दंगाई शहीद कैसे हो सकता है

दंगाई शहीद कैसे हो सकता है

”चंदन के मां-बाप दोनों ही कह रहे हैं कि उनके बेटे को झण्डा यात्रा के दौरान गोली मारी गई। रिपोर्ट लिखवाई है कि सलीम और उसके भाइयांे ने उनके बेटे को गोली मारी। अब्दुल हमीद तिराहे पर झण्डा यात्रा के सवाल पर टकराव हुआ था जहां से सलीम का घर काफी दूर तंग गली में है। पुलिस कहती है कि सलीम और उसके भाइयों ने अपनी बालकनी से गोली चलाई। दोनांे बाते सच कैसे हो सकती हैं। कोई तो जरूर झूट बोल रहा है।“

 

”चंदन की मां और बाप दोनो ही बेटे की मौत पर गम में मुब्तला होने के बजाए शुरू से ही जहरीली सियासत कर रहे है। टीवी कैमरों के लिए चंदन की मां अपने घर के सामने कुछ औरतों के साथ बैठी रो रही थी तो अपने घुटने पर वह तिरंगा रखे थी। चंदन के बाप सुशील गुप्ता ने पहली फरवरी को शिकायत की उन्हें धमकी मिली है। पुलिस कप्तान पियूष श्रीवास्तव ने तहकीकात की तो पता चला है कि वह झूट बोले हैं और मएएनआईफ के रिपोर्टर के कहने पर झूटी शिकायत की।“

 

 

लखनऊ! 26 जनवरी को कासगंज मंे विश्व हिन्दू परिषद के जरिए कराए गए फिरकावाराना फसाद में मारे गए दंगाई अभिषेक उर्फ चंदन गुप्ता को शहीद का दर्जा दिए जाने का ढोंग जरूरत से कुछ ज्यादा ही किया गया है। किसी ने यह नहीं सोचा कि आखिर दंगाई शहीद कैसे हो सकता है। उसकी अर्थी को तिरंगा में लपेटकर तिरंगे की तौहीन की गई इसपर भी सब खामोश रहे। समाजवादी पार्टी के लीडर राम गोपाल यादव ने राज्य सभा में इस पूरे मामले की पोल पट्टी खोलते हुए बता दिया कि चंदन की मौत उसके अपने साथी की गोली लगने से हुई जो मुसलमान नहीं था। इसके बावजूद वहां एक तरफा तौर पर मुसलमानों के खिलाफ ही पुलिस ने सख्त कार्रवाई करके मुसलमानों को दहशतजदा करने की कार्रवाई की। एक शख्स सलीम को गिरफ्तार करने के लिए उसके घर का दरवाजा तोडा गया और मुसलमानों को महज बेइज्जत करने की गरज से दरवाजा तोडने की कार्रवाई को टेलीविजन चैनलों पर टेलीकास्ट कराया गया।

चंदन के वाल्दैन यानि उसकी मां और बाप दोनों को अच्छी तरह पता है कि उनके इकलोते बेटे की मौत कैसे हुई शायद इसीलिए मामले को डायवर्ट करने के लिए वह दोनों पहले दिन से ही बेटे की मौत पर सियासत करते दिखे। चंदन की मां जो मौके पर थी भी नहीं उन्होने सबसे पहले यह कहा कि उनका बेटा देशभक्ति पर शहीद हो गया क्योंकि मुसलमानों ने उसे पकड़ कर मपाकिस्तान जिंदाबादफ का नारा लगाने के लिए कहा जब उसने नारा नहीं लगाया तो उसे गोली मार दी। जबकि पुलिस का कहना है कि सलीम और उसके भाइयों ने अपने मकान की बालकनी से गोली चलाई जिससे चंदन गुप्ता की मौत हुई। अगर गोली चलाने वाले बालकनी में थे जो झगड़े की जगह, अब्दुल हमीद तिराहे से काफी दूर तंग गली में है तो चंदन की मां आखिर किस के कहने पर झूट बोल रही है। चंदन के वालिद ने जो रिपोर्ट लिखवाई है उसमें सलीम उसके भाई वसीम और नदीम के अलावा 20 लोगों को नामजद किया है। अगर यह सभी लोग सलीम के घरकी बालकनी में गए तो बात साफ है कि वह लोग दंगे के लिए मौजूद नहीं थे और कोई भी शख्स अपनी बालकनी से गोली तभी चलाएगा जब उसके घर पर हमला होगा या कुछ लोग घर में घुसने की कोशिश करेंगे। अब पुलिस और चंदन के वाल्दैन को बताना पडेगा कि अगर चंदन को सलीम के घर की बालकनी से गोली मारी गई तो वह झंडा यात्रा का शहीद कैसे हो गया और इतनी तंग गली में क्या करने गया था।

जिस किसी के नौजवान बेटे की इस तरह मौत होगी वह दोनांे शौहर-बीवी बेटे के गम में डूबने के बजाए फिरकापरस्ती की घटिया सियासत में मुलव्विस (लिप्त) हो जाएंगंे। इसी से अंदाजा लगता है कि इन लोगों के जेहनों में कितना जहर भरा है। बेटे की मौत के अगले दिन चदंन की मां कुछ औरतों के साथ टीवी कैमरों की आसानी के लिए बैठी रो रही थी तो अपने घुटने पर तिरंगा रखे थी। वह बराबर यही कहे जा रही थी कि उनके बेटे नेे देश और तिरंगे के एहतराम (सम्मान) के लिए अपनी जान दी है इसलिए उसे शहीद का दर्जा दिया जाए और हमारे परिवार को कम से कम 51 लाख रूपए की माली (आर्थिक) मदद भी दी जाए। चंदन के बाप सुशील गुप्ता ने भी अपनी बीवी की तरह बेटे के गम मे डूबने के बजाए जहरीली सियासत करने का ही रवैया अख्तियार किया और तरह-तरह की बयानबाजी करते रहे। पहले ही दिन से उनके घर पर सिक्योरिटी के लिए पुलिस की एक गारद तैनात कर दी गई थी। उन्हे एक पर्सनल सिक्योरिटी गार्ड दे दिया गया था। इसके बावजूद उन्होेने पहली फरवरी को धमकी दिए जाने का ड्रामा किया। उस वक्त के पुलिस कप्तान पियूष श्रीवास्तव ने खुद धमकी मामले की तहकीकात की और सुशील गुप्ता से पूछा कि घर के बाहर पुलिस की गारद और खुद सुशील के साथ एक सिक्योरिटी गार्ड होने के बावजूद उन्हें धमकी कैसे और किसने दी। इसपर सुशील गुप्ता फिर झूट बोले कहा कि वह घर के बाहर बैठे थे तभी दो लोग (मुसलमान) मोटर साइकिल से गुजरे और यह कहते हुए चले गए कि तुमने रिपोर्ट लिखवाकर अच्छा नहीं किया। तुम्हें बाद में देखेंगें। मोटर साइकिल वालों की यह बात घर के बाहर तैनात पुलिस वालों ने कैसे नहीं सुनी और धमकी की बात सुनकर खुद उन्होने शोर मचाकर मोटर साइकिल वालों को पकड़वाया क्यों नही? इस किस्म के सवालों पर सुशील गुप्ता का झूट सामने आ गया और उन्होनेे पुलिस कप्तान को बता दिया किया कि धमकी की शिकायत करने के लिए उनसे मएएनआईफ टीवी न्यूज एजेसी के मकामी (स्थानीय) रिपोर्टर ने कहा था। पुलिस कप्तान पियूष श्रीवास्तव ने पता कराया तो इस बात की तस्दीक हो गई कि हां एएनआई के रिपोर्टर ने महज सनसनी फैलाने और धमकी के बहाने कुछ बेगुनाह मुसलमानों को गिरफ्तार कराने की साजिश के तहत सुशील गुप्ता से यह जालसाजी कराई थी। वजीर-ए-आला योगी आदित्यनाथ ने चंदन गुप्ता के घर वालों को छः फरवरी को मुलाकात करने के लिए लखनऊ बुलाया तो चंदन के वालिद सुशील गुप्ता और उनकी वालिदा दोनो ही लखनऊ नहीं पहुचे। उन्हें इस बात का डर था कि उनका झूट पकड़ा जाएगा। उन्होने अपनी बेटी यानि चंदन की बहन और चंदन की मौसी को ही वजीर-ए-आला से मिलने भेज दिया।

चंदन को सिर्फ एक गोली लगी उसके बाप की रिपोर्ट पर सबसे पहले सलीम को गिरफ्तार किया गया फिर उसके दोनो भाई वसीम और नदीम को भी गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने सबसे पहले गिरफ्तार हुए सलीम से यह कहवा लिया कि उसके साथ उसके दोनों भाई भी चंदन पर गोलियां चला रहे थे। सवाल यह है कि अगर तीनों भाई गोलियां चला रहे थे तो चंदन को सिर्फ एक गोली कैसे लगी और ऊपर से हो रही फायरिंग में नीचे खडी भीड में कोई जख्मी क्यों नहीं हुआ। कासगंज पुलिस ने एक जादू और दिखाया है कि अब तक सलीम समेत जितने लोग भी गिरफ्तार हुए हैं सबके पास से कट्टा और कुछ कारतूस ही बरामद हो रहे हैं।