जेएनयू मे ‘इस्लामी दहशतगर्दी’ का नया कोर्स

जेएनयू मे ‘इस्लामी दहशतगर्दी’ का नया कोर्स

मोहम्मद मशहूद

नई दिल्ली! भारतीय जनता पार्टी की मरकजी सरकार मुसलमानों को नफ्सियाती और जेहनी तौर पर उलझा कर रखने की हिकमते अमली पर अमल पैरा है। लव जेहाद, गौकुशी, तीन तलाक, मोहम्मद अली जिनाह की तस्वीर और इसी तरह के कई दूसरे मसलों पर आए दिन कुछ न कुछ ऐसा होता है कि मुसलमान का अपनी तरक्की और खुशहाली के लिए सोचना और भाग-दौड़ करना मुहाल हो गया है। ताजा मामला यह है कि जवाहर लाल नेहरू युनिवर्सिटी यानी जेएनयू के नाम से मशहूर मुमताज तालीमी इदारे ने ‘इस्लामी दहशतगर्दी’ नाम से नया कोर्स शुरू करने का फैसला किया है। वह युनिवर्सिटी जो चंद साल पहले तक अपने फहम व फरासत (विजडम) के लिए न सिर्फ मुल्क मंे बल्कि दुनिया में अपनी अलाहिदा शिनाख्त रखती थी और जो हिन्दुत्ववादियों की आंख की किरकिरी बनी हुई थी और जिसके बारे में फिरकापरस्त  ताकतें सीधे इल्जाम लगाती थीं कि इस तालीमी इदारे पर लेफ्टिस्ट नजरियात के हामिल लोगों का गलबा है वह युनिवर्सिटी ‘इस्लामी दहशतगर्दी’ नाम का नया कोर्स शुरू करने का फैसला करे तो साफ समझ में आता है कि तालीमी इदारों पर हिन्दुत्ववादी ताकतों ने किस तरह से अपने भेदभाव वाले नजरियात को थोपना शुरू कर दिया है।

‘इस्लामी दहशतगर्दी’ नाम का नया कोर्स शुरू करने की अखबारी इत्तेलाआत पर खुद से नोटिस लेेते हुए दिल्ली अकलियती कमीशन के चेयरमैन डाक्टर जफरूल इस्लाम खान ने जेएनयू के रजिस्टरार को नोटिस जारी किया है कि किस बुनियाद पर युनिवर्सिटी में इस्लामी दहशतगर्दी कोर्स शुरू किया जा रहा है। जबकि मुस्लिम हलकों में इसके खिलाफ शदीद गम व गुस्सा पाया जा रहा है। सियासी, समाजी और इल्मी शख्सियात ने खुल कर इसकी मुखालिफत की है। जमीयत उलेमा-ए- हिन्द के जनरल सेक्रेटरी महमूद मदनी ने इस सिलसिले में वजारते तालीम, युनिवर्सिटी के वाइस चांसलर प्रोफेसर एम जे कुमार और चांसलर विजय कुमार सारस्वत को खत लिखकर आगाह किया है कि दहशतगर्दी को इस्लाम से जोड़ना घिनौनी साजिश और इस्लाम की तौहीन है जिसे किसी भी सूरत मेें कुबूल नहीं किया जा सकता। उन्होने यह खदशा भी जाहिर किया कि इससे एकेडमिक फिरकापरस्ती को फरोग मिलेगा। उन्होने कहा किसी भी मजहब को दहशतगर्दी सेे जोड़ना बुनियादी तौर से गलत है। इस्लाम जैसे पुरअम्न मजहब जिसकी निगाह में एक इंसान का कत्ल सारी इंसानियत के कत्ल के बराबर है, को दहशतगर्दी जैसे नापाक अमल के साथ नत्थी करके पेश किया जाए। उन्होने कहा कि दहशतगर्दी के नाम पर पूरी दुनिया में जंग करने वाली बड़ी-बड़ी ताकतें भी इस्लामी दहशतगर्दी की इस्तलाह अख्तियार करने की हिम्मत नहीं करती हैं यहां तक कि अमरीका के साबिक सदर जार्ज डब्ल्यू बुश और बराक ओबामा और रूस के सदर व्लादिमीर पुतिन ने वाजेह तौर से इस्लामी दहशतगर्दी जैसी इस्तलाह को गलत करार दिया और उनके दलायल थे कि यह तर्जे कलाम दहशतगर्दी के प्रोपगण्डे को जायज ठहराने जैसा है। जो अपने अमल को मजहबी जंग बतला रहे हैं। इन आलमी और तारीखी हकायक को नजरअंदाज करके जेएनयू इंतजामिया ने दुनिया भर के लाखों मुसलमानों का दिल दुखाया है कि जो पुरअम्न हैं और जिन्होंने दहशतगर्दी के खिलाफ जंग में अपनी जानें कुर्बान की हैं। हिन्दुस्तान में जमीयत उलेमा ए हिन्द ने दहशतगर्दी के खिलाफ छः हजार उलेमा के दस्तखत से फतवा जारी किया और वह गुजिश्ता पन्द्रह बरसों से हर महाज पर मुकाबला कर रही है।

दिल्ली अकलियती कमीशन ने जेएनयू को नोटिस जारी करते हुए कहा है कि किस बुनियाद पर युनिवर्सिटी मंे इस्लामी दहशतगर्दी कोर्स शुरू किया जा रहा है। अखबारी इत्तेलाआत के मुताबिक जेएनयू की एकेडमिक काउंसिल के बेश्तर मेम्बरान की मुखालिफत के बावजूद यह फैसला कैसे लिया गया है। कमीशन ने नोटिस में जेएनयू एडमिनिस्टेªशन से सवाल किया है-

  1. क्या इस्लामी दहशतगर्दी के बारे में कोई कोर्स शुरू करने से पहले कोई कांसेप्ट पेपर तैयार किया गया है। अगर किया गया है तो उसकी कापी मुहैया कराई जाए।
  2. क्या इस्लामी दहशतगर्दी का मौजूअ (विषय) किसी दूसरी हिन्दुस्तानी या गैर मुल्की युनिवर्सिटी में पढाया जा रहा है। अगर हां तो तफसीलात दीजिए।
  3. इस कोर्स के तहत किस इलाके पर फोकस किया जाएगा। इस कोर्स के जराए क्या होंगे। कौन सी मैथोडोलाजी अपनाई जाएगी। कौन सी रेफ्रेंस किताबें इस्तेमाल की जाएंगी। और कौन मुमताज एक्सर्ट हैं जो इस मौजूअ पर रिसर्च करेगे और उसे पढाएंगे।
  4. क्या जेएनयू के मौजूदा एडमिनिस्टेªशन ने कोर्स शुरू करने से पहले कैम्पस मेें तलबा और बाहर की सोसाइटी पर इससे पड़ने वाले असरात के बारे में गौर किया है।
  5. एकेडमिक काउंसिल के मेम्बरान की पूरी फेहरिस्त फराहम कीजिए और निशान जद कीजिए कि कौन-कौन मेम्बरान इस मीटिंग में शरीक हुए थे जिस में यह फैसला लिया गया।
  6. अखबारी रिपोर्ट में कहा गया कि बहुत से मेम्बरान ने इस तजवीज की मुखालिफत की क्या उस तजवीज पर वोटिंग हुई थी, तो उसका नतीजा क्या था।
  7. जिस मीटिंग में इस मसले के बारे में बातचीत हुई और फैसला लिया गया उसकी रूदाद की कापी भेजिए।

कमीशन ने रजिस्टरार जेएनयू से इन सवालात के जवाबात पांच दिन में भेजने का हुक्म दिया है।