हिन्दुस्तान हो गया झूटी सियासत का शिकार

हिन्दुस्तान हो गया झूटी सियासत का शिकार

टूजी घोटाला भी बोफोर्स की तरह झूटा ही निकला, आदर्श घोटाले मंे अशोक चहवाण मुल्जिम नहीं

 

 

”मुबय्यना टूजी घोटाले का प्रोपगण्डा करने की साजिश में शामिल नरेन्द्र मोदी मुल्क के वजीर-ए-आजम बन गए, विनोद राय बेशुमार दौलत के खजाने पर बैठे हैं, अरविन्द केजरीवाल दिल्ली के चीफ मिनिस्टर हंै रामदेव तीन सालों में हजारों करोड़ के व्यापारी बन गए वीके सिंह मरकजी वजीर और किरण बेदी गवर्नर बन गई। अन्ना हजारे खुश हैं कि उन्होने फिरकापरस्तों की सरकार बनवा दी। मुल्क की जो बदनामी पूरी दुनिया में हुई मुल्क का जो मआशी (आर्थिक) नुक्सान हुआ उसकी जवाबदेही किस पर होगी कोई जुबान नहीं खोल रहा है।“

 

”सीबीआई के स्पेशल जज ओपी सैनी ने साफ कहा है कि कोई घपला या घोटाला हुआ ही नहीं था सारा मामला महज अफवाहों और गलतबयानियों (झूट) की बुनियाद पर तैयार किया गया इसीलिए सात सालांे में सीबीआई कोई गवाह अदालत में पेश नहीं कर पाई टेलीकाम मोहकमे के अफसरान ने जो कागजात अदालत में पेश किए उनपर वह खुद दस्तखत करने और उनकी जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं हुए।“

 

”टेलीकाम मोहकमे के जिस डीडीजी एके श्रीवास्तव के बयान पर सीबीआई ने घोटाले की पूरी कहानी गढी उस वक्त के वजीर ए राजा पन्द्रह महीनों तक जेल में रहे वही अपने बयान से मुकर गए मोदी के नजदीकी थैलीशाह अनिल अंबानी ने अदालत के जरिए दिखाए जाने पर अपने दस्तखत को तो सही माना लेकिन कहा उन्हें याद नहीं किन हालात में दस्तखत किए थे पौने चार साल तक मोदी सरकार गवाह भी तलाश नहीं कर पाई।“

 

नई दिल्ली! टूजी स्पेक्ट्रम के एक लाख छिहत्तर हजार करोड के मुबय्यना (कथित) घोटाले के सबसे अहम गवाह टेलीकाम मोहकमे के डीडी जी ए के श्रीवास्तव ने मामले की सुनवाई के वक्त अपना बयान ही तब्दील कर दिया। दूसरे बड़े गवाह वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी के करीबी सनअतकार अनिल अंबानी भी मुकर गए जब अनिल अंबानी को अदालत ने उनके बयान पर उनके दस्तखत दिखाए तो अनिल अंबानी ने कह दिया कि हां यह दस्तखत तो उन्हीं के हैं लेकिन उन्हें याद नहीं है कि यह दस्तखत उन्होने किस हाल में किए थे। इन दो के अलावा सीबीआई दूसरे गवाह अदालत में पेश नहीं कर सकी। स्पेशल जज ओ पी सैनी ने 21 दिसम्बर को इंतेहाई दर्द के साथ अपने फैसले में कहा कि सात सालों तक उन्होने बगैर थके इस केस पर काम किया सनीचर और इतवार के अलावा दीगर छुट्टियों में भी अदालत में आकर काम करते रहे लेकिन सीबीआई सबूत नहीं पेश कर सकी। सब बेकार साबित हुआ। अब पता चला कि महज अंदाजों और प्रोपगण्डे की बुनियाद पर यह मामला अदालत में लाया गया था। ए के श्रीवास्तव जिनके बयान की बुनियाद पर उस वक्त के वजीर ए राजा और राज्य सभा मेम्बर कानिमोझी को गिरफ्तार करके तकरीबन सवा साल तक जेल में रखा गया। वह बयान भी जुबानी था। बयान पर श्रीवास्तव के दस्तखत तक नहीं कराए गए थे। जज ओपी सैनी ने कहा कि सीबीआई और ईडी समेत इस मुकदमे से मुताल्लिक तमाम एजेंसियां मुल्जिमान का गुनाह साबित करने में बुरी तरह से नाकाम रही हैं। उन्होने कहा कि सबसे ज्यादा तकलीफदेह बात यह रही कि मुकदमे की पैरवी करने वाले सरकारी अफसरान, सीबीआई, ईडी और दीगर एजेंसियों के अफसरान और सरकारी वकील अदालत में सारी बातें जुबानी करते रहे लेकिन अपने बयानात और अपने ही पेश किए हुए कागजात पर दस्तखत करने के लिए तैयार नहीं हुए। मतलब यह कि भारतीय जनता पार्टी पहले तो सीएजी विनोद राय की मदद से पूरे देश से झूट बोलकर मनमोहन सिंह सरकार को बदनाम करती रही फिर मोदी सरकार बनने के बाद अपने ही इल्जामात अदालत में साबित नहीं कर सकी। इस मामले में साबिक मरकजी वजीर ए राजा पन्द्रह महीनों तक राज्य सभा मेम्बर कानिमोझी, सनअतकार शाहिद बलवा छः-छः महीनों तक जेल में रहे। विनोद गोयनका राजीव अग्रवाल, फिल्मसाज करीम मोरानी, शरद कुमार एम के दयालु अम्मल समेत 19 लोगों और कम्पनियों केा मुल्जिम बनाया गया था सभी को अदालत ने बाइज्जत बरी कर दिया।

डाक्टर मनमोहन सिंह जैसे काबिल और ईमानदार वजीर-ए-आजम की सरकार पर टूजी मामले में एक लाख 76 हजार करोड के घपले का इल्जाम लगा कर मुल्क में हंगामों के सहारे मुल्क की सत्ता पर काबिज हुई नरेन्द्र मोदी सरकार इस मामले में अदालत में गवाह नहीं पेश कर सकी तो स्पेशल सीबीआई अदालत ने सीबीआई की नीयत और मंशा पर ही सवाल उठाकर इस मामले के सभी मुल्जिमान को बरी कर दिया। टूजी स्पेक्ट्रम के एलाटमेंट में हुआ मुबय्यना (कथित) घोटाला भी वैसा ही साबित हुआ जैसे बोफोर्स सौदे में 64 करोड़ का कमीशन खाए जाने का इल्जाम लगाने वाले उस वक्त के डिफेंस मिनिस्टर विश्वनाथ प्रताप सिंह चन्द महीनों के लिए मुल्क की सत्ता पर काबिज तो होे गए थे लेकिन बाद मंे उनका इल्जाम झूटा साबित हुआ था। टूजी घोटाले के बहाने मनमोहन सिंह सरकार को बदनाम करने की साजिश में शामिल रही भारतीय जनता पार्टी आज मुल्क की सत्ता पर काबिज है। उस वक्त आरएसएस और बीजेपी के एजंेट की तरह बेईमानी मुखालिफ आंदोलन चलाने वाले अन्ना हजारे अपने घर में पडे हैं साजिश में शामिल अरविन्द केजरीवाल भले ही दिल्ली के चीफ मिनिस्टर बन गए लेकिन अब वह अपने ही रिंगमास्टर बीजेपी के हाथों कदम-कदम पर तौहीन और जलालत झेलने को मजबूर हैं। योग व्यापारी रामदेव को मोदी सरकार का सबसे ज्यादा फायदा मिला साढे तीन सालों में ही उन्होने बेपनाह दौलत कमा ली। इंतेहा यह कि हरिद्वार के घाटों पर लावारिस फिरते रहने वाला उनका साथी बाल कृष्ण भी 45 हजार करोड़ का मालिक बन कर मुल्क के सौ दौलतमंदों की फेहरिस्त में 19वें पायदान पर पहुच गया। किरण बेदी और रिटायर्ड आर्मी चीफ जनरल वीके सिंह को भी मुनासिब इनाम मिला। वीके सिंह मरकजी वजारत में तो किरण बेदी पाण्डीचेरी के राजभवन में ऐश कर रही हैं। कुमार विश्वास एक मामूली कवि से 2 से ढाई लाख तक लेने वाले कवि बन गए। इस साजिशी गरोह में सबसे ज्यादा अहम रोल अदा करने वाले उस वक्त के आडीटर एण्ड काम्पट्रोलर जनरल आफ इंडिया (सीएजी) विनोद राय को नरेन्द्र मोदी सरकार ने पहले तो बैंकों के एक इंतेहाई हाई पावर कमेटी का चेयरमैैन बनाया फिर सुप्रीम कोर्ट से सिफारिश करके उन्हें क्रिकेट कण्ट्रोल बोर्ड जैसे अकूत खजाने पर बिठा दिया। साबिक मरकजी वजीर कपिल सिब्बल ने कहा है कि विनोद राय को मुल्क से माफी मांगनी चाहिए।

टूजी के बहाने मनमोहन सिंह सरकार को बदनाम करने के प्रोपगण्डे में सरगर्मी के साथ शामिल रहे मौजूदा फाइनंेस मिनिस्टर अरूण जेटली ने फैसला सुनने के बाद फिर कहा कि अदालती फैसले से कांग्रेस यह न समझे कि वह गुनाहों से बच गई। तो क्या अरूण जेटली का यही रवैया अपने वजीर-ए-आजम मोदी और अमित शाह के लिए भी रहेगा अदालत ने ही मोदी को 2002 में गुजरात मंे हुए मुस्लिमकुश फसादात के लिए जिम्मेदार नहीं माना था तो अमित शाह को तमाम गुनाहों से बरी करने वाले चीफ जस्टिस को इनाम की शक्ल में केरल का गवर्नर बना दिया गया।

मनमोहन सिंह सरकार में वजीरों ने टूजी स्पेक्ट्रम के एलाटमेंट में एक लाख 76 हजार करोड रूपए खा लिए यह प्रोपगण्डा करने में उस वक्त गुजरात के चीफ मिनिस्टर की हैसियत से नरेन्द्र मोदी आगे आगे रहते थे। दूसरी तरफ उनके एजेण्ट की तरह काम करते हुए सीएजी की हैसियत से विनोद राय एक एक करके सरकारी दस्तवेजात की कापियां दिल्ली के कुछ मीडिया नुमाइंदों को चोरी से फराहम करके रोज एक नए प्रोपगण्डे को जन्म दिला रहे थे। स्पेशल जज के फैसले के बाद नरेन्द्र मोदी ने तो जैसे अपने हांेट ही सी लिए हैं। गुजरात एलक्शन के दौरान तो मोदी को कांग्रेस के एक मामूली प्यादे शहजाद पूनावाला तक इतने अहम मान रहे थे कि उनकी तारीफों के पुल बांधते फिर रहे थे। जिस मुबय्यना (कथित) घोटाले पर हंगामा करके उन्होेने और उनकी पार्टी ने देश के मआशी (आर्थिक) हालात को गर्क मंे पहुचा दिया था पूरी दुनिया में मुल्क की बदनामी हुई थी। उसपर आए फैसले पर नरेन्द्र मोदी खामोश हैं। कांगे्रस के कई लीडरान का कहना है कि खामोश रह कर मोदी अपने गुनाहों पर पछतावा कर रहे हैं।

इस मामले में अदालत ने जो कुछ कहा वह न सिर्फ इंतेहाई अहम और मुल्क भर के लिए फिक्र करने वाले कमेण्ट हैं बल्कि उन लोगों और पार्टियों के मुंह पर करारा तमांचा है जिन्होनेे टूजी घोटाले के बहाने आसमान सर पर उठा लिया था। अदालत ने कहा कि कोई घोटाला हुआ ही नहीं लेकिन कुछ लोगों ने हकायक (तथ्यों) को इस तरह पेश किया जैसे कोई बहुत बड़ा घपला हो गया। मुल्जिमान के खिलाफ कोई सबूत कभी थे ही नही। टेलीकाम मोहकमे की पालीसियां वाजेह (स्पष्ट) नहीं बल्कि गुमराह करने वाली हैं। तकनीकी जुबान मंे टेलीकाम मोहकमे ने जो रहबर उसूल (दिशानिर्देश) बनाए मोहकमे के अफसर ही उनका मतलब नहीं बता सके। प्रासीक्यूशन मुसलसल कमजोर और अफवाहों पर मबनी (आधारित) दलीलें पेश करता रहा। सुनवाई मुकम्मल होने तक साफ हो गया कि प्रासीक्यूशन (सरकारी वकील) अदालत को गुमराह करता रहा है। ए राजा पर इल्जाम साबित करने के लिए सीबीआई कोई सबूत पेश नहीं कर सकी। कलाइनार टीवी को बैंक के जरिए ट्रांसफर किए गए दो सौ करोड़ रूपए गलत या रिश्वत के थे यह भी साबित नहीं किया जा सका। सीबीआई की चार्जशीट की बुनियाद ही गलत कागजात और अफवाहों पर थी। फैसले के बाद सीबीआई और ईडी ने इस फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट जाने का एलान किया है।