छोटी बचत पर सरकार का हमला

छोटी बचत पर सरकार का हमला

अंदलीब अख्तर

नई दिल्ली! सरकार ने अगली तिमाही (जनवरी से मार्च) के लिए छोटी बचत की स्कीमों पर सूद की शरह में 0.2 फीसद की कमी करने का एलान किया है। यह फैसला नेशनल सेविंग  सर्टिफिकेट (एनएससी), किसान विकास पत्र (केवीपी) सुकन्या समृधि अकाउंट और पब्लिक प्रोवीडेट फण्ड (पीपीएफ) सब पर लागू होगा। सिर्फ एक बचत स्कीम पांच साला सीनियर सिटीजन्स सेविंग स्कीम को इससे अलग रखा गया है।

नए साल के ठीक पहले यह एलान सरकार की तरफ से मुल्क के शहरियों के लिए एक तोहफा है, जो शायद ही किसी शख्स को पसंद आए। समझा जा रहा है कि इस ताजा फैसले का मकसद बैंकों को राहत पहुचाना है।

माहिरीन के मुताबिक सरकार केे इस फैसले के बाद बैंक फिक्स्ड डिपाजिट शरह सूद में भी कटौती कर सकते हंै। बचत पर सूद कम होने से सबसे ज्यादा मुतास्सिर समाज का वह तबका होता है, जो रिटायरमेट के बाद या इसके करीब पहुच कर सूद की रकम से ही गुजारा करने का इरादा रखता है। इस तबके के पास एक तरफ महंगाई से बचने का कोई रास्ता नहीं होता तो दूसरी तरफ सूद की शरहो में कटौती उसकी माहाना आमदनी को भी कम कर देती हैं। क्योंकि बैंकों के अपने मसायल हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। दूसरी तरफ सरकार खुद भी कई बडे मसायल से दोचार है। इससे निपटने के लिए, उसने 50 हजार करोड रुपये का कर्ज लेने का फैसला किया है। कच्चे माल की महंगाई  और बढ़ते हुए माली घाटे को देखते हुए उसके सामने दो ही रास्ते थे या तो तरक्कियाती मंसूबो को मुस्तकबिल के लिए टाल दे या  फिर हर कीमत पर जारी रखें और बजट से बाहर से उनके लिए कर्ज का नज्म करें। इस लिहाज से यह फैसला अच्छा कहा जा सकता है क्योंकि खर्च में कटौती से इक्तेसादी रिकवरी कमजोर होने का मतलब था हर तरफ से मार पडना।  यह बात दीगर है कि सरकार जब पचास हजार करोड रूपए का इजाफी कर्ज लेगी तो सनअतकारों से लेकर घर खरीदने वालो तक में तकसीम करने के लिए कर्ज की रकम लाजमी तौर पर कम हो जाएगी।   बाजार में कर्ज की मांग बहुत ज्यादा नहीं है, इसलिए इसका ज्यादा असर शायद न दिखाई दे लेकिन कहीं न कहीं खदशा तो जरूर है। उम्मीद करनी चाहिए कि बचत पर मुंहसिर लोगों की मदद के लिए, सरकार अगले बजट में कोई रास्ता जरूर निकालेगी। माहिरीन का कहना है कि छोटी बचत में सूद की शरह कम  करने का सबसे ज्यादा असर पीपीएफ अकाउंट होल्डर्स पर पडेगा। अब पीपीएफ और इपीएफ के दरम्यान इंट्रेस्ट रेट का गैप बढकर कर 105 बिलियन प्वाइट हो गया है। ऐसे में इसका नुक्सान इपीएफओ के करोडों पीएफ मेम्बरान को कम इंट्रेस्ट की शक्ल में उठाना पड सकता है।

इपीएफओ के बारे में फैसले लेने वाली आलातरीन बाडी सेंट्रल बोर्ड आफ ट्रस्टी (सीबीटी) की मीटिंग पांच जनवरी को पार्लियामेट का सेशन खत्म होने के बाद हो सकती है।  इस सेटिंग में ईपीएफ पर इंटे©ंस्ट रेट तय करने पर गौर होना है। एपीएफओ के सेंटर पीएफ कमिशनर डाक्टर  वीपी जाय, के मुताबिक मीटिंग की तारीख का फैसला वजीर मेहनत करेगे।

ख्याल रहे कि इपीएफओ, इपीएफ पर इंट्रेस्ट रेेट पीएफ फण्ड में सरमायाकारी से मिलने वाले रिटर्न की बुनियाद पर तय करता है। इपीएफओ के एक आला अफसर के मुताबिक पिछले कुछ बरसों के दौरान सरकारी सिक्योरिटीज पर रिटर्न  मुसलसल कम हो रहा है। इपीएफओ सरमायाकारी के लाइफ पीएफ फण्ड का 85 फीसद हिस्सा सरकारी सिक्योरिटीज में ही सरमायाकारी करता है। ऐसे में इपीएफओ के लिए गुजिश्ता साल तय शुदा 8.65 फीसद इंटे©ंस्ट रेट को बरकरार रखना भी मुश्किल होगा। इपीएफ पर इंटे©ंस्ट रेट के बारे में फैसला इपीएफओ करता है। लेकिन वजारत मेहनत उसकी मंजूरी के लिए उसे वजारते खजाना  के पास भेजता है। चूंकि सरकार छोटी बचत की स्कीमों में इंटे©ंस्ट रेट केा मुसलसल कम कर रही है। ऐसे में इपीएफ पर  इंटे©ंस्ट रेट छोटी बचत स्कीमों से ज्यादा रखना सरकार के लिए मुमकिन न होगा। लिहाजा इस बात का इमकान बहुत कम है कि प्रावीडेट फण्ड अकाउंट होल्डर्स के लिए नया साल कोई नई खुशी लेकर आएगा।