बेईमान जज बना भारत का कुश्ती कोच

बेईमान जज बना भारत का कुश्ती कोच

नई दिल्ली! भारत के पहलवानों ने जिसमें खातून भी शामिल हैं पिछले कुछ बरसों में ओलम्पिक में अच्छे खेल का मुजाहिरा किया है और मैडल जीते हैं। लेकिन अभी तक यह खिलाड़ी ईमानदारी से खेलते आए हैं शायद इसीलिए इनके मैडल की तादाद कम रही। अब हिन्दुस्तानी कुश्ती फेडरेशन ने भारतीय ग्रीको रोमन टीम को कोचिंग देने के लिए जिस शख्स काजराशविली को कोच बनाने का फैसला किया है उन्हें यूनाइटेड वल्र्ड रेसलिंग में रियो ओलम्पिक में कुश्ती का जज रहने के दौरान गलत फैसला करने की वजह से सस्पेड कर दिया था। अब जो कुश्ती के मुकाबले का जज रहने के दौरान बेईमानी कर चुका है और सजा भी पा चुका हो ऐसा खिलाड़ी जब कोच बनेगा तो खिलाड़ियों को सिर्फ जीतने का सबक पढाएगा भले ही उसके लिए बेईमानी क्यों न की जाए। कोच बनने वाले बेईमान जज काजराशविली अपने वक्त में योरोपियन चैम्पियन भी रह चुके हैं। अब देखना यह है कि वह कोच की अपनी जिम्मेदारी कितनी ईमानदारी से निभाते हैं।

भारतीय कुश्ती फेडरेशन की गुजिश्ता डेढ़ सालों से जारी विदेशी कोच की खोज पूरी हो गई है, लेकिन यह तलाश ऐसे कोच पर जाकर रुकी है, जिसे रियो ओलंपिक में खराब जजिंग के लिए सजा दी जा चुकी है। सोवियत संघ के लिए 1982 की वल्र्ड चैंपियनशिप में ग्रीको रोमन के 48 किलो वेट में गोल्ड जीतने वाले जार्जियाई टीमो काजराशविली वही जज हैं, जिन्हें यूनाइटेड वल्र्ड रेसलिंग (यूडब्लूडब्लू) ने रियो ओलंपिक के 65 किलो के क्वार्टर फाइनल में उजबेकिस्तानी पहलवान की तरफदारी करने पर सस्पेंड किया था। उनके साथ कोरियाई व रूसी जजों को भी आगे के मैचों में बाउट की आफिशिएटिंग से रोका गया था।

प्यूर्टो रिको के पहलवान फ्रैंकलिन गोमेज को यह मुकाबला चार के बजाय दो प्वाइंट देने की वजह से उजबेकी नवरूजोव से हारना पड़ा था। इन तीनों जजों के सस्पेंशन को रियो ओलंपिक के दौरान काफी सुर्खियां मिली थी। यूडब्लूडब्लू को इसके बाद जजिंग और रेफरीशिप को सुधारने के लिए मुनासिब कदम उठाने पड़े। यह वही नवरूजोव हैं, जिनके खिलाफ कांसे के तमगे के मुकाबले में खराब रेफरीशिप के लिए मंगोलियाई कोचों ने मैट पर ही अपने कपड़े उतार दिए थे। कुश्ती फेडरेशन के एक ओहदेदार के मुताबिक काजराशविली पांच हजार अमरीकी डालर माहाना की तंख्वाह पर भारतीय ग्रीको रोमन टीम को कोचिंग देने को तैयार हुए हैं। उनका नाम खेल वजारत को भेजा जा रहा है। कामनवेल्थ गेम्स को ध्यान में रखकर वजारत से उन्हें जल्द से जल्द वीजा जारी करने की दरख्वास्त की जाएगी। काजराशविली जार्जिया और पोलैंड की ग्रीको रोमन टीमों के भी कोच रह चुके हैं। यूरोपियन चैंपियन रहने के साथ वह 1979 में जूनियर वल्र्ड चैपियन भी रहे हैं।