स्यूडो राष्ट्रभक्तों पर जिनाह का भूत

स्यूडो राष्ट्रभक्तों पर जिनाह का भूत

अलीगढ! अलीगढ मुस्लिम युनिवर्सिटी के यूनियन हाल में लगी मोहम्मद अली जिनाह की तस्वीर के बहाने शहर में हंगामा कराने और यूनिवर्सिटी पर हमला करने वालों को उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार की जानिब से हर तरह की छूट मिलने के नतीजे में दंगाईयों के हौसले इतने बढ गए कि उन्होने गुजिश्ता छः मई को शहर के भोजपुरा बाबरी मंडी, चंदन शहीद रोड काला महल, डाक खाना जयगंज और रवाई डोरा जैसे मुस्लिम इलाको  में मोटर साइकिल जुलूस निकाल कर इंतेहाई भड़कीली और मुस्लिम मुखालिफ नारेबाजी की। लोकर इंटेलिजेंस यूनिट (एलआईयू) के डिप्टी एस सतीश चन्द्र पाण्डेय ने जिला एडमिनिस्ट्रेशन  को भेजी अपनी खुफिया रिपोर्ट में कहा कि हिन्दू जागरण मंच ने मुस्लिम इलाकों में  जुलूस निकाला भडकीली नारेबाजी की जिससे शहर में जबरदस्त कशीदगी है। हालात बहुत खराब हैं सख्त कार्रवाई की जरूरत है। दो मई को पुलिस की निगरानी में हिन्दू युवा वाहिनी, हिन्दू जागरण मंच और बजरंग दल के नाम पर गुण्डों की एक भीड़ ने एएमयू पर हमला किया था। उस वक्त साबिक नायब सदर-ए-जम्हूरिया (उपराष्ट्रपति) हामिद अंसारी यूनिवर्सिटी के गेस्ट हाउस में थे बडी तादाद मेे तलबा का इल्जाम है कि हिन्दूवादी तंजीमों ने दरअस्ल हामिद अंसारी को निशाना बनाने के लिए यूनिवर्सिटी पर हमला किया था। हमलावरों के साथ सिविल लाइन्स थाने के इंचार्ज की कयादत में पुलिस की भारी भरकम टीम थी। यह लोग बाब-ए-सर सैयद के अंदर दाखिल हो गए। सिक्योरिटी गार्ड्स और कुछ तलबा ने रोकने की कोशिश की तो उनपर हमला कर दिया। इस वाक्ए के खिलाफ युनिवर्सिटी के तलबा रिपोर्ट लिखाने गए तो पुलिस ने उनपर ताकत दिखाते हुए खतरनाक तरीके से लाठियां बरसाई। मामले की रिपोर्ट दर्ज करके कुसूरवार मुल्जिमान के खिलाफ कार्रवाई का मतालबे पर युनिवर्सिटी के चार हजार से ज्यादा लडके-लडकियां कई दिन तक 38-40 डिग्री की गर्मी में धरने पर बैठे रहे लेकिन जिला इंतजामिया (प्रशासन) के अफसरान ने उनसे बात करके धरना खत्म कराने की कोई कोशिश नहीं की एडमिनिस्ट्रेशन ने तलबा के साथ पूरी तरह सौतेलापन दिखाया। युनिवर्सिटी के वाइस चांसलर तारिक मंसूर ने नौ मई को दिल्ली जाकर होम मिनिस्टर राजनाथ सिंह से मुलाकात की और यह कह कर पुलिस की मजम्मत की कि तलबा पर बेवजह जरूरत से कही ज्यादा ताकत का इस्तेमाल किया गया। बारह मई से इम्तेहान शुरू होने वाले थे जिन्हें मुल्तवी करना पड़ा। खबर लिखे जाने तक तलबा का धरना जारी था।

एएमयू तलबा का कामयाब धरना देखकर सरकार मकामी अफसरान और हिन्दूवादी ताकतों से ज्यादा मुल्क के कई टीवी चैनल बौखला गए। प्रोपगण्डा शुरू कर दिया कि युनिवर्सिटी में पढने वाले हिन्दू लडके लडकियों को जबरदस्ती रोक रखा गया है। उनपर जुल्म ढाए जा रहे हैं। इसपर विश्वती सिहं, इला वाष्र्णेय, मनीश कुमार, निशान्त भारद्वाज, दिव्या वर्मा और अजय सिंह समेत दर्जनों हिन्दू लडके लड़कियों ने सामने आकर अफवाहबाजों के मुंह पर करारा तमांचा मारा। उन सभी ने कहा कि वह खुद हिन्दूवादी दहशतगर्दों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के मतालबे पर चल रहे तलबा के धरने में शामिल है। हिन्दू मुसलमान का कोई सवाल युनिवर्सिटी में नहीं है। हमसब एक हैं। इन लडके लडकियों ने मीडिया को सत्ता में लोगों के हाथों बिका गुलाम तक कहा। धरने पर बैठे हजारो तलबा जब नमाज अदा करते थे तो हिन्दू लडके लडकियांे को उनकी हिफाजत मंे चारों तरफ खडे हुए भी देखा जाता था। 

एएमयू यूनियन हाल में जिनाह की तस्वीर लगी होने पर ड्रामा कराने वाले अलीगढ के लोक सभा मेम्बर सतीश गौतम खुद कितने गैर जिम्मेदार और खुराफाती जेहन के हैं इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि छः मई को उत्तर प्रदेश बीजेपी के सदर महेन्द्र नाथ पाण्डेय ब्राहमण महासभा की मीटिंग के सिलसिले में अलीगढ पहुच रहे थे। वह वैशाली एक्सप्रेस में सवार थे। वैशाली लेट हो गई उन्हें रिसीव करने के लिए सतीश गौतम स्टेशन के प्लेटफार्म नम्बर चार पर पहुच गए। गर्मी ज्यादा थी जो उन्हे बरदाश्त नहीं हो रही थी कुछ लोगों का तो यहां तक कहना था कि गर्मी उनके दिमाग मंे चढ गई थी। जब उन्हें यह पता चला कि राजधानी एक्सपे्रस आ रही है उसकी वजह से वैशाली को रास्ते में रोका गया है तो स्टेशन मास्टर को फोन करके वह उनपर बरस पडे़। कहा कि राजधानी हो या दूसरी टेªनें आप सभी को रास्ते में रोकिए पहले वैशाली एक्सप्रेस को स्टेशन पर लाइए। स्टेशन मास्टर ने जब उन्हें  यह जवाब दिया कि ऐसा नहीं हो सकता ट्रेनों की तरजीहात (प्राथमिकताएं) तय हैं उसी हिसाब से चलती हैं हमें राजधानी के लिए ही टैªक खाली रखना हैै। वैशाली उसके बाद ही चलेगी तो वह स्टेशन मास्टर पर बरस पडे़ उन्हें बुरा भला कहते हुए धमकियां देने लगे। ऐसा शख्स क्या कुछ जुर्म नहीं कर सकता? 

अलीगढ मुस्लिम युनिवर्सिटी के खिलाफ सतीश गौतम ने हिन्दू जागरण मंच और हिन्दू युवा वाहिनी के जरिए जो साजिश की उसे देख लगता है कि उन्हें वजीर-ए-आला आदित्यनाथ की भी पूरी हिमायत हासिल थी क्योंकि प्रदेश के मुखिया की हैसियत से उन्होने कोई मुंसिफाना कार्रवाई कराने के बजाए शायद अनजाने में या जानबूझ कर मामले को संजीदगी से नहीं लिया। बस इतना कह कर कर्नाटक चले गए कि मुल्क में जिनाह की शख्सियत को चार चांद लगाने (महिमा मंडित करने) की कार्रवाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सवाल यह है कि एएमयू में तस्वीर लगी होने का मतलब जिनाह को ग्लोरोफाई करना कैसे हो गया। वजीर-ए-आला योगी के इस बयान को हंगामा करने वालों ने अपनी हिमायत समझा, उनके हौसले और ज्यादा बुलंद हो गए। छः मई को भडकीली नारेबाजी करते हुए मुस्लिम इलाकों में जुलूस निकालने वाले हिन्दू जागरण मंच के लोगों ने नौ मई को किसी की परवा किए बगैर दुबारा जुलूस निकाला और दिखाने के लिए गिरफ्तारियां दी। जुलूस निकालने वालों ने एएमयू तलबा पर झूटा इल्जाम लगाते हुए कहा कि धरने पर बैठे लडके लडकियां आजादी के नारे लगा रहे हैं अगर उन्हें आजादी की इतनी ही तमन्ना है तो हिन्दुंस्तानी जागरण मंच किराया दे देगा। वह पाकिस्तान चले जाएं। मतलब यह कि हिन्दू जागरण मंच फिरकावाराना नफरत फैलाने की अपनी हरकतें छोडने के लिए तैयार नहीं है तलबा फिरकापरस्ती से आजादी के ही तो नारे लगा रहे थे। 

इंतेहाई अफसोसनाक बात यह है कि तलबा का धरना इतनी लम्बी मुद्दत तक चला तो खुद को सेक्युलर कहने वाली पार्टियों में एक कांग्रेस के चौधरी विजेन्द्र सिंह के अलावा कोई लीडर मौके पर नहीं आया। कांग्रेस लीडर साबिक लोक सभा और असम्बली मेम्बर चैधरी विजेन्द्र सिंह ने इंतेहाई नाराजगी जाहिर करते हुए युनिवर्सिटी गेट पर खडे होकर कहा कि जिला एडमिनिस्ट्रेशन अगर दस बारह दंगाइयों  को काबू नहीं कर सकता तो बहुत शर्मनाक है। शर्म आनी चाहिए डीएम और पुलिस कप्तान के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होने कहा कि वह इस पूरे मामले की जूडीशियल तहकीकात का मतालबा करते हैं जिसने साजिश की उसे भी पकडा जाए। 

विजेन्द्र सिंह ने कहा कि सवाल जिनाह की तस्वीर का नहीं है क्या जिनाह भारत माता के बेटे नही थे, कहीं और पैदा हुए थे क्या उन्होने गांधी के साथ मिल कर पूरी ताकत से आजादी की लडाई नहीं लडी। अगर किसी के घर में उनकी तस्वीर लगी है तो आप को क्या एतराज है? आपने युनिवर्सिटी मंे घुस कर खून खराबा कर दिया पूरी सरकार देख रही है देश देख रहा है। कितने शर्म की बात है। अगर गुण्डे आते तो युनिवर्सिटी के तलबा उनसे लड़ लेते लेकिन पूरा एडमिनिस्ट्रेशन उनके साथ-साथ भाग रहा है इस्पेक्टर सिविल लाइन्स उनके साथ दौड़ रहा था। इस तरह कभी देश में अम्न व अमान कायम नहीं होता। 

उन्होने कहा कि युनिवर्सिटी एक इदारा (संस्थान) है देश और दुनिया में इस का एक मकाम है यहां से जो लोग तालीम हासिल करके निकलते हैं उनमंे बडी सलाहियतें होती हैं। इन्हीं सलाहियतों और तालीम के दम पर वह दुनिया मे जाते हैं। उसे बर्बाद करने के लिए इस बार टारगेट किया जाता है। अगर उन्होने कुछ किया हो तो उसके दम पर वोट मांगे सिर्फ मुसलमानों को निशाना बना कर एलक्शन जीतना चाहते है। वह युनिवर्सिटी को बदनाम करना चाहते हैं।

देश के साबिक नायब सदर-ए-जम्हूरिया (उपराष्ट्रपति) युनिवर्सिटी मे रूके हुए थे एडमिनिस्ट्रेशन को इसका पूरा इल्म था फिर भी गुण्डों को यहां आने दिया गया फर्ज कीजिए उनका कत्ल हो गया होता तो आज देश का क्या होता। सवाल हिन्दू मुसलमान का नहीं है। सवाल कानून का है। अगर युनिवर्सिटी के बच्चे रिपोर्ट दर्ज कराने जा रहे थे तो क्या गुनाह कर रहे थे। उनपर बर्बर तरीके से लाठी चार्ज किया गया यह कौन सा इंसाफ है? थोडे़ तलबा थे जो जा रहे थे। मैं मतालबा करता हूं कि सीसीटीवी फुटेज देखकर कार्रवाई की जाए। एडमिनिस्ट्रेशन का रवैया देखकर तो लग रहा था कि जिला एडमिनिस्ट्रेशन भी उन गुण्डों के साथ मिला हुआ था। 

अलीगढ़ मुस्लिम युनिवर्सिटी (एएमयू) के तलबा के जबर्दस्त आंदोलन के गहरे सियासी मायने हैं। बजरंग दल, हिंदू युवा वाहिनी जैसी हिंदू तंजीमों (संगठनों) की तमाम कोशिशों के बावजूद एएमयू कैम्प में यह मामला अब तक हिंदू-मुस्लिम या जिनाह बनाम राष्ट्रवाद का नहीं बन पाया है। इसकी बड़ी वजह अलीगढ़ मुस्लिम युनिवर्सिटी तलबा यूनियन और टीचर्स की समझदारी भरी कयादत और उनके साथ में खड़े सिविल सोसायटी, देश की तमाम युनिवर्सिटियां, आठ देशों से आई हिमायत है। इन सबकी वजहों से एएमयू में यह आंदोलन साबिक सदर-ए-जम्हूरिया (पूर्व उप-राष्ट्रपति) हामिद अंसारी के एजाज (सम्मान) और तलबा की सिक्योरिटी  के सवाल पर मरकूज रहा है। इस वजह से एएमयू के आंदोलन का फलक बहुत वसीअ (व्यापक) हो गया। जिस तरह से जवाहरलाल नेहरू युनिवर्सिटी में चले तलबा के आंदोलन ने जम्हूरियत की हिफाजत के सवाल उठाए थे, एएमयू का आंदोलन भी उसी राह पर रहा है। एएमयू के तलबा और टीचर्स दोनों ही हामिद अंसारी पर हमले और तलबा पर पुलिस की बरबरियत की हाई कोर्ट के किसी जज के जरिए तय शुदा मुद्दत में जांच कराने की मांग उठा रहे हैं। अलीगढ़ युनिवर्सिटी के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ, जब टीचर्स ने जुलूस निकालकर इंतजामिया को सदर-ए-जम्हूरिया के नाम मेमोरण्डम सौंपा और इंसाफ की गुहार लगाई।

बड़ी तादाद में लड़कियों की शिरकत इस आंदोलन को खास बनाती है। देर शाम तक बड़ी तादाद में लड़कियां आंदोलन में शिरकत करती हैं, नारे लगाती हैं। अलीगढ़ वीमेन्स मुस्लिम कालेज की तलबा यूनियन की सदर नबा नसीम ने बताया कि यह सरकारी मशीनरी का तलबा पर हमला है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार के आने के बाद से इसमें और तेजी आई है। यह लोग जेएनयू-बीएचयू के बाद अब एएमयू पर हमला कर रहे हैं। वह हमारी बोलने की आजादी पर हमला कर रहे हैं। हम इस हमले के खिलाफ उतरे हैं और जीतकर ही वापस जाएंगे।

एमएमयू तलबा यूनियन के सदर मशकूर अहमद जख्मी होकर व्हील चेयर पर आंदोलन चला रहे हैं। पुलिस की मार की वजह से उनके गले में गहरी चोट लगी है, लेकिन वह आंदोलन की कमान संभाले हुए हैं। उन्होंने बताया कि यह संघ-बीजेपी के लोगों का प्रोपगण्डा है कि एएमयू में सिर्फ मुसलमान पढ़ते हैं। यहां बड़ी तादाद में तकरीबन 50 फीसद गैर-मुस्लिम तलबा, टीचर्स और मुलाजिम हैं। उन्होंने कहा, आजतक के इतिहास में कैम्पस में कभी कोई फिरकावाराना कशीदगी (तनाव) नहीं हुई। यह सारी लड़ाई हम अपने मेहमान और साबिक सदर-ए-जम्हूरिया हामिद अंसारी के एहतराम और इज्जत की हिफाजत के लिए लड़ रहे हैं। वह हमारे मेहमान थे, हम उन्हें लाइफटाइम अचिवमेंट अवार्ड देने जा रहे थे। हम उनकी हिफाजत के लिए सामने आए। पुलिस ने हम पर जिस तरह से हमला किया, जिसमें बड़ी तादाद में तलबा को चोटें लगी हैं, उसने तमाम तलबा को सख्त गुस्से से भर दिया है। हम हमलावरों के खिलाफ कार्रवाई का मतालबा कर रहे थे। इससे साफ लगता है कि पुलिस और इंतजामिया एएमयू को बदनाम करने पर लगा हुआ है। इस बहाने वह कर्नाटक के एलक्शन और 2019 के एलक्शन में पोलराइजेशन करना चाहते हैं, जो हम होने नहीं देंगे।

एएमयू पहुंचकर एक और बहुत दिलचस्प बात यह सामने आई कि यहां की तलबा यूनियन अभी तक पुलिस व इंतजामिया के साथ बहुत ही दोस्ताना रिश्तों के लिए जानी जाती रही है। ऐसा पहली बार हुआ है कि पूरे कैम्पस में जिले के एसएसपी के खिलाफ पोस्टर लगे हुए हैं। उन्हें आरएसएस से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है। 30 अप्रैल को एसएसपी राजेश पांडे (जिनका तबादला कर दिया गया था) के लिए तलबा यूनियन के दफ्तर में अलविदाइया जुलूस (विदाई समारोह) का एहतमाम किया गया था, जिसमें उन्हें सर सय्यद अहमद का पोट्रेट दिया गया था। मौजूदा एसएसपी के खिलाफ तलबा में काफी गुस्सा देखा जा रहा है।

एमएमयू में बीए (पोलिटिकल साइंस) के पहले साल के तालिब इल्म कामरान ने बताया कि आरएसएस और बीजेपी के लोग जानबूझकर इस युनिवर्सिटी की तस्वीर को खराब करने पर तुले हैं। वह हमारे मुस्तकबिल से खिलवाड़ कर रहे हैं। तलबा यूनियन के नायब सदर सज्जाद सुब्हान कहते हैं कि एसएसपी के साथ-साथ बीजेपी के लोक सभा मेम्बर का रोल भी शर्मनाक है। यह बहुत अच्छा है कि अलीगढ़ शहर ने बीजेपी-संघ का फिरकावाराना दांव चलने नहीं दिया।

एएमयू टीचर्स एसोसिएशन के सेक्रेटरी प्रोफेसर नजरूल इस्लाम ने बताया कि हम तलबा के हक में इसलिए उतरे, क्योंकि युनिवर्सिटी के इतिहास में तलबा पर कभी इतना बर्बर लाठीचार्ज नहीं किया गया। तलबा यूनियन एक प्रोग्राम करने जा रहा था, जिसे खराब करने के लिए कुछ बाहरी लोगों ने हमला किया, इसकी मुखालिफत करना तो हम सबका काम था। उन्होंने कहा कि पुलिस ने इन बाहरी लोगों को रोकने के बजाय उन्हें छूट दे दी। इसके खिलाफ एफआईआर कराने जा रहे तलबा पर लाठीचार्ज किया गया और आंसू गैस के गोले छोड़े गए। प्रोफेसर नजरूल इस्लाम कहते हैं कि एमएमयू का नाम और इज्जत है, इसे हम लोगों को खराब नहीं करने देंगे।

युनिवर्सिटी में पढ़ा रहीं तनुष्का सर्वेश ने भी कहा कि दरअसल एएमयू को बदनाम करके बीजेपी बड़ा सियासी फायदा उठाना चाहती हैं। फाइन आर्ट्स शोबे के तालिब इल्म दानिश ने कहा कि सही तरीके से एफआईआर दर्ज होनी चाहिए और यह तलबा का हक है।

एएमयू के जनसंपर्क अफसर उमर ने बताया कि एक सोची-समझी हिकमते अमली (रणनीति) के तहत इस युनिवर्सिटी को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। 

एएमयू में टीचर रहे एम रहमान बताते हैं कि जिनाह की तस्वीर तो महज झूटा बहाना है, बीजेपी-आरएसएस जानबूझकर अपनी गंदी सोच के तहत इस युनिवर्सिटी को बदनाम कर रहे हैं। वह फिरावारियत फैलाना चाहते हैं और इसलिए यह सब कर रहे हैं, लेकिन एएमयू ने उनके मंसूबों को नाकाम कर दिया।