इस साल खेल और खिलाड़ियों का होगा इम्तेहान

इस साल खेल और खिलाड़ियों का होगा इम्तेहान

क्रिकेट, हाॅकी, बैडमिंटन ही नहीं, हर खेल में कड़ी चुनौती लेकर आया यह साल

 

मनोज चतुर्वेदी

खेलों में 2018 की चुनौतियां साल के पहले हफ्ते से ही शुरू हो जाएंगी। भारतीय क्रिकेट टीम पर उपमहाद्वीप में बनाए जीत के सिलसिले को साउथ अफ्रीका और इंग्लैंड में बरकरार रखने की सख्त चुनौती होगी। बैडमिंटन में पीवी सिंधु, सायना नेहवाल और किदांबी श्रीकांत अपने दबदबे को चोटी पर पहुंचाने की कोशिश करेंगे। हाकी के हम कभी शहंशाह रहे हैं, लेकिन पिछली कई दहाइयों से खोए वकार को वापस पाने की कोशिशों में जुटे हुए हैं। पिछले साल के आखिर में पहले एशिया कप जीतने और फिर वल्र्ड हाकी लीग फाइनल्स में कांसे का मैडल हासिल करने से बने माहौल को इस साल कामनवेल्थ गेम्स, एशियाई खेल और साल के आखिर में भुवनेश्वर में होने वाले वल्र्ड कप में भी बनाए रखकर यह साबित करना होगा कि अब हम भी दिग्गज टीमों में गिने जाने लायक हो गए हैं। वैसे, यह साल एशियाई खेलों का है, इसलिए सभी खिलाड़ियों का सख्त इम्तेहान इस साल होना है।

अपनी पेस बैटरी

विराट की कयादत में टीम इंडिया को 2017 में हासिल कामयाबियों का हैंगओवर नए साल की शुरुआत में ही दूर हो सकता है। साउथ अफ्रीका के तौर पर उन्हें एक ऐसी टीम के मुकाबले का सामना करना है, जिसे उसके घर में हम आज तक हरा नहीं सके हैं। माना जाता है कि हमारे बल्लेबाज तेज और उछाल वाले विकेट पर आराम से नहीं खेल पाते। इसकी मिसाल हमें श्रीलंका के खिलाफ कोलकाता टेस्ट में देखने को मिली थी। ईडन गार्डंेन के विकेट पर तेज गेंदबाजों को मदद मिलने पर हिन्दुस्तानी टीम पहली पारी में लकमल की गेंदबाजी के आगे 172 रन पर ढेर हो गई थी। श्रीलंका टीम इस सूरतेहाल का फायदा नहीं उठा सकी थी, लेकिन साउथ अफ्रीका इन हालात में उभरने का मौका शायद ही दे। वैसे भी साउथ अफ्रीकी गेंदबाजी में डेल स्टेन, मार्ने मार्कल और रबाडा जैसे गेंदबाज पूरी सीरीज में हमारे बल्लेबाजों की अच्छी तरह से परख करने वाले हैं।

वैसे, विराट की टीम एतमाद से भरी हुई है और इसे अच्छा मुजाहिरा करने का भरोसा भी है। कहा जा रहा है कि साउथ अफ्रीका ने अगर तेज विकेट दिए तो ईशांत शर्मा, मोहम्मद शमी, भुवनेश्वर, उमेश यादव और जसप्रीत बुमराह वाला हमारा पेस अटैक उनका इम्तेहान लेने का माद्दा रखता है। सही मायनों में हिन्दुस्तानी मुजाहिरा ओपनर्स मुरली विजय, शिखर धवन और कप्तान विराट कोहली पर मुंहसिर रहने वाला है। जून से सितंबर तक होने वाला इंग्लैंड का दौरा भी भारत के लिए कम बड़ा चैलेंज नहीं है। भारत की ही तरह इंग्लैंड को भी घर में हराना मुश्किल है। विराट को इस दौरे पर खुद को भी साबित करना है क्योंकि पिछले इंग्लैंड दौरे पर उन्होंने बहुत मायूस किया था। इस दौरे पर इंडिया और विराट दोनों चल गए तो वल्र्ड क्रिकेट में टीम इंडिया की धाक जम जाएगी।

हाकी की जहां तक बात है तो यह साल बहुत ही अहम है क्योंकि इस साल टीम को अप्रैल में कामनवेल्थ गेम्स, जून में चैंपियंस ट्राफी और अगस्त-सितंबर में जकार्ता एशियाई खेलों के बाद नवंबर-दिसंबर में वल्र्ड कप में हिस्सा लेना है। भारत एशियाई खेलों में फातेह बनता है तो 2020 के टोक्यो ओलिंपिक के लिए क्वालिफाई कर जाएगा। साल के आखिर में भुवनेश्वर में होने वाले वल्र्ड कप में हिन्दुस्तानी टीम पोडियम पर चढ़ने में कामयाब होती है तो मान लिया जाएगा कि वह अब दिग्गज टीमों की बराबरी पर आ गई है। कामनवेल्थ गेम्स में भारत के सामने आस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और न्यूजीलैंड जैसी टीमों का सामना होगा। इसका मैडल भी टीम का एतमाद बढ़ाएगा। एशियाई खेलों की बात करें तो भारत ने 2010 में दिल्ली और 2014 में इंचियोन में हुए खेलों में दिखाया है कि अब वह भी मैडल जीतना सीख गया है। नई दिल्ली एशियाई खेलों में हमने 14 गोल्ड समेत 65 मैडल और इंचियोन में 11 गोल्ड समेत 36 मैडल जीते थे। एथलेटिक्स और कुश्ती में भारत अच्छा मुजाहिरा करता रहा है लेकिन हमारे निशानेबाज, तीरंदाज और मुक्केबाज अपनी सलाहियत के हिसाब से मुजाहिरा नहीं कर पाते हैं। इन सबमें सलाहियत के हिसाब से मुजाहिरा करके हम टाप-3 में आ सकते हैं।

पिछले कुछ सालों में भारत ने किसी खेल में सबसे ज्यादा तरक्की की है तो वह है बैडमिंटन, हालांकि पीवी सिंधु को वल्र्ड चैंपियनशिप और रियो ओलिंपिक में सिल्वर साल 2018 में उनके सामने अपनी इस खामी को दूर करके वल्र्ड रैंकिंग में चोटी पर पहुंचने की चुनौती होगी। सायना नेहवाल भी अपनी पुरानी रंगत पाने के लिए कोशां हैं। इनके अलावा किदाम्बी श्रीकांत और एचएस प्रणय पिछले साल की तरह इस साल भी अपनी धमक दिखाने की कोशिश करेंगे। यह सभी खिलाड़ी पूरी रंगत में खेलते हैं तो भारत का वल्र्ड बैडमिंटन में दर्जा और भी ऊंचा हो सकता है।

यंग टैलंट की बारी

इन सबके अलावा इस साल कुछ नौजवान अपने ग्रैजुएशन की कोशिश करेंगे। इसमें सचिन तेंदुलकर के बेटे आलराउंड क्रिकेटर अर्जुन तेंदुलकर, पृथ्वी शाॅॉ और बैडमिंटन कोच पुलेला गोपीचंद की बेटी गायत्री के नाम खासतौर से लिए जा सकते हैं। अर्जुन पिछले साल ही काम्पेटेटिव क्रिकेट में उतरे हैं और वह गेंदबाजी में असर छोड़ने में कामयाब रहे हैं। 17 साल के पृथ्वी शाॅॉ को रणजी ट्राफी में धमाका करने के बाद वल्र्ड कप के लिए अंडर-19 टीम का कप्तान बनाया गया है। गायत्री के लिए भी इस साल जूनियर से सीनियर कटेगरी में जाने का मौका होगा। टेनिस में करमन कौर के सामने देश की अगली सानिया मिर्जा बनने की चुनौती होगी। टेनिस में सुमित नागल ने भी धमक दिखाना शुरू कर दिया है। इन सभी बाससलाहियत खिलाड़ियों के लिए यह साल काफी अहम होने जा रहा है। (शुक्रिया एनबीटी)