हिन्दुस्तानी फौज की गरिमा के लिए खतरा बने मेजर गोगोई

हिन्दुस्तानी फौज की गरिमा के लिए खतरा बने मेजर गोगोई

मोहम्मद मशहूद/ शब्बीर बट्ट

श्रीनगर! दुनिया की तारीख गवाह है फौज को अगर लम्बी मुद्दत तक सिविल पुलिस जैसी ड्यूटी पर तैनात किया गया तो फौजियों का एक हिस्सा बेईमान हो जाता है। कुछ ऐसा ही जम्मू-कश्मीर और नार्थ-ईस्ट में अक्सर देखने को मिलता है। मेजर लीतुल गोगोई ने नौ अप्रैल 2017 को बडगाम में पत्थर बाजों से मुकाबला करने के बहाने फारूक अहमद डार नाम के एक शख्स को अपनी जीप में बांध कर घुमाया था जिसकी पूरी दुनिया ने मजम्मत की थी लेकिन फौज का हौसला बनाए रखने के लिए न सिर्फ मेजर गोगोई का सरकार और आर्मी चीफ ने साथ दिया बल्कि मीडिया में बयानबाजी करने का मौका भी उन्हें दिया गया। इस वीडियो के वायरल होने पर ही कोर्ट आफ इंक्वायरी शुरू की गई थी जो अब पूरी होने वाली है। उन्हीं मेजर गोगोई को 23 मई को होटल ग्रेण्ड के एक कमरे में एक कश्मीरी लड़की के साथ पकड़ा गया। होटल में काफी हंगामा हुआ। उन्हें सुबह तकरीबन ग्यारह बजे खानपार पुलिस के हवाले किया गया। पुलिस ने मेजर गोगोई और लड़की का बयान दर्ज करने बाद उन्हें उनकी यूनिट के सुपुर्द कर दिया। यह भी पता चला कि गोगोई इस वक्त बडगाम के बीरवाह में 53 आरआर में तैनात हैं। लड़की के साथ श्रीनगर आने के लिए उन्होने अपने आला अफसरान से इजाजत भी नहीं ली थी। इस वाक्ए से महज एक हफ्ता पहले ही उन्हें आर्मी चीफ बिपिन रावत के हाथों एजाज से नवाजा गया था।

मेजर गोगोई के इस मामले पर आर्मी चीफ जनरल बिपिन रावत ने कोर्ट आफ इंक्वायरी का आर्डर दे दिया है। उन्हें 53 राष्ट्र रायफल्स से हटाकर फौरन चिनार हेडक्वार्टर में अटैच कर दिया गया। आर्मी चीफ जनरल रावत ने कहा कि कोर्ट आफ इंक्वायरी की रिपोर्ट आने दीजिए अगर मेजर गोगोई कुसूरवार पाए गए तो उन्हें ऐसी सख्त सजा दी जाएगी जो तमाम फौजियों के लिए सबक आमोज मिसाल बनेगी। फौज के कुछ अफसरों का कहना है कि भले ही मेजर गोगोई की यह हरकत क्रिमिनल केस के दायरे में न आती हो लेकिन उन्होने फौज के स्टैण्डर्ड आप्रेटिंग प्रोसीजर की खिलाफवर्जी की है। फौज के जवाबित (नियमों) के तहत उनका सजा से बच पाना मुश्किल है। अगर इंक्वायरी में वह गुनाहगार साबित हुए तो उन्हें न सिर्फ सात साल कैद की सजा होगी बल्कि उनकी नौकरी भी जाएगी।

आर्मी चीफ ने भले ही मेजर गोगोई के खिलाफ सख्त तहकीकात का हुक्म दिया है। उन्हे बचाने की कोशिशें भी तेज हो गई हैं। खुद गोगोई ने कहा कि वह उस लड़की के जरिए दहशतगर्दों के गरोह तक पहुचना चाहते थे। लड़की से बयान दिलाया गया है कि वह अपनी मर्जी से होटल में उनके साथ गई थी जबकि लड़की की वालिदा ने कहा कि गोगोई रात में उसके घर आए थे और अकेले में उनकी बेटी से मिलने की जिद करते थे। एक बयान में कहा गया कि पुलिस ने गोगोई को होटल के कमरे में लड़की के साथ नागुफ्ता हालत में पकड़ा। दूसरे बयान में कहा गया कि गोगोई का कश्मीरी ड्राइवर समीर अहमद लड़की को लेकर आया था जिसे वह कमरे में ले जा रहे थे तो होटल वालों ने कमरे में जाने से रोक कर पुलिस बुला ली। हकीकत जो भी हो गोगोई की यह हरकत आर्मी की मुलाजिमत के जवाबित के खिलाफ है।

फौज और सरकार के सामने एक बड़ी मुश्किल यह है कि अगर गोेगोई जांच में कुसूरवार पाए जाते हैं तो हुर्रियत लीडरान और कुछ कश्मीरियों का यह इल्जाम सच साबित हो जाएगा कि कश्मीर में तैनात फौजी और फौज के अफसरान मकामी लड़कियों और औरतों के साथ जिन्सी जरायम (यौन अपराध) में मुलव्विस हो जाते हैं। दूसरे मेजर गोगोई एक मुजरिमाना जेहनियत के अफसर साबित हो जाएंगे।

मजिस्टेट को दिए गए लड़की के बयान से एक बात तो पूरी तरह साफ हो रही है कि मेजर गोगोई और लड़की एक दूसरे को पहले से जानते थे और अक्सर एक दूसरे से मिलते थे। लड़की ने अपने बयान में यह भी कहा कि वह बालिग है और अपनी मर्जी से मेजर गोगोई के साथ कुछ वक्त गुजारने के लिए आई थी। कहा जा रहा है कि पुलिस ने इस मामले में अभी एफआईआर नहीं दर्ज की है क्योंकि दोनों बालिग हैं। लड़की के बयान से यह भी मालूम हुआ कि उनकी जान पहचान फेसबुक के जरिए हुई। उस वक्त मेजर गोगोई ने आदिल अदनान के फर्जी नाम से एक फेसबुक अकाउट खोला था। लेकिन बाद में उसने अपनी असल शिनाख्त बता दी थी और बाद में दोनांे दोस्त हो गए। जबकि लड़की की वालिदा के मुताबिक मेजर गोगोई रात को समीर अहमद के साथ उनके घर पर आया था। पहली बार जब वह आया था तो मैं फौज के खौफ में बेहोश हो गई थी। उनके मुताबिक लड़की की उम्र सत्रह साल है जबकि लड़की के स्कूल के दस्तावेज और आधार कार्ड के हिसाब से लड़की बालिग है। कुछ भी हो इतना तया है कि मेजर गोगोई एक लडकी के साथ एक होटल में पाए गए। वह बगैर अफसरान की इजाजत के अपने स्टेशन को छोड़ने के तो कुसूरवार पाए ही गए है। अब यही देखना है कि कोर्ट आफ इंक्वायरी में क्या बातें सामने आती हैं।