मायावती ने किया कुन्बा परस्ती का खात्मा

मायावती ने किया कुन्बा परस्ती का खात्मा

लखनऊ! कांगे्रस और समाजवादी पार्टी पर भारतीय जनता पार्टी कुन्बापरस्ती का इल्जाम लगाया करती रहती है। भाई आनन्द कुमार को बीएसपी का कौमी नायब सदर बनाने की वजह से वह मायावती पर भी कुन्बापसरस्ती को बढावा देने का इल्जाम लगाने लगी थी। इन इल्जामात से छुटकारा पाने के लिए बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने 26 मई को पार्टी की नेशनल एक्जीक्यूटिव की मीटिंग बुलाई जिसमें पार्टी आईन (संविधान) में तब्दीलियों के साथ कई अहम फैसले किए गए। इनमें सबसे अहम फैसला बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने अपने भाई आनन्द कुमार को पार्टी के नायब सदर के ओहदे से हटा कर किया। इसी के साथ मायावती ने कहा कि वह पार्टी से कुन्बापरस्ती का खात्मा करती हैं और एलान करती हैं कि उनकी जिंदगी में कोई भी पार्टी सदर नहीं बनेगा। इसके अलावा उनके परिवार के किसी भी मेम्बर को न तो पार्टी में कोई ओहदा दिया जाएगा न उसको चुनाव लड़ाया जाएगा और न ही राज्य सभा, एमएलसी या वजीर वगैरह बनाया जाएगा। प्रदेश सदर राम अचल राजभर को कौमी जनरल सेक्रेटरी और आर एस कुशवाहा को प्रदेश सदर बनाया है।

बीएसपी सुप्रीमो ने यह तो नहीं कहा कि वह कुन्बापरस्ती के खिलाफ हैं मगर उनकी पार्टी में नायब सदर बने उनके भाई आनन्द कुमार की वजह से उनपर भी यह इल्जाम लगाया जाने लगा था कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी की तरह मायावती भी कुन्बापरस्ती को बढावा दे रही हैं। इसके अलावा दूसरी पार्टियों में बीएसपी छोड कर गए लीडरान ने भी अवाम को गुमराह करने के लिए कहना शुरू कर दिया था कि मायावती अपने ही परिवार के लोगों को आगे बढा रही हैं। इन्हीं इल्जामात से छुटकारा पाने के लिए मायावती ने यह कदम उठाया।

बीएसपी सुप्र्रीमो मायावती ने कहा कि बीजेपी जैसी पार्टियां उन पर कुन्बा परस्ती का इल्जाम लगा रही थीं तो दूसरी तरफ घर के लोग जिसमें भाई-बहन और नजदीकी रिश्ते-नातेदार भी आनन्द कुमार की तरह पार्टी में ओहदा देने के लिए उनपर दबाव बना रहे थे। मायावती ने कहा कि अब मुस्तकबिल (भविष्य) में उनपर कुन्बा परस्ती का इल्जाम न लगे इसके लिए उन्होने पार्टी संविधान में कई अहम तरमीमात (संशोधन) किए हैं। जिसमें सबसे अहम तरमीम (संशोधन) यह है कि कौमी सदर मायावती या उनके बाद आगे जो भी कौमी सदर बनेगा उसकी जिंदगी में और उसके न रहने के बाद भी उसके परिवार के किसी भी नजदीकी मेम्बर को पार्टी तंजीम (संस्था) में किसी भी ओहदे पर नहीं रखा जाएगा। यही नहीं पार्टी के कौमी सदर के परिवार के किसी भी नजदीकी मेम्बर को न तो चुनाव लड़ाया जाएगा न राज्य सभा, विधान परिषद भेजा जाएगा न वजीर बनाया जाएगा। हालांकि यह सारी शर्ते उसपर लागू होंगी जो पार्टी का कौमी सदर होगा। इसके अलावा दीगर सतह के ओहदेदारों के परिवार के लोगों पर यह शर्ते लागू नहीं होंगी। इसी के साथ उन्होने यह भी साफ कर दिया कि उनके (मायावती के) जिंदा रहते कोई पार्टी का कौमी सदर (राष्ट्रीय अध्यक्ष) नहीं बनेगा।

दरअस्ल आनन्द कुमार को पार्टी का नायब सदर बनाए जाने के बाद अपोजीशन और पार्टी छोड़कर जाने वालों ने कहना शुरू कर दिया था कि आनन्द कुमार पार्टी के काम काज में कुछ ज्यादा ही दखल देने लगे हैं और वही मायावती के सियासी वारिस होगे। मगर 26 मई को मायावती ने अपनी पार्टी के कुन्बापरस्ती खत्म करने के लिए अहम कदम उठाया। उन्होने कहा कि अब उनके भाई आनन्द कुमार पार्टी के नायब सदर नहीं रहेगे उन्हें हटा दिया गया है। वह बगैर किसी ओहदे पर रहते हुए पार्टी  का काम करते रहेगे। मायावती ने पार्टी के आईन में जो तब्दीलियां की हैं उसके मुताबिक पार्टी का कौमी सदर कुन्बापरस्ती से दूर ही रहेगा। इसी के साथ लम्बे अर्से तक बीएसपी के प्रदेश सदर रहे साबिक वजीर राम अचल राजभर को पार्टी का कौमी जनरल सेक्रेटरी के साथ बिहार, उत्तराखण्ड और मध्य प्रदेश का को-आर्डीनेटर भी बनाया गया है। जबकि साबिक एमएलसी आर एस कूशवाहा को उत्तर प्रदेश बीएसपी का नया सदर बनाया है। सतीश चन्द्र मिश्रा पार्टी के जनरल सेक्रेटरी होने के साथ-साथ लीगल काम तो देखते ही हैं उनपर अपर कास्ट को बीएसपी से जोड़ने की जिम्मेदारी डाली गई है। अशोक सिद्धार्थ साउथ इंडिया की तीन रियासतों का काम देखेंगे। लालजी वर्मा को छत्तीसगढ का को-आर्डीनेटर बनाया गया है।

नेशनल एक्जीक्यूटिव में पार्टी आईन में तब्दीलियां के साथ बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने अपनी खराब होती सेहत का भी जिक्र किया। उन्होने कहा कि मध्य प्रदेश के प्रोग्राम के दौरान उनके घुटने में चोट लग गई थी डाक्टर तो आपरेशन के लिए कह रहे थे मगर फिलहाल सिंकाई और दवाई से ठीक कर लिया है। उन्होने कहा कि लम्बे वक्त तक सियासत करने के लिए सेहत का ठीक रहना जरूरी है और यह पार्टी के लोगों के हाथ में है कि वह मेरी सेहत को ठीक रखें। हर आदमी अपनी-अपनी जिम्मेदारी को ईमानदारी से निभाए तो उन्हें भी आराम का मौका मिल सकता है। हालांकि अपनी खराब सेहत के मद्देनजर मायावती ने पार्टी संविधान में तो तरमीम की उसमें यह भी जोड़ा कि जब बीएसपी का कौमी सदर अपनी ज्यादा उम्र की वजह से पार्टी व फील्ड में काम करने में खुद को कमजोर महसूस करे तो उसकी रजामंदी से ही उसे बीएसपी का कौमी सरपरस्त (राष्ट्रीय संरक्षक) बना दिया जाए और कौमी सरपरस्त के मश्विरे के मुताबिक ही पार्टी सदर काम करेगा। इस तरह मायावती ने पार्टी आईन में जो तब्दीलियां कीं उससे उन्होने पार्टी मे बडी हद तक कुन्बापरस्ती का खात्मा कर दिया है।