‘सुप्रीम कोर्ट में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा’ मुल्क को आगाह करने वाले जस्टिस चेल्मेश्वर रिटायर होकर अपने गांव चले गए

‘सुप्रीम कोर्ट में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा’ मुल्क को आगाह करने वाले जस्टिस चेल्मेश्वर रिटायर होकर अपने गांव चले गए

 

नई दिल्ली! इस साल 2 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट के तीन सीनियर जजों के साथ अपनी कयामगाह पर प्रेस कांफ्रेंस बुलाने वाले जस्टिस जे चेल्मेश्वर सुप्रीम कोर्ट के जज के ओहदे से रिटायर हो गए । जनवरी में सुप्रीम कोर्ट के चार जाजों की जानिब से बुलाई गई प्रेस कांफ्रेस ने पूरे मुल्क को हैरान कर दिया था क्योंकि यह अपनी नौइयत का पहला वाक्या है जब सबसे बड़ी अदालत के जज अवाम के सामने यह कहने के लिए आएं कि सुप्रीम कोर्ट में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है और हम नहीं चाहते कि 20 साल बाद हमारे बारे में कहा जाए कि ऐसे वक्त में हम खामोश रहे। इस प्रेस कांफ्रेंस की बुनियादी बात यह थी कि सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा आईनी और अवामी नौइयत के अहम मामलों में चुनिन्दा जूनियर जजों की बेंच तश्कील देते हैं। इशारे-इशारे में सुप्रीम कोर्ट के काम-काज में सरकार की बढती हुई दखलअंदाजी की बात भी कही गई और यह बताया गया कि आईनी बेंचों की तश्कील में शफ्फााफयत बरती जानी चाहिए। यह वह मौका था कि जस्टिस लोया की नागपुर में मौत के मामले में जांच के लिए एक पिटीशन महाराष्ट्र हाई कोर्ट में दाखिल की गई थी। इसके फौरन बाद उसी नौइयत के दो पटीशन सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई और जस्टिस दीपक मिश्रा ने न सिर्फ उन्हें मंजूर कर लिया बल्कि इस सिलसिले में यह हुक्म भी जारी कर दिया कि लोया मामले में कोई भी सुनवाई किसी भी हाई कोर्ट में नहीं होगी। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस लोया की मौत की जांच के मतालबे को खारिज कर दिया। प्रेस कांफ्रेंस में सवालों के जवाब में एक जज ने यह कहा था कि इस प्रेस कांफ्रेंस का एक मकसद लोया की मौत का मामला भी उठाना है।

प्रेस कांफ्रेंस से सुर्खियों में आए जस्टिस चेल्मेश्वर इसके बाद खामोशी से अपना काम करते रहे और अपने एलान के मुताबिक खामोशी के साथ ही गुजिश्ता 22 जून को अपने ओहदे से रिटायर हो गए। इस दरम्यान उन्होने कई मसलों पर चीफ जस्टिस को खत लिखकर अपनी बात कही। रिटायरमेंट पर उन्होने जजों और वकीलों दोनों की जानिब से दी जाने वाली अलविदाई पार्टी में भी शामिल होने से इंकार कर दिया था और यह तय कर लिया था कि रिटायरमेंट के बाद वह एक दिन भी दिल्ली में नहीं रूकेंगे और सीधे अपने गांव चले जाएंगे। उन्होने यह भी कहा था कि रिटायरमेंट के बाद वह किसी तरह का कोई ओहदा कुबूल नहीं करेगे और वह इस पर कायम रहे। अंग्रेजी अखबार हिन्दू के नामानिगार से फोन पर बातचीत करते हुए जस्टिस चलमेश्वर ने कहा कि मैं ने अपनी जिम्मेदारियां पूरी करने में अपनी भरपूर सलाहियतों का इस्तेमाल किया है और मैं ने जो कुछ भी किया है उसपर मुझे कोई पछतावा नहीं है। उन्होने कहा कि इस वक्त वह हैदराबाद एयरपोर्ट पर हैं और अपने आबाई वतन की फलाइट का इंतजार कर रहे हैं। इस सवाल पर कि मुस्तकबिल में उनका क्या प्लान है उन्होने कहा कि अभी कुछ महीने मेरा इरादा आराम करने का है। जस्टिस चेल्मेश्वर सुप्रीम कोर्ट के अंदर काम-काज में शफ्फाफियत और जवाबदेही पर बहुत जोर देते थे। शफ्फाफियत के सवाल पर ही 2016 में उन्होने बतौर एहतेजाज कोलजियम की मीटिंग में शिरकत करना बंद कर दिया। उसके फौरन बाद द हिन्दू के साथ एक इंटरव्यू में उन्होने कहा था कि इस मामले में हरगिज उनका कोई जाती एजेण्डा नहीं है। उस वक्त उन्होने यह भी कहा था कि रिटायरमेट के बाद वह सरकार का कोई ओहदा कुबूल नहीं करेंगे और अपने इस इरादे पर वह दो साल बाद अब भी कायम हैं।

टेलीविजन चैनल एनडीटीवी के साथ एक इंटरव्यू में उन्होने कहा कि वह इन सवालां पर अवाम के सामने गए थे जिन्हें वह सुप्रीम कोर्ट की कारकर्दगी के लिए लाजिमी तसव्वुर करते हैं और उन्हें हरगिज इसपर कोई पछतावा नहीं है। इस सवाल पर कि प्रेस कांफ्रेंस के बाद उन्हें दूसरे जजों का कितना तआवुन हासिल हुआ उन्होने कहा कि अब इस पर कोई बात नहीं की जानी चाहिए क्योकि सारा मामला लोगों के सामने है। हां हम सभी चार जजों को जिम्मेदार ठहराया गया।

जस्टिस चेल्मेश्वर ने 42 साल अदलिया की खिदमात में गुजारे हैं। अपने चौवालीसवें यौमे पैदाइश पर 23 जून 1997 को उन्हें हाई कोर्ट का जज मुकर्रर किया गया और 11  अक्टूबर 2011 को वह सुप्रीम कोर्ट के जज बने। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के बाद वह सुप्रीम कोर्ट के सबसे सीनियर जज थे। सुप्रीम कोर्ट के जज की हैसियत से जस्टिस चलमेश्वर ऐसी कई आईनी बेंचों के सरबराह या उसका हिस्सा रहे जिसने बहुत अहम और तारीखसाज फैसले किए। उनकी सरबराही मे मार्च 2015 में आईनी बेंच ने इंफारमेशन टेक्नोलाजी एक्ट के सेक्शन 66ए को गैर आईनी ठहराया था। मजकूरा एक्ट के तहत इंटरनेट पर मुबैय्यना काबिले एतराज पोस्ट के नतीजे में बहुत से लोगों को गिरफ्तार किया गया था। वह उस पांच रूक्नी बेंच के वाहिद जज थे जिन्होने नेशनल जूडीशियल अपाइंटमेट कमीशन का नामंजूर करके जजों की तकर्रूरी के पुराने कोलजियम निजाम को जारी रखने के फैसले से इख्तिलाफ किया था। मरकजी सरकार ने जब सुप्रीम कोर्ट कोलजियम के फैसले को नजरअंदाज करते हुए कर्नाटक हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस से इस जज की कारकर्दगी और किरदार की जांच करने को कहा जिसे हाई कोर्ट का जज बनाने की कोलजियम ने सिफारिश की थी तो सरकार की अदलिया में इस दखल अंदाजी के खिलाफ उन्होने खत लिखा था। कोलजियम के एक मेम्बर के तौर पर जस्टिस चेल्मेश्वर ने उत्तराखण्ड हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस के एम जोजफ को सुप्रीम कोर्ट का जज बनाने की सिफारिश की थी। लेकिन सरकार ने कोलजियम की इस सिफारिश को दरकिनार करते हुए जस्टिस जोजफ से मुताल्लिक फाइल कोलजियम को नए सिरे से गौर करने के लिए वापस भेज दी थी। कुछ दिन पहले जब अपोजीशन के मेम्बरान पार्लियामेंट ने चीफ जस्टिस आफ इंडिया दीपक मिश्रा के खिलाफ इम्पीचमेंट का नोटिस दिया था तो जस्टिस चेल्मेश्वर का कहना था कि यह मसले का हल नहीं है।

जस्टिस चेल्मेश्वर को खास शोहरत उस वक्त मिली जब मेडिकल कालेज में दाखिले के एक घपले का मामला उछला। उस मामले में सुप्रीम कोर्ट से खातिरख्वाह फैसला हासिल करने के लिए मुबैय्यना तौर पर रिश्वत वसूल की गई और सीबीआई ने रिश्वत की रकम पकड़ ली। इसमें शक की सूई चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की तरफ भी घूमी थी। इस सिलसिले में एक पटीशन सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस चेल्मेश्वर की अदालत में दाखिल की गई। जस्टिस चेल्मेश्वर ने इस मामले को आईनी बेंच के हवाले करने के हुक्म के साथ एक आईनी बेच की तश्कील दी जो जाब्ते के मुताबिक था क्योंकि मामले के रजिस्ट्रेशन के वक्त चीफ जस्टिस अदालत में मसरूफ थे और नम्बर दो जज होने की हैसियत से मामला जस्टिस चेल्मेश्वर की अदालत में रखा गया। लेकिन कुछ घंटे के अंदर ही चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने हुक्म को मंसूख करते हुए दूसरी आईनी बेंच बना दी और उसमें जस्टिस चेल्मेश्वर को शामिल न करके उसके सरबराह खुद बन गए जो जाब्ते के खिलाफ था। उस पर सुप्रीम कोर्ट के वकील शांति भूषण ने चीफ जस्टिस पर खुलेआम इल्जाम लगाए और कहा कि चीफ जस्टिस चूंकि खुद शक के घेरे में हैं इसलिए इस मामले की सुनवाई उन्हें नहीं करनी चाहिए। लेकिन चीफ जस्टिस अपने फैसले पर डटे रहे। उनका कहना था कि  रोस्टर बनाने का अख्तियार सिर्फ चीफ जस्टिस का है। इसके कुछ दिन बाद ही जस्टिस चेल्मेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन बी लोकुर और जस्टिस कुरियन जोजफ पर मुश्तमिल चार सीनियर जजों ने प्रेस कांफ्रेंस करके कहा था कि अहम नौइयत के मामलों में कुछ चुनिन्दा और जूनियर जजों को ही बेंच में शामिल किया जा रहा है।