जवानों की लाशें कब तक

जवानों की लाशें कब तक

मोदी सरकार पाकिस्तान को सबक सिखाने में पूरी तरह नाकाम, सर्जिकल स्ट्राइक बेअसर साबित

 

”हमने सर्जिकल स्ट्राइक की हमारे फौजियों ने कई बार पाकिस्तान में घुसकर उनके बंकरों और फौजी ठिकानों को तबाह किया। शहीद जवानों के इंतकाम में कई पाकिस्तानी फौजियों को मौत के घाट भी उतारा इसके बावजूद पुलवामा जैसा दहशतगर्दी का हमला। आखिर यह किसकी नाकामी है हम सर्जिकल स्ट्राइक की कितनी कीमत अदा करेगे इसकी जवाबदेही आखिर किस पर और कब तय की जाएगी।“

 

”अमरीका पाकिस्तान को हजारों करोड़ डालर की मदद करता है दुनिया को बेवकूफ बनाने के लिए पाकिस्तान मुखालिफ बयानबाजी भी करता है। नए साल के मौके पर डोनाल्ड ट्रम्प ने पाकिस्तान को धमकाया हम और मोदी का गुलाम मीडिया इस दावे के साथ नाचने लगा कि यह हमारी सिफारती (कूटनीतिक) जीत है। फौरन ही चीन खुलकर पाकिस्तान के साथ आ गया। यह किस की नाकामी है?“

 

”पुलवामा हमले के बाद सुषमा स्वराज ने यह कह कर कट्टरपंथियों की तालियां तो बटोर लीं कि दहशतगर्दी जारी रहने तक पाकिस्तान के साथ कोई भी क्रिकेट मुकाबला नहीं होगा। उन्होेने यह नहीं बताया कि पाकिस्तान के साथ जारी लाखों करोड़ का व्यापार कब बंद किया जाएगा और भारत से पाकिस्तान को मिला मोस्ट फेवर्ड देश का दर्जा कब खत्म किया जाएगा। पाकिस्तान के साथ जारी गुपचुप मीटिंगें और बातचीत कब बंद होगी।“

 

नई दिल्ली! 31 दिसम्बर को साल की आखिरी रात में जब हिन्दुस्तान और पूरी दुनिया नए साल के जश्न में डूबी हुई थी ठीक उसी रात में पाकिस्तानी फिदायीन दहशतगर्द गरोह ने कश्मीर के पुलवामा जिले के लेथपीरा के सीआरपीएफ कैम्प पर हमला करके हमारे पांच जवानों को शहीद कर दिया। आर्मी चीफ जनरल बिपिन रावत एक दिन पहले ही रजौरी सेक्टर का दौरा करके वापस आए थे। पुलवामा के साथ रजौरी में पाकिस्तानी फौजी ने स्नाइपर शाट के जरिए हमारी फौज के एक जवान जगसीर सिंह कोे शहीद कर दिया। पुलवामा हमले से चार दिन पहले ही पूरे हिन्दुस्तान में इस बात के लिए जश्न मनाया गया था कि पाकिस्तानी फौजियों ने रजौरी में 24 दिसम्बर को एक मेजर और तीन जवानों को स्नाइपर शाट के जरिए शहीद किया था तो 48 घंटों के अंदर ही हमारे फौजियों ने लाइन आफ कण्ट्रोल के पार पाकिस्तानी कब्जे वाले कश्मीर में 300 से 500 मीटर अंदर तक घुसकर उनके चार जवानों को मौत की नींद सुला दी और बखैरियत वापस आ गए इस कार्रवाई में हमारे बहादुर जवानों ने पाकिस्तान की कई फौजी चैकियों और बंकरों को भी उड़ा दिया। हमारा जश्न जारी ही था कि साल के आखिरी दिन पाकिस्तान ने फिदायीन का इस्तेमाल करके लेथपोरा के सीआरपीएफ कैम्प पर बिल्कुल पठानकोट जैसा हमला कराकर हमारे पांच जवानों को शहीद कर दिया। जाहिर है हम इस शहादत को बेकार नहीं जाने देंगे और एक बार फिर इंतकामी (बदलेकी) कार्रवाई करके पाकिस्तान को सबक जरूर सिखाएंगे। यह सिलसिला कब तक चलेगा कोई नहीं जानता। हमारी फौज पाकिस्तान को सबक सिखाने में अहल (सक्षम) है लेकिन किस कीमत पर? आखिर हर मोर्चे पर नाकाम मोदी सरकार सरहद पर लाशें गिनवाने का काम कब तक करेगी? क्या हम अपने जवानों को इसी तरह शहीद कराकर पाकिस्तान को सबक सिखाते रहेगे? वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी उनकी फारेन पालीसी और नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर अजित डोभाल की यह शर्मनाक नाकामी  है कि हमारे फौजी जान हथेली पर रखकर पाकिस्तान के अंदर तक कार्रवाई करते हैं उसके फौरन बाद अपने साथियों को खिराजे अकीदत (श्रद्धांजलि) देते हैं। लाशें गिननी पड़ती हैं। गुजिश्ता साढे तीन सालों मंें वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी ने तकरीबन अस्सी विदेशी दौरे किए हैं। हर दौरे के वक्त सरकार ने अपने गुलाम मीडिया का इस्तेमाल करके डीगें हांकते हुए दावा किया कि फलां (अमुक) मुल्क ने भारत के साथ कांधे से कांधा मिलाकर दहशतगर्दी का मुकाबला करने की यकीनदहानी कराई है। यह दावे भी खूब होते रहते हैं कि अमरीका, यूरोपी मुल्कों, सऊदी अरब या यूनाइटेड अरब अमीरात के साथ बातचीत करके नरेन्द्र मोदी ने पाकिस्तान को दुनिया में अलग-थलग कर दिया है। अगर मोदी के विदेश दौरों के इतने बड़े फायदे दहशतगर्दी के खिलाफ हुए हैं तो फिर मोदी हमारे फौजियों की शहादत के वाक्यात और उनकी लाशें गिनवाने का सिलसिला रोक क्यों नहीं पा रहे हैं? सरकार में आने से पहले तक तो मोदी हर जगह यही कहते फिरते थे कि पाकिस्तान को उसी की जुबान (भाषा) में जवाब दिया जाएगा। वजीर-ए-आजम बनने के बाद मोदी अपनी और पाकिस्तान दोनों की जुबाने भूल क्यों गए? अब अस्ल सवाल यही है कि आखिर सरहद से फौजियों की लाशें आने का सिलसिला कब तक जारी रहेगा?

पुलवामा के सीआरपीएफ कैम्प पर हुए हमले से महज तीन दिन कब्ल 27 दिसम्बर को नरेन्द्र मोदी के नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर अजित डोभाल ने थाईलैण्ड में पाकिस्तान के नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर नासिर खान जजुआ के साथ लम्बी मीटिंग की थी। अब सवाल उठ रहे हैं कि अगर किसी बातचीत का कोई मुसबत (सकारात्मक) नतीजा ही नहीं निकलता है तो बातचीत में होता क्या है? जो सबसे आसान टारगेट हैं, म्यूजिक, अदाकारी और क्रिकेट मोदी सरकार इन पर तो फौरन पाबंदी लगा देती है लेकिन वजीर-ए-आजम मोदी और उनके नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर छुप-छुप कर पाकिस्तान के हुक्मरान के साथ बातचीत करते रहते हैं। पाकिस्तान के साथ जारी व्यापार एक दिन के लिए भी रोका नहीं गया। भारत सरकार ने पाकिस्तान को ममोस्ट फेवर्ड मुल्कफ का दर्जा दे रखा है। उसे भी खत्म नहीं किया जा रहा है।

नरेन्द्र मोदी सरकार आने के बाद से पाकिस्तान के मामले में बार-बार बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं गुजरात एलक्शन में भी पाकिस्तान का नाम लेकर फायदा उठाने की कामयाब कोशिश मोदी ने इस बार भी की अमरीका हजारों करोड़ डालर की मदद पाकिस्तान को देता रहता है। इस पैसे का इस्तेमाल भी पाकिस्तान भारत मुखालिफ दहशतगर्दी की हरकतों में करता रहता है। बीच-बीच में अमरीका दुनिया को बेवकूफ बनाने के लिए पाकिस्तान को दी जाने वाली मदद कुछ दिनों के लिए रोकने का ड्रामा करता है। इस बार भी नए साल के मौके पर अमरीकी सदर डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि हम पाकिस्तान को गुजिश्ता 15 सालों में 3300 करोड़ (33 बिलियन) डालर की मदद दे चुके हैं और पाकिस्तान हमें सिर्फ बेवकूफ ही बनाकर डालर लेता रहता है। इसलिए हम यह मदद बंद करने पर संजीदगी से गौर कर रहे हैं। हर बार की  तरह इस बार भी अमरीकी सदर के इस बयान के बाद मोदी सरकार और उनकी गुलामी में लगा मीडिया इस दावे के साथ दीवानों की तरह नाचने लगा कि यह तो मोदी की डिप्लोमैटिक (कूटनीतिक) कोशिशों की कामयाबी है। मोदी की डिप्लोमैटिक नाकामियों का हाल यह है कि जिस चीन को मोदी ने उसका सड़ा गला माल बेचने और लाखों करोड़ का कारोबार करने के लिए भारत की धरती सौंप रखी है उसी चीन ने डोनाल्ड ट्रम्प के बयान का जवाब देते हुए दो जनवरी को ही कह दिया कि दहशतगर्दी के खिलाफ पाकिस्तान ने काबिले तारीफ काम किया है। ट्रम्प को अपना फैसला तब्दील करना चाहिए इसी के साथ चीन ने पाकिस्तान को एक और बड़ी छूट देते हुए एलान कर दिया कि अब पाकिस्तान और चीन के दरम्यान होने वाले व्यापार का भुगतान डालर में न होकर पाकिस्तानी रूपयों और चीनी करेन्सी येन के जरिए होगा। चीन ने भले ही नेहरू की पीठ में छुरा घोंपकर 1962 में भारत पर हमला तक कर दिया था। इसके बावजूद सत्तर सालों में पड़ोसी मुल्कों के साथ भारत को डिप्लोमैटिक सतह पर ऐसी नाकामी कभी नहीं हुई  थी जितनी अब साढे तीन साल की मोदी सरकार के दौर में हो रही है।

गुजिश्ता साल की आखिरी रात में जिन तीन पाकिस्तानी फिदायीन दहशतगर्दों ने सीआरपीएफ कैम्प पर हमला करके हमारे पांच फौजियों को शहीद कर दिया था दो दिनों के अंदर उन तीनों को हमारे फौजियों ने मार गिराया, बड़ी मिकदार (मात्रा) में असलहा और गोलाबारूद भी बरामद किया गया तो सरकार में बैठे कुछ बेहिस लोगों ने इसका भी क्रेडिट लेने की कोशिश की गुलाम मीडिया ने इस मामले को ऐसे पेश किया जैसे तीन दहशतगर्द न मारे हों पाकिस्तान पर कब्जा कर लिया हो। किसी के मुंह से एक बार यह नहीं निकला कि महम अपने पांच जवानों को बचा नहीं सके, इस नाकामी के लिए हम मुल्क के सामने शर्मिदा हैं।फ पुलवामा में सीआरपीएफ कैम्प पर हमला और पांच जवानों की शहादत के बाद भी बीजेपी के संबित पात्रा और सुधांशु त्रिवेदी जैसे तर्जुमान मुख्तलिफ टीवी चैनलों की बहसों में साल भर पहले पाकिस्तान पर किए गए मसर्जिकल स्ट्राइकफ के बहाने अपनी सरकार की बहादुरी बयान करते हुए नामर्दों की तरह तालियां बजाते दिखे। टीवी चैनलों की बहसों में बीजेपी के लोग मुसलसल झूट  बोलने और देश को गुमराह करने का काम ही करते रहते हैं। हमेशा यह तो बताते हैं कि एक साल में हमने पाकिस्तान और उसके भेजे हुए दहशतगर्दों को सख्त सबक सिखाते हुए कितने दहशतगर्दों को मार गिराया। इस बार भी यही दावा किया जा रहा है कि 2017 के दौरान दो सौ से ज्यादा दहाशतगर्दोें और घुसपैठियों को हमने मौत के घाट उतारा है। यह काम किस कीमत पर और अपने कितने जवानों की शहादत देकर हुआ है यह कभी नहीं बताते। बता भी नहीं सकते क्योंकि जो कीमत भारतीय जवान अदा कर रहे हैं वह बहुत ज्यादा है। एक तल्ख हकीकत यह भी है कि 2017 मे जितने हिन्दुस्तानी जवानों ने अपनी कुर्बानियां दी हैं उतनी पिछले दस सालों में किसी भी साल नहीं देनी पड़ी थी। इन कुर्बानियों के लिए कौन जिम्मेदार है?

लाइन आफ कण्ट्रोल पर और सिफारती (कूटनीतिक) सतह पर पूरी तरह नाकाम मोदी सरकार की वजीर खारजा सुषमा स्वराज ने यह कहकर कट्टरपंथियों की तालियां तो बटोर लीं कि जब तक पाकिस्तान दहशतगर्दी नहीं रोकता उस वक्त तक पाकिस्तान के साथ कहीं भी भारत क्रिकेट मैच नहीं खेलेगा। लेकिन वह यह नहीं बता सकीं कि अगर पाकिस्तान ने दहशतगर्दी न  रोकी तो हम उसे किस तरह सख्त सबक सिखाएंगे। जहां तक फौजी, एटमी और इंटलीजंेस की ताकत का सवाल है भारत के सामने पाकिस्तान कहीं नहीं ठहरता। हिन्दुस्तानी फौजियों में देश के तहफ्फुज के जज्बे और हौसले में भी कमी नहीं है इसके बावजूद मोदी सरकार पाकिस्तान की जानिब से आने वाली दहशतगर्दी को रोकने में कामयाब नहीं हो पा रही हैं। इसकी तो एक ही वजह है कि यह लोग देश चलाने के अहल (योग्य) ही नहीं हैं।