मोदी, योगी, फिरकापरस्ती सभी हारे

मोदी, योगी, फिरकापरस्ती सभी हारे

 

 

देश के उत्तर, दक्खिन, पूरब, पच्छिम और नार्थ ईस्ट यानी सभी कोनों में लोक सभा की चार और असम्बली की ग्यारह सीटों के बाई एलक्शन मे बीजेपी सिर्फ एक लोक सभा और एक असम्बली सीट ही जीत सकी। देश ने साफ मैसेज दे दिया कि वजीर-ए-आजम मोदी अब अवाम झूट और फिरकापरस्ती में फंसकर बीजेपी को वोट नहीं देगे। लोक सभा एलक्शन में बमुश्किल दस महीने बचे हैं मोदी को अब दिल्ली से वापस गुजरात जाने के लिए बोरिया बिस्तर समेट लेना चाहिए।

 

कैराना को बीजेपी ने इज्जत की सीट बना रखी थी। हिन्दू मुस्लिम नफरत, झूट और फरेब के तमाम हथियार इस्तेमाल किए गए। योगी ने मीटिंगेे की मोहम्मद अली जिनाह भी लाए गए। वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोेदी ने गैरअखलाकी (अनैतिक) तौर पर पोलिंग से एक दिन पहले बागपत में रैली करके कैराना पर असर डाला लेकिन कैराना के मुसलमानों जाटों और दलितां ने अपने वोट से बता दिया कि अब वह झूट फरेब और फिरकापरस्ती के झांसे मेंsa फंसने वाले नहीं हैं।“

 

”मुजफ्फरनगर में 2013 सितम्बर में जाट मुस्लिम दंगा कराकर बीजेपी ने पच्छिमी यूपी में अपनी पकड़ मजबूत की थी। जाटों और मुसलमानों के सैकडों साल के इत्तेहाद को तोडा था अब जाट और मुसलमान पिछली कडुवाहट भुलाकर फिर एक साथ आ गए और दलितों को भी अपने साथ ले आए। इस तरह कैराना को हिन्दुत्व की तजुर्बागाह (प्रयोगशाला) के परखचे उड गए। बीजेपी पर बडी चोट यह भी है कि कैराना और नूरपुर दोनो सीटों पर हिन्दुओं की मदद से मुस्लिम उम्मीदवार जीत गए।“

 

हिसाम सिद्दीकी

लखनऊ! झूट, फिरकापरस्ती, आदित्यनाथ योगी की मीटिगें आधे-अधूरे बने एक्सप्रेस वे पर मोदी का रोडशो, हिन्दुत्व और मोहम्मद अली जिनाह इन तमाम मुद्दों को उछालने के बावजूद उत्तर प्रदेश की कैराना लोक सभा सीट पर वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी और प्रदेश के चीफ मिनिस्टर आदित्यनाथ योगी की शर्मनाक शिकस्त हुई है। कैराना सीट बीजेपी के लोक सभा मेम्बर हुकुम सिंह के इंतकाल होने से खाली हुई थी पार्टी ने हुकुम सिंह की बेटी मृगांका को वहां मैदान मे उतारा था उन्हें हमदर्दी (सेम्पैथी) वोट भी नहीं मिला। पूरे मुल्क में शुमाल जुनूब मशरिक, मगरिब (उत्तर, दक्खिन, पूरब, पच्छिम) और नार्थ ईस्ट के मेघालय में हुए ग्यारह असम्बली और चार लोक सभा सीटों के एलक्शन में बीजेपी सिर्फ एक असम्बली और एक लोक सभा सीट जीत सकी है। उत्तर प्रदेश की कैराना लोक सभा और नूरपुर असम्बली सीटें आरएलडी ओैर समाजवादी पार्टी ने जीतीं बीजेपी ने इन दोनांे हलको में हिन्दू मुस्लिम की बुनियाद पर एलक्शन लड़ा था सबसे अहम बात यह है कि दोनों सीटों पर मुस्लिम उम्मीदवारों तबस्सुम हसन (कैराना) और नईम उल हसन (नूरपुर) से जीते है। चीफ मिनिस्टर आदित्यनाथ ने अपनी जान लगा दी एलक्शन मुहिम के दौरान मुजफ्फरनगर दंगों का जिक्र करते हुए यहां तक कहा कि अखिलेश यादव के हाथ हिन्दुओं के खून से सने हैं। इसलिए वह वोट मांगने आने की हिम्मत नहीं कर पा रहे हैं। वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी सीधे-सीधे कैराना में वोट मांगने नहीं आए लेकिन अपनी आदत के मुताबिक पिछले दरवाजे से बेईमानी और गैर अखलाकी (अनैतिकता) का रास्ता अख्तियार करते हुए दिल्ली मेरठ एक्सपे्रसवे और ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस वे के बहाने पोलिंग से एक दिन कब्ल 27 मई को कैराना से मिले हुए बागपत में एक रैली करके कैराना की एलक्शन मुहिम पूरी की। बेहिसी का आलम यह कि 135 में से सिर्फ नौ किलोमीटर ही बने एक्सप्रेस वे का मोदी ने इफ्तेताह किया बल्कि रोड शो भी किया। बागपत में उनके आने के दिन ही गन्ने की कीमत न मिलने के खिलाफ धरने पर बैठे एक काश्तकार की मौत हो चुकी थी इसके बावजूद मोदी ने अपनी तकरीर में काश्तकारों को कुछ देने का एलान करने के बजाए कांगे्रस पर ही हमला करते हुए कहा कि कांग्रेस में एक परिवार का मतलब देश है जबकि हमारे लिए पूरा देश हमारा परिवार है। उत्तर प्रदेश, उत्तराखण्ड, महाराष्ट्र, कर्नाटक, केरल, मगरिबी बंगाल, बिहार, पंजाब और मेघालय यानी मुल्क के हर कोने में हुए असम्बली और लोक सभा के पन्द्रह हलकांे के बाई एलक्शन में बीजेपी असम्बली और लोक सभा की एक एक सीट ही जीत पाई है। लोक सभा में अक्सरियत के लिए 272 सीटे चाहिए मोदी के पास अब इतनी सीटंे भी नहीं है। मुल्क के हर कोने में बीजेपी की यह शिकस्त साफ इशारा करती है किअब मोदी के पैर उखड़ चुके हैं। अगले साल यानी 2019 के लोक सभा एलक्शन में मोदी की बीजेपी की शिकस्त यकीनी है।

कैराना और नूरपुर हलकों के बाई एलक्शन का एक बहुत ही अहम मैसेज यह है कि 2013 में बीजेपी ने मुजफ्फरनगर में मुस्लिम जाट दंगा कराकर पूरे पच्छिमी उत्तर प्रदेश की जाट बिरादरी को अपना मजबूत वोट बैंक बना लिया था और यह प्रोपगण्डा किया कि अब कभी मुसलमान और जाट इकट्ठा नहीं हो सकते। कैराना के नतीजों ने साबित कर दिया कि जाट और मुसलमान तो एक बार फिर एक साथ आ गए, पच्छिम उत्तर प्रदेश में जाटों और दलितों में हमेशा टकराव रहता था अब दलितों ने भी मुसलमानों और जाटों के साथ कांधे से कांधा मिलाकर फिरकापरस्तों को हराने का काम किया है। इशारा साफ है कि 2019 में बीजेपी का उत्तर प्रदेश से सफाया होना यकीनी है। कैराना जीतने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने हिन्दू मुस्लिम नफरत फैलाने की हर मुमकिन कोशिशें की कैराना से हिन्दू भाग रहे है यह इल्जाम हुकुम सिंह ने लगाया था उनका इल्जाम गलत साबित हुआ तो खुद उन्होने ही अपनी गलती मानते हुए बयान दिया था कि उन्होने हिन्दुओं के कैराना से भागने की बात गलत इत्तेलाआत की वजह से कह दी थी। अब इस एलक्शन में खुद चीफ मिनिस्टर आदित्यनाथ योगी ने अपनी तकरीर में यह मुद्दा फिर छेडा और कहा कि अब कैराना से किसी हिन्दू को घर छोड कर भागना नहीं पडेगा। उन्होने मोहम्मद अली जिनाह का राग भी छेड़ा। कैराना को बीजेपी ने कई सालों से हिन्दुत्व की लैबोरेट्री बनाए हुए थी इसके बावजूद बीजेपी कैराना मे हारी वह भी एक मुस्लिम उम्मीदवार के हाथो। तबस्सुम हसन की जीत से साबित हो गया कि उत्तर प्रदेश में कुछ कट्टरपथियों के अलावा बाकी तमाम हिन्दू और मुसलमान एक साथ हैं क्योंकि अगर कैराना मे हिन्दु यानी जाटों और दलितां का वोट तबस्सुम हसन को न मिलता तो उनका जीत पाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन था यही सूरते हाल नूरपुर की है।

एक तरफ नरेन्द्र मोदी का रोडशो, कैराना से मिले हुए बागपत में रैली, वजीर-ए-आला योगी आदित्यनाथ की भडकीली तकरीरे दूसरी तरफ राष्ट्रीय लोक दल, कांगेरस, समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के मकामी कारकुन। न तो अखिलेश यादव एलक्शन मुहिम में गए न मायावती न कांगे्रस का कोई बड़ा लीडर और न चैधरी अजित सिंह ने ज्यादा सरगर्मी दिखाई पूरा एलक्शन दो नौजवानों के हाथों में था एक अजित सिंह का बेटा जयंत चैधरी और दूसरा खुद तबस्सुम हसन का मेम्बर असम्बली बेटा नाईश हसन इन्हीं दोनों नौजवानों ने आम हिन्दू मुसलमानों की मदद से  योगी मोदी फिरकापरस्ती सभी को पटखनी दे दी।

उधर बिहार में तेजस्वी यादव की कयादत में लालू के राष्ट्रीय जनता दल ने नितीश कुमार और मोदी की जोड़ी को पटखनी देने की हैट्रिक बनाते हुए जोकीहाट असम्बली सीट भी जीत ली। इससे पहले अररिया लोक सभा और एक असम्बली सीट आरजेडी जीत चुकी है। नतीजा आने के बाद तेजस्वी यादव ने नितीश कुमार पर सख्त हमला करते हुए कहा कि यह मौकापरस्ती और फिरकापरस्ती पर लालूवाद की जीत है। झारखण्ड में अपोजीशन गठजोड़ में शामिल झारखण्ड मुक्ति मोर्चा ने गोमिया और सिल्ली असम्बली सीटें जीत लीं। बीजेपी असम्बली की ग्यारह में से सिर्फ एक उत्तरखण्ड की थराली सीट और लोक सभा की चार में से एक महाराष्ट्र की पालघर सीट पर ही जीत दर्ज करा सकी है। उत्तर प्रदेश की कैराना और महाराष्ट्र की भडारा गोदिया लोक सभा सीटंे बीजेपी के पास थीं वह दोनो हार गई। महाराष्ट्र मे ही पलुस कडेगाव भी कांग्रेस ने अपने पास बरकरार रखी। कर्नाटक में राजराजेश्वरी सीट और पंजाब में शाहकोट और मेघालय की अम्र्पात सीटें भी कांग्रेस ने ही जीती है। केरल की चैगन्नूर सीट माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी और बंगाल की महेशतला सीट तृणमूल कांगे्रस के खाते में गई। वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी अपनी मकबूलियत (लोकप्रियता) के चाहे कितने बडे बडे दावे क्यों न करें अगर इन नतीजों को सैम्पल माना जाए देश के हर कोने से एक ही मैसेज आया है कि नरेन्द्र मोदी अब यह देश झूट और फिरकापरस्ती के जाल में फसने वाला नहीं है। आप अपना बोरिया बिस्तर बांध लीजिए।

1- पालघर-महाराष्ट्र की पालघर लोकसभा सीट पर हुए बाईएलशन में शिवसेना के उम्मीदवर श्रीनिवास वनगा को 29 हजार से ज्यादा वोटों से हराते हुए बीजेपी के राजेंद्र गावित इस सीट पर पार्टी का कब्जा बरकरार रखने में कामयाब रहे। 2014 का लोकसभा चुनाव इन दोनों पार्टियों ने मिलकर लड़ा था। बीजेपी 2014 के लोकसभा चुनाव में इस सीट पर जीती थी और उसके मेम्बर लोक सभा चिंतामण वनगा के इंतकाल की वजह से इस सीट पर बाईएलक्शन हुआ। यहां पर शिवसेना ने बीजेपी के इंतकाल कर चुके एमपी चिंतामन वांगा के बेटे श्रीनिवास वांगा को अपना उम्मीदवार बनाया था।

कैराना- बीजेपी लोक सभा एमपी हुकुम सिंह के इंतकाल के बाद खाली हुई कैराना लोकसभा  सीट पर हुये बाईएलक्शन में आरएलडी की तबस्सुम हसन ने जीत दर्ज कर ली है। उन्होंने बीजेपी उम्मीदवार मृगांका सिंह को 55000 वोटों से हराया है। कैराना लोकसभा सीट के तहत शामली जिले की थानाभवन, कैराना और शामली सीटों के अलावा सहारनपुर जिले की गंगोह और नकुड़ असम्बली सीटें आती हैं। इनके अलावा महाराष्ट्र की भंडारा गोदिया लोक सभा सीट एनसीपी और कांगे्रस गठबंधन ने तो नागालैण्ड लोक सभा सीट एनडीपीपी ने जीती है जो एनडीए मंे शामिल है।

उत्तराखंड की थराली विधानसभा सीट- बीजेपी ने चमोली जिले की थराली असम्बली सीट पर हुए बाईएलक्शन में जीत हासिल कर ली हैं। बीजेपी की उम्मीदवार मुन्नी देवी शाह ने कांग्रेस के डाक्टर जीतराम शाह को हराया। थराली में मिली जीत से सत्तर मेम्बरान वाली असम्बली में बीजेपी मेम्बरान असम्बली ं की तादाद बढकर फिर 57 हो गयी है। जीतने वाली बीजेपी उम्मीदवार मुन्नी देवी साबिक एमएलए  मगनलाल शाह की बेवा है जिनके इंतकाल की वजह से इस सीट का बाईएलक्शन हुआ।

बिहार की जोकीहाट –  बिहार की जोकीहाट असम्बली सीट के बाईएलक्शन में आरजेडी के शाहनवाज आलम ने अपने नजदीकी हरीफ जनता दल यूनाइटेड के मुर्शीद आलम को 41,000 वोटों से हरा दिया है। यह सीट सरफराज आलम के अररिया से एमपी चुने जाने की वजह से खाली हुई थी।

झारखण्ड की गोमिया और सिल्ली – झारखंड की गोमिया सीट से झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने जीत दर्ज की है। गोमिया में झामुमो की बबिता देवी ने आजसू के लंबोदर महतो को हराया है और बीजेपी के माधवलाल सिंह तीसरे नम्बर पर पिछड़ गये। झारखंड मुक्ति मोर्चा के एमएलए क्रिमिनल मामले में मुजरिम करार दिये जाने और दो साल की जेल की सजा सुनाए जाने की वजहसे  यह सीट खाली हुई थी। झारखण्ड की ही सिल्ली सीट भी झारखण्ड मुक्ति मोर्चा ने ही जीती है। पहले भी यह दोनांे सीटें जेएमएम के पास ही थीं।

पंजाब की शाहकोट-  पंजाब में बरसरे एक्तेदार कांग्रेस के हरदेव सिंह लाडी ने शाहकोट सीट पर हुए बाई एलक्शन में जीत हासिल की है। उन्होंने अपने करीबी हरीफ शिरोमणी अकाली दल के उम्मीदवार नायब सिंह कोहाड़ को 38,801 वोटों के फर्क से हराया। लाडी को जहां 82,745 वोट हासिल हुए वहीं कोहाड़ को महज 43,944 वोट मिले। इस जीत के साथ ही 117 मेम्बरान की पंजाब असम्बली में कांग्रेस के मेम्बरान की तादाद 78 हो गई है। आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार रत्तन सिंह कक्कड़ कलां को महज 1,900 वोट मिले।

मेघालय में अम्पति- मेघालय में अम्पति  असम्बली सीट पर कांग्रेस ने 3,000 से ज्यादा वोटों के फर्क से दोबारा कब्जा कर लिया है। इस जीत के साथ प्रदेश में कांग्रेस मेम्बरान असम्बलीं की तादाद बढ़कर 21 हो गई है और यह 60 मेम्बरान वाली मेघालय असम्बली में सबसे बड़ी पार्टी की शक्ल में उभरी है। कांग्रेस उम्मीदवार मियानी दलबोत शिरा ने 14,259 वोट हासिल किए जबकि उनके करीबी हरीफ बरसरे एक्तेदार  नेशनल पीपुल्स पार्टी के क्लेमेंट मोमिन ने 11,068 वोट हासिल किए। मियानी दलबोत शिरा साबिक चीफ मिनिस्टर मुकुल संगमा की बड़ी बेटी हैं। संगमा इस सीट पर लगातार छह बार चुनाव जीत चुके थे। बरसरे एक्तेदार मेघालय डेमोक्रेटिक गठजोड सरकार की कयादत कर रही राष्ट्रीय पीपुल्स पार्टी के पास 20 मेम्बर हैं।  इसे युनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी के सात, पीपुल्स डेमोक्रेटिक फ्रंट के चार, भारतीय जनता पार्टी और हिल स्टेट पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के दो-दो मेेम्बरान, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के एक और दो आजाद मेम्बरान की हिमायत हासिल है।

यूपी की नूरपुर- समाजवादी पार्टी के नईमुल हसन ने 6,211 वोटों के फर्क से नूरपुर असम्बली सीट जीत ली है। इस सीट से बीजेपी के मेम्बर लोकेंद्र प्रताप सिंह के फरवरी में सड़क हादसे में इंतकाल के बाद से इस सीट पर बाईएलक्शन हुआ। बीजेपी ने लोकेन्द्र प्रताप सिंह की बेवा अवनी सिंह को मैदान में उतार कर हिन्दुत्व और हमदर्दी का वोट हासिल करने की कोशिश की लेकिन नाकाम रही।

केरल की चेंगन्नुर- केरल की  सीपीएम की कयादत वाले एलडीएफ के उम्मीदवार साजी चेरियन ने चेंगन्नुर असम्बली सीट पर कांग्रेस के अपने करीबी हरीफ को 20,956 वोटों के भारी फर्क से मात दी हैं। चेरियन को 67,303 वोट मिलें जबकि कांग्रेस कयादत वाले यूडीएफ उम्मीदवार डी विजयकुमार 46,347 वोट ही हासिल कर पाए। वहीं बीजेपी उम्मीदवार एस श्रीधरन पिल्लै 35,270 वोटों के साथ तीसरे नम्बर पर रहे। जनवरी में सीपीएम मेम्बर केके रामचंद्रन नायर के इंतकाल के बाद यहां बाई एलक्शन हुआ था।

पश्चिम बंगाल की महेशतला- पश्चिम बंगाल की महेशतला असम्बली सीट से टीएमसी उम्मीदवार महेश चंद्र दास जीतें उन्होंने बीजेपी के उम्मीदवार को हराया। यह सीट टीएमसी के पास ही थी। बंगाल के महेशतला असम्बली हलके में 70 फीसद पोलिंग हुई थी।

महाराष्ट्र की पलुस कडेगांव  सीट-महाराष्ट्र के पलूस-कडेगाव असम्बली सीट पर हुए बाईएलक्शन में कांग्रेस के उम्मीदवार विश्वजीत पतंगराव कदम को बिला मुकाबला जीत हासिल हुई हैं  इस सीट पर बीजेपी ने कांग्रेस उम्मीदवार के खिलाफ संग्राम सिंह देशमुख को उतारा था, लेकिन आखिरी वक्त पर उन्होंने अपना पर्चा नामजदगी वापस ले लिया था। यह सीट विश्वजीत के वालिद और सीनियर कांग्रेस लीडर पतंगराव कदम के इंतकाल के बाद खाली हुई थी।

कर्नाटक की राजराजेश्वरी  सीट- कांग्रेस के एन मुनिरत्न ने बेंगलुरु में राजाराजेश्वरी नगर असम्बली सीट से 25,400 से ज्यादा वोटों के फर्क से जीत दर्ज की है। पूरे प्रदेश में 12 मई को असम्बली एलक्शन हुए थे लेकिन वोटर्स शिनाख्ती कार्ड और दीगर गडबडी की वजह से इस सीट पर चुनाव टाल दिया गया था। इस सीट पर 28 मई को बाईएलक्शन हुआ। 12 मई को चुनाव से पहले राजाराजेश्वरी शहर असम्बली हलके के एक अपार्टमेंट से करीब 10,000 वोटर्स शिनाख्ती कार्ड जब्त होने से बड़ा तनाजा पैदा हो गया था।