हिन्दू दहशतगर्दों की तादाद में इजाफा

हिन्दू दहशतगर्दों की तादाद में इजाफा

लखनऊ! मालेगांव, मक्का मस्जिद, अजमेर दरगाह और समझौता एक्सप्रेस में हुए बम धमाकों के इल्जाम में असीमानन्द और प्रज्ञा सिंह ठाकुर समेत तकरीबन एक दर्जन दहशतगर्दों की गिरफ्तारी के बाद कांग्रेस लीडर दिग्विजय सिंह और उस वक्त के होम मिनिस्टर सुशील कुमार शिंदे ने उन्हें भगवा दहशतगर्द कह दिया था तो आज तक पूरा आरएसएस कुन्बा इस बात पर उन्हें कोसता रहता है। आरएसएस लीडरान बार-बार यही कहते हैं कि हिन्दू दहशतगर्द तो हो ही नहीं सकता।
अब उत्तर प्रदेश एटीएस ने रमेश शाह के गरोह को दहशतगर्दी में गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार हुए सात दहशतगर्दों में पांच हिन्दू हैं चूंकि यह गिरफ्तारियां मोदी सरकार में हुई हैं इसलिए आरएसएस के तमाम लोगों की बोलती बंद हो गई है। यह दहशतगर्द उन दहशतगर्दों से ज्यादा खतरनाक हैं जो रायफल ले कर कश्मीर में आम लोगों और फौजियों की जान लेते फिरते हैं क्योकि उन्हें तो किसी न किसी दिन मार दिया जाता है लेकिन रमेश शाह जैसे दहशतगर्दों को आसानी से निशाना नहीं बनाया जा सकता क्योंकि यह पर्दे के पीछे रह कर कश्मीरी दहशतगर्दों को मोटी रकमें फराहम करने का काम करते हैं। एटीएस के जरिए पकडे़ जाने वालों में गरोह सरगना रमेश शाह के अलावा निखिल राय, दयानन्द यादव, निखिल राय, मुकेश प्रसाद, नईम अरशद और नसीम अहमद शामिल हैं। इनसे पूछगछ करने वाली एटीएस टीम का मानना है कि दहशतगर्दों को फडिंग करने वाले इस गरोह में और भी कई लोग शामिल हैं।
टेरर फडिंग करने वाले गरोह का सरगना कितना शातिर है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि एटीएस की टीम उससे कई दिनों से पूछगछ कर रही थी लेकिन उसने पाकिस्तान में बैठे अपने हैण्डलर (आका) का नाम नहीं बताया था। वह गोरखपुर सर्वोदय नगर का रहने वाला है। असुरन चुंगी इलाके में उसका सत्यम शापिंग मार्ट है यह मार्ट उसने टेरर फडिंग के लिए आने वाली रकम के कमीशन से ही खड़ा किया है। वह कम्प्यूटर का माहिर है और बडे़ शातिराना अंदाज में दस्तावेज तैयार कर लेता है। गोरखपुर के तकरीबन तमाम बड़े कहे जाने वाले लोगों से उसने अच्छे ताल्लुकात बना रखे हैं। वह नशे के कारोबार में भी मुलव्विस रहा है। विवेकनगर में उसने तकरीबन पचास लाख की जमीन खरीद रखी है। जिसकी जानकारी उसके घर वालों को भी नहीं है। वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी ने जो जन धन खाते खुलवाए हैं उसने उन खातों का भी जम कर इस्तेमाल किया। दहशतगर्दों को पहुँचाने के लिए विदेशों से रकम आती थी वह यह जन धन खातों में ही मंगवाया करता था।
टेरर फंडिंग के सरगना रमेश शाह को यूपी एटीएस ने महाराष्ट्र एटीएस की मदद से गुजिश्ता 19 जून को पुणे से गिरफ्तार किया था। उसको पुणे से ट्रांजिट रिमाण्ड पर लखनऊ लाया गया जहां उसे कोर्ट के सामने पेश करके सात दिन की पुलिस कस्टडी मंजूर कराई गई। कस्टडी रिमाण्ड 23 जून से शुरू हुई। एटीएस ने 25 जून से बाकायदा पूछगछ की शुरूआत की। इस दौरान उसने कुबूल किया कि इस मामले में पहले गिरफ्तार किए गए मुल्जिम मुकेश से बरामद 70 से ज्यादा खातों का ब्योरा रखने के लिए वह जिस डायरी का इस्तेमाल करता था उसे वह खुद लिखता था। उसमें खातों से मुताल्लिक इंदराज उसी की राइटिंग में हैं। एटीएस ने अब उसकी राइटिंग का मिलान करने का फैसला किया है। एटीएस को तफतीश के दौरान यह भी पता चला कि वह 2011 से इस जुर्म में मुलव्विस है। 2014 में उसके खिलाफ धोका धड़ी का मुकदमा भी दर्ज हुआ था।
रमेश शाह गुजिश्ता 24 मार्च से ही एटीएस के रडार पर था लेकिन मार्च में मुकेश प्रसाद और मुशर्रफ अंसारी की गिरफ्तारी के बाद से वह फरार चल रहा था। मामले के तफतीश के दौरान यह पता चला था कि वह गिरफ्तार किए गए लोगों से राब्ते में रहता था। गिरफ्तार लोगों के कब्जे से मिले आडियो टेप और डायरियों से उसका सुराग मिला। टेरर फंडिंग का जाल गोरखपुर में फैला है इसकी तस्दीक तो मार्च में मोबाइल कारोबारी भाइयों समेत छः लोगों की गिरफ्तारी के बाद ही हो गई थी। अब पूरे नेटवर्क के मास्टर माइंड गोरखपुर के रमेश शाह की गिरफ्तारी के बाद कई लोगों की बेचैनी बढ गई है। वहीं आईजी एटीएस ने साफ कहा है कि रिमाण्ड के दौरान पूछगछ के बाद टेरर फंडिंग से जुड़े कई लोग शिकंजे में आएंगे। याद रहे कि मोबाइल कारोबारी भाइयों की गिरफ्तारी के बाद एटीएस ने ताबड़तोड़ छापामारी करके चार और लोगों को शहर से पकड़ा था। मध्य प्रदेश के रीवा और प्रताप गढ से गिरफ्तारियां हुई थी। यह सभी रमेश शाह के लिए काम करते थे। उनसे पूछगछ में शहर का एक बडे़ कारोबारी जिसका नेपाल में कैसिनो भी है, से पूछगछ की गई और यह कहा गया कि सबूतों की कमी की वजह से शिकंजा नहीं कसा जा सका था। एटीएस को उम्मीद है कि तफतीश के बाद शहर में इस नेटवर्क से जुड़े लोगों पर शिकंजा कसा जा सकेगा।
यह बात भी सामने आई कि टेरर फंडिंग का सरगना अपने वालिद हरिशंकर के साथ ही बिहार के गोपालगंज से आकर गोरखपुर में बस गया था और यहां के मुहीउद्दीपुर इलाके में सब्जी बेचता था। महज तीन साल में मामूली सब्जी बेचने वाला शहर का बड़ा कारोबारी बन गया। दस महीने पहले ही मेडिकल कालेज रोड पर मुकीम शापिंग मार्ट से फैमली स्टोर खोला। रमेश की अचानक बढी कमाई से मोहल्ले के लोग भी हैरत में थे। 24 मार्च के बाद से शापिंग मार्ट बंद है।