पार्टी में ही मोदी मुखालिफ ताकतों ने सर उठाया

पार्टी में ही मोदी मुखालिफ ताकतों ने सर उठाया

नायब वजीर-ए-आला नितिन पटेेल के सामने बीजेपी झुकी तो पुरूषोत्तम सोलंकी ने धमकी दी

 

नई दिल्ली! गुजिश्ता तकरीबन चार साल से एक डिक्टेटर की तरह बीजेपी पर काबिज नरेन्द्र मोदी की पकड़ पार्टी पर न सिर्फ कमजोर हुई है बल्कि पार्टी के लोग अब उन्हें चैलेज करने की हिम्मत करने लगे हैं। मोदी मुखालिफत की शुरूआत भी गुजरात से ही हुई है। पहले तो मोदी की तमाम कोशिशों और फिरकावाराना तकरीरों के बावजूद मोदी अपनी पार्टी को महज 99 सीटें ही जिता सके। सरकार बनी तो पिछले वजीर-ए-आला विजय रूपानी और डिप्टी चीफ मिनिस्टर नितिन पटेल को फिर से गुजरात की कमान सौपी गई। नितिन पटेल खुद चीफ मिनिस्टर बनना चाहते थे जो नहीं हो सका, इससे वह नाराज थे। इसी बीच उनकी पुरानी वजारत फाइनंेस उन्हें नहीं दी गई फिर क्या था नितिन पटेल ने एलान कर दिया कि जब तक उनकी पसंद की वजारत उन्हें नहीं दी जाएगी वह अपना काम नहीं संभालेगे। पाटीदार लीडर हार्दिक पटेल ने नितिन पटेल को हाथों  हाथ लिया और कहा कि अगर वह बीजेपी के सिर्फ दस मेम्बरान असम्बली तोड़ ले तो कांग्रेस से कह कर वह नितिन पटेल को अगला वजीर-ए-आला बनवा सकते हैं। हार्दिक पटेल ही नहीं कांग्रेस के सीनियर मेम्बर असम्बली वीरजी ठुम्मर ने भी नितिन पटेल की तरफ दोस्ती का हाथ बढाते हुए कहा कि वह हिम्मत दिखाएं बीजेपी छोडे तो कांगे्रस उन्हें नया चीफ मिनिस्टर बनाने पर गौर कर सकती है। पटेलों में पकती खिचडी से परेशान मोदी ने नितिन पटेल के सामने घुटने टेके और फाइनेंस मिनिस्ट्री समेत उनकी पसंद के मोहकमे उन्हें सौंप दिए। नितिन पटेल का मामला सुलझा ही था कि कोली समाज के मजबूत लीडर पुरूषोत्तम सोलंकी ने बगावत का बिगुल बजा दिया। उन्हें फिशरीज (मत्सय पालन) जैसा कम अहमियत देकर पूरे कोली समाज की तौहीन की गई है। इसलिए वह मछली पालन जैसी मामूली वजारत कुबूल नहीं करेगे।

खबर है कि गुजरात के कई वजीर ऐसे हैं जो अपनी वजारतों से खुश नहीं हैैं। गुजरात बीजेपी में अंदर ही अंदर बगावत की आग तो सुलग ही रही है बीजेपी के कई ऐसे लीडर हैं जो नरेन्द्र मोदी और अमित शाह के सामने गुलामों की तरह घुटने टेक कर काम करने के लिए तैयार नहीं है। दुनिया भर में कहा जाता है कि जब किसी लीडर का जवाल (पतन) का दौर शुरू होता है तो उसके अपने ही बगावत करने लगते है तो क्या गुजरात के हालात से यह समझा जाना चाहिए कि नरेन्द्र मोदी का सियासी जवाल (पतन) शुरू हो चुका है?

नितिन पटेल की बात को मानते हुए उन्हें फाइनेस वजारत जरूर दे दी गई है मगर खबर है कि इसके बावजूद नितिन पटेल कोई खास खुश नहीं हैं। इसकी वजह यह है कि पिछली रूपानी सरकार में उनके पास फाइनेस के अलावा शहरी तरक्की, सनअत और रेवेन्यू जैसी भारी भरकम वजारतें थीं लेकिन इस बार उन्हें हेल्थ, सडक, मकानात जैसी मामूली वजारतें दी गई हैं। इसी लिए नितिन पटेल भडक गए थे। लेकिन उन्हें मनाने की कोशिश में मोदी और अमित शाह की जोडी पर पड़ा मलौह पुरूषफ का नकाब उतर गया। जिसका नतीजा यह हुआ कि फिशरीज के वजीर पुरूषोत्तम सोलंकी ने अपना मोर्चा खोल दिया। वह अपनी वजारत से मुत्मइन नहीं हैं उनका कहना था कि जब नितिन पटेल को उनकी मर्जी की वजारत मिल सकती है तो उन्हें भी अपनी मर्जी की वजारत चाहिए।

जब पुरूषोत्तम सोलंकी की बात नहीं सुनी गई तो नाराज सोलंकी कैबिनेट मीटिंग में शामिल नहीं हुए। पुरूषोत्तम सोलंकी की रिहाइश गांधीनगर में उनके भाई व साबिक बीजेपी मेम्बर असम्बली हीरा सोलंकी की कयादत में उनके हामियों ने इकट्ठा होकर मतालबा किया कि उनके लीडर पुरूषोत्तम सोलंकी को कुछ और वजारत दी जाए। इस बारे में पुरूषोत्तम सोलंकी ने कहा कि कोली फिरके के लोगों को उन्होने नहीं बुलाया था वह अपनी मर्जी से आए है। उन्होने कहा कि पंाच बार मेम्बर असम्बली रहने के बावजूद पार्टी कयादत ने उनकी अनदेखी की जबकि उनसे जूनियर को उनसे बेहतर मोहकमा दिए गए। उनका कहना था कि कोली फिरका चाहता है कि उसे गुजरात कैबिनेट में बेहतर नुमाइंदगी दी जानी चाहिए। वह प्रदेश वजारत में अकेले कोली फिरके से वजीर हैं। उन्होने बाकायदा धमकी देते हुए कहा कि अगर उन्हें उनके हिसाब से वजारत नहीं दी गई तो 2019 के लोक सभा के एलक्शन में कोली समाज तय करेगा कि किसकी हिमायत की जाए। खबर लिखे जाने तक पुरूषोत्तम सोलंकी के मतालबात नहीं माने गए थे और उनकी नाराजगी बरकरार थी।

अब इसे नरेन्द्र मोदी की पार्टी पर कमजोर होती पकड और कम होते असर का नतीजा कहा जा सकता है कि अब पार्टी के अंदर से ही उनके खिलाफ आवाजें उठने लगी हैं। नितिन पटेल और पुरूषोत्तम सोलंकी के अलावा योगेश पटेल जैसे कई मेम्बर असम्बली है जो कई बार जीतकर आए हैं मगर उन्हें  वजीर नहीं बनाया गया है। योगेश पटेल तो सातवीं बार जीत कर असम्बली पहुचे हैं। लेकिन उन्हें कुछ नहीं मिला इससे उनके अंदर नाराजगी पाई जा रही है। जिसका उन्होने इजहार भी किया है। इसके अलावा भी कई वजीर हैं जो कम अहमियत की वजारत मिलने से मुतमइन नहीं है। इन लोगों का कहना है कि वजीर-ए-आला रूपानी 12-12 मोहकमे अपने पास रखे हैं और सीनियर मेम्बरान को कम अहमियत वाली वजारत दे रहे हैं।

इन लीडरान की नाराजगी से अमित शाह और नरेन्द्र मोदी दोनों वाकिफ हैं इसलिए उन्हें मनाने की अंदरखाने कोशिशें कर रहे है। गुजरात में कांग्रेस के मेम्बरान असम्बली की तादाद 80 होेेने की वजह से मोदी इस दबाव में है कि अगर वह पार्टी के मेम्बरान असम्बली के खिलाफ कोई कार्रवाई करते है तो नाराज मेम्बर पार्टी छोड़कर कांगे्रस में जा सकते हैं और बेईमानी करके हासिल की गई गुजरात की सत्ता उनके हाथ से निकल जाएगी। यही वजह है कि मोदी पार्टी में अपने खिलाफ उठाने वाली आवाजों पर खामोश हैं।

यही नहीं मेम्बरान पार्लियामेट भी नरेन्द्र मोदी के पैगामात का जवाब नहीं देते हैं। यह बात किसी और ने नहीं खुद वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी ने कही है। पार्लियामानी पार्टी की मीटिंग में उन्होने इस बात को बताया। दरअस्ल एक एप के जरिए वह अपने मेम्बरान पार्लियामेट को जोड़ने की कोशिश कर रहे थे। इसमें सरकार की पालीसियों के साथ मेम्बरान पार्लियामेट को मुख्तलिफ स्कीमों की पेशरफ्त के बारे में भी जानकारी दी जाती है। मगर मेम्बरान पार्लियामेट इसे पूरी तरह नजर अंदाज किए हुए हैं। इसका जिक्र करते हुए मोदी ने कहा कि वह रोज मेम्बरान पार्लियामेट को मगुडमार्निगफ कहने के अलावा इस एप के जरिए जरूरी पैगाम देते है। मगर हालत यह है कि ज्यादातर मेम्बरान पार्लियामेट उन पैगामात को पढते तक नहीं हैं। पैगामात का जवाब देना तो दूर रहा दो-चार मेम्बरान पार्लियामेट को छोड़कर कोई गुडमार्निंग का भी जवाब नहीं देता है।

इसके अलावा वह कईबार अवामी तौर पर कह चुके हैं कि गौरक्षकांे के भेष में घूमने वाले गुण्डों को काबू किया जाए, लेकिन उनकी बात सुनने के लिए बीजेपी सरकारों के वजीर-ए-आला तैयार नहीं हैं लेकिन नरेन्द्र मोदी की इतनी हिम्मत नहीं हो रही है कि उनका हुक्म न मानने वाले चीफ मिनिस्टर्स के खिलाफ वह कुछ कार्रवाई कर सके। यही वजह है कि जब गुजरात में नितिन पटेल ने बगावती तेवर दिखाए तो नरेन्द्र मोदी ने उनके खिलाफ कार्रवाई करने के बजाए उनके सामने हथियार डाल दिए। यह देखकर पुरूषोत्तम सोलंकी और योगेश पटेल भी बगावत का झडा लेकर मैदान में उतर आए हैं और उन्हें भी मनाने की कोशिशें अदरखाने जारी हैं।

बीजेपी की गुजरात  चुनाव में जीत के बाद अब बीजेपी लीडरान की वजारतों को पाने के लिए अंदरूनी झगडे की खबरें रुक-रुक के मीडिया में आ रहीं हैं। हाल ही में गुजरात के डिप्टी सीएम नितिन पटेल की नाराजगी की खबरों के बाद वडोदरा से मेम्बर असम्बली योगेश पटेल ने भी कहा कि- 7वीं बार एमएलए बनने के बाद भी कुछ न मिला। वजीरोें की नाराजगी जताती हैं कि कहीं न कहीं पार्टी में सब कुछ ठीक नहीं है। गुजरात में बीजेपी के एक और बड़े लीडर पुरुषोत्तम सोलंकी सरकार से नाराज हैं। पांच बार के मेम्बर असम्बली सोलंकी भावनगर ग्राम से इस बार जीत कर आए हैं और उन्हें फिशरीज वजारत दी गई है। लेकिन वह उससे खुश नहीं हैं उनका कहना है कि फिशरीज वजारत से मेरा काम सिर्फ साहिली इलाकों तक ही महदूद रहेगा। उन्होंने कहा कि कोली समाज मेरे साथ हुए इस बर्ताव से खुश नहीं हैं और अगर ऐसा ही रहा तो समाज के लोग पार्टी से नाराज भी हो सकते हैं। आगे उन्होंने कहा कि जब वजीर-ए-आला विजय रुपाणी खुद एक साथ 12 वजारत संभाल सकते हैं तो मैं एक से ज्यादा क्यों नहीं।

इससे पहले गुजरात में बीजेपी ने डिप्टी वजीर-ए-आला नितिन पटेल को मनाने के लिए उनको मनचाहा फाइनेस वजारत देने का फैसला किया था। पहले फाइनेस वजारत सौरभ पटेल को दी गई थी, लेकिन इससे नितिन पटेल नाराज हो गए थे और उन्होंने इसे इज्जते नफस (आत्मसम्मान) पर चोट बताया था और सरकार का कामकाज संभालने से इनकार कर दिया था। लेकिन बीजेपी सदर अमित शाह से बातचीत करने के बाद वह मान गए और उनको मनचाही वजारत मिल गई। दरअस्ल फाइनेंस मोहकमा पिछली आनंदीबेन पटेल और विजय रुपाणी की सरकार में नितिन पटेल के पास ही था। पिछली बार फाइनेस, शहरी तरक्की, सनअत और रेवेन्यू जैसी दमदार वजारतें चलाने वाले नितिन पटेल को इस बार कम अहमियत वाली हेल्थ, सड़क-मकान जैसी वजारते मिली हैं।