जकात

जकात

मौलाना बदी उज्जमां नदवी कासमी

जकात मुसलमानों की इंशोरेस कम्पनी है यह उनका प्रावीडेट फण्ड है। यह उनके बेकारों का सरमाया इआनत है यह उनके माजूरों, अपाहिजों, बीमारों, यतीमों, बेवाओ का जरिया मआश है और इन सबसे बढकर यह वह चीज है जो मुसलमानों को फिक्रे फर्द उसे बिल्कुल बेनियाज कर देती है। इसका सीधा-सादा उसूल यह है कि आज तुम मालदार हो तो दूसरों की मदद करो कल तुम नादार हो गए तो दूसरे तुम्हारी मदद करेगे। तुम को यह फिक्र करने की जरूरत नहीं कि हम मुफलिस हो गए तो क्या होेगा। मर गए तो बीवी-बच्चों का क्या हश्र होगा। कोई आफत आ पडी, बीमार हो गए, घर में आग लग गई सैलाब आ गया दीवालिया निगल गया तो इन मुसीबतों से खलासी की क्या सबील होगी। सफर में पैसा न रहा तो क्योंकर गुजर भर हो गई। इन सब परेशानियों से सिर्फ जकात तुम को हमेशा के लिए बेफिक्र कर देती  है।  तुम्हारा काम बस इतना है कि अपनी जमा की हुई दौलत में से ढाई फीसद दे कर अल्लाह की इंशोरेंस कम्पनी में अपरा बीमा करा लो, उस वक्त तुम को इस दौलत की जरूरत नही है। यह उनके काम आएगी जो इसके जरूरतमंद हैं। कल जब तुम जरूरतमंद होगे या तुम्हारी औलाद या बीवी जरूरतमंद होगी तो न सिर्फ तुम्हारा अपना दिया हुआ माल बल्कि उससे भी ज्यादा तुम को वापस मिल जाएगा।

क्या लड़कियो के लिए खरीदे हुए जेवरात पर जकात हैः- सवाल- मेरी तीन बेटियां हैं मैने उनकी शादी के लिए बीस तोला सोना ले रखा है और इसके अलावा बर्तन कपड़े वगैरह भी हैं क्या इन चीजों पर जकात है?

जवाब- अगर आपने उस सोने का मालिक उन बच्चियों को बना दिया है तो उनके जवान (बालिग) होने तक तो उनपर जकात वाजिब नहीं। जवान होेने के बाद उनमें जो साहबे निसाब हों उनपर जकात होगी और अगर बच्चियों को मालिक नहीं बनाया मिलकियत आप ही की है तो उस सोने पर जकात फर्ज है। बर्तन, कपड़े वगैरह इस्तेमाल की चीजें आपने उनके लिए रखी हैं उनपर जकात नहीं।

चूंकि बच्चियों के नाम जेवर कर दिया गया इसलिए वह उनकी मालिक बन गईं इसलिए उस शख्स के जिम्मा यानी जो पहले मालिक था जकात नहीं है और हर एक बच्ची की मिलकियत चूंकि हदे निसाब से कम है इसलिए उनके जिम्मे भी जकात नहीं अलबत्ता जो लड़की बालिग हो और उसके पास उस जेवर के अलावा कुछ नकद रूपए हों और उसपर साल भी गुजर जाए तो उस लड़की पर जकात लाजिम होगी क्योंकि जब सोने-चांदी के साथ कुछ नकदी मिल जाए और सब की कीमत साढे बावन तोला चांदी के बराबर हो जाए तो जकात फर्ज हो जाती है और जो लड़की नाबालिग है उसकी मिलकियत पर जकात नहीं जब तक कि वह बालिग नहीं हो जाती।

अगर लड़की को जेवर का मालिक बना दिया तो जब तक वह लड़की नाबालिग है उसपर जकात नहीं बालिग होने के बाद लड़की के जिम्मे जकात वाजिब होगी। जबकि सिर्फ यह जेवर या उसके साथ-साथ कुछ नकद रूपए निसाब को पहुच जाएं सिर्फ यह नीयत करने से कि यह जेवर लडकी के जहेज में दिया जाएगा जकात से मुस्तसना नहीं करार दिया जा सकता। जब तक कि लडकी को उसका मालिक न बनाया जाए और लड़की को मालिक बना देने के बाद फिर उस जेवर को (बगैर लडकी की इजाजत के) खुद पहनना या इस्तेमाल करना जायज नहीं होगा।

सवाल- एक खातून ने सत्तर ग्राम खालिस सोने में तीस ग्राम धात, तांबा, पीतल वगैरह को मिला कर उसका जेवर तैयार किया है यह कुल सोने के हुक्म में होगा? या धात को धात समझा जाएगा? जकात किस तरह निकाली जाएगी?

जवाब- सोने और धात को गलाकर एक कर दिया हो सोना अलग न हो रहा हो तो जो चीज गालिब होगी कुल उसी के हुक्म में होगा अगर सोना गालिब होतो कुल सोने के हुक्म में होगा और अगर धात गालिब हो तो कुल धात के हुक्म में होगा।