कर्नाटक में फिरकापरस्ती और झूट की हार

कर्नाटक में फिरकापरस्ती और झूट की हार
बंगलौर। कर्नाटक में वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी के झूट और अमित शाह की थैलीशाही के बावजूद फिरकापरस्तों की शिकस्त के फौरन बाद 23 मई को एच.डी. कुमार स्वामी सरकार की हलफबरदारी के मौके पर कांग्रेस सदर राहुल गांधी और सोनिया गांधी के साथ मुल्क की डेढ़ दर्जन से ज्यादा सियासी पार्टियों के लीडरों ने इकट्ठा होकर 2019 के लोकसभा एलक्शन में मुल्क की सत्ता पर काबिज नरेन्द्र मोदी को उखाड़ फेंकने का पैगाम मुल्क को दे दिया। कुमार स्वामी के साथ नायब वजीर-ए-आला की हैसियत से कांग्रेस के सीनियर दलित लीडर जी. परमेश्वर ने हलफ लिया। इससे पहले अक्सरियत न होने के बावजूद नरेन्द्र मोदी और अमित शाह ने गवर्नर वजूभाई वाला के जरिए कर्नाटक की सत्ता पर कब्जा करने की हर मुमकिन कोशिश की, 17 मई को बी.एस. येदुरप्पा को वजीर-ए-आला का हलफ भी दिला दिया गया। गवर्नर ने अपनी तरफ से उन्हें असम्बली में अक्सरियत हासिल करने के लिए 15 दिन का वक्त दे दिया था ताकि जनता दल सेक्युलर और कांग्रेस के कुछ मेम्बरान असम्बली खरीदे जा सके, लेकिन कांग्रेस की अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने 15 दिन के बजाए हलफ बरदारी के तीसरे दिन असम्बली में येदुरप्पा को अक्सरियत हासिल करने की हिदायत के साथ पूरी कार्रवाई का लाइव टेलीकास्ट कराने का आर्डर देकर येदुरप्पा और पूरी बीजेपी की ख्वाहिशात पर पानी फेर दिया और येदुरप्पा एतमाद (विश्वास) का वोट लेने से पहले ही भाग खड़े हुए। इस मामले में बीजेपी किस तरह हाथ मलती रह गई इसका अंदाजा तब लगा जब पार्टी सदर अमित शाह ने मीडिया नुमाइंदो से बात करते हुए कहा कि अगर कांग्रेस और जनता दल सेक्युलर ने अपने मेम्बरान असम्बली को बंद करके न रखा होता तो कर्नाटक में आज बीजेपी की सरकार होती। अमित शाह के बयान से साफ जाहिर होता है कि बीजेपी ने कांग्रेस और जनता दल सेक्युलर के मेम्बरान को तोड़ने की पूरी कोशिश की लेकिन कामयाब नहीं हो सके। 224 मेम्बरान की असम्बली में 222 सीटों पर एलक्शन हुए थे, जिनमें बीजेपी को 104, कांग्रेस को 78 जनता दल सेक्युलर को 38 और दो सीटें आजाद उम्मीदवारों को मिली थी। बुरी तरह हारने के बावजूद गोवा और मणिपुर में जम्हूरियत लूट कर सत्ता पर कब्जा करने में कामयाब रही बीजेपी कर्नाटक में भी ऐसी ही कोशिश कर रही थी जो कामयाब नहीं हुई।
कर्नाटक में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनवाने के चक्कर में गवर्नर वजुभाई वाला ने भी अपनी और राजभवन की मुखालिफत का मौका कांग्रेस और दीगर पार्टियों को दे दिया। कांग्रेस और दूसरी गैर बीजेपी पार्टियों ने राजभवन को शाखा भवन तक कह डाला और इल्जाम लगाया कि गवर्नर बजुभाई वाला नरेन्द्र मोदी और अमित शाह के इशारों पर ही काम करते है। उन्होंने गवर्नर के ओहदे के वकार (गरिमा) को गिराया है, उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए।
अब भारतीय जनता पार्टी और उसके तमाम लीडर यह कहते फिर रहे है कि कर्नाटक में कांग्रेस ने जनता दल (एस) लीडर कुमार स्वामी के सामने घुटने टेक कर जो ‘अनैतिक’ गठबंधन बनाकर सरकार बनाई है, वह सरकार तीन से छः महीने तक ही चलेगी, मतलब साफ है कि भारतीय जनता पार्टी कर्नाटक के मामले में खामोश बैठने वाली नहीं है। वह कांग्रेस और जनता दल सेक्युलर दोनो के ही कुछ मेम्बरान असम्बली को तोड़ने की कोशिश करेगी तो कुछ के खिलाफ सीबीआई, ईडी और इनकमटैक्स मोहकमों का इस्तेमाल होगा। पन्द्रह मई को कर्नाटक के नतीजे आने के बाद वाजेह (स्पष्ट) हो चुका था कि बीजेपी को अक्सरियत नहीं मिली है। इसके बावजूद शाम को दिल्ली में बीजेपी के सदर दफ्तर में नरेन्द्र मोदी और अमित शाह ने जीत का जश्न मनाया। मोदी ने इस जीत को बेमिसाल करार देते हुए कहा था कि बीजेपी ने दक्खिन भारत में खुद को मजबूत करने के लिए कर्नाटक का दरवाजा खोला है। अब दक्खिन में भी हमारी जीत का सिलसिला रूकने वाला नहीं है। जाहिर है मोदी और उनकी बीजेपी के सदर कर्नाटक को आसानी से अपने हाथ से निकलने नहीं देंगे।
23 मई को एचडी कुमार स्वामी और जी. परमेश्वर की हलफबरदारी के बहाने देश की तकरीबन डेढ़ दर्जन से ज्यादा इलाकाई पार्टियों के लीडरान ने इकट्ठा होकर देश को यह मैसेज दिया कि वह सब मिलकर अगले साल होने वाले लोकसभा एलक्शन में मोदी सरकार को उखाड़ फेकेंगे। डायस पर खड़े होकर जब इन तमाम लीडरों ने एक साथ तस्वीरें खिंचवाई तो उसे देखकर बीजेपी लीडरान की त्योरियां चढ़ गईं। साबिक वजीर-ए-आजम और कुमार स्वामी के वालिद एच.डी. देवगौड़ा डायस पर मौजूद थे। उनके अलावा यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी, कांग्रेस सदर राहुल गांधी, तेलगू देसम चीफ और आन्ध्रा के वजीर-ए-आला चन्द्रबाबू नायडू, तृणमूल कांग्रेस चीफ और मगरिबी बंगाल की वजीर-ए-आला ममता बनर्जी, पांडिचेरी के वजीर-ए-आला नारायण सामी, बीएसपी सुप्रीमो मायावती, समाजवादी पार्टी के सदर अखिलेश यादव, आर.जे.डी. लीडर तेजस्वी यादव, दिल्ली के वजीर-ए-आला अरविंद केजरीवाल, राष्ट्रीय लोकदल के अजित सिंह, सीपीएम जनरल सेक्रेटरी सीताराम येचुरी, एनसीपी सदर शरद यादव, सीपीआई के डी. राजा वगैरह मौजूद थे। इन सभी ने अपने अपने प्रदेशों में भारतीय जनता पार्टी खुसूसन नरेन्द्र मोदी को हराने की बातें की। इस मौके पर बंगलौर में इकट्ठा हुए पार्टी लीडरान ने यह इशारा भी दिया कि मोदी को हराने के लिए उन्हें जो भी कुर्बानियां देना पड़ेंगी वह देंगे।
गवर्नर ने वैसे तो कुमार स्वामी को असम्बली में अक्सरियत साबित करने के लिए पन्द्रह दिन का वक्त दिया है लेकिन कुमार स्वामी ने कहा है कि वह दो-तीन दिन के अंदर ही अपनी अक्सरियत साबित कर देंगे और अक्सरियत साबित करने के बाद ही उनकी वजारत की तौसीअ (विस्तार) किया जाएगा। फिलहाल यह तय हुआ है कि असम्बली में स्पीकर का ओहदा कांग्रेस के पास रहेगा और रमेश कुमार स्पीकर बनेंगे जबकि डिप्टी स्पीकर का ओहदा जनता दल सेक्युलर के पास होगा। कांग्रेस के 22 और जनता दल (एस) के 12 मेम्बरान को वजीर बनाया जाएगा। यानि कुमार स्वामी वजारत में 34 वजीर होंगे। इस तरह वजीर-ए-आला, और डिप्टी स्पीकर समेत 12 वजीर जनता दल सेक्युलर के होंगे जबकि डिप्टी वजीर-ए-आला और स्पीकर समेत कांग्रेस के 22 वजीर होंगे।
कुमार स्वामी सरकार बन तो गई है लेकिन बीजेपी जराए का दावा है कि कर्नाटक में बीजेपी की सरकार न बन पाने से वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी और पार्टी सदर अमित शाह किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं करेगे। हम यह बेमेल और मौकापरस्ती के अनैतिक गठजोड़ से बनी सरकार को चलने नहीं देेंगे। बीजेपी का दावा है कि भले ही उसे कांगे्रस के मुकाबले दो फीसद वोट कम मिले हैं लेकिन 104 सीटें जीतने का मतलब साफ है कि कर्नाटक के अवाम ने बीजेपी को ही मैनडेट दिया है। इसलिए अवामी राय की तौहीन नहीं होने दी जाएगी। खबर है कि बीजेपी ने दो-तीन मोर्चों पर काम करने शुरू कर दिए हैं। एक यह कि कांग्रेस और जनता दल सेक्युलर के कम से कम एक दर्जन मेम्बरान असम्बली से इस्तीफा करा दिया जाए। दूसरा यह कि डी के शिवकुमार समेत कांग्रेस और जनता दल सेक्युलर के जिन मेम्बरान के खिलाफ आमदनी के मुकाबले कई गुना ज्यादा जायदाद या दूसरे किस्म के मुकदमे हैं उनके खिलाफ ईडी और इनकमटैक्स की कार्रवाई तेज कराकर उन्हें गिरफ्तार करा दिया जाए ताकि बाकी मेम्बरान पर दबाव बनाया जा सके और तीसरे किसी ने किसी बहाने सरकार गिरा कर सदर राज (राष्ट्रपति शासन) लगाया जाए। तीसरी कार्रवाई आसान नहीं है लेकिन अगर मरकजी हुकूमत ठान ले तो छः महीने के लिए सदर राज लगा सकती है। इतने दिनों मे बडे़ पैमाने पर तोड़-फोड़ हो जाएगी। बाद में जो होगा देखा जाएगा।
कर्नाटक सरकार को न चलने देना नरेन्द्र मोदी की मजबूरी जैसा हो गया है। जिस तरह मुल्क डेढ दर्जन से ज्यादा इलाकाई पार्टियों के लीडरान ने कुमार स्वामी की हलफबरदारी के मौकेे पर बंगलौर में इकट्ठा होकर यह मैसेज दिया है कि अब उन सभी का अपनी-अपनी रियासत में बीजेपी मुखालिफ जो गठजोड़ बना है यह टूटने वाला नहीं है हम सब मिलकर अगले साल होने वाले लोक सभा एलक्शन में नरेन्द्र मोदी को हराने का काम करेगे। ऐसी सूरत में अगर कर्नाटक का फार्मूला कामयाब हो गया तो मोदी के लिए अगले साल का लोक सभा एलक्शन बहुत मुश्किल हो जाएगा।