मजाक बन गई मोदी के कत्ल की धमकी

मजाक बन गई मोदी के कत्ल की धमकी

 

 

“देश में लव जेहाद और मामूली जरायम की तहकीकात एनआईए और सीबीआई जैसी एजेसियों से कराई जा रही है लेकिन वजीर-ए-आजम मोदी के कत्ल की साजिश जैसे संगीन मामले का इस्तेमाल पांच दलित लीडरों को रिमाण्ड पर लेने के लिए अदालत में किया गया साजिश का एलान महाराष्ट्र के वजीर-ए-आला देवेन्द्र फडण्नवीस ने करके पूरे मामले को मजाक बना दिया।”

 

“वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी को राजीव गांधी की तरह कत्ल करने की साजिश के दावे पर कोई भी यकीन करने को तैयार नहीं इतने संगीन मामले पर भी सरकार और महाराष्ट्र पुलिस का जो रवैया है वह भी इस दावे पर धूल डालने का काम कर रहा है। शरद पवार ने इसे महज हमदर्दी हासिल करने का ढोग बताया तो शिवसेना लीडर संजय राउत ने कहा कि ऐसे हथकण्डों से 2019 के लोक सभा एलक्शन में बीजेपी को कोई फायदा नहीं मिलने वाला।”

 

“नरेन्द्र मोदी और दीगर बीजेपी लीडरान को कत्ल करने की धमकियांं की बात करना अब कोई नई बात नहीं रह गई है। योगी आदित्यनाथ के गद्दी संभालते ही यूपी असम्बली मे खतरनाक धमाकाखेज (विस्फोटक) पाउडर बरामद हो गया था पिछले महीने बीजेपी मेम्बरान के मोबाइलों पर धमकियों का सैलाब सा आ गया था। उनकी तहकीकात हुई या नहीं कोई नहीं जानता। शायद इसीलिए मोदी के वजीर अठावले भी धमकी की बात मानने को तैयार नहीं हैं।”

 

हिसाम सिद्दीकी

नई दिल्ली! महाराष्ट्र के दलितों की तंजीम (संगठन) एलगार परिषद और नक्सलियों ने मिलकर वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी को कत्ल करने की साजिश रची। महाराष्ट्र के वजीर-ए-आला और पुलिस के जरिए किए गए इस किस्म के दावे भले ही सच हों, लेकिन मोदी उनके हामियों और भक्तों के अलावा कोई इस पर यकीन करने के लिए तैयार नहीं है। इस तरह की साजिश रची गई। इस इत्तेला के खिलाफ वैसे तो पूरे मुल्क के सियासतदानों ने आवाजें अठाई लेकिन सबसे ज्यादा सख्त बयानात महाराष्ट्र के सियासतादानों की तरफ से ही आए। मोदी सरकार में वजीर रामदास अठावले ने ही सबसे पहले कह दिया कि कोई भी अम्बेडकरवादी माओवादियो ंके साथ नहीं हो सकता। एलगार परिषद पर इस तरह का इल्जाम बिल्कुल गलत है। उन्होने कहा कि वह इस सिलसिले में वजीर-ए-आला देवेन्द्र फडण्नवीस से बात करेगे। एनसीपी के सदर और महाराष्ट्र के तकरीबन सबसे सीनियर लीडर शरद पवार ने कहा कि मोदी के कत्ल की साजिश जैसी खबरें सिर्फ आम हिन्दुओं  में हमदर्दी (सहानुभूति) हासिल करने के लिए फैलाई गई है। नरेन्द्र मोदी की मरकजी और महाराष्ट्र में रियासती सरकार में साझेदार शिवसेना ने कहा कि अब इस तरह की खबरें चाहे जितनी फैला ली जाएं 2019 के लोक सभा एलक्शन में मोदी को इसका कोई फायदा नहीं मिलने वाला। याद रहे कि भीमा कोरेगांव में इस साल पहली जनवरी को दलितों के साथ हुई मारपीट और उसके अगले दिन पुणे समेत महाराष्ट्र के कई बड़े शहरों में हुई हिंसा के मामले मे पुणे पुलिस तहकीकात कर रही है हिंसा और दलितों पर हमले कराने के लिए रिपोर्ट मे नामजद ‘समस्थ हिन्दू एकता अघाड़ी’ के लीडर साभाजी भिंडे और ‘समस्थ शिव प्रतिष्ठान हिन्दुस्तान’ के लीडर मिंलंद एकबोते को गिरफ्तार करने के बजाए पुणे पुलिस ने पांच महीने बाद आठ जून को दिल्ली, पुणे और मुंबई से पांच दलितों को ही उठा लिया। आठ जून को उन्हें अदालत में पेश किया गया  तो उनकी पुलिस रिमाण्ड हासिल करने के लिए एक खत भी पुलिस ने अदालत में पेश किया जिसके लिए कहा गया कि यह ई-मेल पर कामरेड प्रकाश के नाम दिल्ली के मुनीरका में रहने वाले रोना जैकब विल्सन के लैपटाप से बरामद किया गया है। जिसमें कहा गया है कि हमें राजीव गांधी कत्ल जैसी कार्रवाई करनी है उसके लिए रायफल खरीदने के लिए आठ करोड़ रूपए और चार लाख राउण्ड गोला बारूद की जरूरत है। इस खत की मुकम्मल तहकीकात के लिए गिरफ्तार किए गए पांचों मुल्जिमान की पुलिस रिमाण्ड जरूरी है। इस तरह के खत की बुनियाद पर वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी को कत्ल किए जाने की साजिश की बात खुद वजीर-ए-आला देवेन्द्र फडण्नवीस ने मीडिया नुमाइंदो से कही थी।

पुणे पुलिस और महाराष्ट्र सरकार ने मोदी को कत्ल करने की साजिश की जो कहानी गढी उसमें एक टाइप शुदा खत यह कह कर दिखाया जा रहा है कि यह रोना जैकब विल्सन के लैपटाप से बरामद हुआ है। इसमें लिखा है कि जिस तरह राजीव गांधी को कत्ल किया गया था उसी तर्ज पर हम एक और कत्ल करने का प्रोग्राम बना रहे हैं यह इतना मजहका खेज (हास्यास्पद) फर्जीवाड़ा है जिसपर किसी को यकीन नहीं होगा। राजीव गांधी को दहशतगर्दां ने इसलिए आसानी से अपना निशाना बना लिया था कि उनकी सिक्योरिटी का माकूल बदोबस्त नहीं था। नरेन्द्र मोदी के साथ ऐसा नही है। सिक्योरिटी के मामले में इस वक्त दुनिया भर में सबसे ज्यादा सख्त और चाक-चौबंद सिक्योरिटी इस्राईल के वजीर-ए-आजम और अमरीकी सदर की होती है। नरेन्द्र मोदी के वजीर-ए-आजम बनने के बाद से हिन्दुस्तानी वजीर-ए-आजम का सिक्योरिटी बंदोबस्त इस्राईली वजीर-ए-आजम और अमरीकी सदर से भी ज्यादा बेहतर और सख्त है। वह खुद इतने चौकन्ना रहते हैं कि पिछले दिनों दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस वे पर उन्होने जो रोड शो किया उसमें उन्होने एक्सप्रेस वे बनवाने वाले वजीर नितिन गडकरी तक को जीप पर खडा नहीं किया। माओवादी उनका क्या बिगाड़ सकते हैं। इसीलिए स्वामी अग्निवेश भी कहते हैं कि यह खबर सिर्फ हिन्दुओं की हमदर्दी हासिल करने और एलक्शन में वोट लेने के अलावा और कुछ नहीं है।

वजीर-ए-आजम मोदी के खिलाफ कत्ल की साजिश की पब्लिसिटी जिस तरह की गई। उस पूरे तरीके ने ही इस दावे को मुश्तबा (संदिग्ध) बना दिया है। अव्व्ल तो हर कोई यह सवाल कर रहा है कि जनवरी में भीमा कोरेगांव और पुणे वगैरह में हुई दलित मुखालिफ हिंसा के लिए दलितों की जानिब से दर्ज रिपोर्ट में नामजद साभाजी भिंडे और मिलिंद एकबोते के खिलाफ कोई कार्रवाई क्यों नही की गई। उन लोगों से तो पूछगछ तक नहीं हुई लेकिन पांच दलित मुफक्किरीन (चिंतकों) को माओवादियों से मिले होने के फर्जी इल्जाम में गिरफ्तार कर लिया गया। फर्जी दस्तावेज और गवाह तैयार करने के इल्जामात से घिरे रहने वाली महाराष्ट्र पुलिस की यह कहानी किसी के गले से उतर नहीं रही है।

अगर वजीर-ए-आजम को कत्ल करने की साजिश रची गई तो यह इंतेहाई संगीन मामला है। इसको जिस तरह मंजरेआम पर लाया गया उसी से अंदाजा लगता है कि यह महज पब्लिसिटी स्टंट है। एक सौ तीस करोड़ के मुल्क के वजीर-ए-आजम को कत्ल करने की साजिश के लिए लिखे खत को फौरन एनआईए और सीबीआई जैसी बडी एजेंसियों को सौप कर इसकी तह तक पहुचने की कार्रवाई किए जाने के बजाए पुलिस ने उसे मुल्जिमान की रिमाण्ड हासिल करने में इस्तेमाल किया और वजीर-ए-आला देवेन्द्र फडण्नवीस ने मीडिया को उसकी जानकारी दी। यह कौन सा तरीका है। इस वक्त मुल्क में लव जेहाद और मामूली क्रिमिनल तक के खिलाफ तहकीकात तो एनआईए और सीबीआई जैसी एजेंसियों को सौपी जाती हैं। लेकिन वजीर-ए-आजम के कत्ल जैसे संगीन मामले की तहकीकात पुणे पुलिस करे तो इसपर कौन यकीन करेगा।

नरेन्द्र मोदी को मारने की धमकी की खबर कोई पहली बार नहीं फैलाई गई है। जब-जब कोई एलक्शन आता है इस किस्म की बातें होने लगती हैं। 2002 में गुजरात में हुए इंसानियत के कत्लेआम के बाद तो पाकिस्तानी खुफिया एजेसी आईएसआई, लश्करे तैयबा और जैश ए मोहम्मद के दहशतगर्द अक्सर नरेन्द्र मोदी को कत्ल करने अहमदाबाद आ जाते थे। अहमदाबाद पहुचते ही उस वक्त क्राइम ब्रांच के जिम्मेदार डीजी वंजारा से उनकी मुलाकात हो जाती थी। वंजारा उनका इनकाउण्टर करवा देते थे फिर एलान करते थे कि इनकाउण्टर मे मारे गए लोग बहुत खतरनाक दहशतगर्द थे जो नरेन्द्र मोदी पर हमला करने की नियत से अहमदाबाद आए थे। 15 जून 2004 को डीजी वंजारा की टीम ने इशरत जहां और उसके चार साथियों को कत्ल करके यही कहानी बताई। इसी तरह की कहानी गढकर 26 नवम्बर 2005 को सोहराबउद्ीन शेख को बाकायदा बस से उतार कर कत्ल किया गया। सोहराब के साथ सफर कर रहा तुलसीराम प्रजापति इस मामले में पुलिस के खिलाफ गवाह था। 28 दिसम्बर 2006 को उसे पुलिस हिरासत में मार दिया गया। मारे जाने से पहले प्रजापति ने खुद ही कहा था कि गुजरात पुलिस उसे कत्ल करने का प्रोग्राम बना रही है। 13 अक्टूबर 2009 को अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने दो लोगों को पकड़ने के बाद कहा कि यह लोग मोदी को कत्ल करने की सिजश रच रहे थे। छः दिसम्बर 2010 को मोदी हामी जीन्यूज ने खबर दी कि मोदी को कत्ल करने की तैयारियां हो रही है। कातिलों को ट्रेनिंग देने के लिए केरल और तमिलनाडु में अड्डें बन गए है। 31 अक्टूबर 2013 को बिहार के बीजेपी लीडर और अब मोदी के वजीर गिरिराज सिंह ने इल्जाम लगाया कि नितीश कुमार ने मुजाहिदीन के साथ मिलकर नरेन्द्र मोदी को कत्ल करने की साजिश की है। हमें इसका जवाब चाहिए। 14 नवम्बर 2013 को अहमदाबाद पुलिस ने इम्तियाज नाम के एक शख्स को पकड़ लिया फिर एक मकामी चैनल टीवी-9 पर खबर चलवाई कि इंसानी बम के जरिए मोदी को मारने की बात इम्तियाज नें बताई है। सात अप्रैल 2014 को लोक सभा एलक्शन मुहिम के दौरान पुलिस ने टीवी-9 के जरिए ही एक बार फिर खबर चलवाई कि पुंलिस ने मोदी को मारने की साजिश नाकाम कर दी। एलक्शन मुहिम के दौरान ही मोदी की पटना रैली मे बम धमाका हुआ था जिसमें कई लोग मारे गए थे। उस वक्त भी यही दावा किया गया था कि पटना का बम धमाका दरअस्ल नरेन्द्र मोदी को कत्ल करने के लिए था लेकिन भगवान ने उन्हें बचा लिया।

नरेन्द्र मोदी और दीगर हिन्दुत्ववादी लीडरों को कत्ल किए जाने की साजिश का भाण्डा फोड़ करने को बीजेपी और आरएसएस का जाना माना हथकण्डा लगता है। यह अफवाहें जानबूझ कर फैलाई जाती हैं ताकि मुल्क में बीजेपी के कट्टरपंथी लोग समाज में नफरत फैलाने का काम आसानी से कर सके। 2017 के शुरू में नरेन्द्र मोदी ने योगी आदित्यनाथ को उत्तर प्रदेश का चीफ मिनिस्टर बनाया। असम्बली का पहला ही एजलास हुआ तो अपोजीशन की पार्टियों की जानिब एक सीट के नीचे धमाकाखेज अशिया (विस्फोटक पदार्थ) बरामद हो गया। बगैर सोचे-समझे खुद योगी आदित्यानाथ ने बयान देकर यह सनसनी फैला दी कि प्रदेश असम्बली को उड़ाने और उन्हें कत्ल करने की साजिश रची गई थी। बाद में पूरा मामला झूट साबित हुआ। पिछले महीने मई के आखिर में अचानक बीजेपी मेम्बरान असम्बली को दुबई और पाकिस्तान के नम्बरों से धमकियां आने लगी थीं धमकी देने वालों ने सभी से कहा था कि दस लाख रूपए दे वर्ना उनको कत्ल कर दिया जाएगा। तकरीबन एक हफ्ते तक इन धमकियों की खबरें अखबारों में छाई रहीं फिर अचानक गायब हो गई। डिजीटल इंडिया के दावे के साथ बड़े-बडे़ दावे करने वाली मोदी सरकार यह भी पता नहीं लगा सकी कि यह धमकियां कहां से आ रही थी। सरकार ने धमकियों पर क्या कार्रवाई और तहकीकात कराई किसी को कुछ भी नहीं पता है। नतीजा यह कि लोग यह कहने लगे कि यह सब बीजेपी का अपना ड्रामा था। धमकियां आई होतीं तो तहकीकात मे पता भी चलता। उत्तर प्रदेश के मेम्बरान असम्बली को धमकियां मिलने की खबर के बाद महाराष्ट्र के चीफ मिनिस्टर देवेन्द्र फडण्नवीस ने भी कहा कि उन्हें भी जान से मारने की धमकियां मिली, उसकी भी तहकीकात का नतीजा किसी को नहीं पता है। इन हालात से तो साफ लगता है कि शरद पवार और शिव सेना लीडर संजय राउत की बातें सही हैं। यह सब बीजेपी का ड्रामा है।