जम्मू बीजेपी लीडरान का जमीन घोटाला

जम्मू बीजेपी लीडरान का जमीन घोटाला

“नरगोटा जम्मू के शमलात की जमीन पर निर्मल सिंह ने अपनी बीवी ममता सिंह के नाम आर्मी के हथियार डिपो के पास आलीशान बंगले की तामीर का काम बारह मई से शुरू कराया जनरल सरनजीत सिंह ने निर्मल सिंह को खत लिखकर आर्मी और जम्मू कश्मीर सरकार के नोटिफिकेशन के हवाले से कहा कि आर्मी के हथियार डिपो की बाउण्ड्री से एक किलोमीटर तक कोई तामीर नहीं हो सकती तो निर्मल सिंह न इल्जाम लगा दिया कि आर्मी तो मकामी बाशिंदों को परेशान करने का काम कर रही।”

“निर्मल सिंह और कवीन्द्र गुप्ता बारी-बारी डिप्टी चीफ मिनिस्टर और डिप्टी स्पीकर रहे दोनां जम्मू-पूंछ से बीजेपी के लोक सभा मेम्बर जुगल किशोर के साथ मिलकर हिमगिरि इंफ्रास्ट्रक्चर एण्ड डेवलपमेट प्राइवेट लिमिटेड नाम की कम्पनी बना कर जम्मू की नरगोटा तहसील में शमलात की बेशकीमती जमीन पर कब्जा किया। यह दोनों बिजली वजीर भी रहे हिमगिरि कम्पनी पावर प्रोजेक्ट के ठेके लेने का भी काम करती है।”

 

“सीनियर कांग्रेस लीडर और राज्य सभा में लीडर आफ अपोजीशन गुलाम नबी आजाद का कहना है कि तीन-सवा तीन सालों मे बीजेपी और पीडीपी वजीरों व मेम्बरान असम्बली ने सिर्फ अपनी जेबें भरने का काम किया। जम्मू-कश्मीर को तबाह करके बीजेपी सरकार से हटी है। अगर ईमानदारी से जांच हो जाए तो तीन-चौथाई वजीर जेलों में दिखाई देंगे। उनका कहना है कि बीजेपी ने कश्मीर के साथ धोकेबाजी की है।”

हिसाम सिद्दीकी

जम्मू! उन्नीस जून को भारतीय जनता पार्टी ने अचानक सरकार से अलग होने का एलान करके सवा तीन साल पुरानी बीजेपी और जम्मू कश्मीर पीपुल्स डिमाक्रेटिक पार्टी की महबूबा मुफ्ती सरकार गिरवाई तो कांग्रेस जनरल सेक्रेटरी और राज्य सभा में लीडर आफ अपोजीशन गुलाम नबी आजाद ने वाजेह (स्पष्ट) तौर पर कहा था कि तीन-सवा तीन सालों में कश्मीर को लूटकर जेबें भरने के बाद सरकार गिरवा दी है इस दरम्यान कश्मीर में हर शोबे (क्षेत्र) को तबाह व बबार्द कर दिया गया। गुलाम नबी आजाद के इस बयान पर बीजेपी ने एतराज उठाया था लेकिन गुलाम नबी आजाद ने जो इल्जाम लगाया था उसके सबूत सामने हैं। बीजेपी के सीनियर लीडरान बारी-बारी डिप्टी चीफ मिनिस्टर और स्पीकर रहे निर्मल सिंह और कवीन्द्र गुप्ता के जमीन घोटाले सामने आए हैं। याद रहे कि इस साल के शुरू तक कवीन्द्र गुप्ता स्पीकर और निर्मला सिंह डिप्टी चीफ मिनिस्टर थे फिर दोनो के ओहदे आपस मे ही तब्दील कर दिए गए थे। दोनां ने हिमगिरि इफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेट प्राइवेट लिमिटेड नाम से एक कम्पनी बनाकर गलत तरीके से आर्मी के असलहा डिपो से मिली हुई एक बड़ी जमीन पर कब्जा कर लिया ‘शमलात’ नाम की जगह की जमीन नागरोटा तहसील के बन गांव में है। निर्मल सिंह की बीवी ममता सिंह भी इस कम्पनी में डायरेक्टर हैं। ममता सिंह ने दो हजार मुरब्बा (वर्ग) मीटर में अपना बंगला बनवाना शुरू किया तो आर्मी के 16वें कोर के कमाण्डर लेफ्टीनेट जनरल सरनजीत सिंह न सीधे निर्मल सिंह को खत लिख कर कहा कि शमलात की जमीन आर्मी हथियार डिपो की बाउण्ड्री के बिल्कुल नजदीक यानी तकरीबन 500 गज के फासले पर है जबकि 26 सितम्बर 2002 को डिफेंस मिनिस्ट्री की जानिब से ‘वर्क्स आफ डिफेंस एक्ट 1903 के तहत जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक आर्मी के किसी भी असलहा डिपो की बाउण्ड्री से एक हजार मीटर (एक किलोमीटर) के फासले तक कोई भी प्राइवेट या सरकारी इमारत नहीं बनाई जा सकती। जनरल सरनजीत सिंह का खत पाने के बाद निर्मल सिंह ने इंतेहाई घटिया इल्जाम लगाते हुए कह दिया कि आर्मी के लोग और अफसरान नरगोटा के आम लोगों को परेशान करने वाली हरकतें कर रहे हैं।

बीजेपी लीडर निर्मल सिंह ने कहा कि उन्होने अपनी बीवी के नाम से शमलात में एक प्लाट हिमगिरि इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेट प्राइवेट लिमिटेड कम्पनी से खरीदा था। हमें उसपर अपना मकान तामीर करने का पूरा कानूनी हक है। मकान की तामीर शुरू करने से पहले हमने ब्लाक डेवलपमेंट दफ्तर से उसका नक्शा भी मंजूर करा लिया था। निर्मल सिंह का झूट उस वक्त पकड़ गया जब नरगोटा के ब्लाक डेवलपमेट आफिसर (बीडीओ) आसिफ अमीन चंदेल ने बताया कि उन्होने या उनके दफ्तर ने नाडोर पंचायत के उस इलाके में किसी को भी किसी किस्म की तामीर करने का न तो कोई ‘नो आब्जेक्शन सर्टिफिकेट जारी किया है और न ही किसी का नक्शा पास किया है। उन्होने कहा कि उनके पास इस सिलसिले में एक खत आया था। हमने उस खत के जवाब में वाजेह (स्पष्ट) तौर से लिख दिया है कि जिस खसरा नम्बर 441 पर तामीर (निर्माण) का काम शुरू कराया गया उसपर तामीर के लिए ब्लाक की जानिब से कोई नो आब्जेक्शन सर्टिफिकेट नहीं दिया गया है। निर्मल सिंह का दावा है कि फौज मकामी बाशिंदों को बिला वजह परेशान करती है। इसलिए मैंने फौजियों से मालूम किया था कि आखिर वह आम लोगों को परेशान क्यों करते हैं तो उन्होने हमे ही परेशान करना शुरू कर दिया। अगर निर्मल सिंह की बात मान ली जाए तो जो कश्मीरी फौजियों की मुबय्यना (कथित) ज्यादतियों की शिकायतें करते हैं वह भी माननी पडेगी। उधर कोर कमाण्डर जनरल सरनजीत सिंह ने कहा है कि हथियार डिपो की बाउण्ड्री के नजदीक बन रहे निर्मल सिंह के मकान का काम रूकवाने के लिए उन्होने मकामी एडमिनिस्ट्रेशन के अफसरान से कई बार कहा लेकिन कोई आफीसर उनका काम रूकवाने के लिए तैयार नहीं हुआ तो मजबूरन उन्हें सीधे निर्मल सिंह को खत लिखना पड़ा। जनरल सिहं की बात सबूत है कि मकामी अफसरान पर बीजेपी का कितना दबाव है।

याद रहे कि शमलात में आर्मी का हथियार डिपो 1970 में बना था तब तक शायद निर्मल सिंह स्कूल में होंगे। 26 सितम्बर 2002 को आर्मी ने और सात अगस्त 2015 को जम्मू के जिला कलेक्टर ने एक नोटिफिकेशन जारी करके वाजेह (स्पष्ट) कर दिया था कि आर्मी के हथियार डिपो की बाउण्ड्री से एक किलोमीटर के फासले तक किसी किस्म की तामीर (निर्माण) नहीं की जा सकती। इन दोनों नोटिफिकेशन्स के बावजूद निर्मल सिंह ने अपनी बीवी के नाम पर मकान बनवाना शुरू कर दिया। यही तो बीजेपी का राष्ट्रवाद है।

निर्मल सिंह और कवीन्द्र गुप्ता वगैरह ने हिमगिरि इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेट प्राइवेट लिमिटेड नाम से जो कम्पनी बना रखी है उसमें जम्मू पूंछ से बीजेपी के लोक सभा मेम्बर जुगल किशोर और दीगर तीन लोग पार्टनर है। यह कम्पनी बिजली प्रोजेक्ट भी लगाती है। निर्मल सिंह और कवीन्द्र गुप्ता की एखलाकियात (नैतिकता) का आलम यह है कि डिप्टी चीफ मिनिस्टर रहते हुए दोनों बारी-बारी से बिजली वजीर भी रहे हैं। इस कम्पनी ने जम्मू के नजदीक चम्बा में तीन मेगावाट का एक पावर प्लाण्ट भी बनाने का काम ले रखा है। नरगोटा तहसील के शमलात की जिस जमीन पर निर्मल सिंह गैर कानूनी तौर से अपना आलीशान बंगला तामीर करा रहे थे वह जमीन भी उनकी कम्पनी हिमगिरि के नाम से ही खरीदी गई थी। सुरिन्दर महाजन नाम के किसी शख्स को इन लोगों ने कम्पनी का चेयरमैन बना रखा है।

जम्मू-कश्मीर की महबूबा मुफ्ती सरकार में रेवन्यू मिनिस्टर रहे गुलाम नबी आलोन का कहना है कि प्रदेश के रेवेन्यू मोहकमे के रिकार्ड के मुताबिक शमलात की जमीन खरीदी या बेची नहीं जा सकती अगर किसी ने वहां जमीन की खरीद-फरोख्त की है तो वह सौदा गैरकानूनी ही रहेगा। उन्होंने कहा कि मकामी गांव वालों को पहले 182 कनाल जमीन रखने की इजाजत थी जो रियासत में 1950 में हुए लैण्ड रिफार्म के मुताबिक था लेकिन बाद में एक सरकारी नोटिफिकेशन के जरिए यह रकबा 180 कनाल से कम करके सौ कनाल कर दिया गया था।

निर्मल सिंह की बीवी ने इस मुतनाजा (विवादित) जमीन पर बारह मई से अपने मकान की तामीर शुरू कराई थी फौरन ही कोर कमाण्डर जनरल सरनजीत सिंह ने इलाके के पटवारी नवीद अहमद को बुलाकर काम रूकवाने के लिए कहा तो पटवारी के कहने पर ममता सिंह काम रोकने के लिए तैयार नहीं हुई। जनरल सिंह ने जिले के आला अफसरान से कहा तो वह अफसरान भी निर्मल सिंह और कवीन्द्र गुप्ता के सामने कुछ बोलने की हिम्मत नहीं कर पाए। इसीलिए जनरल सिंह ने सीधे निर्मल सिंह को खत लिखा। खुद निर्मल सिंह भी यह मानते हैं कि जिस जगह वह अपनी बीवी के नाम मकान बनवा रहे हैं वह आर्मी के हथियार डिपो से सिर्फ चार-साढे चार सौ मीटर के ही फासल पर है।

जम्मू-कश्मीर बीजेपी लीडरान के घपले और घोटाले की यह एक मामूली मिसाल है। अगर भारत सरकार अब गवर्नर राज में पीपुल्स डिमाक्रेटिक पार्टी और बीजेपी के वजीरों के कारनामों की इमानदारी से जांच करा ले तो तीन-चौथाई वजीर और मेम्बरान असम्बली किसी न किसी लूट में मुलव्विस मिलेंगे। इन लोगों ने कीमती जमीनों पर कब्जे करने के अलावा जंगल से कीमती दरख्त कटवा कर लकड़ी स्मगल करने, गैर कानूनी माइनिंग कराने और रिश्वत खाकर किस्म-किस्म के गैर कानूनी काम किए हैं। सड़कों की तामीर में भी खूब घपले किए गए हैं शायद इसीलिए कांग्रेस लीडर और साबिक चीफ मिमिस्टर गुलाम नबी आजाद ने सरकार गिरने के दिन उन्नीस जून को कहा था कि अपनी जेबें भरने के बाद कश्मीर को बर्बाद करके भारतीय जनता पार्टी ने सरकार गिराने का काम किया है।