मुसलमानों का खौफ दिखाकर गुजरात जीते मोदी

मुसलमानों का खौफ दिखाकर गुजरात जीते मोदी

गुजरात में सरकार भले ही बीजेपी की बन गई हो, एलक्शन नतीजों ने मोदी को हिला दिया

 

”अहमदाबाद, सूरत, बड़ौदा और राजकोट की 55 में से 46 सीटंे बीजेपी ने ईवीएम की मुबय्यना (कथित) मदद से जीती हैं। बाकी पूरे गुजरात की 127 में बीजेपी 53 तो कांगे्रेस ने 71 सीटें जीती हैं। 2014 के लोक सभा एलक्शन में बीजेपी 162 और कांगे्रस सिर्फ 17 पर आगे थी साढे तीन सालों में ही बीजेपी 162 से गिरकर 99 पर पहुच गई फिर भी मोदी इस जीत को दोहरी कामयाबी बता रहे है। ऐसा दावा सिर्फ मोदी ही कर सकते हैं।“

 

”पूरी एलक्शन कम्पेन के दौरान मोदी ने 34 पब्लिक मीटिगें की पहले राहुल गांधी और कांग्रेस पर ही हमले करते रहे। आठ दिसम्बर से उन्होने आम गुजरातियों को पाकिस्तान, मुसलमानों, अहमद पटेल वगैरह का खौफ दिखाना शुरू किया मविकासफ जीएसटी और नोटबंदी का जिक्र तक नहीं किया लेकिन 18 दिसम्बर को बोले कि यह जीत जीएसटी और नोटबंदी समेत रिफाम्र्स के उनके फैसलों पर अवाम की मोहर है।“

 

”कांगे्रस के दोनों बड़े लीडर अर्जुन मोढवाडिया और शक्ति सिंह गोहिल सीटें बदलने की वजह से हार गए तो मोदी अपने आबाई वतन बडनगर की ऊझा सीट नहीं बचा पाए। इस सीट पर पांच एलक्शन जीतने वाले इस बार कांगे्रस की खातून उम्मीदवार से हार गए। शरद पवार की एनसीपी और मायावती की बीएसपी ने अपना काम पूरा किया इन दोनों के उम्मीदवारों की वजह से कांगे्रस के तकरीबन डेढ दर्जन उम्मीदवार मामूली वोटों के फर्क से हारे हैं।“

 

अहमदाबाद! गुजरात में भले ही भारतीय जनता पार्टी ने किसी तरह मुसलसल छठी बार सरकार बना ली हो, लेकिन इस जीत के लिए दूसरे दौर की एलक्शन मुहिम में वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी को मुसलमानों, पाकिस्तान, मियां अहमद पटेल, औरंगजेब और मुगलों के नाम का सहारा लेना पड़ा। इस तरह उन्होने एक बार फिर आम गुजरातियों को मुसलमानों का खौफ दिखाकर एलक्शन जीतने का काम किया। मतलब साफ है कि नरेन्द्र मोदी और उन्हें कद्दावर सियासतदां बनाने वाला आरएसएस परिवार मुसलमानों को अपनी नफरत का शिकार चाहे जितना बनाए, मुसलमानों के बगैर इनका काम चलने वाला नहीं है। यह एलक्शन जीतने के लिए वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी ने पाकिस्तान का नाम लेकर एक बड़ा झूट यह बोला कि साबिक नायब सदर-ए-जम्हूरिया (उप राष्ट्रपति) हामिद अंसारी और साबिक वजीर-ए-आजम मनमोहन सिंह की मौजूदगी में छः दिसम्बर को दिल्ली में पाकिस्तानी हाई कमिशनर सुहेल महमूद वहां के साबिक फारेन मिनिस्टर खुर्शीद महमूद कसूरी और दीगर पाकिस्तानियों के साथ मणिशंकर अय्यर के घर में डिनर पर अहमद पटेल को गुजरात का चीफ मिनिस्टर बनवाने की साजिश रची। यह झूट उन्होने कई पब्लिक मीटिंगों में बोला और बड़ी तादाद में गुजरातियों को खौफजदा करके उनके वोट हासिल कर लिए। मोदी, उनकी बीजेपी के सदर अमित शाह और कई लोगों ने इस बार गुजरात की 182 में से 150 सीटें जीतने का दावा किया था लेकिन जीत सके सिर्फ 99, वह भी इसलिए कि सूरत की 16 में से 15, बड़ौदा की दस में से नौ, राजकोट की आठ में से छः और अहमदाबाद इलाके की 21 में से 16 सीटंेे बीजेपी ने ईवीएम यानी एलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन की मदद से जीती हैं। अगर पाटीदार लीडर हार्दिक पटेल के इस इल्जाम को तस्लीम न भी किया जाए कि सूरत जैसे कई बड़े शहरों में ईवीएम हैक करके बीजेपी उम्मीदवारों को जिताया गया है तो भी यह सूरते हाल मोदी के खिलाफ ही है कि चार बड़े शहरों की 55 में से 46 सीटें जीत कर उन्होेने बीजेपी की टैली 99  तक पहुचाई है। मतलब यह कि बीजेपी ने जो 99 सीटंे जीती उनमें तकरीबन आधी 46 तो सिर्फ चार बडे़ शहरों की हैं बाकी पूरे गुजरात की बची हुई 127 सीटों में से बीजेपी को 53 तो कांग्रेस को 71 सीटें मिली हैं। तीन सीटों पर दीगर उम्मीदवार जीते हैं। सोमनाथ मंदिर में राहुल गांधी को गलत रजिस्टर में दस्तखत करने के बहाने बीजेपी ने उन्हें हिन्दू तक मानने से इंकार करते हुए खूब हंगामा मचाया था उसी सोमनाथ इलाके की नौ में से आठ सीटों पर कंाग्रेस ने जीत दर्ज की है। अट्ठारह दिसम्बर की शाम को नरेन्द्र मोदी ने दिल्ली में बीजेपी के दफ्तर में लफ्फाजी करते हुए कहा कि यह जीत उनके लिए दोहरी जीत है क्योंकि यह मविकासफ की जीत है। अब उनसे कौन पूछे कि एलक्शन मुहिम के दौरान तो उन्होने मविकासफ का नाम तक नहीं लिया था तब तो उनकी जुबान पर मुसलमान, पाकिस्तान, मुगल और औरंगजेब ही रहते थे। उन्होने इस जीत को गैरमामूली (असमान्य) करार दिया। गैर मामूली क्या है इसका अंदाजा इसीसे लगाया जा सकता है कि साढे तीन साल कब्ल लोक सभा एलक्शन में उनकी पार्टी ने 162 सीटों पर और कांगे्रस ने सिर्फ 17 सीटों पर बढत हासिल की थी वह बढत अब 99 पर आ गई और कांगे्रस 17 से 80 पर पहुच गई।

हार्दिक पटेल ने एलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीनों को सूरत समेत कुछ शहरों में हैक करके बीजेपी को जिताने की बात कही तो कई लोग खुसूसन मोदी की गुलामी में लगेे टीवी ऐंकर्स उनपर टूट पडे़। हर किसी का एक ही सवाल था कि अगर ईवीएम मंे गड़बड़ी होती तो कांगे्रस को 80 सीटें कैसे मिल जातीं? यह सवाल ही अपने आपमें इंतहाई बेवकूफी भरा है। पूरे प्रदेश या देश की मशीनें कौन हैक कराएगा? मशीनें तो सिर्फ उन्हीं शहरों में हैक कराई जाती हैं जहां रूलिंग पार्टी को कुछ साबित करना होता है। सूरत, अहमदाबाद, बड़ौदा और राजकोट में व्यापारियों और पाटीदारों की अक्सरियत है। हार्दिक पटेल, राहुल गांधी और अल्पेश ठाकोर ने इन शहरों में जो भी पब्लिक मीटिंगें या रोड शो किए उनमें बेशुमार भीड़ आई। नरेन्द्र मोदी इन शहरों में इन नौजवानों के मुकाबले की एक भी मीटिंग नहीं कर सके। जाहिर है ऐसी सूरत में मोदी को इन्ही शहरों में फिक्र भी सबसे ज्यादा हो गई थी। अब अगर हार्दिक पटेल कह रहे हैं कि इन शहरों की ईवीएम हैक की गईं तो उनके इल्जाम में दम है इसकी तहकीकात क्यों नहीं कराई जा सकती है?

गुजरात और हिमाचल प्रदेश दोनों प्रदेशों के एलक्शन जीतने के बावजूद भारतीय जनता पार्टी में वह जोश नजर नहीं आया जो आना चाहिए था। वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी ने इस एलक्शन के लिए गुजरात में तीन दर्जन से ज्यादा पब्लिक मीटिंगें और रोड़ शो किए। उनकी जुबान पर कभी भी मविकासफ की बात नहीं आई पहले दौर में जिन सीटों की पोलिंग होनी थी उन सब पर मोदी का निशाना राहुल गांधी और कांगे्रस पर रहा। उसके बाद दूसरे दौर की पोलिंग वाले इलाकों की पब्लिक मीटिंगों में उन्होनंे पाकिस्तान, मुसलमानों, अहमद पटेल का नाम लेकर हर जगह हिन्दुओं को खौफजदा और गुमराह करने का काम किया। अफसोसनाक बात यह है कि गुजरात के बड़े शहरों के बड़ी तादाद में गुजराती लोगों ने उनके इस प्रोपगण्डे और झूट पर यकीन कर लिया। कुछ उनके इस प्रोपगण्डे पर यकीन और कुछ ईवीएम की मदद नतीजा यह कि मोदी ने चार बड़े शहरों की 55 में से 46 सीटंे जीत कर कांगे्रस पर बढत हासिल कर ली। पूरे एलक्शन में मोदी ने बेईमानी, बदउनवानी (भ्रष्टाचार), नोटबंदी और जीएसटी का कहीं कोई जिक्र तक नहीं किया लेकिन उनकी पार्टी किसी तरह गिरते पड़ते 99 सीटें जीत कर सत्ता में वापस आ गई तो अपनी पार्टी के दफ्तर में गरजते हुए बोले कि अवाम और व्यापारियों ने नोटबंदी और जीएसटी के उनके फैसलों पर मोहर लगा दी है। उनके इसी दोहरे रवैय्ये पर अगले दिन यानी उन्नीस दिसम्बर को पार्लियामेंट के अहाते में मीडिया से बात करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि मोदी हर मामले में गलतबयानी करते हैं इसीलिए वह अपनी साख (विश्वसनीयता) अवाम के दरम्यान खो चुके हैं। राहुल गांधी भी बार-बार कहते हैं और यह हकीकत भी है कि नरेन्द्र मोदी में झूट को सच बनाने और उसकी बुनियाद पर मुअस्सर (प्रभावशाली) तकरीर करने की जो सलाहियत है वह उनमें यानी राहुल गांधी में नहीं है फिर भी वह अपनी तहजीब (सभ्यता), सच्चाई और शराफत के जरिए हर मोर्चे पर मोदी का मुकाबला करने के लिए तैयार हैं और करेंगे। उन्हें उम्मीद है कि वह कामयाबी भी हासिल करेंगे। राहुल की इस बात में दम है इसे खुद नरेन्द्र मोदी ने 18 दिसम्बर को उस वक्त सच साबित कर दिया जब अपनी पार्टी दफ्तर में तकरीर करते वक्त उन्होने इस जीत को मविकासफ की जीत में तब्दील करने का काम किया।

इस एलक्शन मंे कांगे्रस को उस वक्त एक बडा झटका भी लगा जब पार्टी के दो बड़े लीडर शक्ति सिंह गोहिल और अर्जुन मोडवाडिया एलक्शन हार गए। इस बार दोनों की सीटें तब्दील की गई थी। शक्ति सिंह अभी तक अब्दासा हलके से एमएलए थे इस बार उन्हें मांडवी की कच्छ सीट से लड़ाया गया जहां वह बीजेपी के वीरेन्द्र बहादुर सिंह जडेजा के मुकाबले तकरीबन 50 हजार वोटों के भारी फर्क से एलक्शन हार गए। इसी तरह अर्जुन देवाभाई मोडवाडिया की सीट तब्दील करके प्रदेश के वजीर बाबू भाई भीमा भाई बोखिरिया के मुकाबले पोरबंदर सीट से मैदान में उतारा गया था। वह महज 1855 वोटों के मामूली फर्क से हार गए।

इसी तरह नरेन्द्र मोदी के अपने आबाई वतन बडनगर की ऊझा सीट पर उस वक्त शर्मिदगी का सामना करना पड़ा जब मुसलसल पांच बार से जीतते रहने वाले उनके उम्मीदवार पटेल नारायण भाई लल्लूदास कांगे्रस की खातून उम्मीदवार आशाबेन पटेल के मुकाबले हार गए।  इसी तरह पार्टी के सीनियर लीडर और लम्बी मुद्दत तक वजीर व तर्जुमान (प्रवक्ता) रहे जयनारायण व्यास इस बार भी हार गए। वह 2012 में भी हार चुके हैं। राज्य सभा एलक्शन के वक्त अहमद पटेल को हराने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने मोटी रकम खर्च करके कांगे्रस के जिन नौ मेम्बरान को तोड़ा था उन सभी को बीजेपी ने अपना उम्मीदवार बनाया था वह सभी एलक्शन हार गए। शरद पवार की नेशनलिस्ट कांगे्रस पार्टी (एनसीपी) और मायावती की बीएसपी ने भारतीय जनता पार्टी के साथ साठगांठ करके अपने जो उम्मीदवार खड़े किए थे वह अपने मकसद में कामयाब रहे एनसीपी और बीएसपी उम्मीदवारों की वजह से कांग्रेस के एक दर्जन से ज्यादा उम्मीदवार मामूली वोटों के फर्क से एलक्शन हारे हैं।