कासगंज की साजिश बेनकाब – विश्व हिन्दू परिषद और एबीवीपी जिम्मेदार

कासगंज की साजिश बेनकाब – विश्व हिन्दू परिषद और एबीवीपी जिम्मेदार

पुलिस को मिले आधा दर्जन वीडिया फुटेज से दंगाइयों के चेहरे सामने आए, मुल्क के सामने झूट बोला गया

 

 

”ऐटा के लोक सभा मेम्बर कल्याण सिंह के बेटे राजवीर भड़कीली तकरीर करके दंगे की आग में घी डालने का काम करके गायब हो गए। दो मरकजी वजीर गिरिराज सिंह और निरंज ज्योति, राज्य सभा मेम्बर विनय कटियार ने जहर उगला। बीजेपी तर्जुमान (प्रवक्ताओं) ने कई टीवी चैनलों के तआवुन (सहयोग) से मुल्क से झूट बोला कि तिरंगा यात्रा निकालने वालों पर हमला किया गया। बोले कि कासगंज में पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाए गए। वीडियो फुटेज से साबित हुआ कि सब झूट बोल रहे थे।“

 

”आगरा बीजेपी के सदर श्याम भदौरिया ने चंदन गुप्ता के साथ राहुल उपाध्याय के भी मारे जाने और उन्हें खिराजे अकीदत पेश करते हुए वीडियो वायरल करके आग लगाने का काम किया। राहुल ने भी मीडिया के सामने आ कर कहा कि वह जिंदा है दंगे वाले दिन तो वह कासगंज में थे ही नहीं। चंदन की वालिदा के जरिए सियासत कराई गई वह रो रही थी तो उनके घुटनों पर तिरंगा रखा गया, फिर चंदन को शहीद का दर्जा दिलाने का मतालबा कराया गया। 51 लाख का मुआवजा मांगा गया यह सब क्या है?“

 

”तिरंगा यात्रा में भगवा झण्डे का क्या काम था? वीडियो फुटेज में दिखा कि एक गुण्डा रिवाल्वर लिए फायरिंग करते हुए आगे चल रहा था जिसका नाम कमल सोनकर बताया गया। उसी की गोली से चंदन गुप्ता की मौत हुई। चंदन के वालिद ने सलीम उसके दो भाइयों समेत बीस लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई। सलीम गिरफ्तार भी हो गया। चंदन को लगी गोली की फारेसिंक जांच कराकर पुलिस पता लगा रही है कि उसकी मौत किसकी गोली लगने से हुई?“

 

 

लखनऊ! यौम-ए-जम्हूरिया (26 जनवरी) को कासगंज में हुए दंगे और एक नौजवान अभिषेक उर्फ चंदन गुप्ता की मौत के मामले में जो नया वीडियो पुलिस के हाथ लगा उससे साबित हो गया है कि दंगे की पूरी साजिश विश्व हिन्दू परिषद, आरएसएस और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के लोगों ने रची थी, क्योंकि इस वीडियो में तिरंगा यात्रा के नाम पर जो गुण्डे मुस्लिम मोहल्ले की तरफ दौड़ रहे थे उनके पास रिवाल्वर, पिस्तौल, तलवारें और डंडे भी थे। जिस भीड़ में शामिल चंदन गुप्ता को गोली लगी उसमें तकरीबन 50 लोग थे सिर्फ एक के हाथ में तिरंगा था बाकी लाठी-डंडे और हथियारों वाले थे। किसी दबाव में पुलिस ने मीडिया को इसकी इत्तेला नहीं दी लेकिन खबर यह है कि पुलिस के हाथ वह वीडियो भी लग चुका है जिसमंे कमल सोनकर नाम के एक शख्स को रिवाल्वर से तीन फायर करते देखा जा सकता है। उन्ही तीन में से एक गोली चंदन गुप्ता को लगी। सीसीटीवी फुटेज देखकर पुलिस ने सोनकर को हिरासत में भी ले लिया है। हालांकि चंदन के वालिद ने पुलिस में जो रिपोर्ट लिखवाई उसमें उन्होने सलीम और उसके भाइयों समेत बीस लोगों को अपने बेटे का कातिल करार दिया है। सलीम गिरफ्तार हो चुका है दंगा कराने में राजस्थान के गवर्नर कल्याण सिंह के बेटे और एटा से लोक सभा मेम्बर राजवीर सिंह का भी हाथ बताया जा रहा है जो 17 जनवरी को कासगंज में खड़े होकर कह रहे थे कि महमारा एक आदमी मारा गया।फ खबर है कि वजीर-ए-आला आदित्यनाथ योगी ने उसी दिन राजवीर को डांट लगाई और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने के लिए कहा तो राजवीर गायब हो गए। यह साजिश इतनी गहरी है कि आगरा बीजेपी के सदर श्याम भदोरिया ने चंदन गुप्ता के साथ कासगंज के एक मकामी मीडिया नुमाइंदे राहुल उपाध्याय को भी दंगे में मारा गया बताकर सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि (खिराजे अकीदत) दे दी। उससे माहौल में और कशीदगी पैदा हो गई। अगले दिन पुलिस कप्तान के साथ राहुल खुद मीडिया के सामने आए और कहा कि मरना तो दूर उन्हें खरोंच तक नहीं लगी है क्योंकि वह 26 जनवरी को कासगंज में थे ही नहीं। इतनी बड़ी साजिश के बावजूद श्याम भदौरिया के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। साजिश का दूसरा पहलू यह है कि आरएसएस के पैरोकार राकेश सिन्हा, बीजेपी तर्जुमान संबित पात्रा, सुधाशंु त्रिवेदी, मरकजी वजीर गिरिराज सिंह, खुद को साध्वी कहने वाली मरकजी वजीर निरंजन ज्योति और हमेशा झूट बोलने वाले विनय कटियार ने इलेक्ट्रानिक मीडिया के जरिए यह प्रोपगण्डा कर दिया कि तिरंगा यात्रा निकालने और भारत माता की जय बोलने की वजह से कासगंज के मुसलमानों ने यात्रा निकालने वालांें पर हमला किया। चंदन गुप्ता को मुसलमानों ने पकड़ कर पाकिस्तान जिंदाबाद बोलने के लिए कहा वह भारत माता की जय बोलता रहा तो उसकी कनपटी पर पिस्तौल लगाकर गोली मार दी। गवर्नर राम नाईक ने इस दंगे को उत्तर प्रदेश पर एक बदनुमा दाग (कलंक) करार दिया है।

28 जनवरी को मेरठ में बीजेपी लीडरान ने चंदन गुप्ता को खिराजे अकीदत (श्रद्धांजलि) देने का ड्रामा किया उसकी तस्वीर रख कर फूूल चढाए। फूल चढाते वक्त सभी बड़ी बेशर्मी से हंस रहे थे। शायद इस ख्याल से कि मजा बेटा तेरी कुर्बानी (बलि) देकर हमने अपने वोटों में इजाफा कर लिया।फ आरएसएस और विश्व हिन्दू परिषद की इस साजिश में कई टीवी चैनलों ने भी बढ-चढकर तआवुन (सहयोग)  किया और यह साबित करने की कोशिश की कि अब हिन्दुस्तान में तिरंगा लेकर चलने और भारत माता की जय बोलने वालों पर मुस्लिम मोहल्लों में हमले किए जाने लगे हैं और फायरिंग भी की जा रही है। ऐसे मौकों पर कुछ मुसलमानों के जरिए पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे भी लगाए जा रहे हैं। झूट और आग उगलने के लिए मशहूर विनय कटियार ने तो यहां तक कह दिया कि कासगंज में पाकिस्तान से लोग आए थे। उन्होने मकामी लोगों के साथ मिलकर तिरंगा यात्रा पर हमला कराया। उनसे जब एबीपी न्यूज की एक खातून रिपोर्टर ने यह सवाल किया कि आप जो बात कह रहे हैं वह बात तो कासगंज के डीएम, पुलिस कप्तान, मकामी खुफिया एजंेसी कोई नहीं कह रहा है। क्या आप अपनी गलत बयानी (झूट) के लिए माफी मांगेगे। इसपर विनय कटियार ने कहा कि मैं माफी नहीं मांगूंगा मेरे पास सब सुबूत है। क्या सुबूत है? इसपर वह गुस्सा हो गए और उठकर भागने लगे। खुद को साध्वी बताने वाली एक और दंगाई प्राची भी फौरन कासगंज के लिए चल पड़ी लेकिन सिकंदराराऊ के पंत चैराहे पर पुलिस ने उन्हें रोक दिया। वह धरने पर बैठ गईं ओर उनके साथियों ने रोड पर एक लम्बा जाम लगवा दिया। प्राची ने वहां भी  आग उगली और धमकी देते हुए कहा कि वंदेमात्रम के नारे से जिन लोगों को दिक्कत है उन्हें उठाकर फौरन पाकिस्तान भेज देना चाहिए। प्राची ने पुलिस को भी धमकाया और कहा कि अगर दो दिन के अंदर चंदन गुप्ता के कातिलों को गिरफ्तार नहीं किया जाता तो वह कासगंज जाएंगी उन्हें कोई रोक नहीं पाएगा।

मकामी लोक सभा मेम्बर राजवीर सिंह, प्रदेश के साबिक वजीर-ए-आला और अब राजस्थान के गवर्नर कल्याण सिंह के बेटे हैं। इसलिए उन्हीं की तरह भड़कीली तकरीरें करते हैं। 27 जनवरी को चंदन गुप्ता की आखिरी रसूमात में शिरकत करने के बहाने वह कासगंज पहुचे, उनकी पुश्तपनाही में चंदन की अर्थी के आगे चलने वाले कई लोग अपने हाथों में पेट्रोल की बोतलें और डिब्बे लिए हुए थे। वापसी में उन्होनेे मुसलमानों की कई दुकानों और एक मकान में आग लगा दी। कई घरों मंे घुस गए और एक घर मंे लगे तिरंगे को भी उखाड़ कर फेंक दिया। राजवीर ने वहां खड़े होकर जहरीली तकरीर की उन्हें चंदन का नाम भी नहीं पता था, बार-बार महमारा एक आदमी मारा गयाफ कह रहे थे। उनके पास खडे़ उनके एक साथी ने जब याद दिलाया कि उसका नाम चंदन था तभी वह चंदन का नाम ले सके। उन्होने कहा कि अगर कातिलों के खिलाफ जल्द से जल्द कार्रवाई न हुई तो वह खुद ही वापस आकर मअपने आदमी की शहादत का हिसाब करेगें।फ हालांकि बताया जाता है कि बाद में वजीर-ए-आला आदित्यनाथ की डंाट पड़ने के बाद वह कासगंज से भागे तो खबर लिखे जाने तक वापस नहीं आए।

मोदी की वजारत में शामिल गिरिराज सिंह ने फिर भड़काने वाली बातें कीं, उन्होने कहा कि देश में भारत माता की जय बोलने पर अगर गोली चल सकती है तो इससे ज्यादा बदनुमा दाग (कलंक) हमपर और क्या हो सकता है। उन्होने कहा कि कासगंज में अगर चंदन गुप्ता के बजाए किसी मोहम्मद इस्माईल का कत्ल हुआ होता तो आज टीवी चैनलों पर बिल्कुल मुख्तलिफ किस्म की बहस हो रही होती। जाहिर है गिरिराज सिंह का बयान लोगों को भड़काने के मकसद से ही था यह दीगर बात है कि उनके बयान पर लोगों ने ज्यादा ध्यान नहीं दिया। मरकजी वजीर निरंजन ज्योति ने भी यही कहा कि कासगंज में जो कुछ हुआ उसके पीछे पाकिस्तानी जेहनियत वाले मुसलमानों का हाथ हैै। इसलिए उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

इस पूरे हंगामे की शुरूआत 26 जनवरी को सुबह उस वक्त हुई जब अब्दुल हमीद तिराहे पर इलाके के मुसलमान झण्डा फहरा कर जश्न-ए-जम्हूरिया (गणतन्त्र का जश्न) मनाने की तैयारी कर रहे थे। अचानक अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और विश्व हिन्दू परिषद के तकरीबन डेढ सौ लोग नारे लगाते हुए वहां पहुच गए उनके हाथों में कुछ तिरंगे थे लेकिन ज्यादा लोग भगवा झण्डे लिए हुए थे। सड़क पर मुसलमानों को झण्डा फहराते देखकर मोटर साइकिलों पर तिरंगा यात्रा के नाम पर आए गुण्डों ने वंदेमात्रम, भारत माता की जय, हिन्दुस्तान में रहना है तो वंदे मात्रम कहना होगा, हिन्दू, हिन्दी, हिन्दुस्थान, कटवे जाएं पाकिस्तान।फ इन आखिरी नारे की वजह से मौके पर मौजूद मुसलमान भड़क गए। उन्होने कहा कि आपको परचम कुशाई (झण्डारोहण) में शामिल होना है तो रूकें, वर्ना भाग जाएं और इस किस्म के नारे मत लगाओ। मौके पर मौजूद मुनाजिर एडवोकेट का कहना है कि पूरे वाक्ए की वीडियो मौजूद है उसे देखकर तय किया जा सकता है कि गलती किसकी थी। उन्होनेे कहा कि खुद उन्होने आगे आकर मोटर साइकिल सवारों के लीडर से कहा कि वह लोग भी उनके साथ परचम कुशाई (झण्डा रोहण) में शामिल हो जाएं लेकिन दंगाई तो दंगाई होते हैं वह इसके लिए तैयार नहीं हुए और हंगामा ही करते रहे। इसबीच दोनांे तरफ से पथराव और फायरिंग हुई। नफीस अहमद ने बताया कि वह लोग झण्डा यात्रा नहीं निकाल रहे थे वह तो एक सोची समझी साजिश के तहत दंगा-फसाद करने आए थे। हद यह है कि हमने झण्डा लगाने के लिए जो रंगोली बनाई थी उसे भी खराब करने में उन्हें शर्म नहीं आई। नफीस अहमद ने कहा कि उनके बेेटे निसार को दंगाइयों ने गोली मारी जो उसकी रान में लगी और उनके भाई इरशाद को भी बुरी तरह मारा गया, उसपर गोली भी चलाई गई वह खुशकिस्मत था कि बच गया।

दंगाईयांे और कुछ टीवी चैनलों और उत्तर प्रदेश के एक बड़े हिन्दी अखबार ने इस मामले में खूब झूट बोला, पूरे देश के हिन्दुओं को भड़काने के लिए रोती हुई चंदन गुप्ता की मां के घुटनों पर तिरंगा रख दिया गया और उनसे मतालबा कराया गया कि उनके बेटे को शहीद का दर्जा और उन्हें 51 लाख रूपए का मुआवजा दिया जाए। देश में शायद पहली बार ऐसा देखने को मिला जब दंगे में मारे गए किसी नौजवान की रोती बिलखती मां के घुटनों पर तिरंगा रखा गया हो और दंगे में मारे गए किसी शख्स को शहीद का दर्जा दिए जाने का मतालबा किया जा रहा हो। मोटर साइकिलों पर सवार मुबय्यना (कथित) झण्डा यात्रा निकालने वालों के आगे-आगे चंदन गुप्ता ही मोटर साइकिल पर चल रहा था जिसकी मोटर साइकिल पर दो लोग और बैठे थे। अब्दुल हमीद तिराहे पर दोनों तरफ के लोगांे के दरम्यान टकराव हुआ। शुरू में तो विश्व हिन्दू परिषद और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के लोग हावी होते दिखे। लेकिन मुस्लिम अक्सरियती इलाका होने की वजह से ज्यादा भीड़ इकट्ठा हुई तो वह लोग मोटर साइकिलें छोड़ कर भाग खड़े हुए। थोड़ी देर बाद यह लोग फिर गरोह बंद होकर दूसरे मुस्लिम मोहल्ले की तरफ पहुचे। सबसे आगे चल रहे शख्स का नाम कमल सोनकर बताया गया। वह अपने हाथ में रिवाल्वर लिए फायरिंग करता चल रहा था। इस गरोह में शामिल सिर्फ एक शख्स के हाथ में तिरंगा था बाकी डंडे और तलवारे लिए हुए थे।

खबर लिखे जाने तक पुलिस ने चंदन गुप्ता के कत्ल के इल्जाम में सलीम को गिरफ्तार कर लिया था। रिपोर्ट मे नामजद उसके भाई वसीम और नदीम समेत 19 लोग फरार थे। कई वीडियो सामने आ जाने की वजह से पुलिस चंदन के जिस्म में लगी गोली की फारेसिक तहकीकात करा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि चंदन की मौत सलीम के जरिए चलाई गई गोली से हुई या कमल सोनकर के रिवाल्वर से निकली गोली ने उसकी जान ली है?