महाराष्ट्र में हिन्दुत्ववादियों को दलितों का सबक

महाराष्ट्र में हिन्दुत्ववादियों को दलितों का सबक

प्रकाश अम्बेडकर ने कहा कि हिन्दुत्ववादी ताकतों ने दलितों पर हमला करके हालात खराब किए हमारे साथ दलितों और लेफ्टिस्ट समेत दबे कुचलों कमजोर तबकों की ढाई सौ तंजीमें (सगठन) हैं हमें इंसाफ न मिला तो हम इसी तरह की कार्रवाइयां करेगे। उन्होने कहा कि अगर हमने सब्र से काम न लिया होता तो आधी मुंबई जल गई होती।फ

 

हमना सिद्दीकी/ सैफुल इस्लाम

मुंबई! पूरे मुल्क को हिन्दू राष्ट्र में तब्दील करने और अदालतों समेत हर जगह पर भगवा झण्डा फहराने के लिए बेताब हिन्दुत्व के नए ठेकेदारों के लिए 2018 की शुरूआत कुछ अच्छी नहीं रही। पुणे से नजदीक भीमा नदी के किनारे कोरेगांव में मराठों और सवर्ण ब्राहमण पेशवाआंे की शिकस्त की 200वीं सालगिरह पर लाखों दलित इस बार इकट्ठा हुए तो पुणे से कोरेगांव तक के सवर्णों को यह जमावडा नागवार गुजरा। समस्थ हिन्दू एकता अघाड़ी और मशिव प्रतिष्ठान हिन्दुस्तानफ नाम की दो हिन्दुत्ववादी तंजीमों (संगठनों) के लोगोें ने रास्ते में दलितों के एक जत्थे को रोक कर जयश्रीराम के नारे लगवाने की कोशिश की उनकी गाड़ियों पर भगवा झण्डा लगा दिया तो जवाब में दलितों ने दो-तीन दिनों तक पूरे महाराष्ट्र की आम जिंदगी ही मफलूज (पंगू) कर दी। पहले तो दो जनवरी को दिन भर पुणे में हंगामे होते रहे फिर तीन जनवरी को प्रकाश अम्बेडकर की रिपब्लिकन पार्टी ने महाराष्ट्र बंद का नारा दिया, मुंबई समेत महाराष्ट्र के तमाम बडे शहरों में जिंदगी की तमाम सरगर्मियांे पर ब्रेक लगा दिया। मुंबई में विक्रोली से घाटकेापर तक कोई डेढ किलोमीटर तक सड़क पर हजारों कारों, बसों, मोटरसाइकिलों को जला दिया गया। महाराष्ट्र के 18 जिलों में तीन जनवरी को दिन भर हंगामे जारी रहे चन्द्रपुर में बीजेपी के मेम्बर असम्बली नाना शमकुले के दफ्तर पर हमला हुआ। पहली जनवरी से तीन जनवरी की शाम तक मुंबई समेत पूरे महाराष्ट्र में दलितों ने अपनी ताकत का मजाहिरा किया। गाय के नाम पर भगवा कपडा गले में डालकर भगवा झण्डा हाथों में उठाए दंगाई जो मुसलमानों पर अपनी ताकत का अक्सर मजाहिरा करते रहते हैं वह तीन दिनों तक अपने बिलों से निकलने की हिम्मत भी नहीं कर पाए। कमजोर उत्तर भारतियों पर अक्सर अपनी ताकत दिखाने वाले राजठाकरे और उद्धव ठाकरे की सेनाओं ने भी अपने घरों मे ही रहने का फैसला किया। पुलिस हर जगह थी लेकिन सिर्फ खामोश तमाशाई बनी रही।

तीन जनवरी की शाम को दलित लीडर और डाक्टर अम्बेडकर के पोते प्रकाश अम्बेडकर ने बंद वापस लेने का एलान करने के साथ ही मीडिया से साफ कह दिया अगर दलितों पर जुल्म व ज्यादतियां होगी पुलिस और सरकार कोई कार्रवाई नहीं करेगी मजलूमों को इंसाफ नहीं मिलेगा तो रिएक्शन जरूर होगा और वह सबकुछ होगा जो तीन जनवरी को मुंबई समेत पूरे महाराष्ट्र में हुआ है। उन्होने कहा कि इन आंदोलन में सिर्फ दलित ही नहीं हैं  लेफ्टिस्ट समेत दबे कुचले और सताए हुए लोगों की ढाई सौ (250) तंजीमंें शामिल हैं। उन्होने कहा कि पहली जनवरी को पुणे से कोरेगांव जाते वक्त दलितों के जुलूस पर समस्थ हिन्दू एकता अघाड़ी और शिव प्रतिष्ठान हिन्दुस्तान नाम की हिन्दुत्व वादी तंजीमों के लीडरान मिलिंद एकबोते और सांभाजी भिंडे की कयादत में हमला किया। हम इसके चश्मदीद हैं। उन दलितों को पीटा गया कईयों को बुरी तरह जख्मी कर दिया। उनकी बस और गाडियों पर पहले भगवा झण्डा लगाया गया फिर गाड़ियों को जला दिया गया। हमने पुलिस में नामजद रिपोर्ट दी उन हिन्दुत्ववादी दहशतगर्दों के खिलाफ पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। अगले दिन दो जनवरी को पुणे में दिन भर इन लोगों ने बेहूदा हरकतें की पुलिस फिर खामोश तमाशाई बनी रही। मजबूरन हमे तीन जनवरी को महाराष्ट्र बंद का नारा देना पड़ा। इस सवाल पर कि आप हिंसा का जवाब हिंसा से ही देना चाहते हैं? प्रकाश अम्बेडकर ने कहा जी हां बिल्कुल अगर जुल्म सहने वालों के साथ सरकार इंसाफ नहीं करेगी तो हम इंतकाम (बदला) जरूर लें। अब वह दौर खत्म हो चुका जब दलितों और कमजोरों पर जुल्म किए जाते थे फिर भी वह खामोश रहते थे अब हम खामोश नहीं रहेगे। उन्होने कहा कि आज हम पर हिंसा करने का इल्जाम लगाया जा रहा है लेकिन मैं यह वाजेह (स्पष्ट) कर देना चाहता हूं कि अगर हम लोगों ने होश व हवास और सब्र से काम न लिया होता तो आज आधी से ज्यादा मुंबई जल चुकी होती।

इस दरम्यान दलितों के सामने पूरी तरह घुटने टेक चुके वजीर-ए-आला पंडित देवेन्द्र फडण्वीस ने एलान किया कि पूरे मामले की हाई कोर्ट के सिटिंग जज से तहकीकात कराई जाएगी। उन्होने पुणे में मारे गए नौजवान प्रहलाद जाधव के घर वालों को दस-दस लाख रूपए की माली मदद का भी एलान किया। इस दरम्यान महाराष्ट्र पंुलिस ने गुजरात के नव मुंतखब मेम्बर असम्बली जिग्नेश मेवाणी और जेएनयू के तालिब इल्म लीडर उमर खालिद पर भडकाऊ तकरीर करने के इल्जाम में मुकदमा दर्ज कर दिया। दलित लीडरान का कहना है कि दंगा और हंगामा हिन्दुत्ववादियों ने कराया तो रिपोर्ट जिग्नेश और उमर खालिद पर क्यो?

बीजेपी और हिन्दुत्ववादियों की गोद में खेल रहे रिपब्लिकन पार्टी आफ इंडिया के एक ग्रुप के लीडर और मरकजी वजीर रामदास अठावले ने कहा कि महाराष्ट्र में जो कुछ हुआ वह दलितों और मराठों के दरम्यान टकराव है लेकिन प्रकाश अम्बेडकर ने कहा कि जब हमारे साथ ढाई सौ से ज्यादा तंजीमें शामिल हैं तो इसे दलित बनाम मराठा नहीं कहा जा सकता यह जालिम और मजलूम के दरम्यान टकराव का नतीजा है। अब मजलूम भी ताकतवर तबकों के जुल्म बर्दाश्त करने को तैयार नहीं हैं।

कांग्रेस सदर राहुल गांधी ने महाराष्ट्र के वाक्यात को आरएसएस और बीजेपी के फाशिस्ट जेहनियत की वजह से महाराष्ट्र में हुआ हंगाम बताया है जो देश की एकता के लिए जहर साबित हो सकता है। एनसीपी के सदर शरद पवार ने पूरे वाक्यात के लिए महाराष्ट्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया। उन्होने कहा कि भीमा-कोरेगांव मंे दलितों (महारों) का जलसा दो सौ साल से हर साल होता चला आया है कभी कोई लड़ाई झगड़ा नहीं हुआ। इस बार जंग की दो सौवीं सालगिरह थी सभी को मालूम था कि इस बार भीड ज्यादा होगी फिर भी सिक्योरिटी का कोई बंदोबस्त नहीं किया गया। कुछ हिन्दुत्ववादी ताकतों को इस बात की खुली छूट दी गई थी कि वह दलितों पर हमला करें इसीलिए इतना हंगामा हो गया।

महाराष्ट्र में हिन्दुत्ववादियों और दलितों के टकराव का मामला पार्लियामेट के दोनों एवानों में भी गूंजा। अपोजीशन पार्टियों ने तशद्दुद (हिंसा) को महाराष्ट्र सरकार की नाकामी करार देते हुए वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी से बयान की मांग की साथ ही कांग्रेस ने पूरे मामले को हाई कोर्ट के जज से जांच कराने का मतालबा किया। जबकि बीजेपी ने कांग्रेस पर जज्बात भड़काने और इस मामले पर सियासत करने का इल्जाम लगाया। लोक सभा में कांगे्रस लीडर मल्लिकार्जुन खडगे ने कहा कि मुल्क में कुछ  ताकतें दलितों पर जुल्म ढा रही है। दलित जब इज्जत व वकार के साथ जीना चाहते हैं और कोई प्रोग्राम करते हैं तो कुछ लोग उसमें दखल देकर उसका फायदा उठाना चाहते हैं। खड़गे जिस वक्त एवान में इस मसले पर बोल रहे थे उसी वक्त लोक सभा स्पीकर सुमित्रा महाजन ने सौगत राय को इसी मसले पर बोलने के लिए उनका नाम पुकारा। खड़गे  ने अपना माइक बंद होने पर नाराजगी जताते हुए हाथ में लिए कागज फाड़ दिए और स्पीकर से कहा कि वह दलितों के मुद्दे पर बोलने की इजाजत नहीं दे रही हैं। तब स्पीकर ने उन्हें फिर बोलने की इजाजत दी। मरकजी वजीर अनन्त कुमार ने कहा कि कांग्रेस और राहुल गांधी तशद्दुद की आग बुझाने के बजाए भड़काने का काम कर रहे है। हंगामे के बीच दूसरी अपोजीशन पार्टियां इस मुद्दे पर अपनी बात रखना चाहती थी मगर स्पीकर ने इसकी इजाजत नहीं दी। हंगामा बढने पर एवान की कार्रवाई को मुल्तवी कर दिया गया। राज्य सभा में महाराष्ट्र के तशद्दुद का मामला अपोजीशन पार्टियों ने जोरशोर से उठाया और फौरन चर्चा का मतालबा किया। हुक्मरां पार्टी ने इसे रियासत का मामला बताते हुए वाक्यात के पीछे साजिश का अंदेशा जाहिर किया। जीरो आवर में बीएसपी के सतीश चन्द्र मिश्रा ने मामला उठाने की कोशिश की। उन्होने इल्जाम लगाया कि दलितों के खिलाफ तशद्दुद के लिए बीजेपी जिम्मेदार है। राज्य सभा में लीडर आफ अपोजीशन गुलाम नबी आजाद ने कहा बीजेपी सरकार में दलितों पर मजालिम ढाए जा रहे है।

भीमा कोरेगांव मंे पहली जनवरी को हुए तशद्दुद के खिलाफ तीन जनवरी को महाराष्ट्र बंद के दौरान और इससे पहले दो जनवरी को हुई तोड़फोड पर रियासती सरकार के  सख्त तेवर दिखाई दिए और वजीर-ए-आला देवेन्द्र फडण्वीस ने कहा कि तशद्दुद के वाक्यात पर कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी। तीन जनवरी को महाराष्ट्र बंद की अपील भारतीय रिपब्लिकन पार्टी बहुजन महासंघ के लीडर और बाबा साहब भीम राव अम्बेडकर के पोते प्रकाश अम्बेडकर ने की थी। इस अपील की हिमायत ढाई सौ तंजीमों ने की थी। जिसमें लेफ्ट और दूसरी तंजीमें भी शामिल थीं मगर बीजेपी और हिन्दुत्ववादी तंजीमें इसे दूसरा ही रूख दे रही है और इसके पीछे कांगे्रस की साजिश दिखाने की कोशिश कर रही हैं। इसकी वजह यह है कि कांग्रेस सदर राहुल गांधी ने एक ट्वीट के जरिए यह कहा था कि हिन्दुस्तान के लिए आरएसएस और बीजेपी की फाशिस्ट जेहनियत यही है कि दलितों को हिन्दुस्तानी समाज में सबसे निचली सतह पर बने रहना चाहिए।  इस ट्वीट ने हिन्दुत्ववादियों को मिर्ची लगाने का काम किया और वह बिलबिला कर तशद्दुद के पीछेे कांगे्रस की साजिश बताने लगे। राहुल गांधी ने इसी ट्वीट मे ऊना और रोहित वेमुला का भी जिक्र किया जो बीजेपी और हिन्दुत्ववादियों की दुखती रग बन चुके हैं कांगे्रस सदर ने अपने ट्वीट मे कहा था कि ऊना, रोहित वेमुला और अब भीमा कोरेगांव मजाहिमत (प्रतिरोध) की मजबूत अलामत बन चुके हैं। दरअस्ल यह पूरा तनाजा पहली जनवरी 1818 के दिन हुई जंग से मुताल्लिक है जो अंगे्रजों और पेशवा बाजीराव दोयम के कोरेगांव भीमा में लडी गई थी। इस जंग में अंग्रेजों ने पेशवा को शिकस्त दी थी। सबसे अहम बात यह है कि ईस्ट इंडिया कम्पनी की फौज में बडी तादाद में दलित भी शामिल थे। इस जंग में जीत का जश्न मनाने के लिए पुणे में प्रोग्राम किया गया तो बवाल हो गया।

भीमा कोरे गांव फिर पूरे महाराष्ट्र में तशद्दुद के वाक्यात का होना और करोड़ों की इमलाक का तबाह होना महाराष्ट्र सरकार की नाकामी को उजागर करता है मगर जिन लोगोें की वजह से तशद्दुद की आग ने पूरी रियासत को अपनी जद में ले लिया उसके खिलाफ एफआईआर तो हुई मगर गिरफ्तारी नहीं होना यही जाहिर करता है कि देवेन्द्र फडण्वीस सरकार हालात पर काबू पाने में बुरी तरह नाकाम हुई है और नाकामी का ठीकरा कांग्रेस और दलित तंजीमों पर फोड़ने की कोशिश कर रही है।

एनसीपी चीफ शरद पवार ने पुणे जिले में भीमा-कोरेगाँव लड़ाई की 200वीं सालगिरह के प्रोग्राम के दौरान हुई हिंसा के लिए इंतजामिया को जिम्मेदार ठहराते हुए मामले में जांच की मांग की है। अम्न की अपील करते हुए पवार ने कहा कि, सियासी और समाजी हलकेें के लोगों को मुश्तइल करने वाले बयान दिये बगैर ही सूरतेहाल का सामना सब्र से करना चाहिए। पवार ने ट्वीट किया कि, हिंसा सही नहीं है। उन्होने अपील की कि, इंतजामिया के एहतियात नही बरतने की वजह से अफवाहें और गलतफहमी फैली है। नांदेड़ में सोलह साल के प्रहलाद की मौत अफसोसनाक है।

हिंसा पर प्रकाश अंबेडकर ने कहा कि इस हिंसा के पीछे हिंदू तंजीम के मिलिंद एकबोते ओर सांभाजी भिंडे का हाथ है। हम स्पाट पर थे और हमें पता है कि इसके पीछे किसका हाथ है। हमने सरकार को नाम दे दिया है, अब उनका काम है कि कार्रवाई करें। प्रकाश अंबेडकर ने आगे कहा कि अगर कार्रवाई नहीं हुई तो हम आंदोलन करेंगे। हमने ऊना की वारदात सही, कब तक ऐसे और सहते रहेंगे? अगर हमने भीड़ को कंट्रोल नहीं किया होता तो कम से कम 500 हिंदू तंजीमों के लोगों की लाश होती।

वाजेह हो कि भीमा कोरेगांव की लड़ाई 1 जनवरी 1818 को पुणे वाके कोरेगांव में भीमा नदी के पास नार्थ-ईस्ट में हुई थी। यह लड़ाई महार और पेशवा फौजियों के बीच लड़ी गई थी। अंग्रेजों की तरफ 500 लड़ाके, जिनमें 450 महार फौजी थे और पेशवा बाजीराव दोयम के 28,000 पेशवा फौजी थे, महज 500 महार फौजियों ने पेशवा की ताकतवर 28 हजार मराठा फौज को हरा दिया था। इसी की सालगिरह के जश्न में झगडा हुआ।

महाराष्ट्र में पुणे जिले में भीमा-कोरेगांव हिंसा की वजह से पूरे सूबे में तनाव है। रियासत के पच्छिमी हिस्से के सभी सात जिलों में कर्फ्यू जैसे हालात बन गये हैं। भीमा-कोरेगांव में दो फिरकों के बीच हुई हिंसा में एक शख्स की मौत हो गयी और कई दीगर जख्मी हुए हैं। जख्मियों को शहर के अलग-अलग इलाकों के निजी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।

वजीर-ए-आला देवेन्द्र फड़नवीस ने हिंसा की ज्यूडीशियल जांच के हुक्म दिये जिसकी सदारत हाई कोर्ट के मौजूदा  जज करेंगे। फड़नवीस ने हिंसा में मारे गये नौजवान प्रहलाद के घर वालों को दस लाख की इमदादी रकम देने का एलान किया है। फड़नवीस ने अफवाह नहीं फैलाने और अम्न बनाये रखने की अपील की है। उन्होंने दोनों फिरकों के लीडरान से किसी भी ऐसे बयान देने से बचने के लिए कहा जिससे तनाव पैदा हो। फड़नवीस ने सभी को इंसाफ दिलाने के लिए यकीन दहानी कराई है। इस हिंसा की वजह से सेेट्रल और हार्बर लाइन की रेल सर्विस मुतास्सिर हुई हैं। सैकड़ों लोगों ने मुलुंड, चेंबूर, भांदुप, रामाबाई, विखरोली के अंबेडकर नगर और कुर्ला के नेहरू नगर में ट्रेनों को रोका है। खबर लिखे जाने तक कशीदगी बरकरार थी।