोनों ने घर से भाग कर शादी कर ली और तबस्सुम ने अपना नाम बदलकर निशा रख लिया। इस तब्दीली ए मजहब और लव जेहाद पर अब फिरकापरस्तां के मुंह से कोई आवाज नहीं निकल रही है।

पुरानी कहावत है ‘इश्क न देखे जात कुजात-नींद न देखे टूटी खाट’ यानि जब प्यार होता है तो जात-बिरादरी और मजहब की सब दीवारें टूट जाती हैं। अखिलेश और तबस्सुम का इश्क भी कुछ ऐसा ही रहा। अपने खेतों का मुआयना करने आने वाली लड़की तबस्सुम को जानवर चराने वाले अखिलेश से ऐसी मोहब्बत हुई कि वह घर से भाग गई। फिर मुसलमानों के खिलाफ लव जेहाद का हंगामा करने वाली हिन्दू तंजीमों (संगठनों) के लोगों ने उनकी शादी मंदिर में करा दी। शादी के बाद तबस्सुम की  पहली ईद सुसराल में हुई तो उसके सुसराल वालों ने सेवइयां पका कर ईद का त्यौहार मनाया। हालांकि इसपर भी कुछ द्दर्म के ठेकेदारों की त्योरियां चढ गई।

गुजरे जमाने में मोहब्बत के कई किस्से आये और वक्त की रफ्तार में द्दुंद्दले हो गए। लेकिन हीर-रांझा, लैला- मजनूं जैसे आशिकों की बेपनाह इश्क की दास्तानें आज भी लोगों को याद हैं इसकी एक वजह यह भी है कि उनकी ही तरह आज भी दीवानों की कहानियां आती ही रहती हैं। ऐसी ही एक कहानी यूपी के प्रतापगढ़ जिले के छोटे से गांव काशीपुर से निकलकर आई है। जहां अखिलेश नाम के लड़के से तबस्सुम नाम की लडकी ने शादी कर ली। शादी के बाद दोनां का कहना था कि जैसे कोई बुरा ख्वाब देखते वक्त आंख खुल जाए उन्हें वैसा ही सुकून महसूस हो रहा है।

उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में काशीपुर डुबकी गांव के बिहार डेवलपमेट ब्लाक हलके में आता है। इस छोटे से गांव में पैदा हुई इश्क की कहानी शुरू होती है खेत खलियान के उस हिस्से से जहां इस गांव के रहने वाला अखिलेश जानवरों को चराने जाया करता था। इसी खेत से जुड़ा हुआ तबस्सुम उर्फ निशा का भी खेत था और वह भी अपने खेत को देखने के लिए आया करती थी। दोनों की नजरें एक दूसरे को देखती थी, लेकिन उम्र अभी इतनी कच्ची थी कि वह इश्क के परवान चढते समझ नहीं पा रहे थे। रोज मिलने जुलने और बातचीत का सिलसिला द्दीरे-द्दीरे गहरी दोस्ती में बदला। प्यार का सिलसिला शुरू हुआ तो इनके इश्क के चर्चे गांव में भी शुरू हो गए और बात दोनों के घर तक पहुंच गई। दोनों को घर में कैद कर दिया और उनके मिलने-जुलने पर पाबंदी लगा दी गई। लेकिन दोनों के बीच प्यार की हद अब बहुत आगे बढ़ चुकी थी। दोनों ने अब रात में मिलना जुलना शुरू कर दिया और एक रात तबस्सुम के भाई ने दोनों को मिलते हुए देख लिया। उसके बाद दोनों की जमकर पिटाई की गई, जब तक कि दोनों लहूलुहान न हो गए। इस मारपीट के बाद मामला बिगड़ गया और दोनों के इश्क ने फिरकावाराना शक्ल लेना शुरू कर दिया। बात बिगड़ती चली गई और गांव में तनाव शुरू हो गया। इसी दौरान तबस्सुम के घरवालों ने मामला ठीक करने के लिए तबस्सुम की शादी तय कर दी। जब यह बात दोनों को पता चली तो उन्होंने घर छोड़ने का फैसला किया।

अखिलेश और तबस्सुम ने रात के अंद्देरे में घर छोड़ दिया और रेलवे स्टेशन पहुंच गए। इस दौरान अखिलेश की जेब में सिर्फ 200 रुपए थे। दोनों ट्रेन में बैठकर दिल्ली पहुंच गए। दोनों ने एक दूसरे का हाथ थामा और वादा किया कि अपनी नई दुनिया बसाएंगे और अपनी जिंदगी अपने हिसाब से जियेंगे। लेकिन रुपए खत्म होने के बाद तबस्सुम और अखिलेश ने फैसला किया कि वह अपनी जान दे देंगे और अगर साथ जी नहीं सकते हैं तो साथ मर जाएंगे। दोस्तों ने दोनों को मरने की सोच छोड़कर जीने के लिए रागिब किया। साथ अखिलेश के दोस्तों ने हिंदू तंजीमों से मदद मांगी और पूरी बात बताई। इसके बाद हिंदू तंजीमों के लोगों ने अखिलेश के घर पर राब्ता किया फिर थाने पर भी दबाव बनाया। दोस्तों ने कोर्ट की मदद लेते हुए दोनों की शादी का प्लान बनाया। जिसके बाद दोस्तों ने तबस्सुम और अखिलेश को वापस मुंबई से प्रतापगढ़ वापस बुला लिया। यहां कोर्ट में शादी कराने के बाद दोनों की शादी मंदिर में कराने की तैयारी करने लगे। मंदिर में शादी कराने की खबर जैसे ही दोनों परिवारों को मिली एक बार फिर से माहौल गर्म हो गया। लेकिन पुलिस व हिंदू तंजीमों की सख्त हिदायत व चेतावनी के बाद दोनों की शादी मंदिर में हुई और उसके बाद लड़के वाले भी दोनों के प्यार के आगे झुक गए।

अखिलेश से शादी के बाद तबस्सुम से निशा बन गई। लेकिन जब ईद का त्यौहार पूरा देश मना रहा था तो तबस्सुम ने भी अपने घर में अपनी ससुराल में ईद मनाई। तबस्सुम ने सेवई बनाकर घरवालों को खिलाई और पूरे परिवार में खुशियों का माहौल दिखा।